Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
02-05-2020, 12:55 PM,
#71
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
कॉलेज की ज़्यादातर लड़कियाँ रागिनी की चापलूसी करती रहती या यूँ कहो… कि उसके पैसों से मौज करती, और उसकी हां में हां मिलाती रहती थी…

मे आज अपना लास्ट पीरियड अटेंड कर के थोड़ा लाइब्ररी चला गया एक दो बुक लेनी थी..

मेने कुछ बुक्स इश्यू कराई, और जैसे ही लाइब्ररी के गेट से निकल कर लॉबी में कदम रखा ही था..

उधर रागिनी तेज – तेज कदमों से चली आ रही थी, इधर मेरा निकलना हुआ और उसका घुसना सो हम दोनो ही एक दूसरे से टकरा गये,

रागिनी की चुचियाँ मेरे सीने से आकर लगी, मेरे हाथ से बुक्स छूट कर फर्श पर गिर पड़ी…

अचानक से टकराने के कारण, वो कुछ डिसबॅलेन्स हो गयी, और पीछे को गिरने लगी.

मेने फ़ौरन अपना हाथ उसे सहारा देने के लिए पीछे किया, और उसकी मखमली गान्ड को कस लिया…

दूसरे हाथ से उसके कंधे को पकड़ कर उसे गिरने से बचा लिया…और वो फिरसे खड़ी हो गयी…

उसके साथ रोज की तरह 4-5 लड़कियाँ भी चिपकी हुई थी… उसे खड़ा कर के, मेने ज़मीन से अपनी बुक्स उठाई.. और खड़ा होकर उसे सॉरी बोलने ही वाला था… कि तडाक से एक तमाचा मेरे गाल पर पड़ा…

मेने अपना एक हाथ अपने गाल पर रख कर सहलाया और उसकी तरफ देखा… वो अपनी कमर पर दोनो हाथ रखे हुए गुस्से से भुन्भुनाइ…

साले हरामी, देख कर नही चल सकता.. आँखें क्या घर छोड़ कर आता है…

मे उससे उलझना नही चाहता था.. सो मेने उसे सॉरी बोला… और वहाँ से चला आया…

हालाँकि गुस्से से मेरा चेहरा लाल हो रहा था… लेकिन फिर भी मेने अपने गुस्से पर काबू किया, अपनी बुलेट उठाई और घर को चल दिया…

वो पीछे से मुझे जाता हुआ देखती रही… जब तक की मे उसकी आँखों से ओझल नही हो गया…

उसकी एक फ्रेंड ने उसकी बाजू पकड़ कर कहा – अब चल, वो तो चला गया,… अब किसे मारेगी..?

वही लड़की फिर बोली - वैसे उस बेचारे की ग़लती क्या थी..?

दूसरी – हां यार ! वो तो बेचारा गेट से निकल ही रहा था, तू ही उससे टकरा गयी.. और बिना सोचे समझे तूने उस बेचारे को थप्पड़ मार दिया…

तीसरी – कितना डीसेंट लड़का है, फिर भी सॉरी बोला उसने, और बिना कुछ कहे चुप चाप चला गया..

चौथी – मे उसे स्कूल से ही जानती हूँ, वो बस अपनी पढ़ाई से मतल्व रखता है.. किसी से आज तक उसका झगड़ा तक नही सुना हमने..

पहली – अरे ये वोही अंकुश है ना, जिसने स्कूल में चेल्लेंज देने वाले लड़के को पछाड़ दिया.. था.

दूसरी – हां ! वोही अंकुश है, और जानती है.. इसका एक भाई डीएसपी है, और उसकी शादी यहाँ के एमएलए की लड़की के साथ हुई है…

तीसरी – फिर भी देखो… उसको ज़रा सा भी घमंड नही है… प्रिन्सिपल वग़ैरह सब उसे बहुत मानते हैं.. वो चाहता तो तेरे खिलाफ शिकायत भी कर सकता था..

चौथी – पर्सनॅलिटी देखी उसकी… ऐसा हमारे कॉलेज में तो क्या.. आस-पास भी कोई नही है… कितना हॅंडसम, क्या हाइट और बॉडी.. एकदम फिल्मी हीरो लगता है..

कितनी ही लड़कियाँ तो उसके आगे बिछ्ने को तैयार रहती हैं… लेकिन वो किसी को आँख उठाकर भी नही देखता…..

लड़कियों के मुँह से मेरे बारे में ये सब सुनते-2 रागिनी झल्ला उठी और चिल्लाते हुए बोली –ओह… विल यू शट अप ऑल ऑफ यू…बिच.

जाओ जाकर उस हीरो का लॉडा चूसो… इतना ही पसंद है तो.. लेकिन मेरे कान खाना बंद करो तुम लोग.. उहह…. फिल्मी हीरो ! माइ फुट…

पहली – तो तुझे अब भी लगता है कि ग़लती उसकी थी…? मुझे लगता है, कि तुझे उससे माफी माँगनी चाहिए..

रागिनी – क्यों..? वो कोई लाट साब है..?

वो – क्योंकि टकराई तू उससे, और तमाचा भी मारा उसको.. ग़लती तेरी ही है..

रागिनी भड़क उठी और बोली – जा इतना ही उसका ख्याल है तो जाके तू उससे माफी माँग.. यहाँ क्यों खड़ी है..?

उसकी बात सुनकर वो लड़की वहाँ से चल दी… उसके पीछे- 2 वाकी की लड़कियाँ भी चली गयी…

अपनी दोस्तों को यूँ उसे अकेला छोड़ जाते हुए देखकर, रागिनी गुस्से से अपने पैर पटकती हुई तेज-तेज कदमों से वहाँ से चली गयी…

आज पहली बार रागिनी को किसी लड़के की वजह से उसकी दोस्त जो हमेशा उसके साथ रहती थी, उसकी हर हां में हां मिलाती थी, उसके किसी फ़ैसले का विरोध करने का कभी सोच भी नही सकती थी, वो उसे यूँ छोड़ कर चली गयी थी…

रागिनी तमतमाया चेहरा लिए अपने घर पहुँची… उसकी माँ के पुछ्ने पर भी उसने कुछ नही बताया.. और जाकर सीधे अपने कमरे में बिस्तर पर धडाम से गिर पड़ी…

वो खुली आँखों से आज हुए सारे घटना क्रम को सोचने लगी… कभी उसे उस लड़के पर गुस्सा आता, तो कभी अपनी दोस्तों को गालियाँ देने लगती…

जब इस सबसे भी उसका मन नही भरा.. तो वो अपने व्यवहार को चरितार्थ करने लगी…

उसने शुरू से लेकर घर लौटने तक का सारा घटना क्रम कई बार- रीवाइंड कर कर के देख डाला…

आख़िर में मन के किसी कोने से उसे धिक्कार सुनाई दी… और सवाल आया..

तू सिर्फ़ एकबार अपने बाप-भाई के रुतवे को अलग रख कर सोच रागिनी, जो व्यवहार तूने उस लड़के के साथ किया है, क्या वो सही है…?

फिर उसे अपनी फ्रेंड की वो बातें याद आने लगी…

कॉलेज में उसका कितना मान है, उसके परिवार की शान भी कोई कम नही थी…

एमएलए की लड़की उसकी भाभी है…

वो चाहता तो वो उसे भी सबक सिखा सकता था… लेकिन उसके बड़प्पन ने उसे ऐसा करने नही दिया…
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02-05-2020, 12:56 PM,
#72
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
अब रागिनी का मन ग्लानि से भरने लगा था… और अंत में उसने फ़ैसला कर लिया कि वो कल सबसे पहले जाकर अंकुश से माफी माँगेगी… !

जैसे ही रागिनी ने मन ही मन ये फ़ैसला लिया कि वो कल जाकर अंकुश से माफी माँगेगी, उसका मन अप्रत्याशित रूप से शांत हो गया…

अब उसके मन मस्तिष्क में, नफ़रत की जगह अंकुश के लिए दूसरी ही भावनाएँ पनपने लगी, और वो उसका प्यार पाने की कल्पना करने लगी.

उसकी पर्सनॅलिटी उसके दिलो-दिमाग़ पर छाती जा रही थी, इन्ही ख्वाबों ख़यालों में ना जाने कब उसका हाथ उसके नाज़ुक अंगों के साथ खेलने लगा, और उपसर मस्ती भरी खुमारी छाने लगी.

