Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
05-24-2019, 11:51 AM,
#1
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मेरे पति और मेरी ननद


हैलो.. मेरा नाम अनीता है। मैं २६ साल की एक शादीशुदा औरत। गोरा रंग और खूबसूरत नाक नक्श। कोई भी एक बार मुझे देख लेता तो बस मुझे पाने के लिये तड़प उठता था। मेरा फिगर, ३६-२८-३८, बहुत सैक्सी है। मेरी शादी को कोई 8-9 महीने हुए हैं। जब भी मैं कहीं बाहर जाती हूँ तो सभी मर्द मुझे कामुक नज़रों से देखते हैं। मुझे भी ये बहुत पसंद है कि सभी मर्द मुझे देखें मेरे पति का नाम चेतन है.. वो मेरे ऑफिस में मेरे साथ ही काम करते थे.. लेकिन शादी के बाद मैंने जॉब छोड़ दी और घर पर ही रहने लगी हूँ। 
चेतन कोई बहुत ज्यादा अमीर आदमी नहीं हैं। उसकी फैमिली शहर के पास ही एक गाँव में रहती है.. उधर थोड़ी सी ज़मीन है.. जिस पर उसके घर वाले अपना गुज़र-बसर करते हैं। गाँव में उसके बाप.. माँ.. बहन और एक छोटा भाई रहते हैं। उसका छोटा भाई अपनी बाप के साथ जमीनों पर ही होता है। गाँव के स्कूल में ही बहन पढ़ रही थी.. वो बहुत ही प्यारी लड़की है.. डॉली.. यानि वो मेरी ननद हुई।
मैं अपने पति चेतन के साथ शहर में ही रहती हूँ। हमने एक छोटा सा मकान किराए पर लिया हुआ है.. इसमें एक बेडरूम मय अटैच बाथरूम.. छोटा सा टीवी लाउंज और एक रसोई है। 
घर के अगले हिस्से में एक छोटी सी बैठक है.. जिसका एक दरवाज़ा घर से बाहर खुलता है.. और दूसरा टीवी लाउंज है.. घर के पिछले हिस्से में एक छोटा सा बरामदा है। बस.. तक़रीबन 3 कमरे का घर है.. ऊपर की छत बिल्कुल खाली है।
मेन गेट के अन्दर थोड़ी सी जगह गैराज के तौर पर जहाँ पर चेतन अपनी बाइक खड़ी करता है।
मैं और चेतन अपनी शादी से बहुत खुश हैं और बड़ी ही अच्छी जिंदगी गुज़र रही थी। अगरचे.. चेतन का बैक ग्राउंड गाँव का था.. लेकिन फिर भी शुरू से शहर में रहने की वजह से वो काफ़ी हद तक शहरी ही हो गया था। रहन-सहन.. ड्रेसिंग वगैरह सब शहरियों की तरह ही थी.. और वो काफ़ी ओपन माइंडेड भी था। 
घर पर हमेशा वो मुझसे फरमाइश करता के मैं मॉडर्न किस्म के कपड़े ही पहनूं.. इसलिए घर पर मैं अक्सर टाइट लैंगिंग्स और टॉप्स.. स्लीव लैस शर्ट्स और हर किस्म की वेस्टर्न ड्रेसस पहन लेती थी। 
मैं अक्सर जब भी बाहर जाती.. तब भी मेरी ड्रेसिंग काफ़ी मॉड ही होती थी।
मैं अक्सर जीन्स और टी-शर्ट पहनती थी या सलवार कमीज़ पहनती तो.. वो भी फैशन के मुताबिक़ ही एकदम चुस्त और मॉडर्न ही होती थी।
घर से बाहर भी वो मुझे अक्सर लेगिंग पहना कर ले जाता था.. घर आ जाता तो मुझसे सिर्फ़ ब्रेजियर और लेगिंग में ही रहने की फरमाइश करता था..
चेतन मेरे हुस्न और मेरे जिस्म का दीवाना था। हमेशा मेरी गोरे रंग और खूबसूरत जिस्म की तारीफ करता था।
जब भी मौका मिलता.. वो मेरी चूचियों को मसल देता था.. और मेरे खुले गले में हाथ डाल कर मेरी चूचियों को सहलाता रहता था। 
अपने पति को खुश करने और उसे लुभाने के लिए मैं भी हमेशा डीप और लो नेक की कमीजें सिलवाती थी.. जिसमें से मेरी चूचियों भी नजर आती थीं और मम्मों का क्लीवेज तो हर वक़्त ही ओपन होता था। 
दिन में जब भी मौका मिलता.. हम लोग सेक्स करते थे.. बल्कि सच बात तो यह है कि मैं शादी से पहले ही अपना कुँवारापन चेतन पर लुटा चुकी थी।
जी हाँ.. चेतन ही मेरी पहली और आखिरी मुहब्बत था और यह चेतन की मुहब्बत ही थी.. जो के मुझे शादी से पहले ही उसके बिस्तर तक उसकी बाँहों में ले आई थी। 
शादी के 8-9 महीने बाद भी जब हमारी सेक्स जिंदगी और हवस से भरी हुई ज़िंदगी पूरे सिरे पर थी.. तो एकदम इसमें एक ब्रेक सी लग गई और एक टकराव सा आ गया। 
इसकी वजह यह थी कि मेरी ननद डॉली… ने स्कूल का आखिरी इम्तिहान पास कर लिया था और उसने कॉलेज में एडमिशन लेने का शौक़ ज़ाहिर किया.. तो मेरे ससुर जी ने पहले तो इन्कार कर दिया.. लेकिन जब उसके चहेते बड़े भाई चेतन ने भी अपने बाप से बात की.. तो मेरे ससुर जी ने हामी भर ली कि अगर चेतन उसकी जिम्मेदारी उठा सकता है.. तो ठीक है।
अब दिक्कत यह थी कि गाँव में कोई कॉलेज नहीं था और उसे शहर में आना था। जब डॉली ने कॉलेज में एडमिशन लिया.. तो वो गाँव से शहर में आ गई। अब ज़ाहिर है कि उसे हमारे साथ ही रहना था तो डॉली शहर में हमारे साथ उस छोटे से मकान में ही शिफ्ट हो गई।
डॉली की आने से और हमारे साथ रहने से मुझे और तो कोई दिक्कत नहीं थी.. लेकिन सिर्फ़ एक मसला था कि हमारी सेक्स जिंदगी थोड़ी बंदिशों वाली हो जाने थी। 
अब हमें जो भी करना हो.. तो अपने कमरे में ही करना था। वैसे डॉली बहुत ही अच्छे नेचर की लड़की थी.. अभी क़रीब 19 साल की ही थी.. बहुत ही सुंदर और खूबसूरत लड़की थी। बिल्कुल दूध की तरह गोरा रंग.. और मक्खन की तरह से नरम-नरम जिस्म था उसका..
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05-24-2019, 11:52 AM,
#2
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
उसके सीने की उठान.. यानि चूचियों उभर चुकी थीं.. लेकिन अभी बहुत बड़ी नहीं थीं। जाहिर सी बात है कि मुझसे तो छोटी ही थी.. बहुत ही सादा और मासूम सी लड़की थी।
मुझसे बहुत ही प्यार करती थी और बहुत ही इज्जत देती थी। 
जब से घर में आई.. तो रसोई में भी मेरा हाथ बंटाती थी.. और मेरे साथ घर का काफ़ी काम करती थी। मैं भी डॉली की शक्ल में एक अच्छी सी सहेली को पाकर खुश थी।
उसके सोने का इंतज़ाम उस छोटी सी बैठक में ही एक सिंगल बिस्तर लगवा कर.. कर दिया गया था। वो वहीं पर ही पढ़ती थी और वहीं पर ही सोती थी। बाथरूम उसे हमारा वाला ही इस्तेमाल करना पड़ता था.. जिसका एक दरवाज़ा छोटे से टीवी लाउंज में खुलता था और दूसरा हमारे बेडरूम में खुलता था।
बस रात को सोते वक़्त हम लोग अपने बेडरूम वाला बाथरूम का दरवाज़ा अन्दर से बंद कर लेते थे.. ताकि डॉली बाहर से ही उसे इस्तेमाल कर सके।
डॉली वैसे तो बहुत ही खूबसूरत लड़की थी.. लेकिन सारी ज़िंदगी गाँव में रहने की वजह से बिल्कुल ही ‘डल’ लगती थी। उसकी ड्रेसिंग भी बहुत ज्यादा ट्रेडीशनल किस्म की होती थी। सादा सी सलवार-कमीज़ पहनती थी.. कभी भी मॉड किस्म के कपड़े नहीं पहनती थी। 
मुझे घर में लेगिंग पहने देखना शुरू किया.. तो वो बहुत ही हैरान हुई.. तो मैंने हंस कर कहा- अरे यार क्यों हैरान होती हो.. यह सब आज के वक़्त की ज़रूरत और फैशन है.. इसके बिना ज़िंदगी का क्या मज़ा है.. वैसे भी तो घर पर सिर्फ़ तुम्हारे भैया ही होते हैं ना.. और जब भी बाहर जाती हूँ.. तो उनके साथ ही जाती हूँ.. तो फिर मुझे किस चीज़ की फिकर है।
डॉली- लेकिन भाभी बाहर तो बहुत से लोग होते हैं.. वो आपको अजीब नजरों से नहीं देखते क्या?
