Bhai Behen Chudai मैं ,दीदी और दोस्त
08-22-2018, 10:57 PM,
#21
RE: Bhai Behen Chudai मैं ,दीदी और दोस्त
राहुल आज बड़ा ही उदास है और स्कूल में भी चुप ही रहता है ,मुझे ये देखकर बहुत ही चिंता होती है की आखिर मेरा प्यारा दोस्त यु खोया खोया सा क्यों लग रहा है ,
'क्या हुआ बे साले इतना उदास सा क्यों रह रहा है तू ,'राहुल चुप
'बता दे तुझे दीदी की कसम है 'मुझे थोडा गुस्सा आ जाता है ,
'भाई दीदी की कसम मत दिया कर,कुछ बताने लायक होता हो तुझे नहीं बताता क्या ,अपने दोस्त को ऐसा समझ रखा है तूने ,'राहुल भी थोडा गुस्सा हो गया ,
मैंने मन ही मन उसे गलिया दि ''साले कोण सा तुम लोग मुझे कुछ बताते हो ''
'बोल दे ना भाई '
'कुछ नहीं दोस्त '
'बोल भोसड़ीके 'राहुल ने मुझे घूर के देखा
'कुछ नहीं बोला ना बे क्यों आंड खा रहा है ,'मैंने राहुल के आँखों में देखा कुछ तो गलत था ,
'हुम्म ओके चल आज बियर पीते है ,'राहुल ने मुझे बड़े आश्चर्य से देखा
'साले तू कब से पिने लगा,'
'जब से तू मुझसे चीजे छिपाने लगा है ,अब चल '
'सच भाई कोई प्रोब्लम नहीं है,तू क्यों टेंशन ले रहा है ,'
'साले आजकल मैं धयान करता हु ,तेरी आँखे बता रही है की तू छुपा रहा है ,ठीक है नहीं बताना है तो मत बता (मैं कुछ देर सोच में पड़ा रहता हु )अच्छा एक बात बता जो प्रीति ने मुझे बताया वो सच है क्या ,'मेरी बात से राहुल बिलकुल ही काप सा गया जो मैंने भाप लिया
'क्या बताया 'मुझे प्रीति ने कुछ भी नहीं बताया था ,
'वही आयशा और दीदी और प्रीति और परमिंदर नानू विक्की ,तू तो मुझसे कोई बात नहीं छुपता ना तो इतनी बड़ी बात कैसे ...'मैंने कुछ भी नहीं किया था पर ना जाने क्यों मेरी आँखों में आंसू आ गए ,राहुल को लगा की शायद इसे सब पता चल गया है ,वो डर गया
'भाई कुछ तो नहीं हुआ 'मैंने उसे देखा मेरी आँखे लाल हो चुकी थी ,पता नहीं आजकल मैं अपने इमोशन को काबू से बाहर कर देता था ,राहुल सच में डर से कापने लगा ,
'भाई सॉरी वो दीदी ने कहा था की ...'मेरे आँख लावो की तरह उबलने लगे थे और आंसू की धार बह चली थी मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है ,पर डॉ के कहे मुताबिक मैं बस अपने को छोड़ देना चाहता था,
'मुझे विडिओ देखना है ,'विडिओ के नाम सुनकर राहुल पसीने से लथपथ हो गया और वहा से भागने लगा ,,मैंने उसका हाथ पकड़ कर खीचा वो मेरे आगे किसी गुडिया से जादा ताकतवर नहीं लग रहा था मैंने अपने हाथो से उसकी गर्दन पकड़ी और उसे हवा में उठा दिया ,राहुल मेरे इस रूप को देखकर दंग था ,सायद मैं भी
'भाई ये क्या कर रहा है ,विडिओ मेरे पास नहीं है ,'मुझे अपने आप का अहसास हुआ तो मैंने उसे निचे उतार दिया ,वो अब भी डरा हुआ था ,
'मैं डॉ चुतिया से मिला था ,और मैं जनता हु की विडिओ कहा कहा पर है ,अब तू बतायेगा की नहीं ,तू मेरा भाई है ,पर ये मेरी दीदी का सवाल है ,बाकि तू समझदार है,'राहुल ने एक गहरी सांसे ली और डॉ को गाढ़ी गाढ़ी गालीया अपने मन में दिया ,
'ठीक है चल ,पर मुझसे एक वचन कर अगर तू मुझे अपना भाई मानता है तो ,'मैं थोडा नार्मल हो चूका था ,मेरे मुह से मेरे ही राज निकल गए थे और मैंने अँधेरे में तीर मारा था ,
'तेरे लिए कुछ भी कर सकता हु तू जानता है ना ,'
'हां भाई पर ये दीदी से जुड़ा मामला है ,पता नहीं तू इसे देखने के बाद कैसा रियेक्ट करेगा ,'मुझे लगा की जो फोटोज मैंने दीदी के मोबाईल में देखि थी शायद ये वही होंगी और मैं सम्हाल लूँगा ...
'ठीक है बता क्या वादा चाहिए तुझे ,'
'तुझे मेरी कसम है ,तुझे दीदी की कसम है की तू उसे देख कर कोई भी उल्टा सीधा या जल्दबाजी में कुछ भी नहीं करेगा ,पहले जा कर दीदी से मिलेगा उन्हें इनके बारे में मत बताना ,पर मैं जनता हु तू दीदी से मिलकर शांत हो जायेगा तो पहले दीदी से मिलकर बात करेगा फिर ही तू कुछ और करेगा ,मंजूर 'मैं थोड़ी देर उसे देखता रहा
'अगर मंजूर ना हो तो तू मेरी जान ले ले मैं तुझे कुछ नहीं दिखाऊंगा 'मैंने उसे हसकर देखा और उसे अपने गले लगा लिया ,वो साला बड़ा प्यारा लग रहा था ,
'ठीक है मंजूर ,लेकिन अभी चल '
राहुल ने अपने रूम में लेपी खोली पासवर्ड डाला और उस फोल्डर को खोला मुझे तुरंत दीदी का नाम दिख गया ,
'तू हट मुझे देखना है ,'
'पर भाई मैं दिखा रहा हु ना 'मैंने उसके कंधे को पकड़ कर उसे पीछे धकेल दिया और खुद लेपी के पास चला गया वो लडखडाता हुआ पीछे की आ गया और मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,
मैंने दीदी वाला फोल्डर खोलने के लिए कर्सल वह ले गया,राहुल की दिल की धड़कने बढ़ी हुई थी जिसकी आवाज मुझे भी सुनाई दे रही थी ,जब इसकी धड़कने इतनी बडी हुई है तो मेरा क्या होगा क्या मैं सच में इसे सम्हाल पाउँगा अगर कुछ नया दिख गया तो ,मैं लगातार 15 गहरी सांसे ली राहुल मुझे ऐसे देख रहा था जैसे मैं कोई भूत हु ,मेरा मन जब पूरी तरह से शांत हो गया तो मैंने उसे मुस्कुरा के देखा और क्लिक कर दिया ,
इतने विडिओ मेरी धड़कने बड रही थी मैंने फिर 10 गहरी सांसे ली खुद को सम्हाल कर मैंने पहले विडिओ में क्लीक किया राहुल वह से जाने लगा मैंने उसका हाथ पकड़ उसे रोक लिया ,
पहले विडिओ को देखते देखते मेरी आँखों में अंगारे थे मेरा पूरा शारीर काप रहा था मैं जमीन में बैठ गया और आँखे बंद कर बाद दीदी के चहरे को देखने लगा ,
''दीदी मेरी प्यारी दीदी क्या क्या नहीं सहा है तुमने इतना क्यों उससे प्यार किया जिसने तुम्हे धोखा दिया...तुम्हारी कोई गलती नहीं थी दि तुम प्यार में थी उस लड़के के ,तुमने मुझे नहीं बताया राहुल से छुपाया क्योकि तुम प्यार में थी अपने भाइयो के ,सब अकेली सहती रही ना '
राहुल के आँखों से भी आंसू की धरा बहाने लगी ,वो मुझसे आकर लिपट गया ,
'भाई मैं भी तेरा गुनाहगार हु ,जब परमिंदर और आयशा वाला केस हुआ तब से ये विडिओ मेरे पास है ,तब से मैं ये दर्द अपने जेहन में दबा के रख्खा हु ,मुझे माफ़ कर दे मेरे भाई ,'मैं राहुल से लिपट के रोता रहा और वो मुझसे जब तक हमारे आंसू नहीं थम गए ,अब मेरा दिल बिलकुल हल्का था और रास्ता साफ ...
मैं उठा और दूसरे विडिओ को चलाने के लिए क्लीक किया ,लेकिन राहुल ने मुझे टोक दिया ...
'भाई सब में वही है ,लेकिन अगर तुझमे हिम्मात है और तू ये देख पाए तो आखरी विडिओ देख ले ...'मैंने आखरी विडिओ चलायी पहला नजारा देख कर ही मैं पास राखी खुर्सी पर गिर गया मैं किसी बुत की तरह सब देख रहा था लेकिन राहुल ने उसे फ़ास्ट फारवर्ड किया उसने मुझे इंजेक्शन के बारे में बताया और उस जगह विडिओ को ले गया जहा मेरी और दीदी की बात हुई थी मेरी आँखों में आंसू थे और उस दिन का मंजर साफ़ हो चला था...इतने पर राहुल ने विडिओ बंद कर दिया मेरे अंग अंग में बस अंगारे थे आँखों में पानी था ,जो मेरी जलती हुई आँखों को थोडा सकून दे रही थी ,मेरे दांत आपस में पिस रहे थे ,चहरा किसी अंगारे सा तपता हुआ किसी टमाटर सा लाल हो चूका था,मै८न बेसुध सा अपनी जगह पर बैठा निर्वात(खाली स्थान) को ताक रहा था ...
'भाई इन लोगो ने दीदी के साथ 8 घंटो तक बलात्कार किया'मैंने सर उठाकर राहुल को देखा
'हा भाई ये बलात्कार ही था ,मैंने भी ये विडिओ कल ही देखा,पर ठहरा नामर्द ,हा भाई मैं नामर्द हु जो ये सब देखकर भी चुप बैठा हु एक जन तो अब जा चूका है,पर बाकि दो को तडफा तडफा के मरना भाई,उन्होंने हमारी दीदी के जिस्म से कपडे उतारे है ,उनके जिस्म से चमड़ी उखाड़नी चाहिए 'राहुल के भी हाथ पाँव कापने लगे थे ,मैं अपनी जगह से उठा और राहुल को गले से लगा लिया वो फफककर रो पड़ा ...
'भाई जो तूने किया उसके लिए भी हिम्मत चाहिए ,अब गुस्से से काम नहीं चलेगा हमें इस पेड़ के जड़ तक को काट के फेकना है ,तू अपने को रिलेक्स कर और जा कर विक्की और नानू से मिल और इस पते पर ले आ (मैंने डॉ वाला पता उसे दिया ),याद रहे उन्हें पता नहीं चलना चाहिए की तू गुस्से में है ,और तू उन्हें कॉल नहीं करेगा और ऐसे मिलना की कोई देखे नहीं ,तेरे साथ आते भी कोई नहीं देखना चाहिए,,,अब हम दोनों भाई मिलकर कुछ करेंगे पर दीदी को पता नहीं चलना चाहिए ,पुरे विडिओ मैं अभी डिलीट कर रहा हु ,तुझे कोई प्रोब्लम तो नहीं 'राहुल बड़े आश्चर्य से मुझे देख रहा था ,उसके आँखों में मेरे लिए आंसू था ,उसने बड़े प्यार से मुझे नहीं कहा ,
'मैंने तुझसे वादा किया था ना की दीदी से मिलकर ही जाऊंगा तो मैं दीदी से मिलाने जा रहा हु'
वो मेरे गालो पर अपने हाथ रख कर मुझे बड़े प्यार से देख रहा था ,
'साले आज तो तू दीदी की तरह समझदारी वाली बात कर रहा है ,इतना समझ कहा से आ गया'
'दीदी से '....
मैंने पुरे विडिओ डेलेट कर डी और घर को चला गया मुझे नहीं पता था की मैं दीदी से कैसे डील करूँगा ,दीदी के रूम को नोक किया दीदी ने बड़े प्यार से मुझे देखा ,
'क्या हुआ भाई थका हुआ लग रहा है ,काफी पिएगा क्या ,बनाकर लाऊ"मैंने ना में अपना सर हिलाया ,दीदी की बातो में प्यार था ,उनकी आँखों में प्यार था ,मैं उनके पास आकार बैठ गया वो एक किताब की ओर देख रही थी ,मैंने दीदी के आँखों में आते बालो को अपने हाथो से हटाया ,उन्होंने मेरी तरफ देखा और प्यार से मेरे होठो पर एक चुम्मन दे दि,दीदी के चहरे पर एक मुस्कान खिल रही थी अब वही मुस्कान मेरे चहरे पर भी थी ,मैं उनके प्यारे चहरे को निहारे जा रहा था की उन्होंने मुझे आँखों से इशारा किया ,क्या हुआ ,
'आप पढो ना मुझे बस आपको देखने का मन हो रहा है ,'वो मेरे गालो पर अपना हाथ रख सहला डी और फिर से किताब पड़ने लगी ,जाने कैसे मेरी दीदी ने मुझे अपनी काले कल से अलग रखा होगा ,हमारे बीच इतना सब हुआ कैसे वो अपनी आग को उस दवाई के इतने स्ट्रोंग असर के बाद भी सिर्फ प्यार ही दिखाया ,तुमने बहुत सहा है दीदी ,बहुत जली होगी तुम भी अपने वासना के आग में पर कभी मुझपर अपनी आंच तक नहीं आने दि ,हमेशा अपने प्यार की छाव तले मुझे बिठाया ,जब मैं रुका तो तुम भी रुक गयी उस आग को तुमने कैसे सम्हाला होगा,इतना कुछ सहती रही ,इतना जलील किया है उन लोगो ने तुम्हे और तुम बस हमें खुशिया और प्यार ही देती रही ,क्या बीती होगी तुमपर जब वो गिध्ध तुम्हे नोच रहे थे और तुम अपने भाई के लिए रो रही थी ,उन्होंने तुम्हारा बलात्कार किया ,हा ये बलात्कार ही था और तुम तुम बस मुझे याद करती रही ,तुमने मुझे जो दिया है उसका एक तिनका भी तुम्हे दे पाऊ तो मेरा तुम्हारा प्यार सफल हो जाएगा ,तुमने तो खुद को मेरे प्यार में भूला दिया और मैं ,मैं अनजान सा बस....लेकिन अब नहीं दीदी हां सच कहता है राहुल उनके शारीर से उनकी चमड़ी तक खीच लूँगा मैं ,तुमपर कोई आंच अब नहीं आएगी नहीं आएगी ,तुम्हे पता चलने भी नहीं दूंगा ,तुम्हारे इस हालत के जिम्मेदारो को ढूंड ढूंड कर मरूँगा जड़ से मिटा दूंगा ....
