चूतो का समुंदर
06-08-2017, 10:49 AM,
RE: चूतो का समुंदर
यहाँ फार्म हाउस पर....


चंदा मेरी बाहों मे पूरी नंगी डली हुई थी....

मैं पिछले 2 घंटे से उसकी चूत और गान्ड की धज्जियाँ उड़ा रहा था...

इस दौरान मैं 2 बार झडा और चंदा की तो गिनती ही नही थी....

इस दमदार चुदाई के बाद चंदा बहुत खुश थी....

चुदाई के बाद चंदा नीचे निकल गई और मैं रेस्ट करने लगा....

फिर दोपहर को हम सब घर के लिए निकलने लगे....सब लोग बस मे सवार हो चुके थे...सिर्फ़ मैं और अकरम नीचे खड़े थे.....

मैं- चल अकरम...अब घर के मज़े लेगे...

अकरम- ह्म्म...चलते है...डॅड आ जाए बस...

मैं- क्यो..कहाँ गये....??

अकरम- यही थे यार...कॉल आया तो बात करने निकल गये...मैं बुला के आता हूँ...

अकरम के जाते ही मैने अपने आदमी को कॉल किया....

( कॉल पर)

स- हेलो अंकित...मैं तुम्हारे कॉल का ही वेट कर रहा था....

मैं- अच्छा...ऐसी क्या बात हुई...सब ठीक है ना....

स- हाँ...सब ठीक है...अपना काम हो गया...और हाँ...एक न्यूज़ है तेरे लिए...

मैं- गुड या बॅड...??

स- तुम खुद डिसाइड कर लेना...पर इतना ज़रूर कह सकता हूँ कि ये शॉकिंग न्यूज़ है...

मैं- अच्छा...बोलो....

स- ह्म्म..बात तुम्हारे डॅड और कामिनी की है....

तभी अकरम ने मेरे कंधे पर हाथ रखा....

अकरम- चल भाई...डॅड आ गये...

मैं(कॉल पर)- कल मिलते है...बब्यए...

और कॉल कट कर के हम बस मे सवार हुए और घर की तरफ चल पड़े...

मैं(मन मे)- मेरे डॅड और कामिनी की बात ....बट क्या...ये साली कामिनी का चक्कर पूरी तरह मिटाना ही होगा...हर बात मे इसका नाम आ जाता है....अब बस...आर या पार....

आख़िरकार ट्रिप ख़त्म हो गई....

ट्रिप मे काफ़ी काम हुए...मज़े भी किए और चोट भी खाई....

कही प्यार मिला तो कही नफ़रत....दोस्ती भी निभाई और प्यास भी बुझाई...

सम्राट सिंग के नाम का एक नया बंदा पिक्चर मे आया....अब इसके बारे मे पता लगाना ही होगा....

मोहिनी की सच्चाई भी पता चली और उसके मन का भाव भी...

अकरम की मोम भी खुश हो गई और सही रास्ते पर आ गई....

बस ज़िया को ठिकाने पर लगाना बाकी रह गया...वो भी टाइम मिलने पर कर दूँगा....

एक तरफ रूही, गुल और मोहिनी का जिस्म भी मिला ...और दूसरी तरफ जूही का प्यार मिला...

एक और बात अच्छी हुई...पूनम और संजू का सेक्स रीलेशन भी मेरे सामने ओपन हो गया....अब तो उसके घर पर मौका मिलते ही दोनो साथ मे बजाएँगे ...

लेकिन पूरी ट्रिप मे वसीम और सरद का कॅरक्टर पूरी तरह से नही समझ पाया....

है तो दोनो अयाश...पर फिर भी ज़्यादातर चुप चाप ही रहे...शायद मेरा भ्रम हो...

वेल रेकॉर्डिंग तो है ही मेरे पास...एक बार फिर चेक कर लूँगा....

ट्रिप तो ठीक थी ही...साथ मे सहर मे भी काफ़ी कुछ अच्छा हो गया...

कामिनी ने कमल के बारे मे पूरा राज़ खोल दिया....और दुश्मनी की वजह भी बता दी....

पर कुछ तो है जो सिर्फ़ दामिनी ही बता सकती है....उसे ढूड़ना पड़ेगा...

और काजल...अब वो भी गेम मे शामिल हो गई....ह्म्म..उसके नेक्स्ट स्टेप का इंतज़ार रहेगा....

रिचा पर नज़र रखना भी काम आ गया....साली की ठुकाई भी हो गई और काम भी नही हुआ ..

सोनी भी पकड़ मे आ गया....अब इसे सबक तो सिखाना बनता ही है....

रिचा का भी बुरा हाल होगा...पर पहले उसका यूज़ करना है...

रजनी आंटी से बात करना ज़रूरी हो गया है....और बहुत जल्दी....

यही सब सोचते हुए मैं बस मे बैठा हुआ घर की तरफ आ रहा था.....
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06-08-2017, 10:49 AM,
RE: चूतो का समुंदर
बस एक सवाल फिर से दिमाग़ मे खलबली मचा रहा है...कि मेरे डॅड और कामिनी की कौन सी बात पता चली...

साला अकरम को भी तभी आना था...2 मिनट बाद आता तो सब पता चल जाता...

वेल अब मौका मिलते ही पूछ लूँगा....

ये सब बाते...और कुछ प्लान सोचते-सोचते मैं सो गया....

पूरे सफ़र के दौरान हम सिर्फ़ एक जगह खाने के लिए रुके....वहाँ मैने अपने आदमी को कॉल किया बट उसने कॉल लिया ही नही...

बाद मे उसका कॉल भी आया..बट मैं बस मे था इसलिए नही लिया....क्योकि तभी जूही मेरे साथ थी...

फाइनली हम घर पहुच गये....सीधा अकरम के घर....

वहाँ मैने सबको बाइ बोला और संजू, पूनम के साथ घर के लिए निकल आया....

जब मैं संजू के घर पहुचा तो चोंक कर रह गया...

मुझे देखते ही रजनी आंटी लगभग भागते हुए मेरे सीने से चिपक गई....

मेरे साथ -साथ , वहाँ खड़े सब लोग रजनी आंटी की हरक़त से हैरान थे....

संजू और पूनम शायद यही सोच रहे होंगे कि माँ तो हमारी है और प्यार अंकित के लिए...

अनु, रक्षा, मेघा, विनोद और प्रमोद भी अजीब नज़रों से हमे देख रहे थे...

पर आंटी को किसी की परवाह नही थी...वो तो मुझे कस के अपने सीने से लगाए हुई थी...

रजनी- भगवान का सुक्र है कि तू ठीक है...

मैं- आंटी...क्या हुआ...आप...

रजनी- जबसे मैने सुना कि तुझ पर हमला हुआ...तबसे मैं...

और आंटी की आँखो से आँसू निकलने लगे....

आंटी के सुबकने की आवाज़ से तो मेरा माइंड ही हिल गया...मैं समझ ही नही पा रहा था कि बात क्या है...

आज आंटी के जिस्म की गर्मी कोई सेक्स की फीलिंग नही दे रही थी..बल्कि उनके बदन से प्यार टपक रहा था...

ये प्यार जिस्मानी नही था...ये तो दिल से दिल का रिश्ता था...पर मेरी समझ से परे था....


मैने वहाँ खड़े हर सक्श को देख कर जानने की कोसिस की पर कोई फायडा नही हुआ...

ना ही किसी ने कुछ बोला और ना ही किसी ने कोई इशारा किया....

मैं- आंटी...आख़िर बात क्या है...प्ल्ज़...चुप हो जाइए...

मैने थोड़ी देर तक आंटी को समझाया और फिर उन्हे ले जा कर सोफे पर बैठा दिया...आंटी अभी भी सिसक रही थी...

मैं- अब बोलिए...क्या बात है...