मैं- अरे यार देखते हैं.. तो देखते रहें.. मेरा क्या जाता है.. वैसे इन लोगों की कमीनी नज़रों का भी अपना ही मज़ा होता है।
मैंने एक आँख मार कर डॉली से कहा.. तो वो झेंप गई।
मैं उसे हमेशा ही मॉड और न्यू फैशन के कपड़े पहनने को कहती.. लेकिन वो इन्कार कर देती।
‘मुझे शरम आती है.. ऐसी कपड़े पहनते हुए.. और फिर मुझे इन कपड़ों में देख कर भैया बुरा मान जाएंगे..’
शहर में आने के बाद चेतन ने उसे खूब शहर की सैर करवाई। हम लोग चेतन की बाइक पर बैठ कर घूमने जाते.. मैं चेतन के पीछे बैठ जाती और मेरे पीछे डॉली बैठती थी।
हम लोग खूब शहर की सैर करते.. और डॉली भी खूब एंजाय करती थी। 
बाइक पर बैठे-बैठे मैं अपनी चूचियों को चेतन की बैक पर दबा देती और उसके कान में ख़ुसर-फुसर करती जाती- क्यूँ फिर फील हो रही हैं ना मेरी चूचियां तुमको?
मेरी कमर पर चेतन भी जानबूझ कर अपनी कमर से थोड़ा-थोड़ा हरकत देता और मेरी चूचियों को रगड़ देता। कभी मैं उसकी जाँघों पर हाथ रख कर मौका मिलते ही उसकी पैन्ट के ऊपर से ही उसके लण्ड को सहला देती थी.. जिससे चेतन को बहुत मज़ा आता था। 
हमारी इन शरारतों से बाइक पर पीछे बैठे हुई डॉली बिल्कुल बेख़बर रहती थी।
चेतन अपनी बहन से बहुत ही प्यार करता था.. आख़िर वो उसकी सबसे छोटी बहन थी ना.. कम से कम भी उससे 18 साल छोटी थी.. और वो मुझसे 10 साल छोटी थी। 
रोज़ाना चेतन खुद ऑफिस जाते हुए डॉली को कॉलेज छोड़ कर जाता और वापसी पर साथ ही लेता आता था। मुझे भी कभी भी इस सबसे कोई दिक्कत नहीं हुई थी। जैसा कि ननद-भाभी में घरों में झगड़ा होता है.. मेरे और डॉली कि बीच में ऐसा कभी भी नहीं हुआ था.. बल्कि मुझे तो वो अपनी ही छोटी बहन लगती थी।
फिर एक दिन वो वाकिया हुआ जो इस कहानी के आगे बढ़ने की वजह बना, उससे पहले ना कुछ ऐसा-वैसा हुआ हमारे घर में, और ना ही किसी के दिमाग में था.. लेकिन उस वाकिये के बाद मेरा दिमाग एक अजीब ही रास्ते पर चल पड़ा और मैंने वो सब करवा दिया जो कि कभी नहीं होना चाहिए था।
वो इतवार का दिन था और हम सब लोग घर पर ही थे। दोपहर के वक़्त हम सब लोग टीवी लाउंज में ही बैठे हुए टीवी देख रहे थे कि चेतन ने चाय की फरमाइश की.. इससे पहले कि मैं उठती.. आदत के अनुसार.. डॉली फ़ौरन ही उठी और बोली- भाभी आप बैठो.. मैं बना कर लाती हूँ।
मैंने उसे ‘थैंक्स’ बोला और दोबारा टीवी देखने लगी, चेतन भी मेरा पास ही बैठा हुआ था।
अचानक ही रसोई से डॉली की एक चीख की आवाज़ सुनाई दी और साथ ही उसके गिरने की आवाज़ आई। मैं और चेतन दोनों ही फ़ौरन ही उठ कर रसोई की तरफ चिल्लाते हुए भागे।
‘क्या हुआ है डॉली?’
जैसे ही हम लोग अन्दर गए तो देखा कि डॉली नीचे रसोई कि फर्श पर गिरी हुई है और अपने पैर को पकड़ कर दबा रही है और वो दर्द के मारे कराह रही थी।
हम फ़ौरन ही उसके पास बैठ गए और मैं बोली- क्या हुआ डॉली.. कैसे गिर गई?
डॉली- बस भाभी.. पता ही नहीं चला कि कैसे मेरा पैर मेरी पायेंचे में फँस गया और मैं नीचे गिर पड़ी।
चेतन- अरे यह तो शुक्र है कि अभी इसने चाय नहीं उठाई हुई थी.. नहीं तो गर्म-गर्म चाय ऊपर गिर कर और भी नुक़सान कर सकती थी।
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05-24-2019, 11:52 AM,
#3
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
मैंने आहिस्ता-आहिस्ता डॉली को पकड़ कर उठाना चाहा.. उसका दूसरा बाज़ू चेतन ने पकड़ा और हमने डॉली को खड़ा किया.. तो वो अपना बायाँ पैर नीचे ज़मीन पर नहीं रख पा रही थी। बड़ी ही मुश्किल से वो अपना एक पैर ऊपर उठा कर मेरी और अपने भैया की सहारे पर लंगड़ाती हुई टीवी लाउंज में पहुँची।
इतने से रास्ते में भी वो कराहती रही- भाभी नहीं चला जा रहा है.. बहुत दर्द हो रहा है।
टीवी लाउंज में लाकर हम दोनों ने उसे सोफे पर ही लिटा दिया और मैं उसके पास बैठ गई।
चेतन- लगता है कि इसके पैर में मोच आ गई है।
मैंने डॉली को सीधा करके सोफे पर लिटाया और उसके पैर की तरफ आकर उसके पैर को सहलाती हुए बोली- हाँ.. लगता तो ऐसा ही है..
मैंने चेतन से कहा- आप डॉली के बेडरूम में जाकर मूव तो उठा लायें.. ताकि मैं इसके पैर की थोड़ी सी मालिश कर सकूँ।
मेरी बात सुन कर चेतन फ़ौरन ही कमरे में चला गया और मैं आहिस्ता-आहिस्ता उसके पैर को सहलाती रही। अभी भी डॉली दर्द के मारे कराह रही थी।
चंद लम्हों के बाद ही चेतन वापिस आया और उसने मूव मुझे दी। मैंने थोड़ी सी ट्यूब से मलहम निकाली और उसे डॉली के पैर के ऊपर मलने लगी। 
फिर मैंने चेतन से कहा- जरा रसोई में जा कर रबर की बोतल में पानी गरम करके ले आओ.. ताकि थोड़ी सी सिकाई भी की जा सके।
चेतन भी अपनी बहन के पैर में मोच आने की वजह से बहुत ही परेशान था। इसलिए फ़ौरन ही रसोई में चला गया।
डॉली के पैर के ऊपर मूव लगाने के बाद मैंने उसकी सलवार को थोड़ा ऊपर घुटनों की तरफ से उठाया.. ताकि उसकी टांग के निचले हिस्से पर भी मूव लगा दूँ।
डॉली ने उस वक़्त एक बहुत ही लूज और खुली पाएचों वाली सलवार पहनी हुई थी और शायद यही वजह थी कि वो रसोई में इसके पाएंचे से उलझ कर गिर गई थी।
जैसे ही मैंने डॉली की सलवार को उसकी घुटनों तक ऊपर उठाया तो डॉली की गोरी-गोरी टाँगें मेरी आंखों के सामने नंगी हो गईं।
उफफ्फ़.. डॉली की टाँगें कितनी गोरी और मुलायम थीं.. जैसे ही मैंने उसकी नंगी टाँग को छुआ.. तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैंने मक्खन में हाथ डाल दिया हो.. मैं उसकी टांग की मालिश का भूल कर आहिस्ता-आहिस्ता उसकी टाँग को सहलाने लगी। 
धीरे-धीरे अपना हाथ उसकी नंगी टाँग पर फेरने लगी। कभी पहले ऐसा नहीं हुआ था.. लेकिन आज मुझे एक अलग ही मज़ा आ रहा था। मुझे उसकी मखमली टाँग को सहलाने का मौका जो मिल गया था।
फिर मैंने अपने ख्यालों को झटका और उसकी टाँग पर मूव लगाने लगी।
थोड़ी ही देर में चेतन गरम पानी की रबर की बोतल ले आया और मेज पर रख दी। 
अब वो दूसरी सोफे पर बैठ कर दोबारा से टीवी देखने लगा.. डॉली की टाँग पर मूव लगाते हुए अचानक ही मेरी नज़र चेतन की तरफ गई.. तो हैरानी से जैसे मेरी आँखें फट सी गईं। मैंने देखा कि चेतन की नजरें टीवी की बजाय अपनी सग़ी बहन की नंगी टाँगों को देख रही हैं।
मुझे इस बात पर बहुत ही हैरत हुई कि चेतन कैसे अपनी छोटी बहन की नंगी टाँग को ऐसे देख सकता है।
उसकी आँखों में जो हवस थी.. वो मैं अच्छी तरह से पहचान सकती थी.. आख़िर मैं उसकी बीवी थी।
यह देख कर एक लम्हे के लिए तो मेरे हाथ डॉली की टाँग पर रुक से गए.. लेकिन मुझमें हिम्मत ना हुई कि मैं अपने पति से नजरें मिलाऊँ या उसको रोकूँ या टोकूँ.. मैंने अपनी नजरें वापिस डॉली की टाँग पर जमा दीं और आहिस्ता-आहिस्ता मूव मलने लगी। 
डॉली को किसी बात का होश नहीं था.. वो तो बस अपनी आँखें बंद किए हुए पड़ी हुई थी। डॉली की नंगी गोरी टाँग को सहलाते सहलाते मेरे दिमाग में एक शैतानी ख्याल आया.. कि क्यों ना मैं इसकी टाँग को थोड़ा और एक्सपोज़ करूँ और देखूँ कि तब भी चेतन अपनी बहन की गोरी टाँगों को नंगा देखता रहता है या नहीं..