मेरी आँखों में आंसू की बुँदे देख दीदी घबरा गयी और मेरे आंसुओ को अपने होठो में ले लिया ,मेरे चहरे पर फिर एक मुस्कान आ गयी ,
'क्या हुआ पागल ऐसे क्यों देख रहा है ,'दीदी ने मेरे गालो को सहलाते हुए पूछा ,मैं आगे बढ़कर उनके होठो को अपने होठो में लिया और उनमे खो गया जब हम अलग हुए तो दीदी मुस्कुरा रही थी ,
'इसलिए देख रहा हु ,क्योकि मेरी प्यारी दीदी हस्ते हुए इतनी प्यारी दिखाती है ,'दीदी ने मेरी आँखों में देखा उस प्यार भरे अहसास को देखकर दीदी ने मुझे अपनी ओर खीचा और मेरे होठो को अपने होठो में भर लिया .....

एक बड़ा कमरा जो एक सुनसान जगह पर था राहुल उसपर टहल रहा था ,वो बड़ा ही बेचैन लग रहा था,विक्की और नानू भी किसी का बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे,लेकिन वो एक टेबल पर बैठे सिगरेट पी रहे थे ,
'अबे कब आएगी तेरी वो item साला इतनी देर हो गए और उसे करेंगे कहा यार,यहाँ तो बिस्तर भी नहीं है .'नानू ने अपने हाथो से सिगरेट फेकते हुए कहा,राहुल ने बस एक नजर उन्हें देखा और चुप ही रहा ...
इधर मैं उस जगह पर पहुच चूका था और मैंने दरवाजा खटखटाया राहुल दरवाजा खोलते ही उन दोनों के तरफ इशारा करते हुए एक कातिल मुस्कान में मुस्काया..मुझे देख कर वो दोनों सकते में आ गए
'आकाश तुम यहाँ 'विक्की ने कहा
'हा मैं 'मैं हस्ते हुए उनके पास जाता हु और हाथ मिलाता हु ,विक्की जैसे ही हाथ आगे बढाया मैंने उसे अपनी ओर खीच लिया और बड़ी जोरो से एक लात उसके टांगो के बीच लगा दि,वो तिलमिलाता हुआ बैठ जाता है ,और मुझे आश्चर्य से देखने लगता है ,उसका चहरा देखकर मेरे सर में खून चढ़ गया,मुझे वो सभी दृश्य दिखाई पड़ने लगे जो दीदी के साथ हुए थे ,इससे पहले की नानू कुछ समझ पता मैं नानू पर भी झपटा और उसके गर्दन को दबाते हुए उसका सर टेबल पर दे मारा,एक ही वार दोनों के लिये काफी थी पर मुझे देख कर राहुल को ना जाने कौन सा जोश आ गया की उसने पास रखे एक लोहे के सरिये से नानू के सर पर एक वार कर दिया ,नानू का सर फटा और वो जमीन में बेहोश हो पद गया ,इधर विक्की ने कुछ होश सम्हाला और खड़े होने की कोसीसी की पर राहुल ने लगातार कुछ वार उस सरिये से कर दिए..मैंने राहुल को रोका और इशारा किया ,हमने दोनों को खुर्सियो में बांध दिया,पास में ही पानी से भरी एक बाल्टी राखी थी ना जाने कब से उसे भरकर रखा गया हो ,मैंने उसे अपने पास ले लिया ...और नानू के सर पर उधेल दिया ,नानू को होश आने लगा और विक्की ने हमें सवाल भरे निगाहों से देखा,,
'ये सब क्या है ,'मैंने उसे गुस्से दे देखने लगा ,मेरे अंदर की जवाला इतनी बढ़ रही थी मुझे नहीं पता था की मैं कितने देर में अपना आप खो दूंगा
'तम्हारी सच्चाई हमें पता चल चुकी है ,अब तुम्हरे पास एक ही आप्शन है की तुम हमें बताओ की वो दवाई तुम्हे कहा से मिली,'मेरी बात सुनकर विक्की का चहरा लाल हो गया ,वो डर से कुछ बोल नहीं पा रहा था पर उसने उसने थोड़ी हिम्मत जुटाई,,
'हमें नहीं पता वो परमिंदर जानता था,'मेरे चहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आई और राहुल ने अपना हाथ चलाया और कई घुसे एक साथ जड़ दिए ,विकी बोखला गया पर कुछ कह ना सका मैं पास ही पड़े सरिये को पकड़ कर आया और विक्की के गले में रख दिया ,
'तुमने जो किया मन तो कर रहा है की तुम्हारे शारीर से तुम्हारी चमड़ी भी नोच लू ,पर तुम्हारे पास बचने का एक रास्ता है ,एक नाम और तुम आजाद ,बताओ जो भी पता है ,'मेरी आँखों में दीदी का चहरा घूम गया पर मैंने अपने को खोने से रोका ...विक्की जानता था की मेरे सर पर खून चढ़ा हुआ
'प्रफुल्ल ,एक फार्मसिस्ट है ,उसने ये दवाई बनायीं है पर उसका भी कुछ दिन पहले क़त्ल हो चूका है ,आगे का मुझे नहीं पता ,उन लडकियों को परमिंदर को तैयार करने कहा गया था,ताकि उन्हें हाई क्लास के लिए तैयार किया जाय ,हम लोग एक दो बार प्रफुल्ल के लेब गए थे पर ये उससे या परमिंदर से कोण करता था ये किसी को नहीं पता ,प्लीज् भाई अब हमें छोड़ दो 'राहुल और मैं एक दुसरे को देखते है,
'अच्छा एक बात और बता की प्रीति को तो तुमने धंधा कराया था ना ,तो ग्राहक कहा से लाते थे और कहा ले जाते थे ,'प्रीति का नाम सुन मैं थोडा हैरान तो हुआ पर मुझे पता था की राहुल को हो पता है वो मुझे नहीं पता ,
'वो वो परमिंदर ही सब करता था हमें कुछ नहीं पता ,'मैंने सरिया उसके गले में धकेल दिया
'जब तुझे कुछ नहीं पता तो तू जी कर क्या करेगा ,'एक खून की फुहार फूटी और मेरे चहरे पर आ लगी ,
ये मंजर देख नानू का तो पेसाब निकल गया ,राहुल उसे लात घुसे से मारने लगा और आख़िरकार तब तक मेरे हाथ से सरिया लेकर उसने उसका काम भी खत्म कर दिया ...
लेकिन राहुल का गुस्सा शांत नहीं हुआ उसने अपने जेब से एक चाकू निकला और उन्दोनो के चमड़े को उनके शरीर से उधेड़ने लगा ,राहुल को देख मुझे लगा जैसे वो विक्षिप्त हो चूका है ,मैंने उसे उसके मन की भड़ास निकलने से नहीं रोका और आश्चर्य जनक रूप से मेरा मन बहुत ही शांत हो चूका था,मैंने डॉ चुतिया को कॉल किया और पूरी कहानी बताई ,उन्होंने हमें वह से जल्दी निकलने और लाश को वही छोड़ देने को कहा ,,...मैंने फिर एक बार मुड़कर राहुल को देखा वो अब अपना सर पकडे बैठा था उसके कपडे तक खून से रंग चुके थे ,मैंने फिर डॉ को कॉल लगाया
'डॉ वाश रूम कहा है ,'
'मकान के पीछे वाले हिस्से में देखना '
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08-22-2018, 10:57 PM,
#22
RE: Bhai Behen Chudai मैं ,दीदी और दोस्त
आज मुझे इतना सकून हो रहा था जैसे कोई बढ़ा बोझा सर से उतर गया हो ,मैं जब घर आया तब शाम रात में तब्दील होने को थी,मेरे आते ही दीदी ने मुझे बड़ी ही परेशांन निगाहों से देखा
'कहा था तू इतने देर से ,पता नहीं क्यों मुझे इतनी बेचैनी हो रही थी,कॉल भी नहीं उठाया और राहुल कहा है ,उसने भी कॉल नहीं उठाया कही जाते हो तो ठीक है पर कॉल तो कर सकते थे ना ,'मैंने हलके से मुस्कान के साथ दीदी को देखा ,वो मुझे झूठे गुस्से से देखती है और आंखे बड़ी करके डराने की कोशिस करती है ,जिससे मेरी हसी छुट गयी ,और मैंने दीदी को अपनी बांहों में भर लिया,
'आई लव यू दीदी,'मैंने दीदी के मासूम से चहरे को प्यार से सहलाते हुए उनके नर्म गालो में एक चुम्बन रसीद कर दि ,
'मी टू भाई ,'दीदी के आँखों में चमक आ चुकी थी ,हम एक दुसरे के चहरे को बड़े प्यार से देख रहे थे की मम्मी ने किचन से ही आवाज लगायी ,,
'अगर तुम दोनों भाई बहन का इमोशनल ड्रामा हो गया हो तो खाना लगा दू ..'मैं और दीदी हस्ते हुए अलग हो गए ....
रात मुझे दीदी से मिलाने का मन हुआ और जब मैं उनके रूम पंहुचा तो वो किसी से विडिओ चैट कर रही थी ,वो हस रही थी शर्मा रही थी,उन्होंने मुझे देखा तो इशारे से मुझे अपने पास बुला लिया ,सामने अविनाश था मैंने उसे हल्लो कहा और उन दोनों को मेरे वह होने से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था ,बल्कि दीदी जादा खुश दिख रही थी मतलब साफ़ था की अभी ये दोनों कोई गलत चीज नहीं कर रहे थे ...लेकिन दीदी उसके हर बात पर हस्ती थी,थोड़ी शर्मा जाती मैंने दीदी का ऐसा रूप कभी नहीं देखा था ,मुझे इतना तो समझ आने लगा की दीदी उससे प्यार करती है या बहुत ही जादा पसंद करती है ...मैंने भी भी उससे थोड़ी फॉर्मल बात की और उसने हमें गुड नाईट कहकर चैट ख़तम कर दिया ..दीदी ने लेपी बंद किया और मुझे शर्मा कर देखा मैं उनके गोद में सो गया
'दीदी एक बात पुछू ,'
'हा बोलो 'वो मेरे बालो को सहलाती रही
'ये अविनाश मुझे ठीक नहीं लगता,'दीदी के हाथ अचानक से रुक गए
'क्यों ऐसा क्यों बोल रहा है,'मैंने सर उठाकर उनको देखा ,उनके चहरे की लाली कुछ फीकी सी थी
'वो आपने बर्थ डे पर गौर किया इतना खर्च किया था,इतने पैसे कहा से लाया होगा ,'मैं जैसे अपने ही मन की बात कह रहा था,लेकिन दीदी फिर मुस्कुरा पड़ी
'अरे यार उसके कांटेक्ट बहुत है ,किसी ने फिनेंस कर दिया होगा,राजनीति में ये होता है ,सभी बड़े कारोबारी अपना काम निकलने के लिए राजनेताओ की मदद लेते है ,और थोड़े पैसे पार्टी फंड में भी डाल देते है ,'
'मगर आप तो कहती हो वो इमानदार है '
'हा वो तो है ,पर यार कितना भी इमानदार हो जाय पार्टी चलने के लिए पैसे तो चाहिए ना वो तो बड़े बिजनेसमैंन ही देते है ना ,'दीदी ने मेरे गालो पर अपना हाथ रखा ...