रजनी- बेटा..वो तुम पर हमला हुआ था ना....तुझे किसी ने मारने की कोसिस की...

मैं- हाँ...शायद धोखे से हो गया था...पर मुझे कुछ नही हुआ...मैं ठीक हूँ..

रजनी(मेरा हाथ देखती हुई)- और ये चोट...ये क्या है..

मैं- अरे...ये तो मामूली खरॉच है....बोला ना कि उसने धोखे से मार दिया था...

रजनी- पर बेटा ..

मैं(बीच मे)- बस आंटी...भूल जाइए...कुछ नही हुआ...अब रोना नही...प्ल्ज़्ज़...

फिर मैने आंटी को समझा कर चुप करा दिया और उनसे कॉफी बनाने का बोल कर संजू के रूम मे फ्रेश होने निकल गया....

बाथरूम मे आते ही मैं सोच मे पड़ गया....

मैं(मन मे)- क्या यार...ये आंटी भी ना...समझ मे ही नही आती...

एक तरफ तो मेरे दुश्मनो का हाथ पकड़ रखा है और दूसरी तरफ इतना प्यार....

मुझ पर हमले की खबर सुन कर ये हाल हो गया....अगर मुझे कुछ ज़्यादा चोट लग जाती तो...

क्या ये सही मे परेसान है या फिर ये भी ड्रामा है...

वेल...अब ये पता करने मे ज़्यादा टाइम नही है....जल्दी ही आंटी को अकेले मे घेरता हूँ...फिर सारा सच सामने आ जायगा...

फिर रेडी हो कर हम ने कॉफी पी और मैं घर जाने लगा...

बट रजनी ने मुझे रोक लिया....उन्हे कुछ बात करनी थी...

मैं- हाँ आंटी...क्या बात है अब...

आंटी- वो...तू थोड़ा रेस्ट कर ले...फिर बताती हूँ...बस थोड़ा वेट कर...ओके...

मैने भी आंटी को फोर्स नही किया और उपेर आ गया...

उपेर आते ही मेरे सामने रक्षा आ गई...

रक्षा- क्या भैया...मुझसे नही मिलना क्या...भूल गये मुझे...??

मैं- नही बेटा...कुछ नही भूला...सब याद है..तुम भी और तुम्हारी...

मैने अपनी बात आधी छोड़ दी और रक्षा बुरी तरह शरमा गई...

मैं- हाँ तो...क्या हाल है...

रक्षा- ऐसे नही...आप खुद देख कर बताना...

मैं- पागल...तू भी ना...तेरे क्या हाल है...समझी..

रक्षा- ह्म्म...पर आप भी समझो ना...बहुत बुरा हाल है...

मैं- ओह्ह...कोई नही...मैं आ गया हूँ ना..सब ठीक कर दूँगा...

रक्षा- अभी ...

मैं- नही...अभी नही...सब है यहाँ...वेट कर...जल्दी ही करेंगे...

और फिर मैं संजू के रूम मे आ गया...

थोड़ी देर बाद मुझे आंटी ने नीचे बुलाया ....

मैं- हाँ आंटी ..अब बताइए...फिर मुझे घर जाना है..

आंटी के साथ प्रमोद अंकल भी खड़े थे...मेरी बात सुनकर दोनो एक-दूसरे को देखने लगे...

मैं- बोलिए...क्या हुआ...??

रजनी- बेटा वो...वो तुम्हारे डॅड का ऑफीस...

मैं- हाँ...ऑफीस का क्या...??

रजनी- वो बेटा..एक ऑफीस जल गया...किसी ने आग लगा दी...

मैं- क्या...कैसे...किसने...और क्यो...ये कब हुआ...??

रजनी- नही पता बेटा..बस ये पता है कि कुछ लोग आए और आग लगा गये...

मैं- पर गौर्ड़ क्या कर रहे थे और वहाँ काम करने वाले...

रजनी- उस दिन ऑफीस बंद था...कोई नही था वहाँ...

मैं- ओह माइ गॉड...ये क्या हुआ...आंटी...मैं चलता हूँ...

रजनी- बेटा...मेरी बात तो सुनो...

मैं(घर से निकलते हुए)- बाद मे आंटी...बाद मे आता हूँ...

और आंटी की बात सुने बिना कार से अपने घर की तरफ निकल गया...
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06-08-2017, 10:49 AM,
RE: चूतो का समुंदर
कार मे आते ही मैने अपने आदमी को कॉल किया.....

( कॉल पर )

स- हाँ अंकित..आ गये...

मैं- हाँ आ गया...अब बताओ कि कौन सी बात बता रहे थे....

स- हाँ..बताउन्गा...पर अभी अपने घर पहुचो...अर्जेंट है...

मैं- अर्जेंट...पर ऐसी क्या बात हुई...

स- ज़्यादा कुछ नही...वो एक पोलीस वाला कुछ ज़्यादा ही इंटरेस्ट ले रहा है...तुम्हे और तुम्हारे डॅड को ढूँढ रहा है...

मैं- पर किस लिए...

स- और किस लिए...ऑफीस मे आग लगी और गान्ड उसकी जल गई...हाहाहा...

मैं- हाहाहा....ऐसा क्या...चलो तो मिल ही लेते है...आग को थोड़ा और भड़का दे...

स- ह्म्म...तुम पहुचो...और मज़ा लो....

मैं- ह्म्म..बाइ...

और कॉल कट कर के मैने कार दौड़ाई और सीधा घर पर ब्रेक मारा...

जैसे ही मैं घर मे एंटर हुआ तो सामने का नज़ारा देख कर मुझे गुस्सा आ गया...

सामने सविता, सोनू, रेखा, रश्मि, हरी, और पारूल किसी मुजरिम की तरह डरे-सहमे खड़े हुए थे और एक पोलीस वाला अपना डंडा घूमाते हुए उनके सामने खड़ा हुआ था...साथ मे 2 हवलदार भी वही खड़े थे...

वो पोलीस वाला और कोई नही बल्कि रफ़्तार सिंग ही था...

रफ़्तार- मैं आख़िरी बार पूछ रहा हूँ..सीधे से बता दो कि आकाश और उसका बेटा कहाँ है...वरना....

मैं(गेट पर खड़े हुए)- ये क्या हो रहा है...और तुम हो कौन मेरे डॅड को पूछने वाले...

मेरी आवाज़ सुनते ही सबकी नज़रे मेरी तरफ घूम गई और उनकी सहमी आँखो मे खुशी झूम गई....और सभी मेरा नाम ले कर खुश हो गये...

रफ़्तार- ओह..तो यहाँ है तू...

मैं- हाँ...और तुम बताओ कि ये सब क्या है...

रफ़्तार- क्या है ..दिख नही रहा...पूछ-ताछ चल रही है...

मैं- कैसी पूछताच्छ...

रफ़्तार- यहाँ आओ तो...फिर बताता हूँ ..

मैं(पास मे आकर)- ह्म्म..अब बोलो..क्या है ये सब...

रफ़्तार- तुझे पता है कि तेरे बाप का ऑफीस जल कर खाक हो चुका है..

मैं- ह्म्म...पता चला मुझे...तो जाओ और उन्हे पकडो जिसने आग लगाई..यहाँ क्या कर रहे हो...

रफ़्तार- पकड़ेंगे...पकड़ेंगे ...क्या है ना कि पहले कुछ बाते पूछनी पड़ती है...कि कोई दुश्मनी थी क्या ...कोई आक्सिडेंट है..किसी पर शक है...या फिर बाप का कोई नाजायज़ रिश्ता...ह्म्म..हाहाहा....

मैं(गुस्से मे)- बकवास बंद कर....क्या बक रहा है...

रफ़्तार- चुप...मुझे आँख मत दिखा...नही तो ऐसा हाल करूगा कि...