यही सोच कर मैंने आहिस्ता से डॉली की सलवार उसके घुटनों के ऊपर सरका दी.. और अब उसकी खुली पायेंचे वाली सलवार उसके घुटनों से ऊपर आ गई थी.. जिसकी वजह से डॉली का घुटना और उसकी जाँघ का थोड़ा सा निचला हिस्सा भी नंगा हो गया था। 
मैंने उसके घुटनों पर भी आहिस्ता-आहिस्ता मूव लगानी शुरू कर दी और मसाज करती हुई.. मैंने तिरछी नज़र से अपने पति की तरफ देखा.. तो पता चला कि अब भी वो चोर नज़रों से अपनी बहन की नंगी टाँग की ओर देख रहे थे।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा दी।
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05-24-2019, 11:52 AM,
#4
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
कितनी अजीब बात थी कि एक भाई भी अपनी सग़ी छोटी बहन की नंगी टाँग को ऐसी प्यासी नज़रों से देख रहा था.. जैसे कि वो उसकी बहन ना हो.. बल्कि कोई गैर लड़की हो! 
मुझे इस गंदे खेल में अजीब सा मज़ा आ रहा था और मैं इसलिए इस मसाज को एक्सटेंड करती जा रही थी.. ताकि चेतन ज्यादा से ज्यादा अपनी बहन के जिस्म से अपनी आँखों को सेंक सके।
अब मेरे दिमाग में एक और शैतानी ख्याल आया। जिससे मैं चेतन को और भी क़रीब से उसकी बहन की नंगी मुलायम टाँगें दिखा सकती थी। मैंने अपने पास ही सोफे पर रखी हुई मूव नीचे फर्श पर गिरा दी। थोड़ी देर के बाद मैंने चेतन को आवाज़ दी- सुनो.. जरा मुझे मूव नीचे से उठा कर दें..
मैंने यह बात बिना चेतन की तरफ देखते हुए कही.. और वो ऐसे चौंका जैसे किसी ख्वाब से जगा हो..
फिर वो हमारी तरफ बढ़ा। इतनी देर में मैंने डॉली की दूसरी टाँग भी नंगी कर दी थी और उसको भी मैं मजे से सहला रही थी। डॉली को जैसे अब दर्द से कुछ सुकून मिल रहा था.. जिसकी वजह से वो आँखें मूंदे लेटी हुई थी।
चेतन मेरे क़रीब आया और नीचे फर्श पर से मूव उठा कर मेरी तरफ बढ़ाई लेकिन मैंने अपनी स्कीम की मुताबिक़ बिना उसकी तरफ देखते हुए कहा- थोड़ी सी यहाँ पर लगा दो..
मैंने डॉली की दूसरी टांग की तरफ इशारा करते हुए उससे कहा.. दिल ही दिल में मैं मुस्करा रही थी और देखना चाहती थी कि अपनी बहन की नंगी टाँग के इतने क़रीब होते वक्त चेतन का क्या रिएक्शन होता है।
दूसरी तरफ मासूम डॉली आँखें बंद करके चुपचाप लेटी हुई थी… उसे नहीं अंदाज़ा था कि उसकी भाभी क्या गेम खेल रही है और उसका अपना सगा बड़ा भाई किस नज़र से उसके नंगे जिस्म को देख रहा है..
आहिस्ता से चेतन ने हाथ बढ़ाया और डॉली की एक नंगी टाँग के ऊपर से हाथ गुज़ार कर दूसरी तरफ वाली टाँग पर मूव लगाने लगा। मेरी नज़र उसके हाथ पर ही थी.. जिसमें मुझे हल्की-हल्की कंपकंपाहट महसूस हो रही थी। 
दूसरी टाँग की तरफ हाथ ले जाते हुए उसका हाथ डॉली की पहली टाँग को टच करने लगा। मैंने आहिस्ता से उसकी चेहरे की तरफ देखा.. तो उसका चेहरा लाल हो रहा था और नजरें तो जैसे अपनी बहन की मखमली गोरी-गोरी नंगी टाँगों से चिपकी ही पड़ी थीं। 
मूव लगा कर चेतन ने हाथ पीछे हटाया और मूव को टेबल पर रख कर वापिस दूसरे सोफे पर जा कर बैठ गया और टीवी देखने की एक्टिंग करने लगा। जबकी उसकी नज़र अब भी चोरी-छिपे डॉली की नंगी टाँगों को ही देख रही थीं।
थोड़ी देर चुप रहने की बाद चेतन बोला- आख़िर तुमको हुआ क्या था.. जो नीचे ऐसी गिर पड़ीं?
डॉली बोली- भैया वो मेरा पैर पायेंचे में फँस गया.. तो गिर गई..
मुझे तो जैसे मौका ही मिल गया.. मैंने फ़ौरन ही कहा- गिरना ही पड़ेगा ना तुमको.. जो इतने पुरानी फैशन की खुले-खुले पायंचों वाली सलवारें पहनती हो। मैंने कितनी बार कहा है कि माहौल और फैशन के मुताबिक़ ड्रेसिंग किया करो।
मैंने उसे प्यार से डाँटते हुए कहा।
चेतन भी बोला- हाँ.. ठीक ही तो कह रही है तुम्हारी भाभी.. वैसे यह तुम्हारा ही काम है ना.. कि तुम इसे समझाओ कि शहर में कैसे रहना होता है..
मैं- मेरे पर क्यों गुस्सा होते हो.. पूछ लो इससे.. कितनी बार कहा है इसे.. कि मेरी तरह की ड्रेसिंग किया करो.. लेकिन यह नहीं मानती है.. यह तुमसे डरती है.. कि पता नहीं भैया बुरा न मान जाएं।
चेतन- लो.. इसमें मेरे बुरा मानने वाली कौन सी बात है.. आख़िर वक़्त कि मुताबिक़.. एक हद में रह कर.. तो चलना ही होता है ना..
मैं- यही तो मैं इसको समझाती हूँ कि देखो मैं भी तो लेटेस्ट कपड़े पहनती हूँ ना.. तो क्या कभी तुम्हारी भाई ने मुझे रोका है.. या कभी बाहर कुछ ऐसा-वैसा हुआ है.. जो तुम डरती हो?
