Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
Yesterday, 12:57 PM,
#81
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मेरे लंड की गर्मी पाकर उसकी चूत में संकुचन होने लगा.. मानो वो अपने दोस्त को चूम रही हो… और कह रही हो कि आओ मेरे प्यारे.. मेरे आँगन में तुम्हारा स्वागत है…

मेने एक हल्का सा धक्का देकर अपने सुपाडे को उसके छोटे से छेद में फिट कर दिया… उसकी आह… निकल गयी.. और वो उफ़फ्फ़…उफफफ्फ़… करने लगी…

मे – क्या हुआ रानी…?

वो बोली – थोड़ा टाइट है… आराम से ही डालना..

मेने कहा – फिकर मत करो.. तुम्हें कुछ नही होगा… थोड़ा सहन कर लेना बस..

ये कह कर मेने एक अच्छा सा शॉट लगाया और मेरा आधा लंड उसकी कसी हुई चूत को चीरते हुए अंदर फिट हो गया…

वो दर्द से बिल-बिला उठी… मेने उसके होंठों को चूम लिया और उसकी चुचि सहलाते हुए कहा… बस थोड़ा सा और… फिर मज़ा ही मज़ा…

वो थोड़ी देर करही, मे उसकी चुचियों की मालिश करता रहा… और हल्के हल्के से आधे लंड को अंदर बाहर किया… जब उसे कुछ अच्छा लगने लगा और मस्ती से कमर हिलाने लगी…

मौका देख मेने एक और फाइनल शॉट लगा दिया… मेरा पूरा लंड किसी खूँटे की तरह उसकी कसी हुई चूत में फिट हो गया…
आआंन्नज्….माआआ….मररर्र्ररर…गाइिईईईईईईई….रीईईई……वो दर्द से तड़पने लगी …

उसकी चूत के होंठ पूरी तरह खुल चुके थे…

मेने उसे ज़मीन से उठा कर अपने सीने से लगा लिया… होंठ चूस्ते हुए उसके सर को सहलाया.. और फिरसे लिटा कर उसके निप्पलो से खेलने लगा…

एक-दो मिनिट में ही उसका दर्द कम हुआ तो मेने अपना लंड सुपाडे तक बाहर निकाला.. देखा तो उसपर कुछ खून भी लगा हुआ था…



सही माइने में आज ही उसकी सील टूटी थी…

मेने फिरसे अपना लंड धीरे-2 अंदर किया… तो वो इस बार सिर्फ़ सिसक कर रह गयी…

कुछ देर आराम-आराम से अंदर-बाहर कर के उसकी चूत को अपने लंड के हिसाब से सेट किया… अब उसे भी मज़ा आने लगा था…

मेने अपनी स्पीड बढ़ा दी और अब घचा घच.. उसकी कसी चूत में लंड चलाने लगा… जब पूरा लंड अंदर जाता तो वो अपने पेट पर हाथ रख कर उसे महसूस करती..

जब मेने पूछा तो वो बोली – देखो ये यहाँ तक आ जाता है… आअहह…बड़ा मज़ा दे रहा है… और ज़ोर से करो…हइई….माआ… में गयी.ईयी……हूंम्म्म..

वो झड रही थी… जिससे उसके पैरों की एडीया मेरी गान्ड पर कस गयी…और वो मेरे सीने से चिपक गयी..

मे उसे उसी पोज़ में लिए हुए खड़ा हो गया… वो मेरे सीने से चिपकी हुई थी…. मेने उसकी जांघों के नीचे से अपने हाथ निकालकर उसे अपने लंड पर अधर उठा लिया….



कुछ देर उसको अपने लंड पर अपने हाथों के इशारे से मेने आराम आराम से उसे कूदाया..

वो अब फिरसे गरम होने लगी… और खुद ही अपनी कमर उच्छल-2 कर मेरे लंड पर कूदने लगी..

मेरी स्टॅमिना देख कर वो दंग रह गयी… 10 मिनिट तक में उसे हवा में लटकाए ही चोदता रहा… और अंत में मेने ज़ोर से उसे अपने सीने में कस लिया..

मेरे साथ-साथ वो भी झड़ने लगी.. और मेरे गले से चिपक गयी….

कुछ देर बाद में उसे गोद में लेकर वही घास पर बैठ गया.. वो मेरे होंठ चूमते हुए बोली – आज मेने जाना की सच्चा मर्द क्या होता है… और चुदाई कैसे होती है..

उसके बाद हम ने अपने शरीर साफ किए… वो वहीं पास में बैठ कर मूतने लगी..

उसके मूत से पहले ढेर सारी मलाई निकलती रही.. जिसे वो बड़े गौर से देखती रही..

मूतने के बाद वो फिरसे मेरी गोद में आकर बैठ गयी,

हमारे हाथ धीरे – 2 फिरसे से बदमाशियाँ करने लगे, जिससे कुछ ही देर में हम फिरसे गरम हो गये…

फिर मेने उसे घुटने मोड़ कर घोड़ी बना दिया, और पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर चोदने लगा…

इसी तरह मेने कई आसनों से उसे तीन बार उसे जमकर चोदा.. वो चुदते-2 पस्त हो गयी..

कुछ देर बैठ कर, हम कपड़े पहन कर मैदान में आ गये.. और एक पेड़ की छाया में लेट गये..

एक घंटा अच्छे से आराम करने के बाद घर लौट लिए…

घर आकर मेने उसके सास-ससुर को बताया कि उसका इलाज़ तो हो गया है.., लेकिन कुछ दिनो तक हर हफ्ते उसे ले जाना होगा…

तो वो बोले – बेटा अब तुम ही इसे ले जा सकते हो.. हमारे पास और कॉन है.. तो मेने भी हां कर दिया…

पंडित – पंडिताइन ने मुझे खूब आशीर्वाद दिया.. हम दोनो मन ही मन खुश हो रहे थे…

कुछ देर चाय नाश्ता करने के बाद मे अपने घर आ गया और भाभी को सारी बात बताई…

वो हँसते हुए बोली – वाह देवेर जी ! मेरी सोहवत में स्मार्ट हो गये हो… हर हफ्ते का इंतेज़ाम भी कर लिया… मान गये उस्ताद…!