'ह्म्म्म आप को कभी नहीं लगा की अविनाश के सम्बन्ध गलत लोगो से है ,'दीदी हस पड़ी जैसे उन्हें लगता था की मैं एक छोटा बच्चा ही हु और मुझे दुनियादारी की कोई समझ नहीं
'अरे मेरे प्यारे भाई ,नेता लोगो को तो सबसे सम्बन्ध बना कर रखना पड़ता है ना ,क्या अच्छा और क्या बुरा ,तू इन सबके बारे में मत सोचा कर ,तू अपनी पढाई और अपनी सेहत पर ध्यान दे ,तू जिम भी रेगुलर नहीं जा रहा है कुछ दिनों से ,और हा आयशा पर भी थोडा ध्यान दे ,'दीदी खिलखिलाकर हस पड़ी ,दीदी सचमे अजीब थी दुनिया में कुछ भी हो रहा हो ,उनके साथ कुछ भी हुआ हो पर मेरे पास ,मेरे साथ आकर वो सारे दुखो को ताक में रख देती है ,सिर्फ मेरी ख़ुशी उन्हें बस यही दिखता है और कुछ नहीं ,मैं दीदी के दुःख को कभी ना पड़ पाया कभी समझ नहीं पाया क्योकी वो मुझे अपने दुखो से हमेशा दूर रखती थी ,मेरे लिए उनके पास जो था वो था बस खालिस प्यार ,प्यार और प्यार ,...मैंने उनके चहरे को अपनी तरफ झुकाया और अपने होठो को उनके होठो पर मिला दिया ,दीदी भी मेरा साथ देने लगी और वो मेरे साथ ही लेट गयी,आज हवस मुझसे खोशो दूर था और दीदी का जिस्म मुझे आकर्षित नहीं कर रहा था ,मैं बस अपनी आँखे मूंदे उनके प्यार को अहसास करना चाहता था,उनके होतो की नशीली शराब को बस पीना चाहता था ,
मैंने उनकी आँखों में देखा मुझे एक प्यार भरी तमन्ना दिखाई दि मुझे लगा जैसे वो मुझे कुछ कहना चाहती हो मैंने आँखों से उन्हें पूछ ही लिया की क्या बात है ,
'तुम्हे वो दिन याद है जब तुमने कहा था की दीदी की चूत,'मैं थोडा शर्मा गया
'क्या दीदी आप भी उसे पकड़ कर बैठी हो,हो गया ना अब वो ख्याल भी मेरे मन में नहीं है,अब मैं किसी भी असमंजस में नहीं हु ,मुझे पता है हमारे बीच कुछ भी गलत नहीं हो सकता,जो भी होगा वो महज प्यार होगा ,कोई वासना नहीं ,'दीदी मुस्कुराते हुए मेरा हाथ अपने हाथो में लेकर अपने निकर के अन्दर डालती है ,मैं उनके नर्म बालो का अहसास अपने हाथो से कर उन्हें सहलाने लगता हु,
'अच्छा तो मेरा भाई यहाँ भी छू सकता है ,वो भी प्यार से ,'मैं उनके योनी को सहलाता हु और उनके बालो को अपनी उंगलियों में फेरता हु ,
'हा दीदी मैं आपको हर जगह छू सकता हु ,वो भी प्यार से ,बिना किसी वासना के बिना किसी उत्तेजना के ,...(मैं कह ही रहा था की मेरे लिंग में थोड़ी अकड़ होनी शुरू हो गयी )सॉरी उत्तेजना तो होगी पर वासना नहीं 'दीदी फिर खिलखिला पड़ी और मुझे किस करने लगी मैं अब उनकी निकर को निकल देना चाहता था ,मैंने उसे पकड़कर निचे खीचा दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया ,
'अभी नहीं ,अभी तुम्हे मुझे बहुत प्यार करना है ,फिर इसे उतरना ,'दीदी के चहरे पर एक शरारती मुस्कान थी .
'मैं आपके लिए सब करूँगा ,पर क्या आपको ये पसंद आएगा की आपका भाई आपको नंगा करे ,'ना जाने मेरे मुह से ये क्या निकल गया था ,
'नहीं मुझे अच्छा नहीं लगेगा ,'मेरा चहेरा थोडा दुखी हो गया ,लेकिन दीदी ने मेरे गालो पर अपने हाथो को रगडा
'मैं चाहती हु की मेरा भाई मुझे इतना प्यार करे की हमारे बीच कपडे जैसे शब्द का अर्थ ही ना रह जाए ,ये सेक्स ये जिस्म,ये कपडे ,ये समाज के बंधन ,ये सब चोचले सब ख़तम हो जाय ,क्या तू मुझे इतना प्यार देगा की तेरी दीदी इन सबसे आजाद हो जाय और तुझमे ही मिल जाय ,'दीदी की सांसे भारी थी और आँखों में आंसू थे बड़ी अजीब सी शर्त थी दीदी की वो मुझमे मिलना चाहती थी पर कैसे मुझे पता नहीं वो क्या चाहती थी मुझे पता नहीं ,पर जो समझ आया वो था प्यार बस प्यार और प्यार ....
आज दीदी को जी भर कर किस किया जी मुझे लग रहा था की आज के बाद वो मुझे नहीं मिलेगी,मैं अपना प्यार देना चाहता था पर बिना किसी हवास के,मैं उनकी शरीरी से आती गंध को अपने नथुनों में भरना चाहता था,मैं उनके मुलायम त्वचा को अपने हाथो से सहलाना चाहता था मैं उनकी फूली हुए गालो को अपने होठो में भरकर उनका रस पीना चाहता था,मैं उनके शारीर के किसी भी हिस्से को नहीं छोड़ना चाहता था ,
मैंने उनके माथे को अपने होठो से लगाया और उनकी आँखों में अपनी आँखे गडा दि,उनकी आँखे एक आमंत्रण दे रही थी की आ जाओ मुझमे सामने आओ ,मैं उनके नाक से अपनी नाक टिका दि ,और हमारी आती जाती सांसे एक दुसरे में घुलने लगे ,उनके उन्नत वक्षो को अपने विशाल छाती से रगड़ता हुआ मैं उनके होठो से आती मस्त खूसबू में डूब गया और अपने होठो को उनके होठो पर लगा कर उनके गुलाबी नर्म होठो के गीलेपन को और गिला करने लगा ,मेरी जीभ उनके जीभ से टकराई और मैंने उनकी जीभ को अपने अंदर खीचने लगा ,वो बिना किसी स्वाद के भी मीठा था,और हमारी थूक आपस में मिलाने लगी ,मेरा शारीर अब उनके नाजुक शारीर को पूरी तरह ढके थी और वो मुझमे ऐसे समायी थी जैसे कभी अलग ही ना होना चाहती हो ,मैं उनके नाजुक जिस्म को मचलता हुआ आगे बढ़ रहा था की उनकी सांसे भी भरी होने लगी थी और मेरे जिस्म की हर हरकत उनके मुह से आह के रूप में निकल जाती ,
मेरा हाथ अब उनके स्तनों का आभाश कर रहा था की कितने नर्म ,मुलायम ,लेकिन कसे हुए थे ,निप्पलो ने तो अपनी सीमा तक अपने को ताने हुए थे ,जैसे किसी पर्वत की चोटी को मात देने चले हो ,मेरा हाथ पड़ते ही वो सिसकी ,
'आह भाआआअ ईईई 'उनकी मादक सिसकी ने मेरे हाथो को पकड़ बढ़ने पर मजबूर कर दिया था और मैं उन्हें मसलता हुआ उनके अहसासों में खोया जा रहा था ,उनकी मादक गंध मुझे मदहोश कर रही थी अब कुछ भी ना रहे अपना बस खो जाओ ,खो जाओ उस मस्तानी सी धड़कन के अहशास में ,मैंरा लिंग ना जाने कब से ताना हुआ अब दर्द देने लगा था ,सायद यौवन के इस अद्भुत शिखर पर वो अपनी भी मर्जी चलाना चाहता था,मैंने दीदी के जन्घो के बीच उसे जगह दि की वो उतावला सा एक ही झटके में फुंकर मरने लगा मैंने उसे थोडा और और दबाया की दीदी ने मुझे अपने बांहों में कस दिया और मेरे होठो को काटने लगी ,जवाब में मैंने भी एक अपने हाथो को उनके स्तन पर और अपने लिंग को उनकी योनी पर मसल दिया
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08-22-2018, 10:58 PM,
#23
RE: Bhai Behen Chudai मैं ,दीदी और दोस्त
'भाई मैं मर जाउंगी ,आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह भाआयआआ ईईईई 'दीदी की सिस्कारियो ने मेरी उत्तेजना को और भी बड़ा दिया था और मैंने उनके टी शर्ट को उतरने लगा दीदी ने मुझे पूरा सहयोग किया किया,मैं अब उनके नर्म सुडोल उन्नत स्तनों का आभास सीधे अपने जिस्म पर कर पा रहा था ,मैंने अपने हाथो से उनके सर को पकड़ा और थोडा तिरछा कर अपने होठो को उनके होठो से मिलकर चूसने लगा,मेरी उंगलिया उनके बालो में फसी थी,और दोनों के जिस्म की गर्मी आपस में मिल रही थी , हम दोनों चाहते थे की अब रुकना नहीं है ,पर कैसे मैं आगे जाऊ मैं एक ओहापोह में था,मैं अपने शारीर से ही उनके नग्न शारीर को रगड़ रहा था की दीदी ने मुझे ऊपर से नग्न कर दिया और मेरे निकर को निकाल फेका,मेरा पूरा शारीर अब नग्न था,और मेरा लिंग अब सीधे दीदी के झीने निकर से उनकी योनी में प्रहार कर रहा था हर प्रहार दीदी के शरीरी को कापा देती थी और ना जाने वो कैसे इतनी गीली हो रही थी मेरा लिंग उनके कामरस का आभाश उनके निकर के ऊपर से ही कर ले रहा था,मेरा लिंग अब फिसल कर उनकी योनी की फंको में फिसलता चला गया और लिंग का सिरा उनकी नाभि को छूने लगा ,ये रगड़न दीदी के लिए आफत ही बन गयी क्योकि अब मेरा लिंग उनकी योनी पर लेता हुआ था उनकी फांके मेरे लिंग को गोलियों को अपने में समाये हुए थी पर वो उसे भेद नहीं रही थी ,बल्कि लेटे हुए थी ,दीदी ने मेरे होठो को इतनी जोर से काटा की मेरे होठो से खून की थोड़ी सी धार निकल पड़ी पर परवाह किसे था ,दर्द कहा था जो भी था बस प्यार था बस प्यार का खुमार था,नाभि पर मेरे लिंग के शिखर को महसूस कर दीदी ने नेरा सर उठाया और मेरी आँखों में देखने लगी ,उनकी निगाहे आधी बंद थी जैसे कोई नशा किये हो ,वो अपने सांसो को सम्हालते हुए कह पायी ,
'कितना बड़ा है भाई तेरा ,'मैंने उनके मदहोश चहरे को देखा और कोई जवाब दिए बिना ही मैंने अपने उनके होठो पर एक लार गिरा दि और उस चिपचिपे लार को फिर से चिपचिपा करने लगा मैंने दीदी के निकर तक अपने हाथ ले जाकर उसे उतरने लगा पर दीदी ने अब मेरे हाथो को रोका और अपने सर पर ले जा रख दिया ,मेरे लिए अब रुकना बड़ा ही मुस्किल था मैंने कमर उठाया और निकर के ऊपर से फिर एक जोरदार दबाव उनकी योनी में दे दिया दीदी फिर छटपटा गयी और उनकी योनी की थिरकन उनके पुरे शरीर में फ़ैल गयी वो काप गयी ,और मुझे जोरो से भीच लिया ,मैं जनता था की दीदी अभी अपने आखिरी वस्त्र को निकलना नहीं चाहती ,शायद वो अपने भाई से इतनी ही दूरी चाहती है ,मेरे लिए रुकना तो मुस्किल था पर दीदी के मर्जी के खिलाफ अपने प्यार की तिलांजलि देना मैंने कभी उचित नहीं समझा ,मैं उनसे प्यार करता हु,ना की वो मेरे लिए कोई वस्तु है जिसे मैं भोगु ,
'दीदी र्रुका नहीं जा रहा ,खोल दो ना ,'मैंने पहली बार ऐसा आग्रह उनसे किया था,'उनकी आँखों में पानी थी भीगे हुए आँखों से वो मुझे देखने लगी ,
'मैं भी यही चाहती हु भाई , मुझसे भी नहीं रुका जा रहा पर ये हमारे प्यार की इन्तहान है की हम कहा पर रुक सकते है ,कम से कम आज तो रुक जा ,अगर तू चाहे तो खोल दे पर मैं चाहती हु की तू रुक जा ...'मेरे गालो को अपने हाथो से सहलाती वो प्यार का ऐसा इंतहान बता गयी जो एक यौवन के गुरुर में डूबे और उत्तेजना के शिखर पर पहुच चुके लड़के के लिए लगभग असंभव होता है ,पर मैंने दीदी के आँखों का पानी देखा और मेरा प्यार मेरी उतेजना पर हावी होने लगा मैंने आगे बढकर तुरंत ही उनके आँखों के उस पानी को अपने होठो में भर लिया और उस खारेपन को महसूस करता हुआ ना जाने मेरे आँखों में कब पानी आ गया ,मैंने उनके मासूम से चहरे पर अपने होठो को लगाया और उनके गालो को चूसने लगा ,जब तक की मेरा लिंग शांत नहीं हो गया ,वो भी जनता था की उसकी उतेज्जना का महत्व बस आज इतना है था ,दीदी ने अपने भाई के अपने लिए अथाह प्यार को महसूस कर मुझे अपनी बांहों में भिचा और फिर हमारे होठ मिल गए हम एक दूजे से तब तक मिले रहे जब तक की नींद ने हमें बेहोश ना कर दिया ........