डॉली शरमाते हुए बोली- अच्छा भाभी अब बस भी करो न.. क्यों भैया के सामने मेरी वाट लगाने में लगी हुई हैं।
डॉली की इस बात पर मैं और चेतन दोनों हँसने लगे। मैं महसूस कर चुकी थी कि चेतन को अपनी सग़ी बहन की नंगी टाँगों को देख कर बहुत अच्छा लगा था। 
मैं सोच रही थी कि अगर डॉली भी मेरे जैसे ही कपड़े पहने.. तो चेतन की तो फट ही जाएगी और फिर मैं देखूँगी कि अपनी बहन पर नज़र डालने से कैसे वो खुद को रोकता है। मेरे दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़ शरारत थी कि मैं एक भाई को उसकी बहन की जरिए से टीज़ करूँ और देखूँ कि आख़िर एक भाई कितना ज़ब्त कर सकता है.. या अपनी बहन कि जिस्म को किस हद तक देख सकता है।
कुछ दिन की लिए डॉली को अपनी कॉलेज से छुट्टी करनी पड़ी और इन दिनों वो घर पर ही रहती थी। 
मैं उसकी रोज़ाना मूव लगा कर मालिश करती थी.. लेकिन हमेशा ही मेरी यही कोशिश होती थी कि मैं उसकी टाँगों की मालिश उसके भाई के सामने ही करूँ.. ताकि उसे अपनी बहन के जिस्म से आँखें सेंकने का मौका मिल सके। उधर चेतन का भी यही हाल था कि जब भी मैं डॉली को क्रीम लगाती.. तो वो आस-पास ही भटकता रहता था।
इसी दौरान मैंने डॉली को एक जीन्स लाकर दी और उसने बहुत ही शरमाते हुए एक लोंग शर्ट के साथ पहनी।
मैंने भी उसको टी-शर्ट पहनने पर जोर नहीं दिया कि चलो शुरू तो कराया.. तो एक दिन इसको सेक्सी कपड़े भी पहना दूँगी। 
जब चेतन जॉब से वापिस आया तो डॉली उस जीन्स में बाहर ही नहीं आ रही थी। बड़ी मुश्किल से वो बाहर आई तो उसका चेहरा शर्म से सुर्ख हो रहा था और वो नजरें ऊपर नहीं कर पा रही थी। 
हालांकि उसकी शर्ट ने उसकी पूरी जीन्स को छुपाया हुआ था और उसकी जीन्स सिर्फ़ घुटनों से नीचे से ही नज़र आ रही थी।
वो बाहर आई तो वो अपनी कमीज़ को अपने जिस्म के साथ चिपका रही थी और नीचे को खींच रही थी.. जैसे कि अपनी जीन्स को छुपाना चाहती हो।
चेतन ने उसे देखा तो पहली तो हैरान हुआ और फिर जोर-जोर से हँसने लगा.. जिसे देख कर मैं भी हँसने लगी।
उधर डॉली का और भी बुरा हाल हो गया.. शर्म से उसका चेहरा रोने वाला हो रहा था।
मैं- देख लो चेतन.. आज बड़ी मुश्किल से तुम्हारी इस चहेती बैकवर्ड माइंडेड बहन को जीन्स पहनाई है और इसकी तो शरम ही नहीं जा रही है.. देखो तो सही क्या कोई खराबी है इसमें.. जो इसने पहनी हुई है?
चेतन ने डॉली की तरफ ऊपर से नीचे तक देखा और बोला- नहीं यार.. बिल्कुल परफेक्ट है। डॉली तुम तो ऐसे ही घबरा रही हो.. अरे अनीता तुमने इसे कोई शर्ट ले कर नहीं दी क्या?
मैं- यार.. मैंने इसके लिए वो भी ले देनी थी.. लेकिन इसने साफ़-साफ़ इन्कार कर दिया कि मैं टी-शर्ट नहीं पहनूंगी… इसलिए मैं नहीं ले कर आई।
चेतन- चलो फिर किसी दिन ला देना… जस्ट रिलेक्स करो डॉली.. क्यों परेशान हो रही हो.. यह तो आजकल सब लड़कियाँ कॉलेज में और बाहर भी पहनती हैं।
फिर हम सबने खाना खाया और अपने-अपने कमरों में आ गए। 
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05-24-2019, 11:52 AM,
#5
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
धीरे-धीरे डॉली को जीन्स की आदत होने लगी और वो फ्रीली घर में जीन्स पहनने लगी.. लेकिन अभी भी उसने कभी भी टी-शर्ट नहीं पहनी थी।
अब मेरा अगला कदम उसको लेगिंग पहनाने का था.. जिसमें उसके जिस्म के निचले हिस्से की पूरी गोलाइयाँ उसके भाई की नज़रों के सामने आ जातीं।
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काफ़ी बार मैंने उससे कहा.. लेकिन वो शर्मा जाती थी और मेरी बात मानने को तैयार नहीं होती थी।
एक रोज़ मैं और डॉली दोनों घर पर अकेले थे। चेतन के जाने के बाद जब हम काम से फारिग हुए.. तो मेरे दिमाग में एक ख्याल आया। मैंने अपनी एक ब्लैक कलर की लेगिंग निकाली और डॉली को अपने कमरे में बुलाया। 
वो आई तो मैंने उससे कहा- डॉली देखो इस वक़्त तो तुम्हारे भैया भी घर पर नहीं हैं.. तो तुम एक बार मुझे यह लेगिंग पहन कर तो दिखाओ।
डॉली शरम से सुर्ख हो गई और इन्कार करने लगी.. लेकिन मैंने भी आज.. उसकी बात ना मानने का पक्का इरादा कर लिया हुआ था।
जब मैं उससे इसरार करती रही तो फिर वो मानी और मेरी ब्लैक लेगिंग लेकर बाथरूम में चली गई।
कुछ देर के बाद डॉली अपनी सलवार उतार कर मेरी वाली ब्लैक टाइट लेगिंग पहन कर बाथरूम से बाहर आई और बाथरूम के दरवाजे के पास ही खड़ी हो गई। 
उस देख कर मेरी आँखें चमक उठीं.. वो टाइट ब्लैक लेगिंग डॉली की खूबसूरत और सुडौल टाँगों पर बेहद प्यारी और सेक्सी लग रही थी।
उसकी टाँगों का हर एक कर्व उसमें बहुत ही प्यारा और अट्रॅक्टिव लग रहा था। डॉली मुझसे दूर अपनी नजरें झुका कर खड़ी हुई थी और उसके चेहरे पर एक शर्मीली सी मुस्कान थी।
मैंने उसे अपने पास आने को कहा.. वो आहिस्ता-आहिस्ता चलती हुई मेरी पास आई.. तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बिस्तर पर बैठा लिया।
ऊपर से उसने अभी भी अपनी लंबी सी कमीज़ पहनी हुई थी। मैंने अपने पास बैठा कर अपना हाथ उसकी टाँग के ऊपर रखा और आहिस्ता-आहिस्ता सहलाने लगी और बोली- देखो इस लेगिंग में तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो।
डॉली शर्मा कर बोली- लेकिन भाभी इस लेग्गी में तो पूरे का पूरा जिस्म जैसे नंगा ही लग रहा है।
मैं मुस्करा कर बोली- अरे पगली ऐसा क्यों सोचती हो तुम.. यह तो बन्दी की खुद महसूस करने की बात है ना.. अब मुझे देखो.. मैं तो यह पहन कर बाहर भी चली जाती हूँ और तुम्हारे भैया कोई ऐतराज़ भी नहीं करते हैं।
डॉली मेरी तरफ देख कर शरमाती हुई बोली- भाभी आपने तो हद ही की है.. भला इतनी खुले गले के कपड़े भी कोई पहनता है क्या?
डॉली ने मेरे डीप और लो-नेक गले की तरफ इशारा करते हुए कहा.. जिसमें से मेरी चूचियों का ऊपरी हिस्सा और क्लीवेज साफ़-साफ़ नज़र आ रहा था।
मैंने मुस्करा कर अपनी गले की तरफ देखा और अपना हाथ डॉली की टाँग पर ऊपर की तरफ.. जो उसकी टाइट लेग्गी में साफ़ नज़र आ रही थी.. पर ले जाते हुए बोली- अरे यह सब तेरे भैया की ही फरमाइश तो है.. वो ही मुझे घर में ऐसी सेक्सी हालत में ही देखना चाहते हैं.. तो फिर मैं क्या कर सकती हूँ।
मेरी बात पर डॉली हँसने लगी।
डॉली- भाभी क्या आपको ऐसे कपड़ों में कुछ गलत फील नहीं होता क्या.. या कोई परेशानी तो नहीं होती.. जब बाहर लोग आपको देखते हैं तब?