मेने हँसते हुए कहा – अरे भाभी ! बेचारी मिन्नतें कर रही थी.. कि समय निकल कर मुझे भी प्यार कर लिया करना.. सो मेने ये तरीक़ा सोच लिया…

इस तरह से पंडित जी की बहू वर्षा की समस्या का समाधान मेरी भाभी ने कर दिया….
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Yesterday, 12:57 PM,
#82
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
रामा दीदी और विजेता दोनो पक्की वाली सहेलियाँ हो चुकी थी, दोनो एक ही साथ रहती, साथ-2 खाती, और साथ ही सोती…विजेता यहाँ आकर सबके साथ घुल-मिल गयी थी…

भाभी का नेचर तो था ही सबको प्यार करना, सो वो इतनी घुल मिल गयी हमारे घर में की एक दिन भी उसे अपने घर की याद नही आई…

रामा दीदी तो मेरे साथ हर तरह से खुली हुई थी, वो कभी भी मुझे छेड़ देती, मुझे तंग करती रहती, कहीं भी गुद गुदि कर देती,

मेरे भी हाथ उसके नाज़ुक अंगों तक पहुँच जाते…, उन्हें मसल देता, जिसे देख कर विजेता शॉक्ड रह जाती..

शुरू शुरू में तो उसे ये सब बड़ा अजीब सा लगा, कि सगे भाई बेहन ऐसा एक दूसरे के साथ कैसे कर सकते हैं…

इसके लिए उसने दीदी को बोला भी…तो उन्होने कहा – अरे यार इसमें क्या है, अब भाई बेहन हैं तो इसका मतलव ये तो नही की हम खुश भी ना हो सकें… कुछ ग़लत नही है, बस तू भी एंजाय किया कर..

मेरा भाई तो बहुत बड़े दिलवाला है, उसमें सबके लिए प्यार समाया हुआ है…

दीदी की बात से वो भी धीरे-2 मेरे साथ हसी मज़ाक, छेड़-छाड़ करने में उसके साथ शामिल होने लगी…

धीरे –2 उसकी भावनाएँ खुलने लगी…रही सही कसर रामा दीदी पूरी कर देती उसके नाज़ुक अंगों के साथ छेड़-छाड़ कर के….!

इसी दौरान एक दिन आँगन में हम तीनों बैठे थे, कि अचानक रामा दीदी मुझे गुदगुदी कर के भाग गयी…

मेने उसका पिछा किया और थोड़ी सी कोशिश के बाद मेने उसे पीछे से पकड़ लिया..

मेरे हाथ उसकी चुचियों पर जमे हुए थे, वो अपनी गान्ड को मेरे लंड के आगे सेट कर के अपने पैर ऊपर उठाकर एक तरह से मेरी गोद में ही बैठी थी..

मेने उसके कान को अपने दाँतों में दबा लिया…वो खिल-खिलाकर हँसते हुए मुझे छोड़ने के लिए बोलने लगी…

हमारे बीच के इस खेल को चारपाई पर बैठी विजेता देख रही थी, वो अपने मन में कल्पना करने लगी, कि रामा की जगह वो खुद है, और मे उसकी चुचियों को मसल रहा हूँ…

मेरा लंड उसकी गान्ड से सटा हुआ है… ये सोचते – 2 वो गरम होने लगी.. और अनायास ही उसका हाथ अपनी चुचि पर चला गया, वो उसे दबाने लगी, और उसके मुँह से सिसकी निकल गयी…

उसकी आँखें भारी होने लगी… उसे ये भी पता नही चला कि कब हम दोनो उसके पास आकर बैठ गये…

उसका एक हाथ अभी भी उसकी चुचि पर ही था, जिसे वो अपनी आँखें बंद किए धीरे-2 दबा रही थी…

मेरी और रामा दीदी की नज़रें आपस में टकराई, तो वो उसकी तरफ इशारा कर के मुस्कराने लगी…

फिर उसने विजेता के कंधे पर हाथ रख कर उसे हिलाया, वो मानो नींद से जागी हो, अपनी स्थिति का आभास होते ही वो शर्मा गयी, और अपनी नज़रें नीची कर ली.

रामा दीदी को ना जाने कहाँ से राजशर्मा कीसेक्सी कहानियों की एक किताब मिल गयी, शायद रेखा या आशा दीदी के पास रही होगी, क्योंकि वो तो बेचारी अकेले कभी बाज़ार गयी नही थी..

तो एक रात वो दोनो अपने कमरे में साथ बैठ कर उस किताब को पढ़ रही थी…

पढ़ते – 2 उन दोनो पर वासना अपना असर छोड़ने लगी, और वो किताब को पढ़ते – 2 एक दूसरे के साथ समलेंगिक (लेज़्बीयन) सेक्स करने लगी.

वो स्टोरी भी शायद ऐसी ही कुछ होगी, जिसे वो पढ़ते – 2 एक्शिटेड होने लगी और उसमें लिखी हुई बातों का अनुसरण करने लगी…
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Yesterday, 12:58 PM,
#83
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
रामा ने उसके होंठों पर किस किया तो विजेता गन गाना गयी, उसके शरीर में झूर झूरी सी होने लगी, और उसने भी उसको किस कर लिया…

अब वो दोनो एक दूसरे होंठों पर भूखी बिल्लियों की तरह छीना छपटी सी करने लगी…

जैसे – 2 रामा उसके साथ करती, वो बस उसका अनुसरण करने लगती… क्योंकि उसे इस खेल में इतना मज़ा आ रहा था, जो आज से पहले उसने सोचा भी नही था…

किस्सिंग करते – 2 रामा उसके बूब्स दबाने लगी जो उसके बूब्स से भी 21 थे…

फिर जैसे ही रामा का हाथ उसकी टाँगों के बीच उसकी कोरी करारी मुनिया पर गया, उसने अपनी टाँगें भींच ली…और उसके मुँह से मादक सिसकारी फुट पड़ी..