मैं(बीच मे)- मेरी छोड़...और जा कर काम कर...पकड़ उन्हे जिसने आग लगाई...

रफ़्तार- ओह छोरे...मेरा काम मत सिखा मुझे...और ये गर्मी भी मत दिखा..वरना ऐसे केस मे अंदर डालूँगा कि तेरा बाप भी...

मैं(बीच मे)- चुप...तू समझता क्या है अपने आप को...हाँ...तू मेरा घंटा नही उखाड़ सकता...समझा....

रफ़्तार अब पूरा गुस्सा हो गया....

रफ़्तार- साले तेरे पर पहले से ही नज़र है मेरी...अब तूने मुँह चला कर अपनी शामत बुला ली...देख मैं क्या करता हूँ...

मैं(रफ़्तार को घूर कर)- देखना तो तुझे है...मुझसे पंगा लिया ना...तो रफ़्तार का रफ अलग हो जायगा और तू तार-तार हो जायगा...समझा...

रफ़्तार ने गुस्से से मेरी कलर पकड़नी चाही पर मैने उसका हाथ पकड़ लिया....

रफ़्तार- मेरा हाथ पकड़ने की हिम्मत...अब देख साले...

और रफ़्तार ने दूसरा हाथ उपेर किया कि एक आवाज़ सुन कर वो रुक गया...

आवाज़ इनस्पेक्टर आलोक की थी...जो इस टाइम अपने हवलदारों के साथ गेट पर खड़े थे....

आलोक- रफ़्तार सिंग...ये सब क्या है...

रफ़्तार- सर ..मैं तो बस पूछ ताछ....पर ये लड़का...


आलोक- तुम चुप रहो...(मुझे देख कर) आप बताओ...क्या हुआ...

फिर मैने और मेरे फॅमिली मेंबर्ज़ ने शुरू से अंत तक की सारी बात बता दी...जिसे सुन कर आलोक को गुस्सा आ गया...

आलोक- ये सब क्या है रफ़्तार....

रफ़्तार- सर...ये सब झूठ है..मैं तो...

आलोक(बीच मे)- शट अप....यू आर सस्पेंडेड...अब निकलो यहाँ से...अब ये केस मैं खुद देखुगा...

रफ़्तार कुछ नही बोल पाया बस गुस्से मे मुझे घूरते हुए मेरे घर से निकल गया...

और फिर आलोक ने हम से केस के सिलसिले मे थोड़ी बात की और सबसे रफ़्तार की हरक़तो की माफी माँग कर निकल गये..... 
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06-08-2017, 10:50 AM,
RE: चूतो का समुंदर
कहीं दूर किसी गाओं मे....

दामिनी और रघु को इस गाओं मे रुके हुए लगभग 2 दिन निकल गये थे...फिर भी दोनो के हाथ अभी तक कुछ नही लगा था...

दोनो ने बहादुर के घर पर निगरानी रखी हुई थी...साथ ही साथ गाओं मे भी पूछ-ताछ करवा रहे थे....फिर भी कुछ नही हुआ...

उपेर से दामिनी इस बात से गुस्सा थी कि रघु ने उसे यहाँ रुकने के लिए मजबूर कर दिया और पूरी रात उसे चोदता रहता है...

लेकिन आज दामिनी ने रघु को मना ही लिया....

दामिनी ने रघु को आगे का काम समझाया और वो सहर की तरफ निकल आई....

दामिनी के जाने के बाद रघु से मिलने के लिए एक सक्श आया...

वो सक्श कार से निकला और रघु के साथ कमरे मे आ गया....

रघु- साब...सालों बाद कोई मिल ही गया जो आज़ाद को ढूँढ रहा है...

" ह्म्म...ये औरत अपने काम की है...क्या बताया इसने"...सामने वाले ने सिगरेट जलाते हुए बोला...

रघु ने दामिनी के बारे मे सब कुछ बता दिया...जो भी रघु को पता था....

" ह्म्म्मे..तो पता करो कि उसके माँ-बाप को आज़ाद ने कब और कहाँ मारा था...फिर देखना...खेल मेरा होगा और कीमत ये चुकाएगी...."...और उसने धुन्ये का छल्ला हवा मे उड़ा दिया...

रघु- ह्म्म..साब...एक बात बताइए...आप आज़ाद से इतनी नफ़रत करते है...फिर भी अब तक चुप है...आपको किसी दूसरे की क्या ज़रूरत थी....आप खुद ही उसे....

सामने बैठा सक्श अपनी सिगरेट को झटकते हुए रघु की बात काट कर बोला.....

" ह्म्म...क्या करूँ...गैरों से ज़्यादा अपनो को सज़ा देने मे तकलीफ़ होती है..."

रघु- क्या मतलब....

" तुम नही समझोगे.....चलो...मैं चलता हूँ....तुम दामिनी को ले कर जल्दी आना...."

और वो सक्श कार से निकल गया...और रघु उसकी बातों के बारे मे सोचता रह गया.....

सहर मे....मेरे घर पर....

इनस्पेक्टर के जाने के बाद मैं सबसे मिला...और फिर मैं डॅड के ऑफीस को देखने जाने लगा...

बट सविता ने बताया कि अभी पोलीस ने सब सील कर दिया है....पहले पोलीस से पर्मिशन लेनी होगी ...

मैने भी सोचा कि कल ही जाउन्गा...वैसे भी वहाँ देखने के लिए बचा क्या.है...

फिर मैं सबको ट्रिप की बाते बताने लगा....काफ़ी बाते हुई और फिर मैं रेस्ट करने रूम मे चला गया....

फिर जब मेरी आँख खुली तो रात हो चुकी थी....

मैं(मन मे)- मुझे तो सीक्रेट हाउस जाना था....अब क्या...रात भी हो गई...चलो कॉल ही कर लेता हूँ....

( कॉल पर )

स- हाँ अंकित...तुम आए नही...

मैं- सॉरी...मैं सो गया था...

स- कोई नही...रेस्ट करो...कल मिलते है...

मैं- ह्म्म..पर वो बात तो बताओ...मेरे डॅड और कामिनी की...

स- ह्म..एक काम करो...कल मिलो ..कुछ दिखाता हूँ...तुम खुद समझ जाओगे....

मैं- पर बताने मे क्या प्राब्लम है...
स - कुछ नही...बस मैं चाहता हूँ कि तुम खुद देख कर डिसाइड करो..कि बात कितनी इम्पोर्टेंट है...ओके


मैं- ह्म्म..चलो फिर कल ही देख लूँगा...

स- गुड...ऑर हाँ..एक गुड न्यूज़ है...

मैं- क्या...

स- तुमने कहा था ना कि सोनी को सबक सिखाना है...तो आदमी भेज दिए है....

मैं- नही...उन्हे वापिस बुला लो...सोनी को टच नही करना....

स- पर क्यो...उसे छोड़ रहे हो...क्यो...

मैं- छोड़ नही रहा...उसको अहसास दिलाना है कि धोखा मिलता है तो कैसा लगता है....साले के उपेर डॅड इतना भरोशा करते थे ...और उसने धोखा दिया...नही....इतनी छोटी सज़ा नही मिलेगी....उसको सज़ा भी मिलेगी और धोखे का अहसास भी होगा....अपने आदमियों को बुला लो...

स- ओके...वो अभी निकले है...मैं रोक देता हूँ...पर करना क्या है उसका....

मैं- कल प्लान करेंगे....कुछ मजेदार...

स- ह्म्म..और रिचा का क्या...

मैं- वो तो साली रंडी है...टाइम आने पर यूज़ करेंगे...पर हां....उसकी बेटी....उसकी डीटेल निकालो...पता तो चले कि रंडी की बेटी है कैसी....

स- ह्म्म..तो ठीक है...कल मिलते है...बाइ....