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08-22-2018, 10:59 PM,
#24
RE: Bhai Behen Chudai मैं ,दीदी और दोस्त
(दो महीने के बाद )
डॉ और मैं दोनों एक होटल के वेटिंग रूम में बैठे थे ,डॉ के चहरे पर चिंता के भाव थे वही आकाश बस कुछ करने को उतावला दिख रहा था ,
'तुम सच में ये करना चाहते हो ,'डॉ ने चिंतित भाव से आकाश की और देखने लगे ,
'मुझे कोई रोक सकता है क्या ,उसकी चमड़ी अपने हाथो से निकलने की कसम खायी है डॉ मैंने अब वो नहीं बच पायेगा मेरे हाथो से ,'मेरे चहरे पर एक दृठता के भाव दीप्तिमान हो गया था,
'मगर वो बहुत ही पावरफुल है ,उसे यहाँ से उठाना बहुत मुस्किल होगा और क्या नेहा मानेगी की ये सब उसने ही किया है ,वो तो उससे प्यार करने लगी है ,तुम भी जानते हो ,'
'मैं उन्हें सब बताऊंगा ,की क्या हुआ था ,और वो भी उसके मुह से कहलाऊंगा ,आप बस मुझे इजाजत दे ,'डॉ ने हां में सर हिलाया ...मैं वाह से उठकर राहुल को कॉल लगता हु और
'भाई तू तैयार है ,आज हमारा अंतिम संघर्ष है ,'
'भाई क्या हम सही समय का वेट नहीं कर सकते यहाँ मुख्यमंत्री भी आने वाले है और बहुत पोलिश वाले भी है ,'मेरे चहरे की गंभीरता और भी बढ़ जाती है ,
'नहीं तूने सोच कैसे लिया की अब जब मुझे पता है की दीदी की जिंदगी किसने बर्बाद की है मैं समय का इन्तजार करूँगा ,जो होगा वो होगा या तो मरेंगे या मारेंगे तू आ रहा है कई या मैं अकेले निपटाऊ उसे ,'राहुल मेरी बात से हडबडा गया था ,
'भाई पागल है क्या साले साथ जिए है मरना पड़ेगा तो साथ ही मरेंगे ,और लवडे क्यों मरेंगे जब दीदी का प्यार हमारे साथ है,और वापस जाकर मुझे प्रीति को भी ठोकना है और तुझे भी तो आयशा को पटाना है ना..'मेरे चहरे पर एक हसी खिल गयी
'भोसड़ीके चल प्लान शुरू करते है.,देबू कहा है (देबू एक कम्पूटर जीनियस है ,जिसके बारे में कहानी के शुरुवात में बताया गया था,)'
'वो अपनी पोजीशन में है ,'
'ओके'
मैं तेजी से कांफ्रेंस हल की तरफ बढता हु,बहार मुझे पास दिखने को कहा जाता है ,मैं पास दिखाकर आगे बढता हु ,मुख्यमंत्री का भाषण चल रहा होता है ,और अविनाश अभी उनके साथ ही होता है मैं गौर से स्टेज को देख रहा था,तभी एक शख्श के मोबाईल पर एक कॉल आता है और वो स्टेज से उतारकर निचे आ जाता है ,वो चलता हुआ लिफ्ट की तरफ बढता है और साथ में ही मैं भी सबसे नजर छुपकर उसके पीछे बढता हु वो लिफ्ट से ऊपर चला जाता है ,मैं स्क्रीन में देखता हु 5 वे फ्लौर पर लिफ्ट रुकी थी मैं पूरी ताकत से दौस्ता हुआ ऊपर जाने लगता हु ,वहा पहुचने पर मैं फिर राहुल को काल करता हु ,
'हां 5वा फ्लोर है ,'
'जनता हु बस दो मिनट 'राहुल एक होटल के कर्मचारी के पोशाख में आता है उसके हाथो में इ ट्रे है ,'मैंने देबू को कॉल लगाया थोड़ी देर में ही उसने कॉल उठा लिया ,
'हां वो अकेला है ,तुम लोग जा सकते हो ,'मैं राहुल को इशारा करता हु ,राहुल गेट के पास पहुचता है ,
'सर रूम सर्विस '
'नहीं चाहिए बाद में आना 'अंदर से आवाज आती है ,
'सर मेडम ने शेम्पियान का ऑर्डर दे दिया था वो थोड़ी देर में आने को कह गयी है ,'उस शख्श के चहरे पर एक मुस्कान आई (जैसा की मुझे लगा )
'रुको 'और उसने गेट खोल दिया राहुल सर झुकाए अंदर चला जाता है ,पर थोड़ी ही देर में
'राहुल तू 'राहुल उसे धक्का देकर गिरा देता है '
'हां मदेरचोद मैं 'मैं भागकर अंदर जाता हु और उसपरर घुसो की बारिश कर देता हु ,वो चिल्लाने को होता है पर मैं उसके मुह को दबा देता हु ,राहुल जल्दी से अपने ट्रे के निचे से एक बोतल निकलता है और उसे अपने रूमाल से गिला कर उसके नाक पर रख देता है ,वो शख्स थोड़ी छटपटाहट के बाद बेहोश हो जाता है ,मैं उसे गुस्से से भरा हुआ देखने लगता हु ,
'मन तो करता है इसे अभी मार दू पर ....इसे तो दीदी ही मारेगी ,'मैं देबू को कॉल लगाता हु ,
'सारे कैमरे हैक है ,'
'कब के तुम्हारा ऊपर आना किसी ने नहीं देखा अब जल्दी निकालो इससे पाहे की होटल स्टाफ को पता लगे की कैमरे हेक है मैं बस उन्ही कैमरे हो हेक कर रहा हु जिसमे तुम्हारी फुटेज आने वाली होगी वरना उन्हें पता चल जायएगा ,'
'गुड 'मैंने फोन रखा,राहुल उस शख्स को दो तीन घुसे लगा देता है ,
'चल जल्दी कर ,इसे तो आज दिनभर और मनभर मारना है ,'राहुल एक काला कपडा निकल कर उसके सर को ढक देता है और उसे हम उसे ट्रे के निचे डाल देते है राहुल और मैं उसे लेकर लिफ्ट में पहुचते है और फर्स्ट फ्लोर पर ही रुक जाते है,मैं उसके सर से काला कपडा हटा कर उसे कंधे में डालकर पीछे की सीढियों से निचे जाने लगता हु राहुल लिफ्ट में ही ट्रे लेकर निचे जाता है किचन में ट्रे छोड़कर वहा से भागता है और सीधे मेरे पास बेसमेंट में पहुचता है ,तभी देबू का काल आता है ,
'सालो उसका मोबाईल स्विच ऑफ करो और बेसमेंट में बने टॉयलेट में जा कर छुपो जब तक सभी मंत्री यहाँ से बहार नहीं चले जाते कार लेकर मैं वह नहीं आ सकता सभी कार की चेकिंग हो रही है ,डॉ भी मेरे साथ ही है ,'
हम वह के टॉयलेट में जा छुपते है ,लगभग एक घंटे हो चुके थे की वो शख्स थोड़ी हलचल करने लगता है ,
'अबे दवाई की शीशी कहा है ,'मैं राहुल की तरफ देखता हु ,
'भाई वो तो मैंने फेक दि डस्टबिन में 'मैं उसे घुर के देखता हु वो मुझे आँखों से ही सॉरी कहता है की मेरे चहरे पर एक मुस्कुराहट आ जाती है और मै राहुल को इशारा करता हु वो बहार जाता है,
'कोई नहीं है 'और मैं उसे एक जोरदार घुसा मरता हु वो फिर बेहोश हो जाता है ,अब राहुल के चहरे में भी एक स्माइल थी ,कुछ देर बाद देबू का कॉल आया ,
'हा हम तैयार है ,कार लेके आ रहा हु ,'
'ओके '
कार आने पर मैंने फिर से उस शख्स को कपडे में ढँक दिया और कार में डाल दिया डॉ के चहरे पर एक विजयी मुस्कान थी ,और देबू कार से बहार आता है , और मेरे गले लगता है ,
'थैंक्स दोस्त 'वो मुझे दीदी का मोबाईल वापस करता है
'भाई मैं अपने प्यार के लिए कुछ भी कर सकता हु ,'उसके भोले चहरे पर अब एक चमक थी पहली बार था जब देबू ने खुलकर दीदी को अपना प्यार स्वीकारा था ,
'भाई तो आज से तू मेरा जीजा है,बस अब दीदी को पटा लईयो मैं तेरे साथ हु ,'और मैं एक बार फिर से देबू के गले मिलता हु ,देबू के चहरे में शर्म था ..मैं राहुल को दीदी का मोबाईल देते हुए
'राहुल तू दीदी को लेकर गोदाम पहुच मैं इसे लेकर वहा पहुचता हु ,'राहुल आश्चर्य से मुझे देखता है
'मैं साले दीदी को ये खुसखबरी तू क्यों नहीं देता ,'मैं थोडा गंभीर था
'नहीं भाई वो सब बताने की मुझमे हिम्मत नहीं है ,मैं जनता हु तू ये कर सकता है ,दीदी को बस इसका नाम मत बताना वरना वो यहाँ नहीं आ पायेगी ,और जब मेरे बारे में बताएगा तो उन्हें यकीं दिला देना की मैं बिलकुल ठीक हु ,और तुझे अगर मारे तो कुछ झापड़ खा लेना ,'राहुल के चहरे पर एक हसी तैर गयी ,
'साले तेरे लिए तो गोली भी खा लू 'राहुल आगे बढकर मेरे गले लग जाता है और वहा से निकल जाता है ,इधर हम भी अपने ठिकाने पर पहुचते है और एक खुर्सी पर उसे बांध देते है ,कला कपडा अभी भी उसके चहरे को ढंका था ,इधर राहुल दीदी को सब बताता है ,की कैसे हमें उसके बारे में पता चला पर वो नहीं बताता की वो शख्स कौन है ,दीदी सच में उसे दो झापड़ लगा देती है जिसे राहुल मुस्कुराते हुए झेल लेता है और दीदी उससे लिपट के रोने लगती है ,अब उसके शख्स से मिलने की नहीं मेरे पास पहुचने की जल्दी है ,
'ना जाने मेरे भाइयो ने मेरे लिए कितनी तकलीफ उठाई है ,अब चल जल्दी मुझसे एक पल भी इन्तजार नहीं हो रहा है ,मुझे मेरे भाई को पहले देखना है ,'राहुल का चहरा अब भी लाल था पर होठो पर एक मुस्कान थी ,
'उस दरिन्दे को देखना है या आकाश को ,'राहुल ने शरारती मुस्कान से पूछा
'पहले तो मेरे भाई को ,अब चल ना 'दीदी ने भी मुस्कुराते हुए कहा ....

बड़े से गोदाम में एक खुर्सी पर बंधा वो शख्स अपने को छुड़ाने को तडफ रहा था ,पास ही मैं देबू और डॉ खड़े थे मैंने जैसे ही ये देखा की वो होश में आ रहा है,उसे कई घुसे मार दिए ,वो चिल्ला पड़ा ,डॉ ने मुझे इशारा किया और मैंने एक पड़ा हुआ कपडा उठा उसके मुह में ठूस दिया जब वो मुझे देखा तो उसकी आँखों में डर साफ़ था जिसे देखकर मेरे चहरे पे एक स्माइल सी आ गयी ,थोड़ी देर में दरवाजे पर दस्तख हुई मैंने फिर उसका चहरा ढंका और दरवाजा खोला सामने दीदी राहुल और प्रीति खड़े थे प्रीति को लाने मैंने ही कहा था क्योकि उस आदमी ने उसकी भी जिंदगी बर्बाद की थी ,दरवजा खोलते ही जैसे ही मैंने दीदी को देखा की चटाक एक जोरदार चांटा मेरे गालो में पड़ा ,इसे देखकर राहुल की हसी छुट गयी पर उसने अपना मुह दबा लिया ,
'बहुत बड़ा हो गया है तू ,क्या समझता है तू अपने आप को हीरो है तू ,इतनी सी उम्र में ये सब काम करेगा तू ,दो लोगो को किडनेप करके मार दिया ,इतने बड़े लोगो से पंगा ले लिया और ये ,ये क्या है किडनेप करके ले आया समझता क्या है तू अपने आप को ,'मेरे चहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी लेकिन दीदी का चहरा गुस्से से तप रहा था वही उनकी आँखों में आंसू था और आवाज भरी रही ,मैं आगे बढकर उनको पकड़ने को हुआ पर फिर एक तडाक दुबारा मेरे गालो में पड़ा ,
'मत छूना मुझे और मत कहना मुझे दीदी ,तुझे कुछ हो जाता तो ,कैसे जीती मैं दीदी अब पूरी तरह से रो पड़ी और आकर मेरे गले लग गयी मैं उनकी बालो को सहलाने लगा तभी राहुल ने मुझे इशारे से अंदर जाने को कहा ,हमं अंदर आ चुके थे पर दीदी अब भी मुझसे लिपटी थी ,
'दीदी मैं बिलकुल ठीक हु ना,कुछ नही होगा आपके भाई को जबतक आपका प्यार मेरे साथ है ,दीदी ,ओ दीदी ,'मैंने दीदी के चहरे को उठाया और उनके गालो में एक चुम्बन दे दिया ,उनकी बड़ी बड़ी आँखे लाल हो चुकी थी वही गीली आँखे इतनी प्यारे लग रही थी मैंने उनके आँखों पर अपने होठ रख दिए ,
'जिसने आपकी जिंदगी को बर्बाद किया आज आपको उसे सजा देनी है ,दीदी उसका चहरा देख शायद आप को यकीं ना हो पर हा इसी आदमी ने आपकी और ना जाने कितनी लडकियों की जिंदगी से खेला है ,और दीदी आप अपने भाई की सोच रही हो ,और उन सभी लडकियों का क्या वो भी तो किसी ना किसी की बहन होंगी ना ,'
'मुझे तुझपर गर्व है मेरे भाई ,भगवान् ऐसा भाई सबको दे ,और ये कोई भी हो इसे तो मैं अपने हाथो से मरूंगी 'दीदी ने मेरे गालो को हाथो से सहलाया और उस शख्स के तरफ मुड़ी डॉ चुतिया उस शख्स के चहरे से नकाब उठाते है उसके मुह में अभी भी वो कपडा ठूसा हुआ होता है ,उसे देखकर दीदी के चहरे के भाव पूरी तरह से बदल गए उनके पैर लड़खड़ाने लगे ,वो गिरते हुए बची मैंने दौड़कर उन्हें सम्हाला वो उस शख्स के पास लड़खड़ाते हुए जाती है और उसके पैरो में बैठ जाती है ,
'मनीष ....'दीदी के आवाज में एक रुदन था जैसे किसी ने दिल ही चिर दिया हो ,उनकी आवाज सुनकर मेरे जेहन से एक हाय निकल गयी ,
'आखिर क्यों ,इतना बड़ा धोखा प्यार का नाटक क्यों,'दीदी रोने लगी है और मनीष के चहरे में एक हसी के भाव है ...