कभी वो अपनी चुचियों को मसलकर फील करती कि ये अंकुश उनको मसल रहा है, तो कभी उसका हाथ अपनी चूत पर महसूस करती, और उसे अपने हाथ से सहलाने लगती.

रागिनी की खुमारी कब वासना में बदल गयी, उसे पता ही नही चला और उसकी उंगलियाँ चूत के अंदर जाकर एक्सर्साइज़ करने लगी…

वो अपनी उंगलियों को चूत में अंदर बाहर करती हुई, फील करने लगी, जैसे अकुश का लंड उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा हो…

उसके मुँह से मादक सिसकियाँ निकलने लगी…. आअहह…अंकुशह….और जोरी सीए…चोद्द्द….बोलते हुए उसकी उंगलियों की रफ़्तार तेज होती चली गयी…

आख़िरकार वो लम्हा भी आ पहुँचा जिसकी चाहत हर शरीर को होती है,

उसकी कमर किसी धनुष की तरह बिस्तेर से ऊपर उठती चली गयी, और एक चीख मारते हुए उसकी चूत ने अपना कामरस छोड़ दिया…

अपने गीले हाथ को वो काफ़ी देर तक देखती रही, फिर उसे बेडशीट से पोन्छ कर साँसों को इकट्ठा करते हुए उसके चेहरे पर एक सुकून भरी स्माइल खेल गयी..

अपने खुद के हाथों से अपना चूतरस निकालने में आज उसे एक अलग सा ही मज़ा आया था, जो इससे पहले कभी नही मिला..,
इसी खुमारी में ना जाने कब उसकी आँखें बंद होती चली गयी…
उधर अपना हीरो… अंकुश शर्मा यानी कि मे.. जब घर पहुँचा…

आज कॉलेज मे जो कुछ भी उसके साथ हुआ था, उसे तो वो बुलेट की आवाज़ में ही भूल चुका था, ऊपर से मस्त हवा के झोंके अपने साथ उसके गुस्से को भी उड़ा ले गये थे..

इससे पहले की मे घर तक पहुँचता, कि रेखा दीदी जो भैया की शादी के बाद से अभी तक यहीं जमी हुई थी.. मेरे घर से अपने घर की ओर जा रही थी..

मुझे रास्ते में ही रोक कर एक अर्थपूर्ण स्माइल करते हुए बोली - क्यों रे हीरो.. सवारी कहाँ से चली आ रही है…?

मे – कॉलेज गया था.. आप सूनाओ क्या चल रहा है..?

वो तंज़ कसते हुए बोली – हमारा क्या चलेगा..? दिन काट रहे हैं, तू तो कभी बात भी नही करता…और क्यों करेगा हमारे जैसे छोटे लोगों से…

मे – ऐसा क्यों बोल रही हो दीदी..? वैसे और किसी से बात करते देखा है आपने मुझे..? अब समय ही नही मिलता है, … अब मे कोई जान बूझकर तो ऐसा नही करता ना…!

वो – हां भाई ! वैसे भी दूसरों से फ़ुर्सत मिले तभी तो हमारी तरफ ध्यान जाए भी जनाब का.. क्यों..?

मे – किसकी बात कर रही हो.. ?

वो – क्यों अपनी साली के पीछे -2 नही घूम रहा था जब तक वो यहाँ रही..? और उस रात शांति बुआ के साथ….???

उसने जान बूझकर बात अधूरी छोड़ दी… मेने उसके चेहरे की ओर देखते हुए पूछा.. शांति बुआ क्या..? क्या कहना चाहती हो आप…?

वो – मुझे सब पता है बच्चू.... उस रात क्या हो रहा था… लेकिन मुझे ये भी पता है, कि उसमें तेरी कोई ग़लती नही थी..

मे तो एकदम सन्न रह गया उसके मुँह से ये सब बातें सुनकर, और मन ही मन सोचने लगा.. तो क्या इस भेन्चोद ने सब कुछ देखा था उस रात…?

मुझे चुप देख कर वो बोली – देख भाई.. तू चिंता ना कर, मे किसी को कुछ नही बताउन्गी.. तू ना थोड़ा सा हमारे ऊपर भी नज़रें इनायत कर्दे बस…

मेने फिर भी बचाव की आख़िरी कोशिश करते हुए कहा – मेरी समझ में नही आ रहा दीदी, कि आप क्या बोल रही हो…?

वो तुनक कर बोली – अच्छा ! तो साफ साफ सुन, जिस रात बारात लौट कर आई थी, उस रात तू शांति बुआ के बगल में ही सो गया था… ये तो याद होगा…?

मे – हां ! जगह नही बची थी कहीं, तो सो गया उसमें क्या…?

वो – तो ! रात में शांति बुआ ने मौके का फ़ायदा उठाया, और तेरे ऊपर चढ़ कर चुद रही थी… अब आया कुछ याद…?

और अगर फिर भी तू मुझे चूतिया समझ रहा हो तो, उसके बाद तूने बुआ को पीछे से जबरजस्ति चोदा था… अब बोल !

मेने उस रात की तेरी चुदाई लाइव देखी थी, और सच कहूँ तो तभी से मेरी चूत भी तेरा ख़याल आते ही पानी छोड़ने लगती है यार,

ये कहकर वास्तव में ही वो साड़ी के ऊपर से ही अपनी चूत को मसल्ने लगी…

मे हथियार डालते हुए बोला – ठीक है दीदी आप जो चाहती हैं, वो मे करने को तैयार हूँ.. बोलिए कब और कहाँ करवाना है..?

वो – अभी आजा ना ! घर में, मे और आशा ही हैं, उसको में अभी खेतों पर भेज देती हूँ…

मे – ठीक है, तो फिर चलिए, मे अभी आधे घंटे में आता हूँ आपके पास…

उधर जब मे घर पहुँचा तो मुझे देखते ही भाभी बोली –लल्ला जी थोड़ा समय निकाल कर पंडित जी से बड़े देवर जी के गौने का मुन्हुर्त निकलावाके लाना है.. बाबूजी बोलके गये हैं..

मेने कहा ठीक है भाभी.. मे चला जाउन्गा… उसके बाद मे फ्रेश हुआ, और अपने कपड़े चेंज कर के खाना खाया और निकल लिया रेखा दीदी के घर की तरफ..
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02-05-2020, 12:56 PM,
#73
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
रास्ते में ही आशा दीदी मिल गयी जो अपने खेतों की तरफ जा रही थी, मेने पूछा कि कहाँ जा रही हो, तो उसने कहा – माँ-बापू को खाना देने जा रही हूँ..

तुम कहाँ जा रहे हो..

मेने कहा - रेखा दीदी ने बुलाया है किसी काम से.. मेरी बात सुनकर, वो अपनी बड़ी – 2 आँखें मटकाते हुए बोली – रेखा दीदी को तुमसे ऐसा क्या काम पड़ गया..?

मेने कहा – एक काम करो जल्दी लौट के आ जाओ, खुद ही देख लेना और ये कहकर मेने अपनी एक आँख दबा दी..
वो सब समझ गयी.. और बोली – बेस्ट ऑफ लक… लेकिन मेरे लिए थोड़ा बचा के रखना …अपना… परसाद… और हँसती हुई तेज तेज कदमों से खेतों की तरफ चली गयी…

उनके घर पहुँचने तक रेखा दीदी ने अपने बच्चे को दूध पिलाकर सुला दिया था,

अब वो उसे गाय या भैंस का ही दूध देती थी…अपना दूध पिलाना तो उसने कब का बंद कर दिया था..

मे जैसे ही उसके घर पहुँचा तो, झट से उसने दरवाजा बंद कर दिया.. और मुझे हाथ पकड़ कर अंदर ले जाने लगी…

मेने कहा – दीदी तुम चलो कमरे में, मे टाय्लेट कर के बस एक मिनिट में आया..

उसके जाते ही मेने दवाजे की संकाल खोल दी और ऐसे ही उसे भिड़ा रहने दिया…

मे जब उसके कमरे में पहुँचा तो वो अपनी साड़ी उतार चुकी थी… खाली ब्लाउज और पेटिकोट में उसके कसे हुए पपीते जैसे गोल बड़े-बड़े चुचे आधे बाहर को उबले पड़ रहे थे…

मेने जाकर उसके उन दोनो पपीतों को पकड़ कर ज़ोर से मसल दिया… उसके मुँह से अहह… निकल गयी….