मैं- ह्म्म..बाइ...

और कॉल कट कर के मैं रेडी हुआ और नीचे आ गया...
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06-08-2017, 10:50 AM,
RE: चूतो का समुंदर
नीचे पारूल अपने कमरे मे पढ़ाई करने मे बिज़ी थी....

वो इतना मन लगा के पढ़ रही थी कि उसे पता भी नही चला कि मैं उसके पीछे आ गया हूँ...

उसे पढ़ते देख मुझे बेहद खुशी हुई...मैने अपना हाथ उसके सिर पर फिराया तो वो चौंक कर पलट गई...


पारूल- भैया...आप...आइए ना...

मैं- क्या हो रहा है बेटा....

पारूल- कुछ नही...पढ़ाई कर रही थी...

मैं- ओह्ह...इतना डूब कर...साबाश ...

पारूल- क्या साबास...कुछ भी समझ नही आता....

मैं- आएगा बेटा....मेहनत करो...सब समझ आएगा....

पारूल- भैया...मैं फैल हो गई तो....

और पारूल ने अपना सिर झुका लिया...मैने उसको चेहरा हाथो से उपेर किया...

मैं- नही बेटा...ऐसा नही सोचते...और मान लो हो भी गई...तो क्या...नेक्स्ट टाइम फिर ट्राइ करना....

पारूल- भैया...आपने मेरे लिए इतना कुछ किया...और फिर भी मैं पास नही हो पाई...

मैं- चुप....तुम पास हो या फैल...कोई फ़र्क नही पड़ता...तू मेरी प्यारी गुड़िया है और हमेशा रहेगी....

मेरी बात सुन कर पारूल मेरे गले लग गई और खुशी के आंशु बहाने लगी....

मैने उसे थपथपाया और फिर अलग करके आँसू पोछे...

मैं- अब एक भी आंशु नही..ओके..

पारूल(आँख सॉफ कर के)- ह्म्म...

मैं- अब अपने भैया को कुछ खिला भी दे....ह्म्म..बहुत भूख लगी है...

पारूल- ओह्ह..अभी बनाती हूँ...क्या खाओगे आप...

मैं- ह्म्म..एक काम कर आज एग करी खिला दे...हाँ..

पारूल- आप थोड़ा रूको...मैं अभी लाई...

और पारूल जल्दी से किचन मे निकल गई...और मैं उसकी नॉटबुक देखने लगा...

तभी मेरी नज़र एक डाइयरी पर पड़ी....जब मैने उसे खोल कर देखना शुरू किया तो 1 पेज पर मेरी आँखे ठहर गई....


उस पेज मे एक फोटो रखी हुई थी....जो कि मेरी थी....

और मैने जब फोटो उठाई तो उस पेज पर लिखी लाइन्स पढ़ कर मेरी आँखे नम हो गई....
पेज की लाइन्स :- 


मेरे सर....मेरे मालिक...मेरे भैया....मेरे भगवान....

अगर आज कोई पूछे कि मैं सबसे ज़्यादा किसे मानती हूँ तो वो आप हो...

कोई मुझसे कहे कि भगवान देखा है..तो मैं कहुगी हाँ....आप ही मेरे भगवान हो....

मैने अपने पापा को कभी नही देखा था...और जिस माँ को देखा है वो भी दूसरों की माँ के जैसे नही है...

मेरी माँ ने मुझे बचपन से मार और गालियों के अलावा कुछ नही दिया....

मैं ये नही कहती कि वो बुरी है...पर शायद हालात ने उन्हे ऐसा बना दिया....

वो मेरा पढ़ाई करना पसंद नही करती थी...शायद पैसो की वजह से...

इसलिए उन्होने मुझसे काम करवाया...और काम ना होने पर मारा...गालियाँ दी...

उन्ही के कहने पर मैं जिस्म को बेचने के लिए राज़ी हुई....

पर कहते है कि भगवान चाहे तो सब ठीक होता है...

जब मैं जिस्म बेचने निकली तो आप ही मुझे पहली बार मे मिले....

मुझे उस दिन तो आप पर गुस्सा आया...पर आपने मेरी जिंदगी संवार दी...

आपने मुझे बेहन का दर्जा दिया....और सिर्फ़ दर्जा ही नही.. आपने मुझे अपनी बेहन की तरह रखा...

मुझे उस दलदल मे जाने से बचाया और अपने साथ इस महल मे ले आए...

आपने मुझे नौकरानी से राजकुमारी बना दिया....

आपसे मिलने के पहले लोग मुझे हवस और नफ़रत से देखते थे ...पर...

आज इस घर मे सब मुझे प्यार और सम्मान से देखते है....

आपने मुझे एक घर दिया....पढ़ने का मौका दिया...और सबसे बढ़ कर...मुझे आपके रूप मे एक भाई एक पिता और मेरा भगवान मिल गया...

आपको धन्याबाद कह कर मैं आपका अपमान नही कर सकती...बस सिर झुका कर अपने भगवान को नमन करती हूँ और आपकी तस्वीर अपने पास रखती हूँ...जो आपके कमरे से चुराई है....



इस पेज की लास्ट लाइन पढ़ कर मेरे चेहरे पर हल्की स्माइल तो आई लेकिन मेरी आँखे नम हो गई थी....

ऐसा लगा कि पारूल ने दिल का सारा दर्द उन लाइन्स मे छिपा कर पेश कर दिया हो...

मुझे खुशी भी हो रही थी और गुस्सा भी आ रहा था....

खुशी इस बात की मैने एक अच्छी लड़की को अपनी बेहन के रूप मे पाया ...और गुस्सा इस बात का ...कि मैने उसके साथ सेक्स क्यो किया....

फिर मैने सोचा कि जो हो गया सो हो गया...अब मैं अपनी बेहन के सारे सपने पूरे करूगा...

फिर मैने वो फोटो और डाइयरी पहले की तरह रख दी और आँखे सॉफ करते हुए बाहर निकल आया....

हॉल मे आते ही मुझे रेखा मिल गई...

रेखा- क्या हुआ सर ..आप रो रहे है...

मैं- हाँ..नही..नही...बस आँख सॉफ कर रहा था....थका हूँ...शायद इसलिए पानी आ गया....

रेखा- ओह्ह...वैसे सर...आज आपकी मालिश करने आ जाउ...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म्मह...आ जाओ...तुम्हारी उसकी मालिश भी हो जाएगी...

और फिर हम बाते करते रहे जब तक पारूल खाना नही लाई....


खाना आते ही सबने खाना खाया और पारूल की तारीफ भी की...

फिर मैं पारूल को पढ़ने का बोल कर अपने रूम मे आ गया....

थोड़ी देर बाद रेखा भी आ गई और फिर देर रात तक रेखा की चूत , गान्ड और मुँह ने मेरे लंड की मालिश की....

सुबह मैं उठा तो पारूल स्कूल जा चुकी थी...मैं भी रेडी हुआ और नाश्ता कर के संजू के घर निकल गया......

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06-08-2017, 10:50 AM,
RE: चूतो का समुंदर
कामिनी के घर....आज सुबह....

सुबह-सुबह काजल रेडी हो कर घर से निकलने की तैयारी मे थी...वो कामिनी को बताने ही गई थी...तभी उसे देख कर कामिनी बोली....

कामिनी- ह्म्म...तो अंकित से मिलने जा रही हो...हाँ...

काजल- मोम...आपको कैसे पता ....

कामिनी- बेटा ..मैं तुम्हारी माँ हूँ...इतना तो समझ ही सकती हूँ....वैसे सोचा क्या है....??

काजल- ह्म्म..अभी तो बस उससे मिलने का सोच रही हूँ...मिले तो सही...फिर देखते है....

कामिनी- वही तो...मिलोगि कैसे....??