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08-22-2018, 10:59 PM,
#25
RE: Bhai Behen Chudai मैं ,दीदी और दोस्त
दो महीने पहले )
मैं,राहुल और डॉ चुतिया तीनो पूरी मेहनत से उस शातिर दिमाग को ढूंढने में लगे थे ,मेरा और डॉ का शक अविनाश पर था ,मैं दीदी को अविनाश से दूर ही रखना चाहता था पर वो उसकी ओर आकर्षित होती जा रही थी ,उन्होंने एक दिन अविनाश को प्रपोस भी कर दिया लेकिन अविनाश ने उन्हें कहा की तुम तो मेरी बहन जैसी हो ,दीदी का सपना चूर चूर हो गया वो उस दिन खूब रोई ,अविनाश मुझे दीदी को सम्हालने को कहा ,उसकी इन बातो से मेरे शक की सुई घूमी और मैंने सीधे सीधे सोचना शुरू किया ,हमने अविनाश की फंडिंग का पता किया उसमे से कुछ ऐसे शख्स थे जो प्रीति ने ग्राहक हुए थे ,लेकिन उन्होंने अविनाश को फंडिंग किसी और वजह से की थी ,जो की पूरी तरह से बिजिनेस था ,
इधर दीदी का दिल टूट चूका था और मनीष उनके करीब आ रहा था ,मैं और राहुल भी उसे पसंद करते थे और वो दीदी को प्रपोस भी कर चूका था इसलिए हमने दीदी को सम्हालने के लिए उसकी मदद की थोड़े ही दिन में हमने उन्हें बिक्लुल नार्मल कर दिया ,और उन्होंने मनीष का पप्रपोसल भी हमारे कहने पर एक्सेप्ट कर लिया,लेकिन मनीष ने दीदी से इतना प्यार जताया की दीदी उससे बहुत प्यार करने लगी थी ,अभी तक मेरे और दीदी के जिस्मानी सम्बन्ध भी कम हो चुके थे और मैं आयशा की और दीदी मनीष की और जादा ध्यान देने लगे था ,आयशा मुझसे लगभग पट चुकी थी पर मैं उसे प्रपोस नही कर पा रहा था ,वही प्रीति राहुल के बहुत ही करीब हो गयी थी और उनमे एक प्यार का रिश्ता जन्म ले रहा था,,,दीदी मनीष के प्यार में डूबने लगी थी ,हम सभी इससे बहुत खुस थे,लेकिन फिर हमें एक बात पता चली
डॉ चुतिया ने पता लगाया की प्रफुल्ल पहले एक डॉ के पास काम करता था जो की मनीष के पापा है , वही से हमने मनीष और उसके पापा के ऊपर नजर रखी,उसके पापा तो सामान्य लगे पर मनीष की हरकते कुछ अजीब लगी ,पता लगाने पर पता चला की वो जितना सीधा लगता था उतना है नहीं ,उसका उठाना बैठना कई बड़े लोगो से था ,प्रफुल्ल के नौकरी छोड़ने के बाद भी वो उसके साथ मिलता रहा और उससे ही वो दवाई बनवाई थी ,फिर परमिंदर से दोस्ती की जो की विक्की और नानू का दोस्त हुआ करता था और बहुत बड़ा लड़की बाज था ,मनीष को विक्की और नानू की आदतों का पता था इसलिए उसने परमिंदर पर ही भरोसा दिखाया ,और उसे अपने धंधे में मिला लिया क्योकि उसे पता था की वो तो लडकिय पटा नहीं पायेगा ,उसने लडकियों के दम पर अपने कांटेक्ट अच्छे किये इसी के चलते प्रीति और कुछ दूसरी लडकियों को भी युस किया ,और ये काम वो परमिंदर के भरोसे कर रहा था ,विक्की नानू तक को इसकी खबर नहीं लगी की इसके पीछे कोण है,पर ये तो अभी ट्रेलर ही था वो ऐसी लडकियों की फौज खड़ा करना चाहता था,और उसका सबसे बड़ा शिकार थी कॉलेज की सबसे सुंदर लडकिय नेहा और आयशा पर यही उससे गलती हो गयी नेहा तो फसकर भी निकल गयी ,और आयशा फस ही नहीं पायी ,और उसे मुसीबत में डाल गयी ,मनीष के सभी कांटेक्ट को मिलाने पर प्रीति ने भी अधिकतर के साथ सेक्स करने को स्वीकार किया ,पर मैं जल्दबाजी नहीं करना चाहता था और मैंने और सुबूतो को इकठ्ठा करना ही सही समझा ,इसी दौरान मनीष ने दीदी के साथ सेक्स की कोशिस की पर दीदी ने साफ़ मना कर दिया वो उसे बहुत चाहती थी पर वो दूध की जली थी ,मनीष ने उन्हें काबू में करने के लिए उन्हें राजनितिक पार्टी में ले जाना शुरू किया जो दीदी को बहुत पसंद था ,,बड़े लोगो से मिलवाना और लीडरशिप,दीदी के अविनाश से सम्बन्ध भी सामान्य हो गए बल्कि उसके लिए इज्जत और भी बढ़ गयी दीदी उसकी पार्टी भी ज्वाइन कर ली,मनीष दीदी को इम्प्रेश करने के लिए उन्हें लोगो से मिलवाता था लेकिन वो कभी इतनी इम्प्रेस नहीं हो पाई की अपना जिस्म दे दे ,लेकिन ये भी मनीष की गलती निकली क्योकि एक सिंपल लड़के की इतनी पहचान ने हमारा शक और पुख्ता किया ..
इधर किसी बड़े साबुत की तलाश में हम देबू से मिले जो दीदी का दीवाना था हमने देबू पर भरोसा जताया और उसे अपने साथ मिला लिया दीदी के बारे में सुनकर उसके आँखों में आंसू आ गए ,उसकी आँखों में मैंने दीदी के लिए प्यार देखा जो मैंने कभी और किसी लड़के के आँखों में नहीं देखा था,मुझे वो लड़का भा गया और मैंने उसने भी अपना सब कुछ छोड़कर हमारी मदद करने की ठान ली,उसने मनीष और अविनास का मोबाईल हेक किया और उनके सभी कॉल हम सुनने लगे ,दो तीन दिनों में ही साफ़ था की अविनाश बिलकुल ही क्लियर है और मनीष ही फसाद की जड़ है ,वो बेहद बेचैन था क्योकि उसे कोई भी लड़की नहीं मिल पा रही थी और ग्राहक उस पर प्रेसर डाल रहे थे उसकी आखिरी उम्मीद नेहा दीदी ही थी ,लेकिन यही फिर से उसकी गलती निकली ,हमें नेहा दीदी के मोबाईल का इस्तमाल उसे फ़साने में किया और ये यकीं दिला दिया की वो उससे सेक्स करने को राजी है और उस होटल के कमरे में उसे मिलना है,आखरी कंफरमेशन डॉ ने उसके अकाउंट की जानकारी निकलवा कर उस होटल के वेटिंग रूम में दे दि,जिसके बाद मैंने आखरी लड़ाई लड़ने की ठान ली और वो हमारे चुंगुल में था...

डॉ ने मनीष के मुह में लगा कपडा खोला जैसे लग रहा था की वो कुछ बोलना चाहता हो ,उसकी हसी से सारा कमरा गूंज गया वो एक शैतान की हसी थी,उसके चहरे पर धधकते अंगारे और आँखे बिलकुल सुर्ख लाल हो चुकी थी ,दीदी अब भी उसके पैरो के पास पड़ी उससे यही पूछ रही थी की तुमने ये क्यों किया...
'क्यों किया क्योकि मैं पवार चाहता था,क्यों किया क्योकि मैं तुम जैसी रंडियो को नग्गा कर बाजार में नचाना चाहता था,क्यो किया पूछती है साली रांड,मुझे पैसा चाहिए पवार चाहिए और तेरे जैसी सभी लडकिय मुझे मेरे निचे चाहिए ,'मनीष की बातो से जहा दीदी स्तब्ध थी वही मैं गुस्से से भरा हुआ उनके पास आता हु ,लेकिन डॉ ने मुझे इशारे से वही रोक दिया और आँखों से कहा की रुक नेहा को बोलने दे,आग तो मेरे तन मन में भी बड़क चुकी थी पर डॉ के कहने से मैं समझ गया की पहले नेहा दीदी को बदला लेने दो ,,
'मैं तुमसे प्यार करती थी मनीष ,और इतना बड़ा धोखा ,'
'धोखा हा हा हा ,धोखा ...साली तू मुझसे प्यार नहीं करती थी तू तो मेरे पास मजबूरी में आई थी जब तेरे चूत की आग बुझाने वाला कोई नहीं रहा तो मेरे पास आयी ,मैं तो तुझे कब से लाइन मार रहा हु और तू ,तू तो पटी उस परमिंदर से क्यों ,क्योकि उसका बड़ा था ना हा हा हा (मनीष पर मनो शैतान सवार था ,)और फिर भी मुझे घास नहीं साली ,हा तुम तो मेरे अच्छे दोस्त हो पर ये सब मैं कैसे कर सकती हु मैं वैसी लड़की नहीं हु,कोण कहता था ,और फिर उस अविनाश के पीछे पड़ गयी ,मैं सरीफा बना सीधा साधा बना पर नहीं ,और जब उसने भी तेरी गांड में लात मारा तब जाकर तू मेरे पास आई साली ,'तब तक एक जोरदार तमाचा मनीष के गालो में पढ़ चूका था ,ये हाथ दीदी का था ,
'मैं सच में तुम्हे प्यार करने लगी थी ,और ये तुम जैसे लडको के दिमाग की हैवानियत है की तुम लोगो के लड़की सिर्फ एक चीज है जिसका इस्तमाल करो और फेक दो ,लड़की का जिस्म फकत जिस्म नहीं होता उससे उनका मन और रूह भी जुडी होती है,तुमने मेरे जिस्म को पाना चाहा लेकिन तुमने मेरी रूह को भी मारा है,सर तेरे कारण मुझे जानवरों की तरह रौंदा गया,मेरे जैसी ना जाने कितनी लडकियों की रूह तक तुमने बेच दि,इसकी सजा तूम्हे मिलेगी ,ऐसी की तुम्हारा रूह तक काप जायेगा ,तुमने कई लडकियों को इस हालत में लाकर खड़ा कर दिया है की सायद अब वो किसी से प्यार ना कर सके ,प्यार के नाम से ही घिन आने लगी है अब तो ,इतनी हैवानियत जो तुमने की है उसका बदला तुमसे ले कर रहूंगी ,'दीदी का तन किसी गर्म सलाख की तरह लाल हो रहा था ,उनके बातो की तपन से माहोल शांत था और सबको बस ये इन्तजार था की दीदी क्या करने वाली है,दीदी ने पास पड़ा लोहे का सरिया उठाया और उसके पैरो में दे मारा,मनीष के मुह से दर्द की चीख निकली पर उसके चहरे पर अब भी मुस्कान थी ,
'जानती है ना की कैसे तीन लडको ने तुझे घंटो तक रौंदा था,हा हा हा 'दीदी के चहरे पर एक कातिलाना मुस्कान थी ,
'तू ये सब बाते कर के बच नहीं सकता मरेगा तो तू तड़फ तड़फ के ही ,'दीदी ने वो सरिया उसके कंधे पर घुसा दिया उसके मुह से फिर एक दर्दनाक चीख निकली ,जिससे दीदी के चहरे पर एक शकुन के भाव आये ,
'जानता है जलील होना किसे कहते है,दर्द किसे कहते है ,'प्रीति जो अब तक सब चुपचाप देख रही थी वो आगे आ गयी ,
'जनता है जब कोई गैर मर्द तुम्हेरे जिस्म को रौंद रहा हो और कुछ ना कर पाने की आत्म गलानी किसे कहते है 'कहते हुए प्रीति ने अपने पैरो को उसके जन्घो के बीच दे मारा ,इससे पहले उसके मुह से चीख निकले दीदी ने सरिया उसके मुह में घुसा दिया, उसके होठो को काटता वो सरिया जबड़े से बहार निकल गया ,अब वो चीख भी नहीं पा रहा था ,और पूरी आवाज उसके मुह में ही दबी रह गयी,इधर देबू कपने लगा था ,राहुल ने उसे सम्हालते हुए उसे वहा से जाने के लिए कहा,वो मुड़ा ही था की
'रुको मुझे मिर्च नमक और तेल और एक कढाई और कुछ लकडिया चाहिए 'दीदी की बातो को सुनकर मनीष गु गु करने लगा उसकी आँखों में आतंक साफ दिख रहा था ,पर सरिया घुसे होने पर वो कुछ नहीं कह पाया ,दीदी ने हस्ते हुए वो सरिया बहार खीच लिया ,अब मनीष के मुह से खून की धार निकल पड़ी पर वो कुछ बोलने में अश्मर्थ था ,वो सायद माफ़ी मांग रहा था पर उसकी आवाज स्पष्ट नहीं थी ,दीदी का आदेश सुनते ही राहुल और देबू वह से निकल गए ,दीदी ने पास पड़े टेबल को उसके सामने रखा और आराम से बैठ गयी ,प्रीति ने सवालिया नजरो से उन्हें देखा ,
'अरे आराम से मरेंगे इस मदरचोद को इतनी जल्दी क्या है ,'दीदी हलके से हसी उनकी हसी में इतनी क्रूरता थी की एक बारी मेरा दिल भी जोरो से धडक गया डॉ मेरे पास आये और मेरा हाथ पकड़ कर