वो नीचे ब्रा नही पहने थी, सो चुचियों को मसल्ते ही उसके निपल ब्लाउज के अंदर से ही खड़े होकर सल्यूट मारने लगे…

मेने उसके निप्प्लो को मसल्ते हुए उसके होंठों पर किस किया और बोला… दीदी !

तुम्हारे ये कलमी आम तो एक दम पक गये हैं… जी करता है चूस-चूस कर खा जाउ…

तो खा ना भेन्चोद… देखता क्या है… मे कब्से तुझे खिलाने के लिए कह रही हूँ…

पर तू तो कहीं और ही मुँह मारता फिरता है… सीईईईईईईईईई…. धीरे मरोड़.. ना..भोसड़ी के तोड़ेगा क्या मेरी घुंडीयों को…

मेने चटक-चटक कर के उसके ब्लाउज के सारे बटन तोड़ दिए.. और उसके नंगे कलमी आमों पर पिल पड़ा….

वो बुरी तरह से सीसीयाने लगी…. हाईए….. खाजा मेरे रजाआ… भेन्चोद… चुसले इनको…. आईईई… मदर्चोद…. काटता क्यो है… चुतिये…

उसके मुँह से गालियाँ सुन कर मेरी उत्तेजना और बढ़ने लगी… मेरा एक हाथ उसकी चूत को सहला रहा था…

उसने भी मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में ले रखा था, और वो उसे मसल और मरोड़ देती…

फिर मेने उसके पेटिकोट का नाडा भी खींचकर तोड़ दिया…

वो शिकायत भरे लहजे में बोली – तू मेरे कपड़े साबित नही छोड़ेगा लगता है..

उसकी पेंटी गीली हो गयी थी… और माल पुआ जैसी चूत पेंटी के ऊपर से ही फूली हुई दिख रही थी…

उसकी चौड़ी दरार देखते ही मेने उसकी माल पुआ जैसी चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर ज़ोर से मसल दिया…

आईईईई…………आराम सीई…..भेन के लौडे… ये तेरी बेहन की चूत है… किसी रंडी की नही जो बुरी तरह से दबोचने में लगा है….

मेने कहा – दीदी… तू अगर अपनी पेंटी को बचाना चाहती है.. तो इसे जलादी से उतार दे…,

वो बोली – तू तो अभी सारे कपड़े पहना है.. और मुझे पूरा नंगा कर दिया..

ये कह कर उसने मेरी टीशर्ट निकाल दी, और लोवर को भी खींच दिया… अपनी पेंटी को उतार कर वो मेरे लंड को मुट्ठी में भरके बोली –

अहह…. क्या मोटा तगड़ा मस्त लंड है तेरा….

तेरे इस मस्त लंड से चुदने के लिए मेरी चूत कब्से फड़-फडा रही थी… अब इसको अपनी चूत में अंदर तक लूँगी….हुउऊंम्म…

आअहह….ये सोचकर ही मेरी चूत पनिया गयी रीई… देख तो कितना रस छोड़ रही है हाईए …ये कहकर वो मेरे लंड को मसल्ते हुए मूठ मारने लगी…

मेने एक हाथ से उसके एक पपीते को दबा दिया, दूसरे हाथ की दो उंगलियाँ उसकी रसीली चूत में पेल दी, और अंदर-बाहर कर के उसे चोदने लगा…

वो हाए-2 कर के अपनी कमर चलाने लगी…

फिर मेने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत से बाहर निकाली और उसके मुँह में डाल दी… वो अपने ही चूतरस को चटकारे लेकर चाटने लगी…
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02-05-2020, 12:56 PM,
#74
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
फिर मे उसके पीछे आ गया, और उसके भारी भरकम गान्ड के पाटों को मसलते हुए, थोड़ा आगे को झुका दिया…

उसकी गान्ड का छेद खुल बंद हो रहा था..

मेने अपना मुँह उसकी गान्ड के पाटों के बीच डाल दिया, और उसकी गान्ड के छेद को जीभ से कुरेदते हुए उसकी चूत में उंगली कर दी…

उसकी चूत और ज़्यादा रस बहाने लगी…

अब उसे और सबर करना मुश्किल हो रहा था, तो उसने मुझे पलंग पर धक्का दे दिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरे मुँह पर अपनी भारी भरकम गान्ड लेकर बैठ गाइिईई……….

मेरे मुँह में उसकी चूत से बूँद-2 कर के शहद टपक रहा था, जिसे मे चासनी की तरह चाटता जा रहा था,

वो भी मेरे ऊपर लंबी होकर पसर गयी, और मेरे लौडे को अपने मुँह में भर कर शॅपर-शॅपर कर के लॉलीपोप की तरह चूसने लगी…

मुझे बाद में पता लगा कि इस पोज़िशन को 69 की पोज़िशन कहते हैं…

मेरी जीभ उसकी चूत में घुसी पड़ी थी, साथ ही उसकी कौए की चोंच जैसी क्लिट जो अब और भी बाहर आ रही थी अपनी उंगलियों में पकड़ कर दबा दिया…

वो बुरी तरह से अपनी कमर को मेरे मुँह पर पटाकने लगी…उसकी गान्ड का छेद खुल-बंद हो रहा था…

मेने अपने दूसरे हाथ का अंगूठा, उसकी गान्ड के सुनहरे छेद पर रख कर फिराया, फिर उसे उसकी चूतरस से गीला कर के धीरे से गान्ड के सुराख में घुसा दिया…

जबादुस्त तरीके से उसकी गान्ड ने मेरे अंगूठे को कस लिया, और अपनी चूत को और ज़ोर से मेरे मुँह पर दबाने लगी…

धीरे – 2 मेने अपना पूरा अंगूठा उसकी गान्ड में डाल दिया, वो गूँग – 2 करते हुए उत्तेजना में मेरा पूरा लंड अपने गले तक निगल गयी…

जिस स्पीड से मेरे हाथ हरकत कर रहे थे, उतनी ही स्पीड से वो मेरे लौडे पर अपना मुँह चला रही थी…

मेरी हरकतें वो ज़्यादा देर तक सहन नही कर पाई, और अपनी चूत का ढक्कन खोल दिया, चूत ने अपना सारा शहद मेरे मुँह में उडेल दिया…!!!

वो अभी मेरे उपेर से लुढ़क कर साइड में लेट कर लंबी-2 साँसें ले ही रही थी, कि मेने उसकी टाँगों को ऊपर कर के अपनी छाती से सटा लिया,

उसकी फूली हुई चूत जो की अब टाँगें ऊपर होने से और ज़्यादा मधु-मक्खी के छत्ते की तरह उभर आई थी, अपनी हथेली से दबा कर रगड़ दिया….

और अब अपना मूसल जैसा सख़्त कड़क लंड उसकी ताज़ा झड़ी हुई चूत में पेल दिया…..

अरे…मारररर……..दिया रीईए…उहह…माआआअ… धीरे…से डालल्ल्ल…कुत्तीए… इसकाअ…एक दिन में ही भोसड़ा बना देगा क्या…भेन्चोद….

बहुत हरामी है तू…भोसड़ी के .. वो दर्द से लिपटी आवाज़ में बोली…. कॉन से जन्म का बैर निकाल रहा है मदर्चोद….

तुमने ही तो कहा था… खा जा मुझे… फाड़ दे मेरी..चूत… अब क्या हुआ….मेने मज़ा लेते हुए कहा…

वो – अरे तेरा फघोड़े जैसा लंड, इतना शख्त और कड़क है … एक दम मोटे डंडे जैसा…. मैया रीि…. अंदर तक चीर डाला रे मेरी चूत को इसने……
आअहह…..उउउफ़फ्फ़…...….

अगर मे एक बच्चे की माँ नही होती.. तो तू मार ही डालता मुझे…आहह……

फिर मेने आराम से अपना मूसल बाहर खींचा… उसने एक राहत भरी साँस अपने नथुनो से निकाली….