काजल- बस मोम...कुछ प्लान किया है...लेकिन अभी इतना ही बताउन्गी...बाकी प्लान पूरा होने पर...ओके...मैं निकलती हूँ...

कामिनी- ओके...बट ध्यान से बेटा...वो दिमाग़ भी खूब चलता है और बिस्तेर पर तो...उफ़फ्फ़...क़हर ढाता है ...

काजल(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...जानती हूँ मोम...बुत आपकी बेटी भी कम नही...मैं भी उपेर और नीचे से क़हर धाती हूँ...हहहे....

और काजल हँसती हुई घर से निकल गई.....

और थोड़ी ही देर मे पहुच गई सोनम के घर....

गेट खुलने पर सोनू उसके सामने खड़ा था ...जो थोड़ा परेशान और गुस्से मे दिख रहा था.....

काजल- हाई सोनू....तुम....ठीक तो हो...??

सोनू- ह्म...हाई...आओ...अंदर आओ...

काजल- हाँ....और...कहाँ थे तुम...कहीं गये हुए थे क्या...और सोनम कहाँ है...

सोनू- हाँ...मैं फ्रेंड्स के साथ गया था.....सोनम...वो अपने रूम मे होगी...

काजल- ओके...तुम सोनम को बुला दो यार...तब तक मैं मामी (सुषमा) से मिल लेती हूँ...

और काजल किचन मे निकल गई...और सोनू दाँत पीसते हुए सोनम के रूम मे चला गया.....

सोनू- जा ...काजल आई है...

सोनम(सोनू के पास आ कर)- ह्म्म...भाई...ये गुस्सा किस लिए....

सोनू- तू जानती है...पर फिर भी...

सोनम(बीच मे)- भाई....छोड़ो ना...शायद किस्मत मे यही था....

और सोनम बाहर आने लगती है...तभी सोनू पीछे से बोलता है ..

सोनू- सोनम...याद रखना...अंकित बहुत ख़तरनाक है...उसे पता भी चला तो....

सोनम(बीच मे)- नही चलेगा....और चला भी...तो वो भी मेरी किस्मत होगी....

और सोनम निकल गई....जबकि सोनू गुस्से को कंट्रोल करता हुआ कुछ सोचने लगा......

फिर काजल, सोनम को ले कर बाहर निकल गई....

( कार मे)

सोनम- हम जा कहाँ रहे है काजल...??

काजल- अंकित के घर...और कहाँ...

सोनम(चौंक कर)- क्या...नही-नही...रूको...प्लीज़...

काजल ने तभी कार साइड मे रोक ली...

काजल- क्या हुआ...रोका क्यो...हमे अंकित से मिलना है...भूल गई मैने क्या कहा था...

सोनम- नही...कुछ नही भूली ..पर ऐसे डाइरेक्ट...बिना किसी वजह के...आइ थिंक ये सही नही होगा...

काजल- ह्म्म..बात तो सही है...पर और करें भी क्या.....तू जानती है ना कि मैं जल्द से जल्द उसके करीब होना चाहती हूँ...

सोनम- हाँ...पर ऐसे नही जा सकते....कुछ सोच कर जाना होगा...वरना शायद....

काजल(बीच मे)- ह्म्म...एक आइडिया है ...चल...

और काजल , सोनम को जवाब दिए बिना कार को अंकित के घर पर दौड़ा देती है....

थोड़ी देर बाद दोनो अंकित के घर पर थी...

सोनम(धीरे से)- बता तो...क्या सोचा तूने...

काजल- रुक...बताती हूँ...

तभी सविता सामने से आ जाती है...

सविता- जी कहिए ...

काजल- हमे अंकित से मिलना है...

सविता- अंकित...वो तो बाहर निकल गया....एक मिनट देखती हूँ...शायद आ गया हो...

और सविता अंकित के रूम मे कन्फर्म करने जाती है...तभी काजल , सोनम को कान मे कुछ समझा देती है...

सविता(वापिस आ कर)- माफ़ कीजिए...वो तो घर पर नही है....आप बोलिए क्या काम था. .

काजल- सोनम...(और सोनम को देखती है )

सोनम- वो...आक्च्युयली...आप अंकित से इतना बोल देना कि सोनम आई थी...बस...अब हम चलते है...

और फिर दोनो जल्दी से निकल गई.....

------------------------------------------------------

रेणु के घर....

रेणु के पास एक कॉल आया....

रेणु- हाँ...बोलो....थे कहाँ आप...??

बॉस- रिलॅक्स..मैं बिज़ी था...अब मेरी बात ध्यान से सुन...गुड न्यूज़ है...

रेणु- ह्म्म..बोलो...

बॉस- अब टाइम आ गया है...आकाश वापिस आ रहा है...और उसके दुबारा वापिस जाने के पहले ही तुम्हे अंकित के पास जाना होगा....

रेणु- मैं अपना काम जानती हूँ...

बॉस- गुड...तो तैयार हो जाओ...जो भूख तुमने अंकित के जिस्म मे पैदा की थी...उसका फायदा अब होगा...

रेणु- जानती हूँ...मुझे इस वक़्त का सालो से इंतज़ार था....

बॉस- ओके...बाइ..

और कॉल कट होते ही रेणु खुश हो जाती है...और अंकित की बुआ के पास जा कर बोलती है...

रेणु- हमे जिस टाइम का इंतज़ार था ..वो आ गया...अब हमारे बदले की आग जल्दी बुझ जाएगी....अब आकाश को समझ आएगा कि..""अपने जब धोखा देते है तो क्या हालत होती है..."" और साथ मे अंकित को भी....बेचारा...बहुत भरोसा करता है मुझ पर...हहहे...

और रेणु के साथ-साथ आकृति भी मुस्कुरा देती है......


संजू के घर...सुबह के वक़्त...

मैं अपने घर से निकल कर सीधा संजू के घर पहुचा ....

इस टाइम सब लोग नाश्ता करने मे बिज़ी थे...सिर्फ़ संजू नही था वहाँ....

मैं(हॉल मे आते ही)- उउउंम...आलू के पराठे...वाउ...

मेरी आवाज़ सुन कर सबने मुझे प्यारी से स्माइल दी और आने का इशारा किया...

रजनी- हाँ बेटा...आजा...तेरे लिए ही ख़ास बनाए है...

मैं(बैठते हुए)- मेरे लिए....पर आपको कैसे पता....कि मैं आ रहा हूँ...

रजनी(बीच मे)- एक माँ का दिल सब खबर रखता है बेटा...समझे...

मैं(मुस्कुरा कर)- हाँ...समझ गया...लाइए...और हाँ..ये माँ का दूसरा बेटा कहाँ है...

रजनी- उसका तो पूछ मत बेटा...सुबह से रेडी हो कर ऐसे निकला जैसे फ्लाइट पकड़ना हो...पता नही इतनी जल्दी मे कहाँ निकल गया...

मैं- ओह्ह..मैं पता करता हूँ...पर पहले पेट पूजा फिर काम दूजा...लाइए....

और मैं भी सबके साथ गरमा- गरम आलू के परान्ठो का मज़ा लेने लगा...

नाश्ता करते हुए मैने गौर किया कि अनु थोड़ा गुस्सा है...शायद मैने बात नही की थी इसलिए...

पर दूसरी तरफ रक्षा बहुत खुश थी...शायद उसकी खुशी मुझ पर क़हर बरसायगी...
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06-08-2017, 10:50 AM,
RE: चूतो का समुंदर
पर सबसे ख़ास बात थी कि आज मेघा आंटी मुझे चोर नज़रो से देख रही थी....

मुझे मेघा का यू देखना अच्छा लगा...और मन मे मेघा के लिए अरमान फिर से जाग गये...पर अभी मेरा टारगेट रजनी आंटी थी...इसलिए मैने मेघा पर कोई ख़ास ध्यान देना सही नही समझा...