'आकाश इसे करने दो जो करना चाहे इतने दिनों से अंदर ही अंदर जलती रही है ,आज इसके मन का भड़ास नहीं निकला तो शायद ये कभी किसी से वो प्यार नहीं कर पायेगी और प्यार बिना इसकी जिंदगी नारख सी हो जानी है ,'मैंने भी सहमती में अपना सर हिलाया ,कुछ देर तक दीदी उसे युही घुर के देखती रही वो दर्द का आदि हो चूका था ,खून बंद ही नहीं हो रहा था ,अब वो रो रहा था चिल्ला रहा था पर कुछ भी करने को मुह खोलता तो दर्द की लकीरे उसके चहरे पर साफ़ दिखाती ,दीदी और प्रीति के चहरे पर उसके दर्द को देखकर एक हलकी मुस्कान आ जाती थोड़ी देर बाद ही प्रीति ने पास पड़ा एक लकड़ी का टुकड़ा उठा लिया ,और मनीष के सर में हाथ फेरते हुए बड़े प्यार से कहा ,
'जानते हो मेरी जान जब चुद सुखी हो और कोई जबरदस्ती तुम्हारे चुद और गांड में एक साथ घुसता है तो कितना दर्द होता है ,(वो थोड़ी देर रुकी )नहीं जानता मेरा बाबु ,मैं बताती हु 'मनीष आक्रांत नजरो से उसे देख रखा था ,उसकी नजरे ही उसका डर का सबब बताने को काफी थी,प्रीति ने दीदी को देख जिनके चहरे की मुस्कान और फ़ैल गयी थी ,प्रीति लकड़ी के टुकडे को उसके कटे हुए होठो के पास खुरेदने लगी और जीभ के कटे हिस्से में घुसा के हिला दि ,मनीष का बंद ही नहीं हो पा रहा था ,उसके जबड़े लटके हुए थे ,वो दर्द से छटपटाने लगा ,पूरी कुर्सी हिलने लगी थी,
'दर्द होता है 'प्रीति ने बड़े प्यार से पूछा ,मनीष बस रो रहा था ,और प्रीति चिल्ला पड़ी
'मुझे भी होता था मदरचोद ,हा मैं दवाई के असर में थी ,पर मेरे जमीर को ही मार डाला तुम लोगो ने एक वैश्या या यही कहा था ना तूने रंडी ,रंडी बना दिया ना तूने मुझे ,'प्रीति एक जोरदार झापड़ और लगा देती है ,उसके आँखों में आंसू थे ,मनीष का जबड़ा लटक गया और मुह से खून और लार मिलकर टपकने लगी ,आंसू तो मेरे अर दीदी के आँखों में भी थे ,तभी राहुल आता है उसके हाथो में एक बैग था ,देबू शायद घर जा चूका था ,
'तेल गर्म करो कढाई में और नामक मिर्च मुझे दो 'राहुल तुरंत कुछ इटे लाकर लकडिया जलाता है और कड़ी में तेल गर्म करने लगता है ,इधर दीदी नमक उठाती है और प्रीति को इशारा करती है ,प्रीति सरिये को उठा कर दीदी से पूछती है कहा पर ,
'जहा तेरा मन करे 'प्रीति सरिये को उसके जन्घो में घुसा देती है फिर दूसरी जांघ में मनीष ना चिल्ला पा रहा था और ना ही कुछ कर पा रहा था उसका दर्द बस उसकी आँखों से दिख रहे थे ,वो छूटने को छटपटाता पर कोई फायदा नहीं था,वो दहशत भरी आँखों से उन्हें देख रहा था ,उसके आखो में आसू थे ,दीदी नमक ले जाकर उसके जख्मो में छिड़क देती है वो दर्द से काप जाता है दीदी और प्रीति के आँखों में आंसू थे और चहरे पर हैवानियत लेकिन जब जब वो छटपटाता था दोनों के चहरे पर एक अपार शकुन दिखाई देता था,दीदी ने मिर्च प् पेकेट फाड़ा और उसके मुह में डाल दिया वो दर्द से बस छटपटाता हुआ बेहोश हो गया उसका सर निचे को झुक गया मिर्च ने अपना असर दिखाया और खून तो कम हो गया और लार बहने लगी ,लेकिन दीदी ने उसे हिलाया ,
'नहीं नहीं तू इतने जल्दी बेहोश नहीं हो सकता तू इतने जल्दी मर नहीं सकता तुझे अभी और तद्फाना है ,नहीं नही ,'प्रीति ने अपने नजर दौड़ाये और साथ रख ठंडा पानी जो उसके पर्श में ही था ले आई और पूरा उसके ऊपर डाल दि ,पानी कंटेनर में होने की वजह से बिलकुल ठंडा था ,जिससे मनीष को होश आया लेकिन उसकी इतनी हिम्मत नहीं हो पा रही थी की वो सर उठा ले वो जितने जल्दी हो सके मरना चाहता था ,दीदी ने उसका से उठाया,और कुर्शी के पीछे के सिरे से लगा दिया वो बेबस निगाहों से दीदी को देख रहा था ,दीदी उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली अभी तो तुझे दर्द मिलना बाकि है मेरी जान ,और उबलते तेल के तरफ इशारा किया ,मनीष की रूह तक काप गयी उसकी आँखे अब पथरा चुकी थी वो बस देख रहा था ,उसके हाथ पैर चलने बंद हो चुके थे ,दीदी ने उस छूती सी कढाई को देखा जिसमे तेल उबल रहा था ,यो अपना दुपट्टा निकल कर उसके सिरे को पकड़ी और कडाही पकड़ कर उसके पास आ गयी ,प्रीति ये देख कर जोरो से रोने लगी जैसे ना जाने कब से ये रोना दबा के राखी हो दीदी ने उसके सर पर से तेल को डालना सुरु किया,दीदी की आत्मा से एक रुदन निकला जैसे वो खली हो रही हो वो दोनों चीख चीख कर रो रही थी . मनीष तड़फता रहा ,इतना छटपटाया की आखिर में खुर्सी समेत गिर गया उसके मुह के इतना जख्मी होने पर भी स्की चीखे निकल रही थी जैसे उसकी आत्मा जल रही हो ,उसके शारीर में फलोले थे और वो आख़िरकार निढल पड़ा था ,पर उसकी सांसे चल रही थी ,दीदी और प्रीति पुरे खाली हो चुके थे .....


थोड़ी देर एक गंभीर शांति का वातावरण बन चूका था,दीदी ने मुझे देखा और मुझसे लिपट गयी ,
'भाई इसने तुझे भी बहुत तडफाया है ,अभी ये जिन्दा है ,अब इसे मार डालो ,'मैं दीदी से अलग हुआ हाथो में सरिया लिया अब तक उसके पुरे शारीर में फफोले थे वो हलके हलके साँस ले रहा था ,उसे देखकर ही मेरा पूरा गुस्सा शांत हो चूका था ,मैंने राहुल को देखा मेरी दशा उससे छुपी नहीं थी हम एक नार्मल इन्सान ही थे ,दीदी और प्रीति ने जो किया वो उनके सालो का गुस्सा था ,हमें भी उस पर गुस्सा था पर इन दोनों के इस रूप को देखकर हमरी आत्मा शांत हो चुकी थी ,मुझे कुछ ना करता देख प्रीति सामने आई और हाथो से सरिया लेकर उसके गले में घुसा दिया ,,
राहुल प्रीति के पास आकर उसे गले से लगा लिया यही मैं दीदी को अपनी बांहों में भर लिया ...डॉ वह खड़े खड़े कुछ सोच रहे थे ,थोड़ी देर बाद रक् कोई कुछ नहीं बोल रहा था ,असल में कोई कुछ बोलने की हालत में भी नहीं था,आख़िरकार डॉ ने ही बात की शुरुवात की ,
'तुम लोग यहाँ से चले जाओ,बाकि मैं सम्हाल लूँगा,और हो सकता है की पोलिश तुमसे पुछ्ताज करने आये तो डरना मत ,विक्की और नानू के लापता होने का केस पहले ही चल रहा है,पर उसमे तुम नहीं फसोगे ,पर इसके केस में नेहा के मोबाईल से उसे लास्ट कॉल गया था,तो पुछ्र्ताज हो सकती है बोल देना की दोस्त था ,और अभी से लेकर रोज कम से कम 15 दिनों तक उस्क्व नंबर में कॉल करते रहना ,ताकि उन्हें लगे की तुम्हे भी नहीं पता की वो लापता है,हो सके तो एक दो दिन में उसके पापा को भी कॉल कर लो ,और तुमने उसे लास्ट बार कब देखा था,डॉ ने नेहा दीदी से पूछा ,
'दो दिन पहले,'
'नहीं तुमने उसे आज देखा है ,मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ,स्टेज पर अविनाश के साथ ,तुम्हारे साथ राहुल और आकाश भी थे और मैं भी था ,सबका बयां लिया जायेगा सबको यही कहना है...और अविनाश को अभी कॉल करके उसके पहने शर्ट की तारीफ करो की बहुत क्यूट दिख रहे थे ,और पूछो की मनीष कहा है ,मुझसे बात किया और स्टेज से उतरकर गायब हो गया ,और रही कमरा फुटेज की बात तो तुम तीनो वापस जाओ और एक दो फुटेज वहा से खिचावाओ ताकि उसे देबू आज के फुटेज में ऐड कर सके ,'हम सब डॉ की बातो को धयान से सुन रहे थे ,और वहा से निकलकर हमने ऐसा ही किया.....



(नोट -यहाँ से कहानी का एक पार्ट ख़तम हो जाता है जिसमे सस्पेंस और ड्रामा था ,दूसरा पार्ट अगले update से चालू होगा,जिसमे खालिस प्यार और रोमांस होगा )
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Reply
08-22-2018, 10:59 PM,
#26
RE: Bhai Behen Chudai मैं ,दीदी और दोस्त
आज एक गजब की शांति मेरे दिल में थी,हो भी क्यों ना दीदी को उनका इंसाफ मिल चूका था ,मैं बहुत ही इत्मिनान से लेटा हुआ था ,दीदी मेरे विशाल सीने के घने बालो में सर छुपाये एक छोटी बच्ची की तरह मुझमे समां जाने की कोशिस कर रही थी,हम दोनों हो शांत थे और दीदी कभी अपना चहरा मेरे सीने पर रगडती कभी मेरे बालो से खेलती थी ,
'दीदी ,'बहुत देर तक दीदी की कोई हरकत ना देखकर मैंने कहा,
'ह्म्म्म 'दीदी हलके से 
'कुछ बोलो ना,'
'क्या '
'मैं कुछ बात बोलू ,'
'हम्म्म'मैं दीदी के बालो को सहलाता रहा ,और वो मेरे छाती के बालो को ,
'दीदी आपको देबू कैसा लगता है ,वो आपसे बहुत प्यार करता है .'दीदी ने अपना चहरा ऊपर उठा कर मेरी और देखा,
'भाई प्लीज ,अब और नहीं ,तूने देखा ना ,पहले परमिंदर फिर मनीष,साला जिससे भी प्यार की उसने मुझे धोखा दे दिया ,'मैं दीदी को और दुखी नहीं करना चाहता था,
'अच्छा पर अविनाश ने तो नहीं दिया ना धोखा,सब थोड़ी ना एक जैसे होते है,'दीदी ने अपनी आँखे बड़ी कर मुझे देखा ,
'वो तो बहुत अच्छे है,पर देख ना जो अच्छा निकला उसने अपनी बहन बना लिया ,'
'ह्म्म्म मतलब की आपके भाई लोग ही अच्छे होते है,जैसा की मैं है ना,'मेरे और दीदी के चहरे पर एक मुस्कान खिल गयी ,
'हां मेरे भाई ,मेरे नसीब में किसी अच्छे इन्शानो की गर्ल फ्रेंड नहीं बहन बनना ही लिखा है ,आयशा कितनी लक्की है ना की तेरे जैसा बॉयफ्रेंड उसे मिला ,'मैंने दीदी के चहरे को पकड़ कर अपने पास खीचा ,
'ये बात अपने दोस्त को समझाओ ना,'दीदी की एक हसी निकल गयी ,
'वो तो कब से राजी हो जाती तू ही फट्टू है तो वो बेचारी क्या करेगी ,'दीदी ने हस्ते हस्ते मेरे सर पर एक प्यारी से चपात मार दि,
'अरे दीदी पहली बार है ना यार समझा करो ,लेकिन दीदी एक चीज बोलू,उसे जब भी देखता हु मुझे तुम्हारी ही याद आ जाती है ,और जानती हो उसे मैं पसंद ही इसलिए करता हु क्योकि वो मुझे तुम्हारी याद दिलाती है ,'दीदी मेरी बातो को सुन थोड़ी इमोशनल हो गयी उनकी आँखों में प्यार के कुछ आंसू आ गए थे ,
'मेरा प्यारा भाई,तू कब बड़ा होगा रे ,जब भी तुझे देखती हु तू मुझे वही छोटा सा नन्हा सा शांत भोला भाला सा मेरा प्यारा भाई लगता है ,'दीदी मेरे मुह को अपने हाथो में दबा दि और मेरे गालो में एक जोरदार सा किस कर दि की मेरा पूरा गाल ही गिला हो गया,
'क्या दीदी मैं बच्चा थोड़े ना हु,'मैंने उस गीलेपन को साफ़ करते हुए कहा,'
'मुझे तो लगता है ,'मुझे एक शरारत सूझी
'अच्छा लेकिन आप तो कहती थी की मेरा बहुत बड़ा हो गया है,,'मेरे चहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गयी 
'अरेएएए 'दीदी के चहरे पर एक मुस्कान तेरी पर थोड़ी ही देर में उनका चहरा गंभीर हो गया,
'क्या हुआ दि ,'दीदी में मुझे बड़े ही प्यार से देखा और मेरे माथे पर एक किस कर दिया 
'भाई कितने दिन हो गए ना हम ऐसे साथ समय ही नहीं बिता पाय ,मैं भी कहा उस कमीने के प्यार में पड़ गयी थी,'
'हा दीदी और प्लीज् आप देबू के बारे में सोचना जरुर वो बहुत ही अच्छा लड़का है ,और मैंने उसकी आँखों में देखा है वो आपसे बहुत प्यार करता है,आप भी जिंदगी में आगे बड़ो और खुश रहो मुझे इसके अलावा क्या चाहिए ,'