अभी वो अच्छे से अपने आप को संभाल भी नही पाई थी, कि मेने फिरसे एक ताक़तवर धक्का उसकी चूत पर मार दिया….

वो फिरसे बिलबिला कर गालियां देने लगी…धीरीए…..कुत्ते….हइई र्रइ….

ऐसे ही कुछ धक्कों तक चलता रहा, वो चुदती भी जारही थी.. और साथ-2 कुछ ना कुछ बड-बड़ाती भी जा रही थी..

मेरे धक्कों की स्पीड के हिसाब से ही उसके मुँह से गालियाँ निकल रही थी.. जो मुझे और ज़ोर से चोदने को भड़का रही थी…

15-20 मिनिट तक हम दोनो ही जमकर चुदाई में लगे रहे.. अब वो भी अपनी गान्ड उछाल-2 कर मस्त होकर चुद रही थी…

फिर हम दोनो ने एक साथ ही अपने – 2 नल खोल दिए और झड़ने लगे…

मेरे गाढ़े – 2 रस से उसकी पोखर लबा लब भर गयी, … वो भी आज पहली बार इतनी गहराई तक लंड लेकर बुरी तरह से झड़ी थी….

आज उसके बोर की अच्छे से सफाई हो गयी थी…
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02-05-2020, 12:56 PM,
#75
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
हमारे गाँव के पंडित जी जो हमारे घर में होने वाले सभी वैदिक कार्यों को संपन्न करते हैं.. उनका घर बीच गाँव में है…

50 वर्षीय पंडित जी के दो संतानें थी, बड़ा लड़का जिसकी उम्र कोई 23-24 की होगी..
उसकी शादी एक साल पहले हो चुकी थी, दूसरी बेटी, उसकी शादी उसके भाई से भी एक साल पहले हो गयी थी..

घर पर पंडित जी, उनकी पंडितानी, और बेटे की बहू.. यही तीन प्राणी रहते थे…

बेटी की शादी हो चुकी थी, और बेटा शहर में रहकर कुछ नौकरी धंधा करता है… महीने दो महीने में एक बार घर आता है..

मेने पंडित जी के घर का दरवाजा खटखटाया… कुछ देर बाद अंदर से एक सुरीली सी आवाज़ आई… कॉन है…?

मेने बाहर से आवाज़ दी – मे हूँ… अपने पिताजी का नाम लेकर उनका बेटा…अंकुश.


थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला… सामने एक 20-21 साल की गोरी-चिटी, शादी शुदा बेटे की बहू… जिसके गोल-गप्पे जैसे कश्मीरी आपल जैसे लाल-लाल गाल… देखते ही जी करे खा जाउ..

गोल चेहरा, बड़ी बड़ी कटीली काली आँखें, नज़र डालते ही सामने वाला घायल हो जाए…

वो साड़ी पहने हुए थी.. कस्के लपेटी हुई सारी के पल्लू में से उसके कठोर मस्त कबूतर अपने होने का आभाष दे रहे थे…

छ्हरहरे बदन की उस नवयौवना की पतली सी कमर के नीचे.. थोड़ा उभरे हुए उसके कूल्हे…

उसने अपनी साड़ी थोड़ी नाभि के नीचे बाँध रखी थी.. जो उसकी पतली सी सारी में से अपनी सुंदरता का बखान खुद ब खुद कर रही थी…

मेने उसे पहले कभी नही देखा था… तो उसे एकटक देखता ही रह गया… वो भी मुझे घूर-घूर कर देखे जा रही थी…

नज़रें चार होते ही, हम दोनो ही जैसे एकदुसरे में खो गये…

कुछ देर तक हम दोनो ही एक दूसरे को देखते रहे… फिर जब पीछे से पंडितानी की आवाज़ सुनाई दी, तो चोंक पड़े…, उसने फ़ौरन अपनी नज़रें झुका ली..

पंडितानी – कॉन है बहू…?

मेने अपना परिचय दिया और पंडित जी के बारे में पूछा.. तो उसने बताया कि वो तो पड़ोस के गाँव गये हैं.. शाम तक ही लौटेंगे…

मेने अपने आने का कारण बताया और शाम को आने का बोल कर वापस अपने घर लौट आया…
शाम को पंडितजी खुद आकर बाबूजी को गौने की तिथि बता गये….

दूसरे दिन मे समय पर अपने कॉलेज पहुँचा…मेने बुलेट स्टॅंड की.. और अपनी क्लास की ओर चल दिया…

अभी मे ग्राउंड क्रॉस कर के लॉबी में एंटर हुआ ही था कि रागिनी अपने सीने पर किताबें चिपकाए मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी…

मेने उसके साइड से निकल कर आगे बढ़ने की कोशिश की तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया…

मेने पलट कर उसकी तरफ देखा… तो वो मेरा हाथ थामे अपनी नज़रें झुकाए खड़ी थी…

मे एकटक उसकी ओर ही देख रहा था, और मन ही मन सोच रहा था, कि ये भेन्चोद अब और क्या नया बखेड़ा खड़ा करना चाहती है…

जैसे-तैसे कर के मेने अपने गुस्से को कल काबू में किया था… अब अगर इसने कोई ग़लत हरकत करने की कोशिश की, तो मे साली की माँ चोद दूँगा…

मे अभी ये सब सोच ही रहा था, कि उसने मेरा हाथ छोड़ दिया और अपने दोनो हाथ जोड़ कर बोली – मुझे माफ़ करदो अंकुश, अपने कल के व्यवहार के लिए मे बहुत शर्मिंदा हूँ..

मे तो मुँह फाडे उसको देखता ही रह गया… अचानक ये चमत्कार कैसे हो गया.. यार, ये शेरनी… भीगी बिल्ली कैसे बन गयी… ज़रूर इसकी ये कोई चाल होगी…

मे – देखो..! मे कल की बात को कल ही भूल चुका हूँ… अब मुझे तुमसे कोई शिकायत नही है… प्लीज़ मेरा रास्ता छोड़ो.. मुझे लेक्चर अटेंड करने के लिए लेट हो रहा है..

वो – तो सिर्फ़ एक बार कह दो कि तुमने मुझे माफ़ कर दिया..

मे – अरे यार ! जब मे कह रहा हूँ.. कि मे कल की बात को भूल चुका हूँ.. तो अब इसमें माफ़ करने की बात कहाँ से आ गयी…

वो – इसका मतलव तुम मुझसे नाराज़ नही हो…?

मे – नही ! मे तुमसे नाराज़ नही हूँ… अब मे जाउ…?

वो – तो अब हम फ्रेंड्स हैं..? और ये कह कर उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया…

मेने भी कुछ सोच कर अपना हाथ आगे कर दिया… तो उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर चूम लिया और थॅंक्स बोलकर वहाँ से भाग गयी…

मे उसकी थिरकति गान्ड को देखते हुए वहीं खड़ा रहा और उसकी इस हरकत का मतलव निकालने की कोशिश करता रहा.. फिर अपना सर झटक कर अपनी क्लास में चला गया…!

लास्ट लेक्चर अटेंड कर के मेने स्टॅंड से अपनी बाइक ली और किक मारकर कॉलेज से चल दिया…

अभी मे कॉलेज के गेट से बाहर निकल ही रहा था, कि देखा ! गेट के ठीक सामने एक खुली जीप खड़ी थी, 5 लड़के जो शक्ल से ही आवारा किस्म के लग रहे थे.. जीप के नीचे खड़े थे…

उनमें से एक लड़का, जो 5’4” हाइट होती, गोरा रंग चौड़ा शरीर, किसी फुटबॉल जैसा, चेहरा घनी दाढ़ी से भरा हुआ… बड़ी-2 लाल – लाल आँखें, देखते ही उसने मुझे हाथ देकर रुकने का इशारा किया…

मेने बाइक रोक दी लेकिन एंजिन अभी भी चालू ही था.. मेरे दोनो पैर ज़मीन पर टीके हुए अभी भी में बाइक की सीट पर ही बैठा था..

वो फुटबॉल जैसा फिर बोला – ओये… ये डग-डग बंद कर…मेने बाइक का एंजिन बंद कर दिया और गाड़ी को साइड स्टॅंड पर लगा कर खड़ा हो गया…

वो मेरे पास आया, अब मेरी हाइट 6’2” , और वो मेरे सामने टिंगा सा तो मुझसे बात करने के लिए उसे अपना थोबड़ा उठाना पड़ा,

वो ऊँट की तरह अपनी गर्दन उठा कर बोला - तेरा ही नाम अंकुश है..?