नाश्ता कर के सब लोग निकल गये...अंकल लोग शॉप पर और आंटी लोग घर के काम पर...

अनु मुँह बना कर अपने रूम मे निकल गई और पूनम भी...अब सिर्फ़ मैं और रक्षा बाकी थे....

मैं जब तक कॉफी पीने लगा...तो रक्षा ने मुझे इशारे से उपेर आने का बोला और वो भी निकल गई...

मैं कॉफी निपटा कर उपेर जाने वाला था कि मेघा आ गई...

मेघा- और अंकित...ट्रिप कैसी रही...

मैं- मस्त थी आंटी...बहुत मज़ा किया...

मेघा- ओह्ह...अब क्या इरादा है...

मैं- अब ...बस स्कूल और बाकी काम...

मेघा- वैसे...अगर तुम्हे टाइम हो तो मुझे कुछ काम था तुमसे...

मैं- तो बोलिए ना...

मेघा- आओ बैठो तो सही ..बताती हूँ....

मेघा ने सोफे पर बैठ कर मुझे बाजू मे बैठने का इशारा किया...मैं भी उनके बाजू मे बैठ गया...

उउंम्म...क्या महक थी मेघा आंटी की...आज तो कुछ ज़्यादा ही महक रही थी....मन तो कर रहा था कि बस...

मेघा- हाँ..तो मैं बोल रही थी कि तुम्हे टाइम हो तो मेरी हेल्प करोगे क्या...??

मैं(होश मे आ कर)- हाँ..हाँ...बोलिए ....

मेघा- आक्च्युयली मुझे थोड़ा वर्काउट करना था...और भाभी(रजनी) ने बताया कि तुम्हारा खुद का जिम है...तो मैं सोच रही थी कि...

मैं(बीच मे)- इसमे सोचना क्या...वो आपका ही घर है...आ जाइए कभी भी...

मेघा- पर मुझे कुछ नही आता...तुम टाइम दे पाओगे...

मैं- बेशक...आप जब कहे...आइ एम रेडी...

मेघा- ओके..तो कल से ..??

मैं- डन ...कल सुबह से...ओके...

इस बात-चीत के दौरान मेरे और मेघा के जिस्म आपस मे टकराए...जिससे मुझे तो मज़ा आया...मेघा का नही पता...उसे भी आया होगा शायद...और हाँ...मेघा की शानदार महक मेरी नाक मे समा गई थी...काफ़ी मादकता वाली महक थी वो...

फिर मुझे याद आया कि अभी अनु से मिलना है...और रक्षा से भी...

तो मैने मेघा को कल आने का बोला और उपेर जाने लगा...

सीढ़ी चढ़ते ही अनु मेरे सामने थी...वो कहीं जाने की तैयारी मे थी...

अनु(मेघा से)- मोम...मैं फ्रेंड के घर जा रही हूँ ...बाइ...

और अनु मुझे गुस्से से देख कर निकल गई....

अनु का गुस्सा देख कर मुझे बुरा लगा पर वहाँ कुछ नही बोल पाया....

तभी मेरे बुझे मन को रक्षा ने राहत दी...उसका एसएमएस आ गया....उसने रूम मे आने का बोला...

मैं(मन मे)- चलो...अनु का गुस्सा बाद मे शांत करेंगे...अभी इससे तो निपट लूँ...क्या चाहती है ये....

मैं(मेघा से)- आंटी..मैं पूनम से मिल के आता हूँ...

और मैं उपेर आ कर रक्षा के रूम मे चला गया....

रक्षा का रूम खुला ही था...गेट खुलते ही मैने रक्षा को आवाज़ दी तो वो बाथरूम से बाहर निकली...

रक्षा(दीवाल से पैर टिका कर)- कैसी लग रही हूँ भैया....ह्म...


रक्षा ने अपनी आँखे नचाते हुए मुझसे पूछा...और उसे देख कर मेरे दिल पर बिजलियाँ गिरने लगी....

रक्षा ने इस वक़्त सिर्फ़ एक टवल लपेट रखी थी....
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06-08-2017, 10:50 AM,
RE: चूतो का समुंदर
आज मुझे वो थोड़ी गदराई सी दिख रही थी...उसके बूब्स का साइज़ भी थोड़ा भरा हुआ दिख रहा था...शायद कुछ दिन के गॅप के बाद देख रहा था..इसलिए....

रक्षा को इस तरह देख कर मुझे उसका इरादा समझने मे देर नही लगी....

मैं गेट पर खड़ा हुआ रक्षा को घूरे जा रहा था.....जिससे रक्षा शरमा गई....

रक्षा(शरमा कर)- अब ऐसे ही देखते रहेंगे क्या...

मैं- ह्म्म..हाँ...अभी देखना बाकी है...

और मैने जल्दी से गेट लगाया और रक्षा के पास आ गया....

मेरे दोनो हाथ रक्षा के गोरे बाजू को जकड़े हुए थे और मेरी गरम साँसे उसके शरमाते हुए चेहरे को गरम कर रही थी...

रक्षा(आँखे बंद कर के)- भैया....

मैं- स्शहीए...थोड़ा रूको...तुझे ठीक से देख तो लूँ...

और मैने अपने हाथो से उसकी टवल निकाल दी.... उसका गोरा बदन पूरा नंगा था...और मेरी आँखो मे सेक्स की भूख जगा रहा था...

रक्षा आँखे बंद किए हुए अपने होंठो को दाँत से दबाए मेरा वेट कर ने लगी....

पर मैने आगे झुक कर अपने होंठो को रक्षा के गुलाबी निप्पल पर रख दिया...

रक्षा- ओह्ह्ह भैया....

मैने धीरे से अपनी जीभ को रक्षा के निप्पल पर घुमाना चालू कर दिया....और रक्षा धीरे -2 सिसकने लगी...

मैं- सस्स्रररुउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउप्प्प...मम्मूउउहह...

रक्षा- ओह्ह भैया...कितना तरसया आपने....करो भैया...और प्यार करो...

मैं- म्मूउहह...आअहह..हाँ बेटा...आज तुझे बहुत प्यार करूगा...उउंम्म..

और मैने बारी- 2 रक्षा के बूब्स चाटना जारी रखा और रक्षा धीरे-2 गरम होने लगी...अब उसकी सिसकियाँ भी बढ़ चुकी थी...

फिर मैने उसके बूब्स को हल्के-हल्के काटना और चूसना शुरू कर दिया....

रक्षा- आअहह..भैया....ओह्ह्ह...मत काटो ना...आअहह...

जब मैने मन भर के बूब्स का रस्पान कर लिया तो मैने रक्षा को किस करना शुरू कर दिया....

मैं- सस्स्ररुउउप्प....उउउंम...कैसा है मेरा बेटा....

रक्षा- उउंम...बहुत प्यासा...उउउंम..

मैं- उउउंम्म...प्यास भुझा देता हूँ...उउउंम्म...

रक्षा- उउउंम..जल्दी भैया...उउंम्म...सब घर मे है...उउउंम्म..

और किस करते हुए मैने रक्षा की गान्ड को दोनो हाथो से पकड़ा और उपेर उठा लिया....

रक्षा ने अपने पैर मेरी कमर मे और हाथ मेरे गले मे लपेट कर किस करना चालू रखा....

मैं रक्षा को उठा कर बेड तक ले गये और उसे लिटा दिया....

रक्षा के लेट ते ही मैने झुक कर उसकी चूत के उपरी हिस्से पर किस कर दिया...

मेरे किस करते ही रक्षा ने अपनी टांगे खोल दी....


रक्षा की चूत धीरे-धीरे पानी बहाने लगी थी ...

मैं- ह्म्म...ये तो अभी से पानी छोड़ने लगी...हाँ...