सस्सिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई………….उईईईईईईईईईईईईईईईईईई…….डीडीिईईईईईई…….नहियीईईईई

रामा ने उसे छेड़ते हुए कहा – क्यों मेरी जान… मज़ा नही आया क्या…
वो – आहह… दीदी कुछ अजीब सी गुदगुदी होने लगती है…

रामा – इसी को मज़ा कहते हैं..मेरी गुड़िया रानी…टाँगें खोल अपनी, देख कितना मज़ा आता है…

उसने अपनी टाँगें खोल दी और उसके बूब्स प्रेस करते हुए अपनी चूत मसलवाने लगी…

दोनो की हालत बाद से बदतर होती जा रही थी…अब उन्हें अपने कपड़े किसी दुश्मन की तरह लगने लगे और वो दोनो जल्दी ही ब्रा और पेंटी में आ गयी…

अब सिचुयेशन ये थी, कि रामा पलंग के सिरहाने से पीठ टिकाए बैठी थी अपनी टाँगें फैलाए, और विजेता उसकी टाँगों के बीच बैठी अपनी टाँगें पसारे बैठी थी…

दोनो एक दूसरे के होंठों को चूस्ते हुए, रामा उसकी गीली चूत को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रही थी, और विजेता उसकी….

विजेता – आअहह…दीदी… बहुत मज़ा आरहा है… और ज़ोर से रगडो मेरी चूत को..

रामा – मज़ा आरहा है ना…! पर मेरी जान ! जो मज़ा किसी मर्द के हाथ से मिलता है, वो मेरे हाथों से नही मिलने वाला…

वो उसके मुँह की तरफ देखते हुए बोली – क्यों मर्द के हाथ से ज़्यादा क्यों आता है…?

रामा – वो तो तू जब हाथ लगवाएगी तभी पता चलेगा…!

फिर रामा ने उसकी ब्रा और पेंटी भी निकाल दी, बिना कपड़ों के जब उसकी उंगलियाँ विजेता की गीली चूत पर पड़ी, वो मस्ती से भर उठी.. और उसकी कमर हवा में लहराने लगी.

रामा अपने हल्के हाथों से उसके दाने को सहला रही थी…जिससे उसकी चूत और ज़्यादा रस बहाने लगी…

अब उसने भी अपने सारे कपड़े निकल फेंके, और उसकी टाँगों के बीच आकर बैठ गयी,

रामा ने अपना मुँह विजेता की कोरी कुँवारी चूत पर रख दिया और वो उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगी…



विजेता तो पता नही कहीं दूसरे ही लोक में पहुँच चुकी थी, लेकिन रामा से भी नही रहा जा रहा था, सो वो उसके मुँह के ऊपर अपनी गीली चूत रख कर उसके ऊपर लेट गयी …

अब वो दोनो 69 की पोज़िशन में आ गयी, और रामा के इशारे पर वो भी उसकी चूत को चाटने लगी…

कमरे में चपर – चपर की आवाज़ सुनाई देने लगी, मानो दो बिल्लियाँ दूध की हांड़ी से दूध चाट – 2 कर पी रही हों…

एक बार रामा ने अपने होंठों को उसकी कोरी चूत के होंठों पर कस कर सक कर लिया…

विजेता को लगा मानो उसके अंदर से कुछ खिंचा चला जा रहा हो, उसकी गान्ड के गोल गोल गुंबद आपस में कस गये…

उसकी देखी देखा, उसने भी रामा की चूत को कस्के सक कर लिया…

वो दोनो ही गून..गून करते हुए अपना-अपना कामरस छोड़ने पर मजबूर हो गयी…
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Yesterday, 12:58 PM,
#84
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
जब दोनो ही अपने – 2 स्खलन को पा चुकी… और एक दूसरे की टाँगों में मुँह डाले पड़ी रही….

अभी वो ढंग से स्खलन की खुमारी से निकल भी नही पाईं थी, कि भड़क से दरवाजा खुला…!


मे किसी काम से रामा दीदी के कमरे में गया था, दरवाजे को हल्का सा दबाब डालते ही वो खुलता चला गया…

सामने का नज़ारा देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया…

उन दोनो की नज़र जैसे ही मुझ पर पड़ी, विजेता ने झट से उसे अपने ऊपर से धकेल दिया और फटा फट से बेड शीट दोनो के ऊपर डाल ली…

मे उल्टे पैर वापस जाने को पलटा, कि तभी रामा दीदी बोली – भाई रुक तो…!

मेने बिना उनकी तरफ पलटे ही बोला – मे सुवह बात करता हूँ आपसे…!

वो – कोई बात नही, तू बोल ना क्या काम था…?

मे - नही कोई खास नही बस ये देखने आया था, कि आप लोग सो तो नही गये…

कुछ देर बैठ कर गप्पें मार लेता और कुछ नही..बस !

वो – तो आ ना, बैठ… बातें करते हैं…

उसकी बात सुन कर विजेता उसके कान में फूस फुसाई… दीदी ! क्या कर रही हो.. जाने दो ना उनको..

रामा उसको घुड़कते हुए बोली – तू चुप कर…! बैठने दे ना उसे भी, चादर तो ओढ़ रखी है ना हमने, फिर क्या प्राब्लम है तुझे…?

फिर उसने ज़िद कर के मुझे पलंग पर बैठने को मजबूर कर दिया… और में उनके बगल में बैठ कर बातें करने लगा….!