मैं मुस्कुराई और बोली- अरे बस शुरू-शुरू में होता था.. लेकिन अब मैं आदी हो गई हूँ। अब तो हर लड़की ही ऐसा ही ड्रेस पहनती है.. फैशन ही इस चीज़ का है.. तो अब क्या कर सकते हैं.. अगर फैशन के साथ ना चली.. तो ‘पेण्डू’ ही लगूँगी ना.. इसलिए अब मुझे दूसरों की गंदी नजरें भी बुरी नहीं लगतीं.. बल्कि सच पूछो तो मुझे मज़ा भी आता है.. जब कोई मेरे जिस्म को ऐसी नजरों से देख रहा हो.. पता है इससे औरत को संतुष्टि होती है कि उसका जिस्म इतना अट्रॅक्टिव है कि वो मर्दों की नज़रों को अपनी तरफ खींच सकी।
डॉली मेरी बातें हैरान होकर सुन रही थी लेकिन आज उसका दिमाग कुछ-कुछ.. जैसे मेरी बातों को समझ भी रहा था।
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05-24-2019, 11:52 AM,
#6
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
मैंने उसे तसल्ली से समझाया- देख तू मेरी बहन की तरह है.. तो मुझे ही तेरा ख्याल रखना है ना.. कि तू वक़्त के साथ-साथ चले.. ताकि कल को तेरा भी किसी अच्छी जगह पर रिश्ता हो जाए और तू अपने पति के साथ अपनी ज़िंदगी एंजाय कर सके। अरे यह जो थोड़ा बहुत जिस्म को शो करना होता है ना.. यह तो बस ऐसे ही है और अब तो एक रुटीन ही बन गया है.. इस बात को कोई भी माइंड नहीं करता।
डॉली- लेकिन भाभी वो भैया?
मैं- तू क्या समझती है कि यह जो लड़कियाँ बाहर इतनी टाइट जीन्स और लेग्गी पहन कर फिरती हैं.. तो क्या उनके घर में उनके बाप या भाई नहीं होते क्या? अरे पगली सब ही होते हैं.. लेकिन वो लोग अब इस चीज़ को माइंड नहीं करते और वक़्त कि मुताबिक़ चलते हैं.. ऐसे ही तू भी बस अपने भाई से डरती रहती है.. मैं तुमको यकीन दिलाती हूँ कि वो कुछ नहीं कहेंगे तुझे. और अगर कोई ऐसी-वैसी बात की.. तो मैं खुद उनको सम्भाल लूँगी.. और फिर अपना घर तो इस सबकी प्रैक्टिस करने के लिए सबसे अच्छी जगह है..
डॉली शायद मेरी बात समझ गई थी.. मैंने उससे कहा- अभी आज तू मेरी वाली यही लेग्गी पहन ले.. फिर मैं तुझे तेरी साइज़ की और भी प्यारी प्यारी सी नई ला दूँगी।
डॉली शर्मा गई लेकिन कुछ बोली नहीं। फिर मैं उसे लेकर रसोई में आ गई और हम लोग खाना तैयार करने लगे.. क्योंकि चेतन के आने का टाइम भी हो रहा था। काम करते हुए डॉली थोड़ा घबरा भी रही थी.. एक-दो बार उसने मुझसे कहा भी कि भाभी मैं चेंज करना चाहती हूँ.. लेकिन मैंने बड़ी मुश्किल से उसे मना ही लिया कि वो आज अपने भाई के सामने भी यह लेग्गी पहनेगी।
जैसे ही डोर पर चेतन की बेल बजी.. तो डॉली ने मुझसे कहा- जाओ दरवाज़ा आप ही खोलो। 
खुद वो रसोई मैं ही रुक गई। मैंने मुस्करा कर उसे देखा और फिर दरवाजा खोलने बाहर आ गई। मैंने दरवाज़ा खोल कर जैसे ही चेतन अपनी बाइक पार्क कर रहा था.. तो मैंने उसे बताया।
मैं- चेतन.. देखो आज डॉली ने बहुत मुश्किल से हिम्मत करके लेग्गी पहनी है.. तुम से बहुत डर रही थी.. बस तुम को उसकी तरफ कोई तवज्जो नहीं देनी और ना ही उससे कुछ कहना.. ना कोई कमेंट देना है.. और उसकी तरफ ऐसे ही नॉर्मल रहना है.. जैसे कि रोज़ उससे व्यवहार करते हो.. ताकि वो थोड़ी सामान्य हो जाए और आहिस्ता-आहिस्ता इस नई ड्रेसिंग की आदी हो सके। अगर तुमने कोई ऐसी-वैसी बात की.. तो फिर वो दोबारा से अपनी पहली वाली जिंदगी में चली जाएगी।
मुझे पता था कि चेतन के लिए अपनी बहन की टाँगों को टाइट लेगिंग में देखने से खुद को रोकना बहुत मुश्किल हो जाएगा.. लेकिन मैं तो खुद ही उसे थोड़ा और तड़पाना चाहती थी और दूसरी बात यह भी है कि सच में मैं डॉली को थोड़ा कंफर्टबल भी करना चाहती थी ताकि आइन्दा भी उसे ऐसे और इससे भी थोड़ा ज्यादा ओपन कपड़े पहनने में आसानी हो सके। 
बहरहाल चेतन ने मेरी बात मान ली और बोला- अच्छा ठीक है।
अन्दर आ कर चेतन ने अपने कमरे में जाकर चेंज किया। फिर वो फ्रेश होकर वापिस आया और लंच करने कि लिए बैठ गया। 
मैं रसोई में गई और कुछ बर्तन ले आई और फिर डॉली को भी खाना लेकर आने का कहा। मैं चेतन के पास बैठ गई और डॉली का वेट करने लगी।
थोड़ी देर के बाद डॉली खाने की ट्रे लेकर आई.. तो उसका चेहरा शर्म से सुर्ख हो रहा था.. लेकिन जैसे ही वो बाहर आई तो चेतन ने उसकी तरफ से अपनी नज़र हटा लीं और अख़बार देखने लगा। 
फिर डॉली ने खाना टेबल पर रखा और मेरे साथ ही बैठ गई। हम तीनों ने हमेशा की तरह खाना खाना शुरू कर दिया और इधर-उधर की बातें करने लगे।
चेतन डॉली से उसकी पढ़ाई और कॉलेज की बातें करने लगा। 
आहिस्ता-आहिस्ता डॉली भी नॉर्मल होने लगी। उसके चेहरे पर जो परेशानी थी.. वो खत्म होने लगी और वो काफ़ी रिलेक्स हो गई.. क्योंकि उसे अहसास हो गया था कि उसका भाई उससे कुछ नहीं कह रहा है।
सब कुछ वैसा ही हो रहा था.. जैसे कि यह सब एक रुटीन में ही हो।
खाने के दौरान मैंने एक-दो बार डॉली को पानी और कुछ और लाने के लिए रसोई में भी भेजा.. ताकि चेतन का रिस्पॉन्स देख सकूँ और वो भी अपनी बहन को पहली बार चुस्त लेग्गी में देख सके।
हुआ भी ऐसा ही कि जैसे ही डॉली उठ कर गई.. तो फ़ौरन ही चेतन की नजरें उसकी तरफ चली गईं और वो अपनी बहन की लेग्गी में नज़र आती हुई टाँगों को देखने लगा।
मैं दिल ही दिल में मुस्कुराई और बोली- अच्छी लग रही है ना.. इस पर लेग्गी.. यह तो मैंने उसे अभी अपनी पहनाई है.. अब एक-आध दिन में मैं उसे उसकी साइज़ की ही ला दूँगी।
चेतन थोड़ा सा चौंका और बोला- हाँ ला देना उसे भी..