रक्षा- वो तो आपको देख कर ही खुशी के आशु बहाने लगी थी....आओ ना भैया...

मैं रक्षा का मतलब समझ गया और झुक कर उसकी गरमा-गरम चूत पर अपने होंठ चिपका दिए....

रक्षा- आअहह...कितना तड़पाओगे भैया...अपनी गुड़िया का ख्याल रखो ना...आअहह ..

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प...आहह..हाँ बेटा...अब सारी तड़प मिटा दूँगा....

और मैने अपनी जीभ से रक्षा की चूत को चोदना शुरू कर दिया...

रक्षा अपने हाथो से बेडशीट पकड़ कर अपनी गान्ड को उठाते हुए मस्ती मे सिसकने लगी....

रक्षा- आअहह...भैया...करो...गुड़िया को मज़ा दे दो...ओह्ह...तेज भैया....आहह...

मैं- उउंम्म...सस्ररुउउउगग़गग...सस्ररूउउग़गग..उउंम..उउंम्म..उउंम...

रक्षा- ओह भैया...ज़ोर से...खा जाओ...श....उउंम्म...

थोड़ी देर की चूत चुसाइ से रक्षा चूत रस बहाने लगी...

रक्षा- आअहह...भैया....मैं..आहह..गैिईई...

और रक्षा ने अपना नमकीन चूत रस मेरे मुँह मे छोड़ दिया....और मैं चूत रस का मज़ा लेने लगा...

रक्षा प्यार से मेरे सिर पर हाथ फिराने लगी....

रक्षा- ओह्ह भैया...आप ने सारी तड़प मिटा दी...उउउंम्म...ऐसे ही इसका ख्याल रखा करो प्ल्ज़्ज़...

मैं- आअहह...हाँ बेटा...अब रोज रखुगा...खुश ...

रक्षा- सच भैया...

मैं- ह्म्म..सच मे...सस्स्ररुउउप्प्प्प...

और एक बार और उसकी चूत पर जीभ फिरा कर मैं खड़ा हो गया....

रक्षा- भैया..अब मेरी बारी....हम्म

और रक्षा घुटनों पर आई और मेरा लंड बाहर निकाल लिया....

रक्षा(लंड को देख कर)- ऊ...कैसा है मेरा सोना...उ मिस मी ना...उउउंम्म...

मैं- आहह...बहुत मिस किया बेटा...अब इसे तड़पाओ मत...

रक्षा- आज नही तड़पाउंगी..सस्स्ररुउउप्प्प...सस्स्ररुउउप्प्प...

और रक्षा ने लंड हिलाते हुए जीभ से लंड चाटना शुरू कर दिया....और कुछ देर बाद लंड को मुँह मे डाल लिया...

रक्षा- उउउंम्म...उूुउउंम्म...सस्स्रररुउउप्प्प...उउंम..उउउंम्म...


मैं- वा बेटा....ऐसे ही प्यार करो इसे....ये बहुत तड़पा है तुम्हारे लिए...

रक्षा- उउंम्म..उउंम..उउंम..उउंम..

और रक्षा फुल स्पीड से लंड को मुँह मे आगे-पीछे करने लगी....

थोड़ी देर बाद ही मेरा लंड पूरी औकात मे आ गया...और रक्षा भी दोबारा से गरम हो गई...

रक्षा- उउउंम्म..उउंम..आहह...अब अपनी गुड़िया को जन्नत की सैर कराओ भैया...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म...आजा बेटा...

और मैने रक्षा को पास मे खीचा और और उसकी टांगे हाथ से उपेर कर दी और लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा....
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06-08-2017, 10:51 AM,
RE: चूतो का समुंदर
रक्षा- भैया..प्ल्ज़ ...अब तड़पाओ मत ना...प्ल्ज़...

और मैने धीरे से सुपाडा रक्षा की चूत मे डाल दिया...

रक्षा- उउउंम्म...डाल दो भैया...अंदर तक आग लगी है...साल दूऊऊऊ.....

और रक्षा की बात ख़त्म होने के पहले लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया....

रक्षा- आआहह....भैया....उूउउंम्म...

मैं- क्या हुआ बेटा...मज़ा नही आया...

रक्षा- आहह...बहुत अच्छा लगा...बहुत आग लगी थी....अब सुकून मिल रहा है...अब शुरू करो ना...

मैने भी रक्षा को तेज़ी से चोदना सही समझा...क्योकि काफ़ी देर से हम अंदर थे...और कोई भी आ सकता था...

मैने रक्षा की टांगे पकड़ कर जोरदार चुदाई शुरू कर दी....

रक्षा- आअहह ..आहह..आहह...ऐसे ही भैया...और तेज...आहह..आहह..

मैं- हाँ बेटा...ये लो...एस्स..एस्स..एस्स...

रक्षा- ओह भैया...कहाँ चले गये थे...उउफफफ्फ़....अब रोज मज़ा देना...आअहह....ज़ोर से....आअहह...

मैं- हाँ बेटा...रोज करूगा....अभी मज़ा कर...यीहह...यीहह...

थोड़ी देर की चुदाई के बाद रक्षा ने मुझे रोक दिया....

मैं- क्या हुआ....हो गया क्या...

रक्षा- नही...आप मुझे पीछे से करी...कुतिया बना कर...

मैं(मुस्कुरा कर)- अच्छा...मेरी कुतिया बनना है...

रक्षा- हाँ...वैसे मे मज़ा आता है...करो ना...

मैं- हाँ बेटा...अभी कुतिया बनाता हूँ...

और मैने लंड निकाल कर रक्षा को पलटा दिया...रक्षा भी पोज़ मे आकर अपनी मदमस्त गान्ड को हवा मे उठा कर लंड का वेट करने लगी...

रक्षा ने मुझे पीछे से चूत मारने को कहा था...पर उसकी चिकनी गान्ड देख कर मेरा मन मचल गया और मैने गान्ड के छेद पर लंड लगा दिया....

रक्षा(पीछे देख कर)- भैया....क्या इरादा है...ह्म्म..

मैं- अभी बताता हूँ...

और मैने हाथ से लंड को पकड़ा और रक्षा की गान्ड मे सुपाडा डाल दिया....

रक्षा- आअहह...आप तो फाड़ ही दोगे...

मैं- निकाल लूँ ...

रक्षा- नही...आपको गान्ड ज़्यादा पसंद है ना...तो करो...

मैं- पर तुझे दर्द होगा...

रक्षा- तो क्या...अपने भैया के लिए मेरे सारे छेद तैयार है...आप बस करो...

मैं- तो लो फिर...

और मैने एक शॉट मारा और आधा लंड गान्ड मे चला गया....

रक्षा- म्म म्मूऊम्म्मय्ी...आअहह...भीया...रूको मत...डाल दो...

मैं- ये लो बेटा....

और फिर से एक शॉट मारा और पूरा लंड गान्ड मे चला गया...

रक्षा को दर्द हुआ और आसू भी निकले पर वो रुकी नही...


रक्षा- भैयाआअ....अब रुकना मत..करो...

और मैने रक्षा की कमर पकड़ कर उसे तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया....

रक्षा- आअहह....करो भैया करो...आअहह..आअहह..आअहह...

मैं- यस बेटा....ले...ईएह..ईएह...

रक्षा ने अपने हाथ से अपनी चूत को मसलना शुरू कर दिया और गान्ड को पीछे कर के गान्ड मरवाने लगी...

रक्षा- ओह्ह भैयाअ....फाड़ दो ...आष्ह..ज़ोर से...आआअहह....

मैं- हाँ बेटा....तू मज़ा कर...ये ले...एस्स..एस्स...

कुछ देर तक रूम मे सिर्फ़ चुदाई की आवाज़े गूँजती रही और रक्षा की सिसकारियाँ तेज होती गई....