मे जिधर बैठा था, उधर विजेता थी, और उसके साइड में रामा दीदी…., मे पालती लगा कर उनकी तरफ मुँह कर के बात कर रहा था…

दीदी ने चादर के अंदर से ही अपना हाथ विजेता के ऊपर से होते हुए मेरी जाँघ पर रख लिया, और बातें करते हुए उसे सहलाने लगी…

विजेता उसकी हरकत को बराबर देखे जा रही थी…वो धीरे – 2 से उसको मेरी तरफ पुश करते हुए उसका बदन मेरे बगल से सटा दिया…

विजेता ने उसकी तरफ घूर कर देखा, मानो कहना चाहती हो कि ऐसा क्यों कर रही हो..

उसने अपनी आँखों के इशारे से उसे चुप चाप मज़ा करने को कहा… तो वो फिर से मेरी तरफ मुँह कर के बातों में शामिल हो गयी…

रामा – वैसे भाई, तूने हमें किस हालत में देखा था…?

मे उसकी बात का कोई जबाब नही दे पाया, और देना उचित भी नही समझता था, क्योंकि रामा को तो कोई प्राब्लम नही थी,

वो तो मेरे साथ सब कुछ कर चुकी थी, लेकिन विजेता को बहुत फ़र्क पड़ना था, वो अभी इन सब बातों से अंजान थी..
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Yesterday, 12:58 PM,
#85
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
जब कुछ देर तक मेने कोई जबाब नही दिया तो वो फिर बोली – छोटू बता ना यार ! तूने हमें किस हालत में पाया था…?

मे कुछ बोलता उससे पहले विजेता बोल पड़ी…दीदी प्लीज़ ! मत पूछिए ना भैया से ऐसा सवाल..

वो उसको घुड़कते हुए बोली – तू चुप कर.. तुझे क्यों प्राब्लम हो रही है…?

विजेता – भैया कैसे बता पाएँगे… अपनी बहनों के बारे में ऐसी बात…आप क्यों शर्मिंदा करना चाहती हैं बेचारे को…?

रामा – भैया की चमची…तू ज़्यादा जानती है उसके बारे में या मे, चुप-चाप लेटी रह… और उसने विजेता बेचारी को चुप करा ही दिया…

फिर वो मेरे से बोली – हां ! बोल भाई… अब बता भी दे.. ना, क्यों ज़्यादा नखरे कर रहा है, धरी लुगाई की तरह…

उसके जुमले पर हम तीनों ही हँसने लगे…, मेने कहा – सुनना ही चाहती हो.. नही मानोगी..? तो लो…….

और मेने उन दोनो के ऊपर से चादर खींच कर एक तरफ को उच्छाल दी, और बोला – इस हालत में देखा था… अब खुश.

विजेता तो शर्म से दोहरी हो गयी, उसने अपनी टाँगें जोड़कर घुटने अपने सीने से सटा लिए…
लेकिन रामा ने मेरे ऊपर छलान्ग ही लगा दी.. और मुझे पलंग पर लिटा कर मेरे ऊपर बैठ गयी… एक दम नंगी, और गुर्राकर कर बोली…

तेरी ये हिम्मत, अब देख तू … इतना कह कर उसने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया…

मेरे हाथ उसके मोटे-मोटे तरबूजों पर कस गये और मे उसकी मखमली गान्ड को मसल्ने लगा…

विजेता ये सीन देख कर भोंचक्की सी रह गयी, अपनी बड़ी-2 कजरारी आँखें फाड़ कर हम दोनो को देखने लगी…

मेरे होंठ छोड़ कर वो बोली – विजेता तू इसके कपड़े निकाल… इसकी हिम्मत कैसे हुई हमें नंगा करने की…

विजेता तो बेचारी वैसे ही शॉक्ड थी, ये बात सुन कर और ज़्यादा सुन्न पड़ गयी…

जब विजेता की तरफ से कोई रिक्षन ना हुआ तो उसने मेरे ऊपर बैठे हुए ही उसको भी बाजू से पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया और बोली – अब भी शरमाती रहेगी… मेरी लाडो..

मज़े ले ना हमारे साथ, आज देख तुझे हम दोनो मिल कर स्वर्ग की सैर पर ले चलते हैं… ऐसा मौका तुझे फिर कभी नही मिलेगा मेरी जान… आजा, चूस भाई के होंठ…

उसे मेरे होंठों से लगा कर खुद मेरे कपड़े निकालने लगी, और दो मिनिट में ही मुझे भी अपनी लाइन में खड़ा कर लिया…

मेने विजेता को अपनी बाहों में कस लिया और उसके नाज़ुक अन्छुए मादक गोल-2 उरजों को चूसने – चाटने लगा…प्रथम पुरुष स्पर्श उसके लिए वरदान साबित हुआ..

और जैसा रामा ने उससे कहा था, दुगना मज़ा उसको आ रहा था…

रामा ने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया, और लॉलीपोप की तरह उसे चूसने लगी…

मे – देख वीजू… दीदी कैसे मेरा लंड चूस रही है, सीखले, जिंदगी में बहुत काम आने वाला है ये तेरे…

वो गौर से उसे लंड चूस्ते हुए देखने लगी…

कुछ देर लंड चूसने के बाद रामा उसके ऊपर बैठ गयी, और धीरे- 2 पूरा लंड अपनी चूत में डालकर कमर चलकर चुदने लगी या कहो मुझे चोदने लगी…
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Yesterday, 12:58 PM,
#86
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मेने विजेता को अपने मुँह पर बिठा लिया, और उसकी कुँवारी चूत को अपने जीभ से चाटने लगा…



रामा मेरे लंड को अंदर बाहर करते हुए विजेता के होंठ चूसने लगी,

ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा कैसे लिया जाता है, इसे किसी को सिखाने की ज़रूरत नही होती, सब अपने आप आने लगता है…

यही विजेता के साथ भी हुआ, और वो अपनी चूत को मेरे मुँह से घिसते हुए, होंठ चूसने में अपनी बड़ी बेहन का साथ देने लगी

उन दोनो की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगी, वातावरण चुदाईमय हो गया था…

कुछ देर के धक्कों के बाद रामा झड़ने लगी, और मेरे ऊपर बैठ कर हाँफने लगी…

रामा – भाई अब देर मत कर, अपनी गुड़िया रानी को खोलने का समय आ गया है..