मे – हां ! क्यों ? क्या काम है..? बोलिए.. मेने शालीनता बनाए हुए कहा..

वो – तू जानता है मे कॉन हूँ…? भानु प्रताप सिंग नाम है मेरा… ठाकुर सूर्य प्रताप का बेटा…

मे – जी बड़ी खुशी हुई आपसे मिलकर.. बोलिए मे क्या सेवा कर सकता हूँ आपकी..?

वो – सेवा तो हम तेरी करने आए हैं… साले.. बहुत चर्बी चढ़ गयी है.. तुझे.. ये कहते हुए उसने अपना हाथ ऊपर कर के मेरा गिरेवान पकड़ लिया…

मे – देखिए भाई साब ! शायद आपको कोई ग़लत फहमी हुई है… मे तो यहाँ सिर्फ़ पढ़ाई करने आता हूँ.. मेने ऐसा कुछ नही किया जो आपकी शान के खिलाफ हो…

वो – अच्छा ! अब हमें बताना पड़ेगा कि तूने क्या किया है..? साले तेरी खाल खींच कर भूस ना भर दिया तो मेरा नाम भानु प्रताप नही…

अभी वो और कुछ कहता या करता… रागिनी भागते हुए वहाँ आई, उसने अपने भाई का हाथ मेरे गिरेवान से झटक दिया.. और बोली…

रागिनी – ये आप क्या कर रहे हैं भैया…?

वो – इस हरम्जादे ने तेरे साथ बदतमीज़ी की है… और तू इसे ही बचा रही है…

रागिनी – आपको कोई ग़लत फहमी हुई है, इसने मेरे साथ कोई बदतमीज़ी नही की, ग़लती मेरी ही थी… और आपसे किसने कहा कि इसने मेरे साथ कोई बदतमीज़ी की है..?

आप जाइए यहाँ से प्लीज़… मे बाद में आपको सब बताती हूँ.. फिर मेरी ओर पलट कर बोली – सॉरी अंकुश.. मे अपने भाई की तरफ से तुमसे माफी मांगती हूँ..

उसका भाई अपने दोस्तों के साथ वहाँ से चला गया… मेने रागिनी की बात का कोई जबाब नही दिया और बिना कुछ कहे अपने घर चला आया…!

उधर रागिनी का बदला हुआ रबैईया देख कर उसकी फ्रेंड्स आश्चर्य चकित थी, वो आपस में ख़ुसर-पुसर करने लगी…

टीना – अरे यार ! आज सूरज पश्चिम से कैसे निकल आया..

मीना – हां यार ! कल तो ये शेरनी की तरह दहाड़ रही थी… और आज खुड़ने ही उसे अपने भाई से बचा लिया… आख़िर कुछ तो बात हुई है.. चलो पुछ्ते हैं..

वो चारों रागिनी के पास पहुँची… जो मेरे बिना कुछ बोले वहाँ से चले आने की वजह से अपने भाई पर गुस्से से भुन्भुना रही थी…

रखी – हाई रागिनी ! आज तो तू कुछ बदली-2 सी लग रही है…

रागिनी – यू शट-अप…! पहले ये बताओ.. तुम लोगों ने मेरे भाई से क्या कहा..?

रीना – अरे ! तू हमारे ऊपर क्यों भड़क रही है यार ! हमने ऐसा-वैसा कुछ नही कहा…

मीना – तुझे तो पता ही है.. कि हमने तुझे भी कल समझाया था… फिर हम तेरे भाई को क्यों ऐसा-वैसा कुछ कहेंगे..

वो तो पुच्छ रहा था.. कि रागिनी के साथ कल कॉलेज में क्या हुआ… तो हमने उसे सारी बात बता दी…

अब तुम दोनो भाई-बेहन अपने आगे किसी को कुछ समझते हो नही…

टीना – मे फिर कहती हूँ रागिनी… इससे पहले कि अंकुश का पेशियेन्स जबाब दे जाए… तुम दोनो भाई-बेहन सही रास्ते पर आ जाओ… वरना तुम्हारी पूरी फॅमिली के लिए मुशिबत हो सकती है.. आगे तुम्हारी मर्ज़ी…

राखी – वैसे आज तेरा बर्ताव देख कर अच्छा लगा… क्या तेरी कोई बात हुई थी उससे..

रागिनी ने उसकी बात का कोई जबाब नही दिया और वो वहाँ से चली गयी…
इधर जब मे घर पहुँचा.. तो आते ही भाभी ने लपक लिया, और बोली – अच्छा हुआ लल्ला तुम आ गये.. मे अभी सोच ही रही थी कि कैसे और किसके साथ जाउ…

मे – कहाँ जाना है आपको…?

भाभी – अरे ! वो पंडितजी की बहू को कल शाम से ही ना जाने क्या हो गया है..?
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02-05-2020, 12:56 PM,
#76
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
कल शाम को वो अंधेरे में शौच के लिए गयी थी… वापस आकर बड़ी अजीब-अजीब सी हरकतें कर रही है…

चाची बता रही थी.. कि उसके ऊपर कोई भूत – प्रेत का चक्कर हो गया है…, अब जल्दी से फ्रेश हो जाओ, और मुझे वहाँ ले चलो… देखें तो सही, हुआ क्या है उसे ?..

मे सोच में पड़ गया,…कि यार ! कल जब में उनके यहाँ गया था.. तब तो वो एकदम भली चन्गि थी, तो अब अचानक से ही क्या हुआ…?

खैर चलो देखते हैं, ये भूत ब्याधा होती क्या है…? ये सोचते -2 मे फ्रेश होने चला गया…

ज्ब हम पंडित जी के घर पहुँचे.., उनके चॉक (आँगन) में लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था, औरतें और मर्द बैठे आपस में बतिया रहे थे…

कोई कुछ कह रहा था, तो कोई कुछ बता रहा था…

जितने मुँह उतनी बातें.. सब अपनी अपनी राई देने में लगे थे.., आप बीती या सुनी सुनाई दास्तान एक दूसरे के साथ शेर कर रहे थे…

हां ! सब्जेक्ट एक ही था…भूत प्रेत के चक्कर…

चूँकि हमारा परिवार गाँव के प्रतिष्ठित लोगों में शुमार होता है, .. और अब तो एमएलए के घर से संबंध जुड़ने से और ज़्यादा मान सम्मान मिलने लगा था…

हमें देखते ही पंडितानी ने भाभी का स्वागत सत्कार किया…,

जब भाभी ने उनकी बहू के बारे में पूछा तो वो हमें उस कमरे में ले गयी.. जहाँ वो लेटी हुई थी..

गेट खुलने की आवाज़ सुनते ही उसने अपनी बड़ी – 2 आँखें और ज़्यादा चौड़ी कर के खोल दी, जिसमे आग बरस रही थी…, उसके इस रूप को देखकर एक बार तो मुझे भी डर लगने लगा…

सामने अपनी सास के साथ भाभी और मुझे देखते ही वो झट से उठ कर बैठ गयी… और भारी सी आवाज़ निकालकर गुर्राते हुए बोली…

तू फिर आ गयी… साली हरम्जादि… कुतिया… मे तुझे जान से मार दूँगा… वो अपनी लाल-लाल आँखें दिखाकर, और हाथों के पंजों को फैलाकर अपनी सास के ऊपर झपटी…, मानो वो उसका गला ही दबा देना चाहती हो…

भाभी चीखते हुए बोली – लल्ला जी जल्दी से पकडो इसे.. !

मेने झपटकर आगे से उसके कंधे मजबूती से पकड़ लिए…और उसे फिरसे बिस्तेर पर बिठा दिया,

वो झटके मार-मारकर मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी…

और हुंकार मारते हुए ना जाने क्या 2 अनप-शनाप बकने लगी… उसकी गर्दन लगातार झटके मार रही थी… इस वजह से उसका आँचल नीचे गिर गया…

सरके बाल चारों ओर बिखर गये, और अब वो किसी हॉरर मूवी की हेरोइन प्रतीत होने लगी थी…

वो आगे को झुक कर अपने सर को आगे पीछे कर के गोल – 2 घूमने लगी…मुँह से गुर्राहट बदस्तूर जारी थी.