वो ज़ाहिर यह कर रहा था कि उसे इसमें कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है कि उसकी बहन ने क्या पहना हुआ है.. लेकिन मैं जानती थी कि उसे भी अपनी बहन को ऐसी ड्रेस में देखने का कितना शौक़ है।
मैंने सारी बातें अपनी और चेतन की कल्पनाओं में ही रहने दीं और खाना खाने लगी.. तभी डॉली भी वापिस आ गई।
खाना खाकर मैं और चेतन अपने कमरे में आ गए और डॉली अपने कमरे में चली गई।
शाम को हम कमरे से बाहर आए तो डॉली चाय बना चुकी हुई थी। वो चाय ले आई और हम लोग टीवी देखते हुए चाय पीने लगे। एक चीज़ देख कर मुझे खुशी हुई कि डॉली ने लेग्गी चेंज नहीं की थी और अभी भी उसी लेग्गी में थी। शायद अब वो कंफर्टबल हो गई थी कि इस ड्रेस को पहनने में भी कोई मसला नहीं है। 
जब वो टीवी देख रही थी तो उसकी शर्ट भी बेख़याली में उसकी जाँघों तक आ गई थी और मैं नोट कर रही थी कि चेतन की नज़र भी बार-बार उसकी लेग्गी की तरफ ही जा रही थी.. और वो उसकी टाँगों और जाँघों को देखता जाता था।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा रही थी कि कैसे एक भाई अपनी बहन के जिस्म को ताक रहा है और इस चीज़ को देख कर मेरे अन्दर एक अजीब सी लज़्ज़त की लहरें दौड़ रही थीं। 
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05-24-2019, 11:52 AM,
#7
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
मैं इस चीज़ को इसी तरह आहिस्ता-आहिस्ता और भी आगे बढ़ाना चाहती थी। मैं देखना चाहती थी कि एक मर्द की लस्ट और हवस दूसरी औरतों की लिए तो होती ही है.. तो अपनी सग़ी बहन के लिए किस हद तक जा सकती है।
कुछ दिन में डॉली अब घर में लेग्गी और जीन्स पहनने की आदी हो गई और बहुत रिलेक्स होकर घर में डोलती फिरती थी। उसके भाई चेतन की तो मजे हो गए थे.. वो अपनी बहन और मुझसे नज़र बचा कर वो डॉली की स्मार्ट टाँगों को देखता रहता था। 
मैंने डॉली को 3-4 लैगीज उसकी साइज़ की ला दी थीं.. जिनमें से एक स्किन कलर की थी.. एक ब्लैक एक रेड और एक वाइट थी। 
जब डॉली ने अपनी साइज़ की लेग्गी पहनी.. तो वो उस कि जिस्म पर और भी फिट आई और उसमें वो और भी सेक्सी लग रही थी। लेकिन मैंने उसे कुछ भी अहसास नहीं होने दिया। पहले दिन के बाद से अब तक कभी भी मैंने चेतन से दोबारा इस टॉपिक पर बात नहीं की थी और ना ही उसने कोई बात की.. बस वो छुप कर सब कुछ देखता रहता और अपनी बहन के जिस्म के नज़ारे एंजाय करता था।
एक रोज़ मैंने डॉली को अपनी एक टी-शर्ट निकाल कर दी कि इसे पहन लो। बहुत इसरार करने की बाद जब उसने वो शर्ट पहनी.. तो वो उसको जरा ढीली थी और उसके चूतड़ों को भी कवर कर रही थी। लेकिन उससे नीचे उसकी जाँघों को बिल्कुल भी नहीं ढक रही थी।
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उसने मेरे कहने पर नीचे लेग्गी पहन ली, उसकी चुस्त लैगी में फंसे हुए उसके चूतड़ों को तो मेरी शर्ट ने कवर कर लिया थी.. लेकिन उससे नीचे उसकी जाँघों और टाँगें और भी सेक्सी और अट्रॅक्टिव लग रही थीं।
उसे देख कर मैंने उसकी तारीफ की और कहा- डॉली अब तुमको मैं तुम्हारी साइज़ की फिटिंग वाली टी-शर्ट लाकर दूँगी.. फिर मेरी ननद रानी और भी प्यारी लगेगी।
मैंने जानबूझ कर सेक्सी की बजाय प्यारी का लफ्ज़ इस्तेमाल किया था.. ताकि उसे बुरा ना लगे और मेरी बुलबुल मेरे हाथों से ना निकल जाए। 
आज मेरी टी-शर्ट पहन कर उसने अपने भाई का भी जिक्र नहीं किया था.. क्योंकि उसे भी अब पता चल गया था कि उसके भैया भी उसकी ड्रेसिंग पर कोई ऐतराज़ नहीं करते हैं। इसी सोच कि चलते आज उसने लेग्गी के साथ टी-शर्ट पहन कर एक काफ़ी बोल्ड क़दम उठा लिया था।
जब चेतन घर आया.. तो आज जब उसने अपनी बहन को देखा.. तो उसका मुँह खुला का खुला ही रह गया।
जब वो रसोई में काम करती हुई अपनी बहन को देख रहा था.. मैं बेडरूम से छुप कर देखते हुए उसके चेहरे के भावों को देख रही थी।
कुछ देर तक तो वो ऐसे ही चुपचाप देखता रहा.. फिर अचानक ही इधर-उधर मुझे देखने लगा.. जैसे कि उसे पकड़े जाने का डर हो।
मैंने खुद को पीछे हटा लिया ताकि उसे अपने गलती का अहसास या शर्मिंदगी ना हो।
खाने के दौरान भी डॉली थोड़ी सी अनकंफर्टबल थी.. लेकिन चेतन भी चुप-चुप सा था और चोरी-चोरी डॉली की टाँगों की तरफ ही देख रहा था। 
शाम को जब हम लोग टीवी देख रहे थे.. तो भी चेतन की नजरें अपनी बहन के जिस्म के निचले हिस्से पर ही भटक रही थीं.. क्योंकि आज उसके जिस्म का पहले से ज्यादा हिस्सा नज़र आ रहा था और उसी से अंदाज़ा हो रहा था कि उसकी बहन की जाँघों की शेप कितनी प्यारी है। 
चेतन अपनी बहन के जिस्म को देख कर मजे ले रहा था और मैं चेतन की हालत को देख कर एंजाय कर रही थी।
मैं इस अलग किस्म की हवस का नज़ारा कर रही थी। 
अब तो जब भी चेतन इस तरह अपनी बहन के जिस्म को देख रहा होता था.. तो मेरे अन्दर भी तड़फ और गर्मी सी पैदा होने लगती थी।
चेतन की नज़र अपनी बहन के जिस्म पर होती थीं.. लेकिन गीलापन मेरी चूत कि अन्दर होने लगता था।
अब मैंने डॉली को नए सलवार कमीज़ भी सिलवा कर दिए। उसकी शर्ट्स अब लेटेस्ट फैशन की मुताबिक़ थीं.. जो कि शॉर्ट लेंग्थ और बहुत ही टाइट सिली हुई थीं।
उसके सीने की उभारों पर बहुत टाइट फिटिंग थीं.. जिसकी वजह से उसकी चूचियां बहुत ज्यादा उभर गई थीं।
कमर पर पीछे ज़िप होने की वजह से उसकी शर्ट उसके जिस्म पर बहुत ही फँस कर आती थी. और शर्ट की लम्बाई भी सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी हाफ जाँघों तक होती थी।
मैंने उसकी रुटीन से हट कर उसके गले को भी थोड़ा डीप और लो नेक करवा दिया था। गला ज्यादा डीप नहीं था.. लेकिन उसका खूबसूरत गोरा-गोरा सीना नंगा नज़र आता था.. लेकिन क्लीवेज या चूचियां नज़र नहीं आती थीं। 
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05-24-2019, 11:53 AM,
#8
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
ज़ाहिर है कि अभी वो इतनी बोल्ड नहीं हुई थी कि अपनी चूचियों को मेरी तरह से शो करती.. लेकिन यह बात ज़रूर थी कि जब वो झुकती थी.. तो अनायास ही उसकी चूचियां और क्लीवेज का कुछ हिस्सा ज़रूर नज़र आ सकता था।
मुझे तो नज़र आ भी जाता था।
अब अक्सर मैं उसे घर में टाइट कुरती और लेग्गी ही पहनाती थी.. जिसमें उसका जिस्म और भी खिल उठता था। उसका खूबसूरत और सुडौल जिस्म बहुत ज्यादा उभर कर आ जाता था। नीचे उसकी जाँघें और चूतड़ चिपकी हुई लेग्गी में मानो नंगे ही नज़र आ रहे होते और ऊपर से उसके कुरते में फंसे हुए उसके चूचे भी बहुत ही खूबसूरत लगते थे।
आहिस्ता-आहिस्ता मेरी तरह ही उसने भी घर में दुपट्टा लेना छोड़ दिया था। इस तरह की टाइट ड्रेस में अपनी बहन को देख कर तो चेतन की ईद हो जाती थी और उसकी नजरें अपनी बहन के जिस्म पर से हटती ही नहीं थीं।
मुझे महसूस होने लगा था कि आहिस्ता-आहिस्ता डॉली को भी पता चल रहा है कि उसका भाई उसके जिस्म को देखता है.. लेकिन कोई ऐतराज़ नहीं करता। 
तो उसे भी काफ़ी हद तक रिलेक्स फील होता और वो भी कोई ऐतराज़ ना करती कि भाई देख रहा है तो क्यों देख रहा है। 
मैंने यह भी महसूस किया था कि चेतन अपनी बहन के नीचे झुकने का मुंतजिर रहता था.. चाहे वो उसकी आगे को हों या पीछे से.. क्योंकि उसे इस तरह थोड़ी बहुत अपनी बहन की चूचियों की झलक भी नज़र आ जातीं थी।
एक रोज़ ऐसा हुआ कि कॉलेज से आकर डॉली ने एक सफ़ेद रंग की कुरती और स्किन कलर की लेगिंग पहन ली। चेतन अभी तक नहीं आया था..