विजेता की चूत पानी बहाते-2 तर हो चुकी थी, तो मेने उसे लिटा दिया और उसकी टाँगों को मोड़ कर चौड़ा दिया.

रामा ने उसकी फांकों को अपने हाथ से खोल दिया, उसका बारीक सा लाल रंग का छेद दिखने लगा…

रामा ने मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर उसकी चूत के छोटे से छेद के मुँह पर रख कर कहा – भाई, लगा धक्का और अपना लंड डाल कर चौड़ा कर्दे इसके छेद को भी…

मेने अपने लंड को हाथ का सपोर्ट देकर हल्का सा धक्का दे दिया कमर में…

मेरा सुपाडा उसके संकरे छेद में फिट हो गया, विजेता के मुँह से कराह निकल गयी…

रामा ने उसके होंठों को अपने मुँह में ले लिया और उन्हें चूसने लगी, मौका देख कर मेने एक तगड़ा शॉट लगा दिया, और मेरा लंड विजेता की चूत को फाड़ता हुआ, आधे से ज़्यादा अंदर चला गया…

विजेता ने रामा का सर पकड़ कर अपने से दूर कर दिया और हलाल होते बकरे की तरह डकराती हुई चीख पड़ी….

अरईईईईईई……मैय्ाआआ………रीई….मारगइिईईईईईईईईईईई……ओउफफफ्फ़……मेरी चूत फाड़ दी…..सालीए….हर्मीईिइ….बेहन भाई…दोनो ही हरामी हूओ….

रामा उसे – प्यार से पूचकारते हुए उसके गालों को थप थपा कर शांत करने की कोशिश करने लगी…

विजेता मुझे रोने के साथ – 2 गाली देते हुए बोली – अब निकाल भोसड़ी के, या मार ही डालेगा भेन्चोद…अभी भी सांड की तरह चढ़ा हुआ है मेरे ऊपर

हाई…मम्मी…उन्ह..हुंग…कहाँ फँस गयी मे…इन चोदुओ के बीच.

मे उसके निप्प्लो को सहलाते हुए बोला – बस मेरी गुड़िया हो गया सब, अब कुछ नही होगा तुझे आइ सपथ..…

निपल के सहलाते ही उसमें सेन्सेशन होने लगा जिससे उसका चूत का दर्द कुछ कम लगने लगा, मेने धीरे से अपने लंड को बाहर की ओर खींचा,

विजेता ने एक लंबी सी साँस छोड़कर राहत की साँस ली, की चलो आफ़त टली…लेकिन दूसरे ही पल उसका मुँह फिर खुल गया, वजह मेरा 3/4 लंड फिरसे उसकी चूत में जा चुका था…

ऐसे ही 3/4 लंड की लंबाई से उसको धीरे-2 चोदने के बाद उसको अच्छा लगने लगा, अब वो भी अपनी कमर को उचकाने लगी थी…

जब वो फुल मज़े में आ गयी, तो मेने एक फाइनल शॉट लगा दिया और मेरा पूरा 8”लंबा और ढाई इंच मोटा खूँटा, उसकी नयी फटी चूत में सेट होगया….

वो एक बार फिरसे कराह उठी, लेकिन इस बार वो इस झटके को झेल गयी थी, क्योंकि अब उसकी कुँवारी चूत रस छोड़ने लगी थी…

मेने उसकी एक टाँग को अपने कंधे पर रख लिया जिससे लंड अंदर बाहर होने में आसानी होने लगी…



रामा उसके सर के पास बैठ कर उसकी टाइट चुचियों को चूस रही थी..

दो तरफ़ा हमले से विजेता आनंद सागर की लहरों में उतरती डूबती हुई बुरी तरह से अपनी कमर को झटके देते हुए झड़ने लगी..

उसकी आँखें मज़े के आलम में अपने आप मूंद गयी, और उसके पैर मेरी कमर से कस गये…

दो-टीन मिनिट रुक कर मेने उसे निहुरा कर घोड़ी बना दिया, और आहिस्ता से उसकी नयी चुदि चूत में लंड डाल दिया…

एक दो झटकों में उसे फिर से तकलीफ़ हुई, लेकिन जल्दी ही वो फिरसे मज़े ले लेकर अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटक-पटक कर चुदाई का आनंद लूटने लगी…

10 मिनिट उसे इस पोज़ में चोदने के बाद मेने अपना वीर्य उसकी नयी फटी चूत में उडेल दिया, और उसकी खेती की पहली सिंचाई कर दी…

उन दोनो जंगली बिल्लियों ने 15 मिनिट में फिरसे मेरे लंड को तैयार कर दिया, और इस बार मेने रामा को अपने ऊपर बिठा कर उसे चोदने लगा…

हम तीनों रात भर पलंग पर उछल कूद मचाते हुए, चुदाई का भरपूर आनंद उठाते रहे, मेरी स्टॅमिना, एक साथ दो चुतो को ठंडा करने की थी..

इसका मुख्य कारण था, शुरू से ही भाभी की ट्रैनिंग, और दिदियो का मुझे सिड्यूस कर के कलपद कर के छोड़ देना..