'ओके भाई पर अभी नहीं ,अभी तो मुझे मेरे भाई का प्यार उसे दिलाना है ना ,और मुझे अपने भाई को बहुत सा प्यार करना है ,और तुझसे जादा मुझे कोई प्यार कर सकता है क्या,'दीदी ने मुझे इतने प्यार से देखा की मेरे मन का सैलाब फुट पड़ा और मैंने उन्हें कसकर अपने सीने से लगा लिया ,कुछ ही देर में मैंने दीदी का चहरा उठाया उन्होंने मेरी आँखों में कुछ आंसू देखे और अपने होठो से उसे पि लिया और मेरे होठो पर अपने होठो को टीका दिया हमारा होठ बस टिके थे उनमे कोई भी हलचल नहीं हो रही थी,अगले ही पल मैंने उनके उपरी होठो को अपने होठो में ले लिया ,दीदी की एक आह ऐसे निकली जैसे तपते हुए तवे में पानी छिड़क दिया गया हो ,
'ह्म्म्म ह्म्म्म 'मैं पुरे लिज्जत से उनके होठो को अपने होठो में भरकर उनका रस पीना शुरू किया ,दीदी ने अपने स्तनों को मेरे सीने में दबाना शुरू कर दिया ,जब हमारा ये चुम्बन टुटा तो दोनों की आँखों में पानी था ,और होठो में एक मुस्कान ,
'मैं तरस गयी थी भाई इस प्यार के लिए ,'मैंने दीदी के आँखों से लुडकता पानी अपने हाथो से पोछा ,
'तो क्यों नहीं आई मेरे पास ,'दीदी ने एक गहरी सांस ली,
'शायद मैं कही और उस प्यार को तलाश रही थी ,मैं भी कितनी पागल हु ना,तुम्हे अपना सब देने का वादा किया और किसी और की तलाश में लग गयी ,'
'नहीं दीदी आप सही हो ,मैं आपका भाई हु,हमें एक समय पर रुक ही जाना था ,और 'दीदी ने मेरे होठो पर अपने उंगलिया रख दिए ,
'नहीं भाई हमें कही नहीं रुकना था ,और अब हमें अपनी दीवारों को तोडना होगा ,यही तो वो प्यार है जिसकी मुझे और तुम्हे तलाश है ,भाई ये हवस नहीं है ,मेरे अंदर उस दवाई का डोस होते हुए भी मैं इतने दिनों तक किसी से सम्बन्ध नहीं बनायीं इसका कारन तुम्हारा ही तो प्यार था,और अगर ये हवास होता हो शायद मेरे लिए रुकना मुस्किल हो जाता ,हम उतने आगे निकल गए जितना एक कपल जाने के बाद कभी रुक नहीं पाता पर हमारे प्यार ने मुझे दवाई के असर के बाद भी रोके रखा और तुम्हे इतनी उर्जा होते हुए भी ,ये हवास में संभव नहीं था भाई ,ये प्यार ही है,हमरे बीच का प्यार ,जहा हमें एक दुसरे से कुछ नहीं चाहिए बस एक दूजे की खुसी चाहिए,'मैं दीदी के मासूम चहरे को देख रहा था ,उनकी बड़ी बड़ी आँखे ,उनके नर्म गुलाबी होठ,उनके फुले हुए गाल जो चिकनाई से चमक रहे थे ,आँखों में भरा पानी जो उनकी उज्वल आँखों को और चमका रहा था,उनके काले बाल जो उनके कमर तक जाते थे और उनकी कमर के नीच की वो गोलाईया जो किसी नर्म नर्म किसी इद्रधनुष की तरह थे ,उनकी मासूमियत पर मैं अपनी जान दे देना चाहता था ,उनके लिये जहा की हर ख़ुशी उनके कदमो में रख देना चाहता था ,शायद मुझे मेरा प्यार दिखने का और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था की आख़िरकार मैं क्या कर डालू की दीदी के चहरे पर एक हसी आ जाए ,उनकी मुस्कान कभी भी नहीं जानी चाहिए ,मैंने प्यार से दीदी के गालो पर अपने हाथ ले गए ,मेरा स्पर्श इतना भावनाओ से भरा था की दीदी के मन ने भी उसे महसूस कर लिया ,वो मेरे हाथो को चूम गयी ,हमारे आँख आपस में मिले हुए थे एक पल के लिए भी हमें एक दूजे से दूर नहीं जाना था,
'भाई आज हर दिवार तोड़ दो इस प्यार को आजाद कर दो की हम इस मुक्त गगन में खुलकर सांसे ले सके ,'मैं अब भी दीद के चहरे हो देख रहा था ,मुझे नहीं पता था की मैं कैसे दिवार को तोडूंगा,शायद दीदी भी इस बात को समझ चुकी थी,वो मेरे ऊपर झुकी और मेरे कानो में कहा ,
'आज मेरी निकर भी उतर सकता है ,'दीदी की इस बात ने मुझपर एक करेंट की धार छोड़ दि ,एक झुनझुनी सी मेरे पुरे बदन में फ़ैल गयी थी,मैंने सर उठाया तो दीदी के चहरे पर मैंने शर्म देखा और होठो में मुस्कान ,मुझे खुद पता नही था की मैं कैसा रियेक्ट करू मैंने खुद को पूरी तरह से दीदी को सौपने का फैसला किया ,
'दीदी अब मैं कुछ भी नहीं करना चाहता ,मैं बस आपका होना चाहता हु ,पूरी तरह से आपका ,मुझे नहीं पता मैं क्या करूँगा पर मुझे इतना पता है ,जो भी होगा वो मेरा प्यार होगा,'दीदी ने सजल नैनों से मेरे मस्तक पर एक चुम्बन का तिलक किया ,और अपने होठो से मेरे होठो को मिला दिया और हमारे बीच की सभी दूरिय उसी क्षण से ख़तम हो गयी ,हम अब एक ही थे और कोई दूजा ना था ,हम बस अपने को एक दूजे में समेटने की पूरी कोसिस कर रहे थे ना जाने कितने समय तक हम एक दुसरे के होठो को चूसते रहे थे हमारी सांसे थी पर मेरे लिंग में कोई भी अकडन नहीं थी और ना ही इसका भान ही रह गया,समय जैसे रुक सा गया हो ,हम एक दूजे को अपनी बांहों में भरे बस खो जाना चाहते थे ,मुझे तब थोडा होश आया जब मैं दीदी के टी शर्ट के अंदर अपना हाथ घुसाए था और उनकी पीठ को सहला रहा था ,उनकी नंगी पीठ पर अपने हाथो को चलते हुए मैंने उनके शर्ट को निकल फेका मेरा सीना पहले से ही नग्न था ,दीदी के नर्म स्तनों के आभास ने मुझे फिर से किस के खुमार से बहार निकला मैंने अपने हाथो से उन्हें दबाना शुरू किया पर होठो को नहीं छोड़ा दीदी भी अपने हाथो को मेरे सर पर कसली थी और पूरी शिद्दत से मेरे होठो को अपने में समां रही थी ,उन्हें शायद मेरे हाथो के हलचल तक का आभास नहीं हो रहा था ,पर जब मैंने पूरी ताकत से एक वक्ष को दबाया ,
'आहह भाई थोडा धीरे ,'दीदी साँस लेती हुई बोल पायी उनकी सांसे उखड़ी हुई थी ,वो साँस ले पाती इससे पहले ही मैंने फिर से अपना मुह उनके मुह में घुसा दिया ,मैंने उन्हें पीठ के सहारे लिटाया और उनके ऊपर छा सा गया,मैंने दोनों हाथो से उनका चहरा पकड़ा और उनके होठो को छोड़ा फिर ,फिर उनके गाल ,उनकी आँखे उनकी नाक ,उनका माथा ,आँखों की पुतलिया,गरदन ,कन्धा ,छाती ,उजोर ,पेट ,नाभि ,...मैं बस चूसता गया मुझे नहीं पता था की मैं क्या कर रहा हु ,ना दीदी को ही पता था,हम बस खो से गए थे मैंने फिर उनके उजोरो को पकड़ा और उनके उन्नत निपलो को अपने होठो में समां लिया ,दीदी बस छटपटा रही थी ,
'आः आःह भाई,आः आः आआअह्ह्ह्ह भाआआआआआई ,'मैंने अपने मन भर उसे चूसा जब तक की वो लाल नहीं हो चुके थे,मैं निचे आये दीदी का निक्कर और उनकी जन्घो के बीच का गीलापन मुझे दिखाई दिया मैंने अपने जनहो के बीच एक विशाल खम्भे सा दिखाई दिया ,जिसकी अकडन से अब मुझे दर्द होने लगा था,मैंने उसे आजाद कर दिया ,मैंने निकर के छोरो को अपने दोनों हाथो से पकड़ा,मैंने दीदी की और देखा दीदी काप रही थी ,वो एक दिवार थी जो मुझे हमेशा के लिए गिरानी थी ,जिसे गिराकर ही मैं दीदी को अपना बना सकता था,
'दीदी ,'दीदी ने बड़ी मुस्किल से आँखे खोल मुझे देखा ,
'निकाल दू ,'दीदी के चहरे में एक मुस्कान आ गयी ,एक प्यार उनकी आँखों में उतर गया ,
'अभी भी पुच रहा है ,'मुस्काते हुए उन्होंने पूछा और मुझे अपने ऊपर खीच लिया मेरे होठो को फिर अपने होठो में भर लिया ,
'मेरा प्यारा भाई ,'दीदी ने मेरे हाथो को निकर के और ले गयी वो मेरे आँखों में ही देख रही थी उनके चहरे पर अब भी वो मुस्कान थी और आँखों में वही प्यार ,मेरे हाथो में दबाव बनाते वो निकर को निकल डी और अपने पैरो से निकाल निचे फेक दि ,वो हमेशा की तरह कुछ नहीं पहनी थी ,पर मुझे इसकी फिकर ही नहीं थी ना ही मैंने ये देखने की जहमत ही की ,मैं तो फिर दीदी के होठो को चूसने लगा ,हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे मैं उनके ऊपर लेटा था ,और दीदी अपनी आँखे बंद किये बस खोयी हुई थी ,मेरा अकड़ा लिंग दीदी के गिले योनी में हलके हलके घिस रहा था,थोडा गीलापन से बिग कर लिंग भी फिसलने लगा मैंने एक दबाव दिया पर वो जन्घो से जा टकराया ,ऐसा कई बार होता रहा पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ,क्योकि ये बिलकुल स्वाभाविक तोर से हो रहा था ,मैं कोई मेहनत नहीं कर रहा था,मैंने तो दीदी को किस करने में डूबा हुआ था,पर दीदी ने मेरे लिंग को पकड़ा जैसा की उनका पहला मौका नहीं था उन्होंने उसे सही जगह लगाया ,वहा पहुचकर वो चिपिचिपा गिलापण मेरे लिंग को फिर से गेर लिए ,मैंने स्वभावतः फिर झटका मारा लेकिन ये क्या मेरे मुह से एक चीख सी निकली जो दीदी के होठो में खो सी गयी ,मेरी लिंग की चमड़ी ने पहली पर इस घर्षण का आभास किया था लेकिन उस अतिरेक आनद से बढकर ये दर्द नहीं था,मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और ,
'आआह्ह्ह्ह भाऐईई भाऐईईईईईईई '
'दिदीईईईईइ आह्ह्ह्ह 'हमारा मिलन हो चूका था पर अभी तो उफान की शुरुवात भर थी ,
मैंने और दीदी ने आँखे खोलकर एक दूजे को देखा ,हम एक रहत की साँस ले रहे थे ,हमारी आँखे मिली दोनों के चहरे पर एक मुस्कान फैली और मैंने फिर एक जोरदार धक्का मार दिया ,
'अआह्ह्ह 'दोनों के मुह से निकला और दोनों एक दूजे को देख हस पड़े ,,,मैंने धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा ,मेरा लिंग दीदी के योनी रस से पूरी तरह से गिला हो चूका था और हम फिर एक गहन तन्द्रा में प्रवेश कर रहे थे जहा बस प्यार था और दुनिया की कोई शय नहीं हमारी आँखे फिर बंद होने लगी मैं तो किसी भी तरह से आंखे खोल भी पा रहा था पर दीदी की आँखे इतनी बोझिल हो चुकी थी वो अपनी आँखे खोल ही नहीं पा रही थी ,मेरे धक्के एक लय पकड़ चुके थे और हमारी सांसे और आंहे ,उसी लय में चल रहे थे ,समय खो चूका था ,और सारा जहा भी खो चूका था ,हम एक दुसरे को काट रहे थे ,चूस रहे थे चूम रहे थे ,पर हमें नहीं पता था की हम क्या कर रहे है ,कोई कण्ट्रोल हमरे ऊपर नहीं था ,ना हमारा ना और किसी का ,पहले धीरे धीरे आःह आह्ह से लेकर तेज तेज सांसे और आह उह ओह तक पहुच जाते फिर धीरे माध्यम तेज ये सिलसिला ना जाने कब तक चलता रहा ,हमें आँखे खोल एक दूजे को देखने की फुर्सत नहीं थी ,जैसे किसी ने कहा है ,"यहाँ हर पल ही रहती है मस्ती ,की सर झुकाने की फुर्सत नहीं है ,"
ये हमारे लिए पूजा थी ,प्राथना थी ,सजदा था,वो दुआ थी जिसमे पाना ना था,जो बस थी ,बिना किसी के परवाह के ,बिना किसी मांग के ,बिना किसी तलाश के ,बिना किसी चाह के ,हम थे और बस हम थे,,,...एक दूजे में ऐसे घुल रहे थे की पता लगाना भी मुस्किल था की मैं और तू अलग भी है ,बस मेरा मुझमे ना रहा जो होवत सो तोर ,तेरा तुझको सोपते क्या लागत है मोर...