मौसम भी कुछ खराब लग रहा था और इसलिए डॉली कॉलेज से खुद ही पहले ही आ गई थी।
मैंने चेतन को भी कॉल कर दी थी कि डॉली घर आ गई है.. तो वो भी आ जाएं।
तो चेतन आज ड्यूटी ऑफ करके सीधा ही घर आ गया।
डॉली ने जो सफ़ेद कुरती पहनी थी उसके नीचे उसने काली ब्रेजियर पहन ली थी। 
गर्मी का मौसम होने की वजह से कुरती भी बहुत ही पतले कपड़े की थी.. लेकिन उसमें से जिस्म सीधे तौर पर नज़र नहीं आता था.. बस हल्की सी झलक ही दिखती थी कि नीचे का बदन कैसा गोरा है। 
उसकी बैक और फ्रंट पर उसकी ब्लैक ब्रेजियर की स्ट्रेप्स भी हल्की-हल्की नज़र आती थीं। उसकी कुरती की लम्बाई भी ज्यादा नहीं थी.. हस्ब ए मामूल सिर्फ़ उसकी हाफ जाँघों तक ही थी। नीचे स्किन कलर की लेग्गी में उसकी खूबसूरत टांगें और जाँघें बहुत ही प्यारी लग रही थीं और सेक्सी भी..
अपना ड्रेस चेंज करके डॉली हस्ब ए मामूल मेरी साथ रसोई में आकर लग गई। अब मैं उससे ज्यादा ड्रेसिंग की बारे में बात नहीं करती थी.. ताकि वो ईज़ी फील करे और किसी प्रेशर या ज़बरदस्ती की वजह से कोई भी काम ना करे।
यही वजह थी कि कॉलेज के माहौल और मेरे सपोर्ट की वजह से वो काफ़ी हद तक खुल चुकी थी।
सुबह सबके जाने के बाद मैंने कपड़े धो कर बाहर बरामदे में सूखने के लिए लटका दिए थे। बारिश का मौसम हो रहा था.. मुझे ख्याल आया कि मैं कपड़े उतार लाऊँ.. कहीं और ना भीग जाएं। 
जैसे ही मैं डॉली को बाहर से कपड़े उतार कर लाने का कहने लगी.. तो एकदम एक शैतानी ख्याल मेरे दिमाग में कूदा और मैं हौले से मुस्करा कर चुप होकर खामोश ही रह गई।
वो ही हुआ कि थोड़ी देर में बारिश शुरू हो गई.. लेकिन डॉली को नहीं पता था कि बाहर कपड़े सूखने के लिए लटक रहे हैं.. इसलिए उसे उनको उठाने का ख्याल नहीं था.. बारिश थी भी काफ़ी तेज.. थोड़ी देर में ही घंटी बजी.. तो मैंने फ़ौरन ही जा कर गेट खोला और चेतन अपनी बाइक समेत अन्दर आ गया। बारिश की वजह से चेतन पूरी तरह से भीग चुका था। उसकी जीन्स और शर्ट भीग चुकी थी।
वो बोला- आज तो बारिश ने भिगो ही दिया है।
मैं भी मुस्कराई और हम दोनों अन्दर आ गए।
चेतन ने अपनी शर्ट उतारी और एक तरफ रख दी और कुर्सी पर बैठ गया।
अब मैंने डॉली को आवाज़ दी- पानी लाओ अपने भैया के लिए।
वो फ़ौरन ही रसोई से पानी का गिलास भर कर ले आई। 
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05-24-2019, 11:53 AM,
#9
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
जैसे ही चेतन की नज़र अपनी बहन की सेक्सी ड्रेस पर पड़ी.. तो एक लम्हे के लिए तो वो चकित ही हो गया.. लेकिन फिर उसने खुद को सम्भाला और फटाफट पानी का गिलास डॉली से पकड़ कर पीने लगा। 
डॉली वापिस रसोई की तरफ बढ़ी.. तो पानी पीते हुए चेतन की नजरें अपनी बहन के मटकते चूतड़ों और जाँघों पर ही थीं।
मैं हौले-हौले मुस्करा रही थी।
जैसे ही डॉली रसोई में जाने लगी.. तो मैंने उसे आवाज़ दे कर रोका और कहा- डॉली मुझे याद आया.. मैंने तो कपड़े धोकर बाहर डाले हुए हैं.. जल्दी से जाओ और इनको उतार लाओ.. वर्ना सारे कि सारे भीग जाएंगे। 
‘जी भाभी..’ कह कर डॉली बाहर सहन की तरफ चली गई और अब मैं अपनी स्कीम के मुताबिक़ हो रहे ड्रामे के अगले हिस्से की मुंतजिर थी। 
बाहर तेज बारिश हो रही थी.. गर्मी कि इस मौसम में मेरी ननद डॉली अपनी पतली सी कुरती और लेग्गी पहने हुई बाहर से कपड़े उतार रही थी और उसका भाई अन्दर बैठा हुआ था और शायद वो भी मुंतजिर था कि अब उसके सामने क्या सीन आने वाला है।
क़रीब 5 मिनट बाद डॉली कमरे के अन्दर आई तो उफ्फ़.. क्या हॉट मंज़र था.. कपड़े तो वो उतार लाई थी.. लेकिन उसके अपने कपड़े पूरी तरह से भीग चुके थे, सफ़ेद रंग की पतली सी कुरती बिल्कुल भीग कर उसके गोरे-गोरे जिस्म से चिपक चुकी थी, उसका गोरा गोरा बदन कुरती के नीचे से बिल्कुल साफ़ नंगा नज़र आ रहा था, उसकी चूचियों पर पहनी हुई काली रंग की ब्रेजियर भी बिल्कुल साफ़ दिखने लगी थी।
वो ब्रेजियर उसकी चूचियों से चिपक कर ऐसे दिख रही थी.. मानो उसने वो काली ब्रेजियर अपनी शर्ट के ऊपर से ही पहनी हुई हो। उसकी लेग्गी भी थी तो मोटी जर्सी कपड़े की.. मगर वो भी भीग कर और भी उसकी मोटी जाँघों और टाँगों से चिपक चुकी हुई थी।

मेरी नजरें तो उसके जिस्म पर ही चिपक गई थीं।
वो मुड़ कर एक टेबल पर कपड़े रखने लगी.. उसकी कमर हमारी तरफ थी। उसकी कमर पर उसकी ब्रेजियर की स्ट्रेप और हुक बिल्कुल साफ़ नज़र आ रहा था और उसकी कमर भी कमीज़ में से भीगी हुई साफ़ दिख रही थी।
साफ़ पता चल रहा था कि उसका जिस्म किस क़दर गोरा-चिट्टा है।
डॉली को इस हालत में देख कर मेरी हालत ऐसी हो रही थी.. तो उसके अपने सगे भाई का हाल तो और भी पतला हो रहा था। उसकी नज़रें अपनी बहन के जिस्म पर से नहीं हट रही थीं और मैंने भी बिना उसको डिस्टर्ब किए.. उसे अपनी बहन के इस तरह नंगे हो रहे जिस्म का नज़ारा करने दिया।
जैसे ही डॉली कपड़े रख कर मुड़ी तो चेतन मेरी तरफ देखने लगा और बोला- यार मुझे कोई कपड़े दो पहनने के लिए..
मैंने महसूस किया कि उसकी आवाज़ काँप रही थी।
डॉली अपने कमरे की तरफ बढ़ी तो मैंने उससे पूछा- कहाँ जा रही हो?
वो बोली- भाभी मैं डॉली चेंज करके आती हूँ.. पूरे कपड़े भीग गए हैं..
लेकिन मैं उसको इतनी आसानी से जाने दे कर उसके भाई का मज़ा खराब नहीं करना चाहती थी, मुझे उसे इसी हालत में रोके रखना था और उसे रुकने पर मजबूर करना था।
मैंने एक शर्ट पकड़ी और उससे कहा- डॉली, तुम जल्दी से अपने भैया की यह शर्ट प्रेस कर दो.. मैं सालन देख लेती हूँ.. चूल्हे पर पड़ा है.. कब से नहीं देखा.. कहीं जल न जाए।
डॉली इन्कार करना चाहती थी.. लेकिन फिर अपनी आदत की चलते चुप ही रही। उसने एक नज़र अपने भैया पर डाली.. जो कि वहीं चेयर पर बैठा.. अब एक मैगजीन देख रहा था.. और फिर डॉली टीवी लाउंज के एक कोने में पड़े हुए इस्तती स्टैंड की तरफ बढ़ गई।
मैं रसोई में आ गई ताकि चेतन भी खुल कर अपनी बहन के जिस्म का दीदार कर सके। 
जहाँ डॉली खड़ी होकर शर्ट प्रेस कर रही थी.. वहाँ पर उसकी पीठ चेतन की तरफ थी।
मैं छुप कर दोनों को देख सकती थी.. मैंने बाहर झाँका तो देखा कि चेतन की नज़रें अपनी बहन के जिस्म पर ही थीं और उसका एक हाथ अपने लंड को जीन्स के ऊपर से दबा रहा था। 
मैं समझ गई कि अपनी बहन के जिस्म को इस हालत में देख कर वो अपने लंड को खड़ा होने से नहीं रोक पा रहा है।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा दी..