जिस कारण से धीरे – 2 मुझे अपने पर कंट्रोल करने की ट्रिक अपने आप ही आती गयी…

उसी का फ़ायदा उठाकर मेने उन दोनो को पूरी तरह से तृप्त कर दिया, और वो मेरे दोनो ओर मुझसे लिपट कर सो गयी…
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Yesterday, 12:58 PM,
#87
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
अगले दिन से विजेता की छुट्टियाँ ख़तम हो रही थी, मुझे ही उसे छोड़ने जाना था,

उसने शाम को ही बोला था कि उसे किसी भी तरह स्कूल के समय तक वहाँ पहुँचना है…

तय हुआ कि सुबह पौ फटने से पहले ही निकल लेंगे, जिससे वो समय पर अपने स्कूल भी जा सकेगी, और लौट कर मे अपना कॉलेज भी अटेंड कर लूँगा…

15-20किमी का रास्ता बुलेट से मेरे लिए कोई ज़्यादा समय नही लगना था, फिर भी बुआ के घर पहुँचना, उसके बाद उसकी अपनी तैयारी कर के स्कूल निकलना,

इन सारी बातों को ध्यान में रख कर हम 5 बजते ही घर से चल पड़े…

विजेता ने एक टाइट शर्ट और घुटनों तक की स्कर्ट पहन रखी थी, जिसमें वो अभी भी एक स्कूल जाती हुई कमसिन लड़की ही लग रही थी…

बारिस का मौसम था, घने बादलों के चलते, काफ़ी अंधेरा था अभी…गाड़ी की हेड लाइट में हम 35-40 की स्पीड में मस्त सुबह – सुबह की ठंडी हवा का लुत्फ़ उठाते हुए जा रहे थे…

घर से निकलते ही विजेता की मस्तियाँ शुरू हो गयी… अब वो पहले वाली शर्मीली, छुयि-मुई सी विजेता तो रही नही थी..

वो पीछे से मेरी पीठ से चिपक कर अपने दोनो हाथों को आगे कर के मेरे लंड को पॅंट के ऊपर से ही सहलाने लगी…

मुझे अपनी पीठ पर उसकी कठोर चुचियों के उभार महसूस हो रहे थे, ऐसा लग रहा था कि शायद उसने उन्हें शर्ट के बाहर ही निकाला हुआ था..

जब उसके निपल मेरी पीठ से रगड़ते तो शरीर में एक झंझनाहट जैसी होने लगती.

मेने उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर कहा – ये क्या हो रहा है वीजू…?

वो मेरे कान की लौ को अपने दाँतों में दवा कर बोली – आप दोनो भाई बहनों ने एक सीधी साधी लड़की को बेशर्म कर दिया, अब पुछ्ते हो कि क्या हो रहा है…

मेने उसी हाथ को साइड में ले जाकर उसकी नंगी जाँघ को सहलाते हुए कहा – वो तो ठीक है डार्लिंग, लेकिन अब चलती बाइक पर ये सब मत करो,

अभी भी बहुत अंधेरा है, मेरा ध्यान भंग हो गया, और गाड़ी लहरा गयी तो सिंगल रोड पर हम झाड़ियों दिखेंगे…

विजेता अपने कड़क हो चुके निप्पलो को मेरी पीठ पर रगड़ते हुए बोली – तो धीरे – 2 आराम से चलाओ ना भैया, इतनी भी क्या जल्दी है आपको मुझसे दूर होने की…?

मे – अरे यार ! इससे भी क्या धीरे चलाऊ…? अच्छा ठीक है, जो तेरी मर्ज़ी हो वो कर…

मेरे मुँह से इतना कहना ही था कि उसने मेरे पॅंट की जीप खींच दी, और अपना हाथ अंदर डाल कर मेरे लंड को अंडरवेार के बाहर निकाल लिया…

रास्ते में भरपूर अंधेरा था, ऊपर से सुबह होने को थी, इस वक़्त किसी वहाँ के गुजरने के भी कोई चान्स नही थे, सो वो खुलकर अपनी मनमानी पर उतर आई..

मेरा लंड तो उसके हाथ लगते ही अपनी औकात पर आ चुका था, शख्त, गरम लंड को मुट्ठी में कसकर विजेता मेरे कान के नीचे चूमकर उसे मुठियाते हुए बोली..

ये क्या लत लगादि आप लोगों ने मुझे, अब मेरी मुनिया बहुत खुजने लगी है… सीईईईईईई…मम्मूऊऊउ…..कुछ करो ना भैया…. प्लीज़….!

उसका दूसरा हाथ अपनी चूत पर था, जिसे वो खूब ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रही थी….

फिर अचानक से बोली – भैया बाइक रोको, मुझे आपकी गोद में बैठना है…!

मे उसकी बात सुनकर झटका ही खा गया, पीछे मुड़कर जैसे ही देखा तो उसने मेरे गाल को ज़ोर से काट लिया और बोली… रोको ना जल्दी से…

मेने धीरे-2 कर के बुलेट एक साइड में रोक दी…

वो फ़ौरन से उतर कर रोड की साइड में बैठकर मूतने लगी, मेने उसकी तरफ से ध्यान हटा लिया, मुझे पता ही नही लगा कि कब उसने अपनी पेंटी निकाल कर स्कर्ट की जेब में डाल ली…

दो मिनिट बाद आकर वो मेरे आगे, मेरी तरफ मुँह कर के मेरी जांघों के ऊपर बैठ गयी…
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Yesterday, 12:58 PM,
#88
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मेने जब उसके ऊपर ध्यान दिया, तो पाया, उसकी शर्ट के ऊपर के सारे बटन खुले हुए थे, और नीचे उसने ब्रा भी नही पहनी थी…

मेरा लंड तो ऑलरेडी तना हुया खड़ा ही था, सो वो मेरी गोद में बैठ कर उसे अपने हाथ से पकड़कर अपनी गीली चूत के होंठों, जो अब पहले के मुक़ाबले थोड़े फूले हुए से लग रहे थे, पर रख कर घिसने लगी…

मेने एक हाथ से उसकी एक चुचि को सहलाते हुए कहा – अब तो चलें….
जबाब में उसने बस हूंम्म्म…ही कहा,

मेने किक लगाई, और गियर डाल कर बुलेट आगे बढ़ा दी…
वो मेरे लंड पर अपनी चूत को रगड़े जा रही थी, बीच – 2 में मेरे होंठों को भी चूस लेती…

मेने भी अपना एक हाथ उसकी स्कर्ट में डालकर उसके चूतड़ को मसल दिया…वो चिंहूक कर ऊपर को हुई,

इसी दरमियाँ मेरा लंड उसके छोटे से छेद के ठीक सामने आ गया, ऊपर से बाइक एक छोटे से खड्डे में कूदी, नतीजा !