रक्षा- आअहह...भैया...अब मैं गई...आअहह...आअहह...

और रक्षा के झाड़ते ही मैने उसको पकड़ कर तेज़ी से शॉट मारे और थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ने लगा...

मैं- ये लो बेटा...मैं भी आया....एस्स..एस्स..एस्स..आअहह..आअहह...

मेरे झाड़ते ही मैने लंड को बाहर निकाल लिया और रक्षा बेड पर लेट गई...

मैं भी रक्षा के बाजू मे लेट गया और उसकी गान्ड सहलाने लगा...

मैं- अब कैसा लग रहा बेटा...

रक्षा- बहुत अच्छा....

मैं- ह्म्म..तो अब जल्दी फ्रेश हो जाओ..ओके


रक्षा- ओके...

थोड़ी देर बाद हम रेडी हो गये...और मैं आने लगा...

रक्षा(पीछे से)- भैया...आइ एम सॉरी....

मैं- सॉरी...किस लिए...

रक्षा- वो भैया...मैने आपसे पूछे बिना किसी को आपके साथ सोने का प्रोमिस कर दिया...

मैं(गुस्से से)- क्या...तू पागल है क्या...समझ क्या रखा मुझे...हाँ..

रक्षा- सॉरी भैया...पर उसे मैने बताया तो वो पीछे पड़ गई...और मैने डर कर हाँ बोल दी...

मैं- डर कर...कैसा डर...

रक्षा- वो ..भैया...वो एमएलए की बेटी है...इसलिए...

मैं- एमएलए की बेटी है या कोई भी...

तभी पीछे से रजनी आंटी की आवाज़ आई...वो मुझे बुला रही थी...

मैं(रक्षा से)- गो टू हेल...अब सकल मत दिखाना...

और मैं रक्षा की सुने बिना नीचे आ गया...

रजनी- बेटा...मैं और मेघा थोड़ा पड़ोस मे जा रहे है...तू खाना खा लेना...ओके..

मैं- नही आंटी...मुझे अभी जाना है...फिर आउगा...थोड़ा काम है...

रजनी- ओह..ठीक है...लेकिन टाइम से खाना खा लेना...ओके..

मैं- ओके..

फिर मैं संजू के घर से निकल कर अपने सीक्रेट हाउस पहुच गया...
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06-08-2017, 10:51 AM,
RE: चूतो का समुंदर
स- आ गया...क्या हाल है अब...और वो चोट कैसी है...

मैं- मामूली खरॉच थी...अब ठीक है...आप बताओ...

स- मस्त...ऐज ऑल्वेज़...हाहाहा...

मैं- अच्छा...वो बात...क्या बताने वाले थे आप...कामिनी और मेरे डॅड का क्या...

स- हां...दिखाता हूँ...तुम खुद देख कर डिसाइड करो..मुझे तो समझ नही आया...

और फिर एस ने मुझे एक फाइल पकड़ा दी...

स- ये फाइल उसी ऑफीस के लॉकर मे मिली...देखो इसे...

मैं फाइल को देखने लगा और पार्ट्नर्स का नाम पढ़कर मेरा दिमाग़ हिल गया....

मैं- क्या...हाउज़ ईज़ पॉसिबल...ये नही हो सकता....

स- ये ओरिजिनल है...तभी तो मैं भी चौंक गया....

मैं- पर...डॅड ने कामिनी के नाम 30% शेर किए है...क्यो....कामिनी का डॅड से क्या संबंध....????

और मैं फाइल हाथ मे ले कर अपने दिमाग़ मे आए गुस्से को काबू करने मे लग गया......
मैं काफ़ी देर तक उस फाइल को देखते हुए मन मे सोचता रहा कि आख़िर ये चक्कर क्या है....

कौन है ये कामिनी....और डॅड से इसका रिश्ता क्या है....डॅड ने इसे पार्ट्नर क्यो बनाया...???

मुझे यू परेशान देख कर मेरे सामने बैठा मेरा आदमी स उठा और मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोला....

स- अंकित...ये टाइम गुस्से से काम लेने का नही...बल्कि दिमाग़ को यूज़ करने का है...

मैने उसकी बात सुनकर उसकी आँखो मे देखा....और अपने आप को कंट्रोल कर के बोला...

मैं- आप सही कहते हो...लेकिन डॅड ने...

स(बीच मे)- मैने कहा ना...माइंड यूज़ करो...बिना किसी सबूत के किसी रिज़ल्ट पर मत पहुचो...पहले पता करो...

मैं- ह्म्म...आप सही हो...मुझे पता करना ही होगा...ये कामिनी की जड़ कहाँ तक है..और क्यो है...

स- ह्म..लो कॉफी आ गई...पहले कॉफी पियो और रिलॅक्स हो जाओ...

फिर हमने बैठ कर कॉफी पी और कॉफी ख़त्म होते ही....

मैं- एक बात बताइए....आपको लगता है कि कामिनी ने जो बोला वो सच है...

स- हाँ...लगता तो यही है...उस वक़्त वो झूट बोलती क्या...आइ डोंट थिंक सो...

मैं- सही कहा...जब किसी की फटी होती है तो वो सच ही बकता है....

स- और हाँ ...उसके घर जो कॅमरास न्ड माइक्रो फोन्स लगाए थे...उससे भी कुछ खास पता नही चला...

मैं- ह्म्म...इसका मतलब कामिनी ने सच कहा...दामिनी सब जानती है...और कामिनी तो बस अपनी बहेन के कहने पर चल रही है...

स- बिल्कुल...

मैं- पर डॅड और कामिनी का क्या रिश्ता...क्या ये सिर्फ़ बिज़्नेस है या फिर कुछ और...ओह्ह्ह...ये बात बिल्कुल भी नही समझ आ रही...क्या करूँ...

स- पहले रिलॅक्स हो जाओ...और हाँ..चाहो तो हम कामिनी से पूछ सकते है...

मैं- शायद नही...मुझे नही लगता कि कामिनी को इस बारे मे कुछ भी पता है...

स- तो तुम्हारा मतलब कि तुम्हारे डॅड ...

मैं(बीच मे)- हाँ...सिर्फ़ डॅड ही ये जानते है...और इस बात का जवाब वही देगे...पर पुच्छू कैसे....उनसे कुछ भी पूछा तो वो भी कई सवाल करेंगे...और उनके आन्सर मैं अभी नही देना चाहता....

स- तो करना क्या है अभी..ये बोलो...

मैं- मुझे तो अभी काजल का वेट है...देखे तो कि वो क्या करती है...और हां...रजनी...

स(बीच मे)- हाँ...रजनी से बात की...

मैं- नही...आज गया था...बट पहले रक्षा के साथ फस गया और जब फ्री हुआ तो आंटी कहीं जा रही थी...तो मैं निकल आया....पर अब पूछना ही होगा..रजनी आंटी से बात करके कुछ तो बोझ हल्का होगा...शायद इससे कामिनी का भी कुछ आइडिया निकल आए....

स- ह्म्म..सही है..मुझे भी लगता है कि रजनी से कामिनी का कुछ तो पता लगेगा...

मैं- तो ठीक है...आज रात तक कुछ करता हूँ....आज रजनी आंटी को जवाब देना ही होगा...अच्छे से या बुरे से....

और फिर मैं दाँत पीसते हुए वो फाइल ले कर खड़ा हो गया....


स- जा रहे हो....ज़रा उससे मिल तो लो...बहुत परेशान है वो...

मैं- आज नही...उसे बोलना कि थोड़ा और वेट करे...और हाँ...बहादुर को भी...

स- ओके...तुम रिलॅक्स हो कर कदम बढ़ाना...

मैं- ह्म्म...

और मैं वहाँ से निकल आया....

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