उसकी गोल-गोल सुडौल, दूध जैसी गोरी-गोरी चुचियाँ आधी – आधी तक मेरी आँखों के सामने नुमाया हो गयी….
कुछ देर तो मे भी उसकी मस्त कसी हुई जवानी में खो गया… जिससे मेरी पकड़ कुछ ढीली पड़ने लगी…

लेकिन फिर जल्दी ही मेने अपने सर को झटक कर उसे कंट्रोल किया और उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला –

क्यों कर रही हो ऐसा, क्या मिलेगा तुम्हें अपने घरवालों को इस तरह परेशान कर के… ?

मेरी बात सुनकर, एक पल के लिए उसके हाव- भाव बदले……

मानो, वो मुझसे कुछ कहना चाहती हो… लेकिन दूसरे ही पल वो फिरसे वही सब करने लगी…और घूर-2 कर अपनी सास को खा जाने वाली नज़रों से देखने लगी..

भाभी ने पंडितानी को कमरे से बाहर जाने का इशारा किया…, उनके बाहर जाने के बाद हम तीन लोग ही रह गये उस कमरे में,

भाभी ने अंदर से कमरे का गेट बंद कर दिया… और उसके पास जाकेर बैठ गयी…

उन्होने प्यार से उसके कंधे पर हाथ रख कर सहलाया… और बोली – देखो वर्षा….. ये जो तुम कर रही हो, उससे तुम्हारे घर की कितनी बदनामी हो रही है, पता है तुम्हें…?

लोगों का क्या है, उन्हें तो ऐसे तमाशे देखकर और मज़ा आता है, परेशानी तो तुम्हारे अपनों को ही हो रही है ना…

मे जानती हूँ कि तुम्हारे ऊपर कोई भूत-प्रेत का चक्कर नही है…फिर क्यों लोगों का तमाशा बन रही हो…?

भाभी की बात सुन कर वो एक बार के लिए चोंक पड़ी…, और झटके से उसने अपना सर ऊपर किया…

भाभी ने आगे कहा.. चोंको मत…, और बताओ मुझे असल बात क्या है… क्यों कर रही हो ये सब..?

कुछ देर वो यौंही बैठी भाभी को घूरती रही…, मानो उसके मन में कोई अंतर्द्वंद चल रहा हो…, फिर उनके कंधे से लग कर वो फुट – फुट कर रोने लगी, और सुबक्ते हुए बोली …

आप ठीक समझ रही हैं दीदी… लेकिन मे क्या करूँ.. आप खुद ही समझ लीजिए मेरी इस हालत का ज़िम्मेदार कॉन है..?

भाभी उसकी पीठ सहलाते हुए हंस कर बोली – तुझे कल मेरे इस देवर का भूत घुस गया था, है ना..!

उन्होने मेरी तरफ इशारा कर के कहा.., तो उनकी बातें सुनकर उसने अपनी नज़रें झुकाली..
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02-05-2020, 12:56 PM,
#77
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मे भाभी की बात सुनकर चोंक पड़ा…, कुछ कहना ही चाहता था.. कि भाभी ने मुझे चुप रहने का इशारा किया….

फिर वो उससे बोली – तू फिकर मत कर मे सब ठीक कर दूँगी.. बस जैसा मे कहती हूँ, वैसे ही करना… ठीक है..

फिर उन्होने उसकी कमर में चुटकी लेते कुए कहा – अब तू आराम कर, और अपना ये नाटक कल तक और ऐसे ही जारी रखना…..

भाभी की बात सुनकर वो मंद-मंद मुस्कराने लगी, हम दोनो उठ कर बाहर की तरफ चल दिए, वो तिर्छि नज़र मुझ पर डाल कर लेट गयी…

बाहर आकर भाभी ने पंडितनी को अकेले में बुलाया और बोली –

चाची जी, मेरे गाँव में एक भूत भगाने वाला ओझा है.., घर जाकर मे अपने पिताजी को चिट्ठी लिख दूँगी, वो सब संभाल लेंगे, आप बस कल लल्ला जी के साथ वर्षा को उसके पास भेज देना..

चिंता करने की कोई बात नही है.. सब ठीक हो जाएगा…! कल सुबह 10 बजे उसको तैयार करवा देना… ठीक है, मे अब चलती हूँ.

रास्ते में मेने भाभी से पूछा – ये आप वहाँ क्या कह रहीं थीं…? मेरा कॉन्सा भूत है जो घुस गया उसके अंदर…?

भाभी हँसते हुए बोली – चलो घर जाकर शांति से सब कुछ समझाती हूँ तुम्हें..

मे रास्ते भर यही सोच-सोच कर परेशान होता रहा, की आख़िर ऐसा क्या देखा भाभी ने और ये क्यों कहा.. कि मेरा भूत घुस गया है उसके अंदर… आख़िर असल बात क्या है…?

मेरी मनोस्थिति देखकर भाभी मन ही मन मुस्करा रही थी…

घर आकर उन्होने मुझे अपने पास बिठाया और मेरे गाल पर प्यार से सहलकर बोली – हाँ लल्ला ! अब पुछो क्या पुच्छना चाहते हो..?

मे – वही जो आपने वहाँ उससे कहा था.. वो क्या है..?

वो हँसते हुए बोली – तुम्हारे अंदर एक बहुत ही प्यारा सा भूत रहता है, जब तुम उससे कल मिले थे, तो वो भूत उसके अंदर घुस गया..

मे – मेरे अंदर कॉन्सा भूत है.. ? और वो मुझे क्यों नही दिखता..? ये आप कैसी बातें कर रही हो भाभी …?

मुझे तो डर लग रहा है.. प्लीज़ बताइए ना..!

वो हँसते हुए बोली – वही भूत जो थोड़ा – थोड़ा हम सबमें घुस चुका है…तुम्हारे अंदर से… मुझे, रामा को, आशा, को चाची को और शायद अब रेखा को भी .. है ना..!

मे अभी भी नही समझा भाभी… आप सबको कब और कैसे लगा…?

वो – अरे मेरे बुद्धू राजा !.. तुम्हें देख कर तो किसी भी औरत या लड़की को भूत लग ही जाते हैं.. और वो तुम्हारा प्यार पाने को तड़पने लगती है.. समझे कुछ… कि अभी भी नही समझे मेरे अनाड़ी देवर जी…

इतना कह कर भाभी ने मेरे गालों को कच-कचाकर अपने दाँतों से काट लिया और फिर अपनी जीभ और होंठों से सहलाने लगी… जैसे पहले किया करती थी..

मेरे पूरे शरीर में रोमांच की एक लहर सी दौड़ गयी.., मेने झपट्टा मार कर भाभी को पलंग पर गिरा दिया और उनके ऊपर छाता चला गया…

उनके मस्त उभारों को मसल कर, चूत को सहला दिया… वो भी मेरे लंड को पाजामा के ऊपर से ही पकड़ कर मसल्ने लगी…

हम दोनो के हाथ हरकत में आ गये, और इसी तरह एक दूसरे के अंगों के साथ खेलने लगे..

जल्दी ही हमारे कपड़े बदन छोड़कर पलंग से नीचे पड़े थे…

कितनी ही देर तक हम एक दूसरे के बदन से खेलते रहे.. अपने अरमानों को शांत करते रहे…,

कमरे के अंदर वासना का एक तूफान सा आया, और जब वो गुजर गया तो फिरसे हम एक दूसरे की बाहों में पड़े बातें करने लगे..

भाभी मेरे होंठ चूम कर बोली - देखो लल्ला कल तुम वर्षा को मेरे गाँव ले जाने के बहाने कहीं जंगल में अच्छे से उसके साथ मंगल करना.. जिससे उसके शरीर की भूख शांत हो जाए…

वो बेचारी जब से शादी होकर आई है, उसका पति उसके साथ नही रहता है.. अब इस नयी उमर में वो बेचारी कैसे अपने पर काबू रखे..

जब कल उसने तुम्हें देखा.. और शायद तुमने भी उसे प्यार भरी नज़रों से देखा होगा… तो उसकी भावनाएँ भड़क कर बाहर आ गयी..