मेरा आधा लंड सर-सरकार उसकी गीली चूत में घुस गया…

उसके मुँह पर पीड़ा की एक लहर सी दौड़ गयी, और वो थोड़ा ऊपर को उचकी, जिससे मेरा लंड सुपाडे तक उसकी चूत से बाहर आ गया,

लेकिन दूसरे ही पल, वो उसपर फिरसे बैठ गयी…. और अपने होंठों को कसकर भीचकर, धीरे-2 कर के मेरा पूरा लंड उसने अपनी नयी चुदि चूत में ले लिया…

कुछ देर वो यौंही मेरे सीने से कसकर चिपकी बैठी रही, लंड को अपनी चूत के अंतिम सिरे तक फील करती रही…, लेकिन वो कहते है ना, कि बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाती…

बाइक के झटकों ने उसे फिरसे उछल्ने पर मजबूर कर दिया… जिससे मेरा लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर होने लगा…

थोड़ी देर में ही उसको अच्छा लगने लगा और वो खुद से मेरे लंड पर उच्छल कूद करने लगी…

मे कभी इस हाथ से तो कभी दूसरे हाथ से उसके गोल-2 गेंद जैसी गान्ड को मसल रहा था, इससे ज़्यादा मेरे पास करने को था भी कुछ नही…?

आख़िर था तो मे भी एक नौजवान मर्द, कब तक अपने ऊपर कंट्रोल करता, सो मेने एक पेड़ के नीचे लेजाकर बाइक रोक दी,

एक पैर से साइड स्टॅंड लगाया और विजेता की गान्ड के नीचे हाथ लगाकर, उसे अपनी गोद में लिए ही, बाइक की सीट से खड़ा हो गया….

मेरा लंड अभी भी जड़ तक उसकी चूत के अंदर ही था…

मेने बड़े इतमीनान से विजेता को नीचे उतारा, पुकछ की आवाज़ के साथ मेरा लंड उसकी चूत से बाहर आ गया, मानो किसी बच्चे के मुँह से दूध की निपल निकाल ली हो…

उसके बाद हम दोनो ने फटाफट अपने सारे कपड़े अपने बदन से अलग किए, और विजेता का मुँह बाइक के हॅंडल की ओर कर के उसे आगे को झुका दिया,

उसकी एक टाँग बाइक की सीट पर रख दी, आगे उसने बाइक के हॅंडल को पकड़ लिया…

अब उसकी एक टाँग बाइक की सीट पर घुटना टेके हुए रखी थी, और दूसरी टाँग से ज़मीन पर खड़ी बाइक के टॅंक पर झुक गयी….

पीछे से उसकी चूत बाहर को हो गयी, जो अब लंड डालने के लिए परफेक्ट पोज़िशन थी, सो मेने अपना लंड पीछे से उसकी गीली चूत में पेल दिया.
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Yesterday, 12:59 PM,
#89
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
विजेता के मुँह से एक जोरदार सिसकी निकल पड़ी, जो उस शांत वातावरण में गूँज कर रह गयी….

आआअहह……….सस्स्सिईईईईईईईईईईईई…… मेरे प्यारे भैय्ाआअ…..चोदो अपनी गुड़िया को….मिटा दो मेरी चूत की खुजलीइीइ……. आआईयईईई…. माआ…. ऊओ…. आअहह….. उउउफफफ्फ़….

मे घचा घच उसकी चूत में लंड पेले जा रहा था, वो लगातार सिसकती हुई अपनी एक उंगली को पीछे लाकर अपनी गान्ड के छेद को सहलाती जा रही थी….

खुले आसमान के नीचे, हमें किसी के आने का भी डर भय नही रहा… बस लगे थे अपनी-2 मंज़िल पाने में…

और आखिकार हमें हमारी मंज़िल मिल ही गयी… विजेता चीख मारती हुई अपनी गान्ड को पीछे उछाल कर झड़ने लगी…

मेने भी दो-चार धक्के कस कर मारे और उसे अपने लंड से चिपककर उसकी दूसरी टाँग को भी हवा में उठा लिया और अपनी पिचकारी उसकी चूत में छोड़ दी…

कुछ देर हम यौंही चिपके खड़े रहे, फिर उसने पलट कर मेरे होंठों को चूम लिया और बोली – थॅंक यू भैया, आइ लव यू मी स्वीट भैया…

मेने उसके उरोजो को सहला कर पूछा – तू खुश तो है ना गुड़िया…

वो मेरे सीने से लिपट कर बोली – मे बहुत खुश हूँ भैया, जी तो कर रहा है, कि सारी उमर आपसे ऐसे ही चिपकी रहूं, लेकिन काश ये हो पाता,

फिर वो मेरे लॉड को एक बार चूम कर बोली – बहुत याद आएगा ये निर्दयी मेरी मुनिया को…बट कोई नही, इट’स आ पार्ट ऑफ लाइफ…, हो सके तो आते रहना भैया..

कोशिश करूँगा गुड्डो… अब चलो वरना तू स्कूल नही जा पाएगी…जब मेने ये कहा, तो वो बेमन से खड़ी हुई, और अपने कपड़े ठीक कर के हम वहाँ से चल पड़े.