इतने में चेतन उठा और एक पजामा उठा कर डॉली की तरफ बढ़ा। मैं समझ गई कि अब वो और क़रीब से अपनी बहन के जिस्म को देखना चाहता है।
पास जाकर उसने वो पजामा भी इस्तरी स्टैंड पर रखा और बोला- डॉली इसे भी प्रेस कर दो..
यह कहते हुए उसकी नजरें अपनी बहन की चूचियों पर थीं.. जो कि गीली सफ़ेद कुरती में काली ब्रेजियर में साफ़ नज़र आ रही थीं। 
एक भरपूर नज़र डाल कर चेतन वापिस अपनी जगह पर आकर बैठ गया और जब तक डॉली कपड़े प्रेस करती रही.. वो उसके जिस्म को ही देखता रहा।
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05-24-2019, 11:53 AM,
#10
RE: Antarvasna मेरे पति और मेरी ननद
जैसे ही डॉली ने कपड़े प्रेस कर लिए तो अपने भाई से बोली- भाई, ले लें.. कपड़े प्रेस हो गए हैं..
अब मुझे पता था कि वो वापिस अपने कमरे में अपनी कपड़े बदलने के लिए जाएगी.. लेकिन मैं उसे रोकना चाहती थी इसलिए जैसे ही उसने अपने कमरे की तरफ क़दम बढ़ाए.. तो मैंने उसे आवाज़ दे दी- डॉली.. जरा इधर तो आओ रसोई में थोड़ी देर के लिए..
जैसा कि मुझे पता था कि वो मेरी बात को नहीं टालेगी.. वो ही हुआ.. डॉली सीधी उसी हालत में मेरे पास रसोई में आ गई।
मैंने उसे थोड़ा सा काम बताया तो वो बोली- भाभी मुझे चेंज कर आने दें..
मैंने उसके जिस्म की तरफ एक नज़र डाली और बहुत ही बेपरवाही से बोली- अरे अब क्या चेंज करना है.. कपड़े तो सूख ही चुके हैं.. अभी कुछ ही देर में पंखे के नीचे बिल्कुल ही खुश्क हो जाने हैं.. छोड़ो कपड़ों की फिकर.. तुम जल्दी से सलाद बना लो.. तो फिर हम लोग खाना खाते हैं.. पहले ही बहुत देर हो गई है..
डॉली भी थोड़ी सी बेफिकर होकर रसोई के काम में लग गई और मैं दिल ही दिल में अपनी कामयाबी पर मुस्करा दी कि मैं आज एक भाई को उसकी बहन का नंगा जिस्म थोड़ा सा छुपी हुई हालत में दिखाने में कामयाब हो गई हूँ। 
मुझे हँसी तो चेतन पर आ रही थी कि कैसे अपनी बहन के नंगी हो रहे जिस्म को देख रहा था।
अब मुझे इस पर हैरत नहीं होती थी.. बल्कि खुशी होती थी और मज़ा भी आता था। मेरा तो बस नहीं चल रहा था कि मैं कब डॉली को उसके भाई के सामने बिल्कुल नंगी कर दूँ।
कुछ ही देर मैं हम सब लोग बैठे खाना खा रहे थे। डॉली के कपड़े सूख चुके थे.. लेकिन उसकी काली ब्रेजियर अभी भी गीली थी.. जिसकी वजह से वो अब भी साफ़ नज़र आ रही थी। अब डॉली को कोई फिकर नहीं थी.. उसे महसूस ही नहीं हो रहा था कि उसका अपना सगा भाई.. अपनी बीवी की मौजूदगी में भी.. उसकी नज़र बचा कर.. उसके जिस्म और उसकी ब्रेजियर और उसकी चूचियों को देख रहा है। 
मेरी नज़रें तो चेतन की हर हरकत पर थीं कि कैसे खाना खाते हुए.. वो अपनी बहन की चूचियों को देख रहा है।
खाना खाने के बाद मुझे गरम लोहे पर एक और वार करने का ख्याल आया और मैंने अपने इस नए आइडिया पर फ़ौरन अमल करने का इरादा कर लिया।
बारिश रुक चुकी हुई थी और बाहर हल्की-हल्की हवा चल रही थी.. जिसके वजह से मौसम बहुत ही प्यारा हो रहा था, मैंने चेतन से कहा- आज मौसम बहुत अच्छा हो रहा है.. चलो मुझे और डॉली को बाहर घुमाने लेकर चलो।
मेरी बात सुन कर डॉली भी खुशी से उछल पड़ी और बोली- हाँ भैया.. भाभी ठीक कह रही हैं.. बाहर चलते हैं।
चेतन ने एक नज़र अपनी बहन की चूचियों पर डाली और फिर प्रोग्राम ओके कर दिया और बोला- बस तैयार हो जाओ.. फिर चलते हैं। 
चेतन अपने कमरे में चला गया.. मैं और डॉली ने बर्तन समेट कर रसोई में रख कर काम ओके किया और बाहर आ गए।
मैं डॉली के साथ उसके कमरे में गई और उसे एक उसकी टाइट सी जीन्स और एक नई टी-शर्ट निकाल कर दी।
मैं बोली- आज तुम यह पहन कर चलोगी बाहर.. नहीं तो मैं तुमको लेकर भी ना जाऊँगी।
डॉली मेरी बात सुन कर मुस्कुराई और बोली- ठीक है भाभी.. जैसा आप कहो।
मैंने उसके गाल पर एक हल्का सा किस किया और बोली- शाबाश मेरी प्यारी ननद रानी.. 
फिर मैं अपने कमरे में आ गई।
मैंने भी जीन्स और कुरती पहन ली.. कुरती तो हाफ जाँघों तक ही थी और जीन्स भी टाइट थी।
चेतन भी तैयार हो चुका हुआ था।
हम दोनों तैयार होकर टीवी लाउंज में आ गए और मैं चाय बनाने लगी।
जैसे ही मैं चाय लेकर आई तो डॉली भी आ गई।
उसे देख कर तो मेरा और चेतन दोनों का मुँह खुला का खुला रह गया। 
उसकी टाइट टी-शर्ट में उसकी खूबसूरत चूचियों बहुत ज्यादा गजब ढा रही थीं उसकी चूचियाँ बहुत ही सख़्त और अकड़ी हुई और जानदार शानदार लग रही थीं।
टी-शर्ट उसकी जीन्स की शुरुआत तक ही थी और नीचे टाइट जीन्स में डॉली की गाण्ड बहुत ज्यादा उभर रही थी।
उसकी जीन्स और टी-शर्ट उसके जिस्म पर बिल्कुल फंसे हुए थे.. लेकिन वो बहुत ही प्यारी लग रही थी। 
हमने चाय पी और मैं बोली- चेतन आज तुम्हारी बहन को कोई नहीं कह सकता की यह पेण्डू है.. यह तो आज पूरी की पूरी शहरी लड़की लग रही है।
मेरी बात सुन कर डॉली शर्मा गई। फिर हम तीनों सैर के लिए घर से बाहर निकले और चेतन ने अपनी बाइक निकाल ली।
घर को लॉक करके जब चेतन ने बाइक स्टार्ट की.. तो मैंने उसके पीछे बैठने की बजाए अपने प्रोग्राम के मुताबिक़ डॉली को कहा कि वो अपने भाई के पीछे बैठे। 
डॉली को अंदाज़ा नहीं था कि मैं क्या सोच रही हूँ.. इसलिए वो चुप करके चेतन के पीछे बाइक पर बैठ गई। 
यह तो मुझे ही पता था ना कि अब डॉली का पूरा जिस्म अपने भाई के जिस्म से चिपक जाएगा और उसकी चूचियाँ पूरी तरह से चेतन की कमर से प्रेस हो जाना थीं और यही चीज़ मैं चाहती थी। 
आज मैं पहली बार चेतन को उसकी बहन के बदन का और उसकी चूचियों का स्पर्श महसूस करवाना चाहती थी।
डॉली के बैठने के बाद मैं भी उछल कर बाइक पर पीछे बैठ गई और बैठते ही मैंने डॉली को थोड़ा सा और आगे की तरफ दबा दिया।
अब मैं और डॉली दोनों ही एक ही तरफ टाँगें करके बैठे हुई थीं और डॉली का पूरे का पूरा जिस्म का अगला हिस्सा यानि उसकी चूचियाँ अपने भाई की पीठ के साथ चिपकी हुई थीं।
डॉली ने अपना एक हाथ अपने भाई के कंधे पर रखा हुआ था और दूसरा एक साइड पर था। मैंने एक हाथ डॉली की तरफ से डाल कर अपने पति चेतन की जाँघ पर रख दिया हुआ था। 
जैसे ही बाइक चली तो मैंने आहिस्ता-आहिस्ता चेतन की जाँघ को अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया। 
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