वो पुरुष का प्यार पाने के लिए तड़प उठी, उसे कोई और रास्ता नही सूझा और उसने ये भूत वाला नाटक कर डाला..

अब तुम्हारा ही लगाया हुआ भूत है तो तुम्हें ही उतारना होगा ना..कह कर भाभी खिल-खिलाकर हँसने लगी…
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02-05-2020, 12:56 PM,
#78
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मेने भाभी को कस कर गले से लगा लिया और बोला – सच में भाभी आप जादूगरनी हो.. झट से उसकी नब्ज़ पकड़ ली आपने…

लेकिन आपको ये पता कैसे लगा.. कि वो ये सब नाटक कर रही है…?

भाभी – तुम्हें याद होगा, .. जब तुम उसे संभालने की कोशिश कर रहे थे, तब एक पल को उसके विचार तुम्हारी आँखों में देख कर बदले थे.. मे तभी समझ गयी.. कि असल चक्कर ये है…

मे – आप सच में बहुत तेज हो भाभी.. साइकोलजी की आपको बहुत नालेज है.. ये कैसे आई आपके अंदर ..?

वो – अपने परिवार को संभालते-2 अपने आप ही आ गयी.. बस…! अब तुम थोड़ा अपना कॉलेज का काम वाम कर्लो.. मे शाम के कामों को देखती हूँ..

कल सुबह ही उसको लेकर जाना है तुम्हें उसके घर तक मे भी तुम्हारे साथ चलूंगी.. जिससे कोई तुमसे उल्टे सीधे सवाल ना करे…..!

ये कहकर और अपने कपड़े पहनकर भाभी, किचन की तरफ चली गयी, और मे अपने कमरे में आकर कॉलेज का काम करने बैठ गया…..!

दूसरे दिन प्लान के मुतविक में वर्षा को लेकर चल दिया… मेरी मंज़िल वो झील थी जहाँ मेने रामा दीदी की सील तोड़ी थी…

उस हसीन पलों के याद आते ही, मेरे लंड में सुरसुरी होने लगी,

गाँव से निकल कर कुछ आगे जाते ही वर्षा भौजी मेरी पीठ से किसी जोंक की तरह चिपक गयी…

मेने कहा – भौजी ज़रा कंट्रोल करो… वरना ये मेरी बुलेट रानी नाराज़ हो गयी तो दोनो ही किसी झड़ी में पड़े मिलेंगे लोगों को…

वो – देवर जी मे आपको कैसे बताऊ कि, आज मे कितनी खुश हूँ.. जबसे आपको देखा है.. मेरे दिन का चैन, रातों की नींद हराम हो गयी थी..

मेने कहा – भौजी ! आज तो मे आपको खुश कर दूँगा… लेकिन कल को क्या करेंगी..?

वो हँसते हुए बोली … कल फिरसे भूत घुसा लूँगी…

मेने कहा - मे मज़ाक नही कर रहा भौजी… बताइए क्या करेंगी…?

वो – कभी-2 तो मौका दे ही सकते हो ना आप…

मे – लेकिन कब तक…?

वो – आगे की बाद में देखेंगे.. अभी से अपना मूड खराब क्यों करें… वैसे हम जा कहाँ रहे हैं..?

मेने कहा – वो आप मुझ पर छोड़ दीजिए… आज मे आपको जन्नत की सैर कराने ले जा रहा हूँ…

मेरी बात सुनकर उसने अपने कबूतर मेरी पीठ में गढ़ा दिए, और हाथ आगे कर के जीन्स के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ कर दबा दिया…

बातें करते -2 कब हम वहाँ पहुँच गये पता ही नही चला.. ठंडी का मौसम था.. तो लोग ना के बराबर ही थे..

क्योंकि झील में नहाने की हिम्मत तो कोई कर नही सकता था..

वहाँ की प्रकरातिक सुंदरता देख कर वर्षा भौजी खुश हो गयी..

मेने अपनी बुलेट रानी, एक पेड़ के पास खड़ी करदी, और घस्स के हरे-भरे मैदान में घुस गये…

वो मुझसे से चिपक कर चल रही थी, जिससे उसके कबूतर मेरे बाजू से सट गये..
मैदान पार कर के हम घूमते-घामते.. हम जंगल के बीच एकांत में पहुँच गये…

एकांत पाते ही वो मुझसे अमरबेल की तरह लिपट गयी और बेतहाशा मेरे चेहरे को चूमने लगी….

उसका उतावला पन देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी… और मे भी उसका साथ देने लगा..

उसकी सारी खोल कर मेने नीचे गिरादी और उसके कुल्हों को कस कर दबाते हुए उसके होंठों को चूसने लगा…

उसने भी मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया, हम एकदुसरे से मानो कॅंप्टेशन करने लगे की देखें कॉन किसके होंठ ज़्यादा चूस पाता है..

फिर एक दूसरे की जीभ आपस में टकराने लगी.. बड़ा मज़ा आरहा था हमें इस खेल में..

जंगल के शांत वातावरण में पक्षियों के कलरव की ध्वनि के बीच हम एक दूसरे में समा जाने की जी तोड़ कोशिश में लगे थे..

उसने मेरे जीन्स की ज़िप खोल दी और उसको नीचे खिसका कर मेरे लंड की कठोरता को अपनी मुट्ठी में लेकर परखने लगी…

अब उसे अपने अंदर लेने की उसकी इच्छा और ज़्यादा प्रबल हो उठी थी…
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02-05-2020, 12:57 PM,
#79
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मेने उसके ब्लाउज के हुक्स खोल दिए और उसकी ब्रा में कसे हुए उसके 33” के पुष्ट उरोजो को मसल्ने लगा….

अहह………देवेरजीीइई…. मेरे रजाआअ… मस्लो इनको… बहुत तडपाते हैं.. ये… मसलवाने को…कोई नही है.. इनकी खबर लेने… वाला…..उफफफफफफफ्फ़…हइईई…..रामम्म….और ज़ोर से मस्लो…..इन्हें…

उसकी ये शायद फेंटसी रही होगी… सेक्स के समय बड़बड़ाने की… जिसे आज वो खुले वातावरण में पूरा कर लेना चाहती थी…

उसने मेरी टीशर्ट को भी निकाल कर एक तरफ फेंक दिया… मेरी पुष्ट छाती देखकर वो मंत्रमुग्ध हो गयी… और अपनी जीभ से उसे चाटने लगी…

कभी मेरे सीने के बालों को सहलाती… कभी उन्हें अपनी मुट्ठी में कसकर खींच देती…

फिर उसने मेरे छोटे – 2 चुचकों को चाट लिया…. मेरे मुँह से सीईईईईईईईईई…..आहह.. भौजिइइई…. बहुत गरम हो तुम….

हां ! मेरे रजाअ… अह्ह्ह्ह…मेरी गर्मी निकाल दो प्लीज़… मे बहुत प्यासी हूँ...वो सिसकते हुए बोली

चिंता मत कर मेरी सोनचिरैया… आज तेरी सारी गर्मी निकाल दूँगा…

फिर मेने उसके पेटिकोट को भी उससे अलग कर दिया… ब्रा- पेंटी में वो बहुत सुंदर लग रही थी… 34-26-34 का उसका गोरा बदन मेरी बाहों में किसी मछली की तरह मचल रहा था..


वो मेरे लंड को मसले जा रही थी… मेने उसकी पीठ सहलाते हुए.. उसकी ब्रा के हुक खोल दिए….

अह्ह्ह्ह… क्या मस्त गोल-गोल इलाहाबादी अमरूदो जैसी उसकी गोरी-2 चुचियाँ जिस पर किस्मिस के दाने जैसे उसके कड़क निपल बहुत ही मन मोहक लग रहे थे…

लगता है.. पंडित के लौन्डे ने जितना वर्क-आउट करना चाहिए था.. उतना भी नही किया था शायद… अभी भी वो किसी कमसिन कली जैसी ही लग रही थी…

मे – अहह…वर्षा रानी तुम्हारी चुचिया तो अभी भी कुँवारी कली जैसी ही हैं…

वो – मे पूरी की पूरी ही कुँवारी हूँ… मेरे राजाजी…

मे – क्या..? रवि भाई ने अभी तक तुम्हें चोदा नही…?