10 मिनिट बाद हम बुआ के घर पर थे, विजेता को छोड़कर मे दरवाजे से ही लौट लिया…

बुआ ने रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन मेने उनसे बाद में आने का वादा किया और वहाँ से सीधा कॉलेज के लिए लौट लिया…

दूसरे दिन सनडे था, मे तोड़ा लाते तक सोता रहा, जब काफ़ी दिन चढ़ गया तो भाभी ने दीदी को मुझे उठाने के लिए भेजा…

जब वो मुझे उठाने मेरे कमरे में आई, उस समय मे सपने में विजेता की रास्ते वाली चुदाई की पुनरावृत्ति कर रहा था….

मेरा पप्पू इकलौते बरमूडे में अकड़ कर टेंट की शक्ल अख्तियार कर के ठुमके मार रहा था…

जैसे ही रामा की नज़र उसपर पड़ी, उसने अपने मुँह पर हाथ रख लिया और होंठों ही होंठों में बुदबुदाई…

हाईए…राम.. सपने में ही कितना बबाल मचाए हुए है इसका तो, फिर वो धीरे से मेरे बगल में आकर बैठ गयी, और बड़े प्यार से मेरे गाल को चूम लिया, फिर हाथ फेरते हुए मुझे आवाज़ दी…

मे नींद में ही कुन्मुनाया और अपनी एक टाँग उसकी जाँघ पर रख दी…

अब मेरा लंड उसकी जाँघ से आकड़ा हुआ था, उसकी चुभन से रामा के मुँह से सिसकी निकल गयी, और स्वतः ही उसका हाथ मेरे लंड पर पहुँच गया…

वो उसे धीरे-2 सहलाने लगी, अभी वो उसे बाहर निकालने के बारे में सोच ही रही थी, कि भाभी की आवाज़ ने उसे रोक दिया…

अरे क्या हुआ लाडो, तुम भी जाकर लल्ला के साथ सो गयी क्या…?

उसने हड़बड़कर मेरा लंड ज़ोर से भींचकर खींच दिया…

भड़भडा मेरी आँख खुल गयी, देखा तो वो पलंग के नीचे खड़ी खिलखिला कर हँस रही थी,

मेने आँख मलते हुए गुस्से से उसको देखा.. तो उसने मेरे बरमूडा की तरफ इशारा करते हुए कहा –

जल्दी उठ, भाभी बुला रही हैं, कब तक सोता रहेगा… 8 बज गये..

इतना कहकर वो कमरे से बाहर चली गयी, जब मेने अपने तंबू को देखा तो समझ में आया, असल माजरा क्या है..

मे फटा फट बिस्तर से उठा, नित्य कर्म किए और भाभी को बोलकर ऊपर के कमरे में जाकर एक्सर्साइज़ में लग गया…

कुछ देर बाद रूचि भी आ गयी, और वो भी मेरे साथ-साथ अपने हाथ पैर हिलाने लगी…

आख़िर में मेने पुश-अप करना शुरू किया तो रूचि बोली – चाचू मुझे चड्डू खाने हैं..

मेने कहा – चल फिर आजा मेरी बिटिया रानी अपने घोड़े की पीठ पर….

वो मेरी पीठ पर लेट गयी, और कसकर मुझे पकड़ लिया, मेने डंड पेलना शुरू कर दिया…

वो मेरे शरीर के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी, जिससे उसके मुँह से किलकरियाँ निकल रही थी…कुछ देर बाद नीचे से भाभी की आवाज़ सुनाई दी,

रामा ! लल्ला की एक्सर्साइज़ हो गयी होगी, उनका बादाम वाला दूध तो तैयार कर देना लाडो… और देखो, रूचि कहाँ है, उसे भी थोड़ा तैयार कर देना, मे लल्ला की मालिश करती हूँ…

मे अपना डंड पेलने में लगा पड़ा था, मेरे साथ-साथ रूचि भी ऊपर नीचे हो रही थी, और खिल-खिलाकर हस्ती भी जा रही थी…

कुछ देर बाद भाभी एक लंबा सा मुरादाबादी ग्लास बादाम वाले दूध का भरके ऊपर आई,

कुछ देर तो वो चुप-चाप हम चाचा भतीजी को देखती रही, फिर अंदर आते हुए बोली – अब बस करो पहलवान जी, बहुत हो गयी बरजिस…

और रूचि से बोली - तू नीचे जा, बुआ से तैयार होले…
मेने भाभी को देखा, जो अब भी एक वन पीस मेक्सी (गाउन) में थी, उन्हें देखकर मेने एक्सर्साइज़ बंद कर दी, रूचि दौड़ती हुई नीचे चली गयी…

भाभी ने तौलिया लेकर मेरा पसीना पोन्छा, कुछ देर मे खुली छत पर टहलता रहा, अपना पसीना सुखाता रहा, और साँसों को कंट्रोल करने लगा…

फिर भाभी ने अंदर बुलाकर मुझे दूध का ग्लास पकड़ा दिया, जिसे मे एक साँस में ही गटक गया…

भाभी – ज़रूरत से ज़्यादा एक्सर्साइज़ भी मत किया करो, वरना ये शरीर कम होने जाग जाएगा…

मे – आप ही ने तो कहा है, की खूब मेहनत करो, जिससे खूब पसीना निकलेगा, और शरीर मजबूत होगा…

वो – हां ! हां ! ठीक है, चलो अब इस चटाई पर लेटो, तुम्हारी मालिश कर देती हूँ,

मे इस समय मात्र एक शॉर्ट में ही था, सो पेट के बल लेट गया, भाभी ने कमरे में ही रखी एक स्पेशल आयुर्वेदिक तेल जिसमें कई तरह के मिनरल्स थे निकाली और मेरी मालिश करने लगी,

पहले उन्होने मेरे दोनो बाजुओं की मालिश की उसके बाद अपनी पिंडली तक की मेक्सी को और ऊपर चढ़ाया और मेरी जांघों पर बैठ गयी…
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