वो – उसकी उंगली जैसी लुल्ली से क्या चुदाई होगी.. उसकी आवाज़ उत्तेजना से काँप रही थी…

मेने उसकी एक चुचि को अपने पूरे मुँह में भर लिया और दम लगा कर सक करने लगा…

वो मस्ती से भर उठी… और अपने दोनो हाथों से मेरे सर को दबाती हुई… पीछे को लहरा गयी….इसस्शह….हइई... चूसो मेरे रजाआ…. खा जाओ इन्हें.. हइईए…..मैय्ाआआअ…….कितनाअ…मज़ाअ…हाईईइ…इनमें…उफफफ्फ़….माआ..

वो बाबली सी हो गयी थी… मे भी आज उस मस्तानी लौंडिया को पूरा मज़ा देना चाहता था…

दूसरे अमरूद को अपनी मुट्ठी में कस लिया और मसलने लगा… उसकी टाँगें काँपने लगी थी…उसने मेरा एक हाथ अपनी पीठ पर रख दिया…

एक टाँग मेरी कमर से लपेट कर अपनी गीली चूत को मेरे लंड के ऊपर रगड़ने लगी…

मेने उसके कूल्हे पकड़कर उसे उठा लिया… और वो मेरी गोद में आकर किसी बच्चे की तरह अपनी दोनो टाँगों को मेरी गान्ड पर लपेटकर बैठ गयी…

और फिर अपनी कमर चला कर, रस से भीगी हुई चूत को मेरे रोड जैसे शख्त लंड पर रगड़ने लगी…

चूस-चुस्कर मेने उसकी चुचियों को लाल कर दिया.. कयि जगह काट भी लिया…

निपल तो सुर्ख हो चुके थे उसके… लेकिन मस्ती से भरी वो बाला मेरे इस सेक्षुयल टॉर्चर को भी झेल गयी…

अब हम दोनो को ही संभालना मुश्किल हो रहा था.. मेने उसे नीचे उतरने का इशारा किया… और फिर उसकी पेंटी को खींच दिया…

हइई…मे मर जन्वान्न्न….ह…क्या गोरी-चिटी.. चिकनी चूत उसकी.. जो रस से सराबोर होकर दिन के उजाले में और चमक रही थी….

मे उसकी टाँगों के बीच बैठ कर उसकी मुनिया को सहलाता रहा, वो मेरे बालों में उंगलियाँ डाल कर फेरने लगी..

फिर मेने उसकी मुनिया के होंठों के ऊपर लगे उसकी रस की बूँदों को अपनी जीभ से चाट लिया…..

उफफफफफफफफ्फ़……माआआआ…..सीईईईईईईईईय्ाआआआहह……और चाटो मेरे दिलवर..

मेने उसकी रिक्वेस्ट को ठुकराया नही और दो-तीन बार और चाट लिया… वो मस्ती से झूम उठी… उसने मेरे सर को अपनी प्यारी रस-गगर के मुँह पर दबा दिया…

मेने अपना सर उठा कर उसकी तरफ देखा तो वो अपना सर पीछे की तरफ कर के मस्ती से आसमान को निहार रही थी…

मेने उसे आवाज़ दी… भौजी… ! तो उसने मेरी ओर देखा ..हुम्म्म.. बस इतना ही बोली वो..

मे – तुम्हारी रसीली मुनिया का रस चूस लूँ.. ?

वो – हइईए….पुछ्ते क्यों हो जानू… ये सब कुछ तुम्हारा है.. अब.

मेने उसकी तरफ मुस्करा कर उसकी मुनिया के होंठ खोल लिए और अपनी जीभ से उसके अन्द्रुनि गुलाबी हिस्से को चाट लिया…
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02-05-2020, 12:57 PM,
#80
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मस्ती में उसकी आँखे बंद हो गयी, अपनी एक टाँग उठाकर उसने मेरे कंधे पर टिका ली, और मेरे सर के बालों में अपनी उंगलियाँ फँसाए, वो किसी दूसरी दुनिया की सैर पर निकल पड़ी…



अपनी जीभ की नोक को अंदर तक पेल कर, मे उसकी चूत को किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा.. फिर उसके भग्नासा (क्लिट) को अपने होंठों में दबा कर अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी…

वो दर्द से कराह उठी… आह.. इसका मतलब इसकी चूत उंगली लायक ही है अभी..

मेने उसके क्लिट को चूस्ते हुए धीरे-2 अपनी उंगली को अंदर-बाहर कर के उसे चोदने लगा…

उसकी मुनिया लगातार रस बहा रही थी.. जिसे में अपनी जीभ से चाटता जा रहा था…

आख़िरकार उसकी रस से भरी गगर छलक पड़ी.., उसने मेरे मुँह को बुरी तरह से अपनी रस गगर के मुँह पर दबा दिया…

वो अपने पंजों पर खड़ी होकर किल्कारियाँ मारती हुई झड़ने लगी…..!
______________________________



मेने खड़े होकर उसको चूमते हुए पूछा – मेरी सेवा पसंद आई.. भौजी…?

वो – वादा करो देवर्जी… ऐसी सेवा मुझे आगे भी मिलती रहेगी… जब आपकी इच्छा हो तब.. मे आपसे कोई ज़ोर ज़बरदस्ती से नही कहूँगी… बस जब आपका मन करे..

मे कोशिश करूँगा, वादा नही कर सकता…, लेकिन अभी तो पूरी पिक्चर वाकी है मेरी जान.. उसे तो देखलो…

वो मेरे होंठों को चूमकर बोली – आपके ट्रेलर से ही पता लग रहा है कि.., पिक्चर सूपर हिट होगी..

मे – तो फिर अब मेरे बबुआ की भी थोड़ी सेवा हो जाए… ये कह कर मेने उसके कंधों पर दबाब डाल कर उसे बिठा दिया..,

अपने घुटनों पर बैठ उसने मेरा अंडरवेर नीचे कर दिया.. जिसे मेने अपने पैर से दूर फेंक दिया…

सबसे पहले उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ा और बोली – आहह…. ये इतना गरम क्यों है देवर जी…?

सामने इतना गरम कुंड जो है… मेने हँसते हुए उसकी बात का जबाब दिया तो वो उसे अपने गाल से रगड़ते हुए बोली

कितना लंबा तगड़ा हथियार है तुम्हारा, मेरी छ्होटी सी चूत की तो धज्जियाँ उड़ा देगा ये..….!

मे – ऐसा नही है भौजी, देखना कितना मज़ा देता है ये, आज के बाद तुम्हारी गुलाबो इसको ही लेने को तड़पति रहेगी..…

वो हूंम्म… कर के उसको उलट-पलट कर देखने लगी.. फिर उसने एक बार उसे चूम लिया…उउउम्म्म्मम…पुकछ…कितना प्यारा है ये…



हाथ से आगे पीछे करते हुए उसे एक बूँद उसके पी होल पर मोती जैसी चमकती नज़र आई, जिसे उसने अपनी जीभ की नोक पर ले लिया और चखने लगी…

हूंम्म्म… टेस्टी है… कह कर उसने मेरे लाल सेब जैसे सुपाडे को मुँह में भर लिया….और चूसने लगी…!

मेने उसके सर पर हाथ रख लिया और उसे सहलाने लगा… वो धीरे-2 उसे अंदर और अंदर लेती जा रही थी…

सीईईई…अह्ह्ह्ह… राणिि…ज़रा मेरे सिपाहियों की भी सेवा करती जाओ साथ में.. मेरी बात पर उसने सवालिया नज़र से मेरी तरफ सर उठा कर देखा..

मेने कहा… नीचे मेरे टट्टों को भी सहलाओ साथ में और चूसो भी… तो वो वैसा ही करने लगी… अब मुझे और ज़्यादा मज़ा आने लगा…

कुछ देर की चुसाई और सेवा भाव से मूसल राज आती प्रशन्न हो गये… और एकदम लट्ठ की तरह शख्त होकर ठुमके लगाने लगे…

मेने उसे वहीं घास पर लिटा दिया… और उसकी टाँगें मोड़ कर उसकी मुनिया को सहलाया, उसका हौसला बढ़ाया.. और फिर उसे चूम कर अपना सुपाडा उसकी गरम चूत के मुँह पर रख दिया…
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