सांसो में अपनी अंतिम गहराई तक हमें डूबा दिया ,जब लक्ष्य करीब आने को थी तो बस थोड़ी देर के लिए सांसे रुक गयी मेरे अंदर से एक विस्फोट हुए ना जाने कितनी ताकत से मैं धक्के लगाये जा रहा था लेकिन उस विस्फोट ने मुझे शांत कर दिया एक गढ़ा सफ़ेद ,चिपचिपा सा द्रव्य ,मेरे अंदर से निकल दीदी की योनी को भिगो दिया वही दीदी की योनी से ना जाने कितनी बार फुहारे निकल चुकी थी ,लडकियों की एक खासियत होती है की अगर वो प्यार की गहराई का आभास कर पायी और उससे सेक्स करे जिसे वो प्यार करती है तो वो एक नहीं कई चरम सुख (ओर्गोस्म )का अनुभव आसानी से कर पाती है ,एक सम्भोग में लगभग 7 तालो का ओर्गोस्म संभव है ,ऐसा शोधो ने पता लगाया है ...दीदी ने भी आज किसी गहरे तालो पर इसका अनुभव किया था ,और मैंने भी ,तूफ़ान तो शांत हो चूका था पर जैसे हम जम ही चुके थे ,हमारे शरीर एक दूजे से अलग ही नहीं हो रहे थे ,हम पसीने से भीगी थे हमारी सांसे उखड़ी थी ,पर हमारे चहरे में एक परम शांति का आभास था,सबकुछ शून्य हो चूका था ,खो चूका था ,इतनी शांति का आभास मैंने कभी नहीं किया था,ऐसा लग रहा था जैसे मैं खाली हो चूका हु ,बिलकुल हल्का ....हम एक दूजे के चुमते रहे हमारे होठ जैसे कभी एक दूजे से ना बिछड़ेंगे वैसे ही चिपके रहे ,हमारे शरीर इ दूजे के पसीने से सने थे ,चहरा और होठ एक दूजे की लार से सने थे और दीदी की योनी से मेरा वीर्य अब बहार आने लगा था ,मेरे कमर अब भी हलके हलके चल रहे थे जो बड़ी आसानी से फिसल रहे थे पर मुझे रुकने पसंद ही नहीं आ रहा था और ना ही दीदी ही मुझसे अलग होना चाहती थी ,हम वैसे ही लेटे रहे वीर्य अब भी निकल रहा था पर किसे फिकर थी ,मेरे लिंग में कोई जादा ढीलापन नहीं था ,थोड़ी देर में वो फिर उसी आकर में आ गया फिर उसकी नशे तन गयी ,सायद दीदी के कामरस का पान कर वो जादा ही मोटा हो गया था ,जैसे की कामसूत्र ने कहा है की महिलाओ का कामरस पुरुषो के लिंग के लिए सबसे पोसक होता है ,मेरा लिंग पहले से जादा ताना हुआ लग रहा था और जादा मोटा ,दीदी को भी इसका आभास को चूका था ,उन्होंने बस मुझे देखा और मुस्कुराई..
'मेरा प्यारा भाई,रुक बहुत गिला है पोछ दू ,'दीदी उठाने हो हुई लेकिन मैंने उन्हें दबा लिया जैसे मैं नहीं चाहता हु की वो मुझे एक पल के लिए भी छोड़ के जाए 
'नहीं दीदी रहने दो अच्छा लग रहा है ,'हम फिर रति क्रिया में डूब गए ये तब तक चला जब तक की थककर हमारी आँखे ना लग गयी रात भर ना मैं ही अलग हुआ ना उन्हें होने दिया ...मेरा लिंग उनकी योनी में स्खलित होता और वही डूबा रहता,,,,,,,,

कल सुबह मैं जल्दी उठा मेरी हालत बहुत ही खराब लग रही थी, मैंने देखा कि दीदी बाथरुम चली गई है चादर में खून के निशान लगे हुए थे जो हमारे प्यार की निशानी थे., मैं तो बस सोच रहा था की आगे क्या होगा, मैं डॉक्टर से मिलना चाहता था लेकिन उनसे क्या कहता है कि मैंने यह सब किया वह भी अपनी दीदी के साथ, मैं खुद को समझाने में लगा था लेकिन क्या समझा पाता मुझे कुछ नहीं पता मैंने अपने आप को संभाला और बाथरूम की तरफ चल दिया मैंने देखा कि दरवाजा खुला हुआ था. और दीदी अंदर पूरी तरह से नंगी नहा रही थी मैं उनके जिस्म को देखने लगा वह भरी भरी , संगमरमरी जिस्म जो किसी की भी नियत को डगमगा सकता है ,उनके वह उभार उनका पिछवाड़ा , मैं बस उन्हें देखता रहा...
उन्होंने जैसे ही मुझे पलट कर देखा उनके होठों पर एक मुस्कान थी जो बड़ी प्यारी लग रही थी ,नहीं लग रहा था हमारे बीच कुछ ऐसा हुआ है जो नहीं होना था वह अभी भी मुझे उतने ही प्यार से देख रही थी, जैसे पहले देखती थी, मेरी सांसे कुछ और बदती चली थी कुछ और मेरी धड़कन थोड़ी मध्यम थी थी.. उनका चेहरा पानी से भीगा हुआ था उनके बालों से पानी गिर कर उनकी जंघो तकआ रहा था , मैं अनायास ही उनकी तरफ बढ़ता गया मेरे चेहरे पर हम मासूमियत के भाव नहीं थे मैं फिर से उन को पाना चाहता था मैं फिर से उनका होना चाहता था मैं सिर्फ से अपनी जन्नत खोजने निकला था, मैं फिर से यह चाहता था कि मैं उनके साथ एक हो जाऊं, मैं उनके पास गया पीछे से दीदी को जकड़ लिया दीदी ने फिर मुस्कुरा कर मुझे देखा, मैं उनकी चाहतों में खोना चाहता था मैं उनकी बाहों में सोना चाहता था, मैं उनकी सांसो में रहना चाहता था, मैंने उन्हें किस किया, उनके गालों पर, उनकी बालों को अपने हाथों से सहलाया ,उनके वक्षों को मसलता गया, मेरे हाथ अब उनकी योनि पर थे उनके वह घुंघराले बाल जो उनकी योनि में को घेरे हुए थे, ना जाने कैसे एक उंगली मैंने उनकी योनि के अंदर डाली और धीरे-धीरे उसे अंदर बाहर करता रहा ,उनकी योनि गरम नरम मखमली और पानी से भीगी हुई थी वह काम रस का पानी था, मैं भी पूरा नंगा ही था मैंने अपने लिंग को जो अब तक पूरी तरह तन चुका था दीदी के गीले गीले गर्म-गर्म योनि में अंदर तक ले जाने लगा एक बार दीदी भी अपनी आँहो को नहीं रोक पाई उन्होंने पलटकर मुझे अपने आगोश में भरने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुई, मैंने उन्हें पीछे से पकड़ रखा था मेरी मेरे धक्के की स्पीड बढ़ती जा रही थी पहले धीरे-धीरे फिर जोर जोर से दीदी के मुंह से आहे निकलने लगी,
' आह आह आह आह आह भाई भाई भाई भाई आह आह आह आह आह आह भाई भाई धीरे भाई धीरे-धीरे और धीरे-धीरे थोड़ा तेज हां भाई ऐसे ही ऐसे ही आह आह आह आह आह आह आह रुक जाओ ना जाओ ना थोड़ी देर के लिए रुको ना, मुझे पलटो ना मैं तुम्हारा चेहरा देखना चाहती हूं '
वह पलट गई और मुझसे लिपट गई उन्होंने मेरे जीभ से जीभ मिला लिया और उनकी थूक मेरे मुंह के अंदर जाने लगी मैंने भी अपनी जीभ से जीभ से दीदी की गहराइयों को नाप लिया मेरे धक्के बड रहे थे. वह स्पीड पकड़ रहे थे, मैं और जोर से और जोर से और जोर से और जोर स दीदी और मेरी सांसे एक हो रही थी मुझे रुकना नहीं था, ना ही दीदी को हम बस एक होना चाहते थे, वह पानी की फुहार है जो हमारे तन में गिर रही थी मानो कोई आग ही आग हो, ठंडे पानी में भी हमारा शरीर तपाये जा रहा था, वह तपन ऐसी थी कि मुझसे सहा नहीं जा रहा था, मैंने दीदी का एक पैर उठाकर अपने हाथों में ले लिया और दीदी की योनि में जड़ तक जाने लगा, वह रगड़ कितनी मजेदार थी कि मैं रुकना नहीं चाहता था मुझे लग रहा था कि जैसे हमेशा मैं ही रहूं यही करता रहू, दीदी पास रखा साबुन उठाया और मुझे नहलाने लगी, मेरे पूरे शरीर पर उन्होंने साबुन मल दिया ,साबुन ने अपना कमाल दिखलाया हम दोनों का शरीर एक दूसरे में फिसलने लगा, दीदी के उन्नत वक्ष अब मेरा मुंह में थे,मैं उन्हें चूस रहा था दबा रहा था जैसे उनका दूध अभी पीना चाहता हूं, दीदी ने अपना हाथ मेरे सिर पर रख दिया और वह उसे अपनी और खींचने लगी दीदी की सांसे बढ़ने लगी थी और मेरी भी, हम बस अब झड़ने वाले थे मैंने दीदी को दबोचा उनके वक्षों में अपने दांत गड़ा दिए, Ek Aur Toofan आकर चला गया मैं अब दीदी के अंदर अपना गाढ़ा वीर्य डाले जा रहा था, डाले जा रहा था....
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08-22-2018, 10:59 PM,
#27
RE: Bhai Behen Chudai मैं ,दीदी और दोस्त
जैसे कभी यह खत्म ना हो, फिर भी ये खेल रुक नहीं रहा था मेरी स्पीड कम नहीं हो रही थी, दीदी ने मुझे नहलाया सहलाया और मेरे कानों पर धीरे से कहा भाई हो गया ना अब तो रुक जा, मैं दीदी के मासूम चेहरे को देखता रहा और अपना कमर तेजी से चलाता रहा उनके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर मैंने स्पीड और बढ़ा दी ,फिर से दीदी के मुंह से
"आह आह आह आह भाई भाई मेरा प्यारा भाई मेरा सबसे प्यारा भाई आई लव यू भाई भाई आह आह भाई मुझे अपना बना लेना हां हां हां भाई ऐसे ही हां भाई, और जोर से और जोर से हां हां"
फिर एक तूफान चल पड़ा फिर मैं दीदी के अंदर झड़ता गया दीदी ने फिर मुझे दबोच लिया और अपने नाखून मेरे पीठ पर गडा दिए, हमारे प्यार का यह सफर भी खत्म हो गया हम दोनों नहा कर बाहर निकले, दीदी ने तालियों से मुझे साफ किया और वह आईने के सामने अपने बालों को सवारने लगी, मैंने फिर से उन्हें पीछे से पकड़ा और उनकी योनि पर अपने हाथ फिराने लगा, दीदी ने मुड के मुझे देखा भाई तेरा मन नहीं भरा क्या, मैंने हंस कर उन्हें कहां दीदी अभी कैसे भर जाएगा...

मेरे और दीदी का चेहरा आईने में दिख रहा था, मैं दीदी के उन्नत वक्ष को अपने हाथों से सहला रहा था, मेरा लिंग फिर से अकड़ने लगा, मैंने पीछे से ही अपने लिंग को दीदी की योनि में रगड़ना शुरु किया और धीरे से उसे अंदर कर दिया दीदी के मुंह से फिर से आह निकली... क्या भाई फिर से मुझे हंसी आ गई लेकिन मैं अपनी हरकत जारी रखी ,धीरे-धीरे दीदी के भी योनि में गीलापन आ गया और उनके निप्पल खड़े होने लगे, मैंने उन्हें आईने के सामने झुका दिया अब दीदी का चेहरा आईने में दिख रहा था, और मैं उनके पीछे खड़ा हुआ, मेरी कमर अब तेजी से चलने लगी दीदी फिर से सिसकियां लेने लगी, मैंने दीदी के बाल को पकड़ा और जैसे कोई घोड़े की सवारी करता हो, वैसे ही दीदी को घोड़ी बनाकर घुड़सवारी करने लगा दीदी के उन्नति पृष्ठ दीदी के मेरे सामने थे उन्होंने अपने हाथों से दबा रहा था इतना मज़ा इतना नशा जैसे मैं जन्नत में हूं, मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह मुझे इतना मजा देगा और कोई नहीं मेरी दीदी देगी, मेरी प्यारी दीदी, इतनी प्यारी ,इतनी प्यारी जिसे मैं अपना पूरा जहान मानता हू, जिनके चेहरे पर एक शिकन भी आए तो मेरा दिल धड़कता है, जिनके चेहरे पर चिंता की एक लकीर भी मुझे बेचैन कर देती है आज मैं उन्हें भोग रहा था, मैं उनके मजे ले रहा हूं ,सिर्फ सिर्फ और सिर्फ क्या मैं अपनी वासना को पूरी कर रहा हूं, नहीं यह प्यार है ,,खाक का प्यार???? यह तो पूरी तरह से वासना थी.. नहीं नहीं यह तो प्यार है, मेरा प्यार मेरी दीदी का प्यार मेरी दीदी गलत नहीं कर सकती और मैं कैस मैं कैसे मैं कैसे गलत कर सकता हूं, नहीं नहीं अचानक मेरी स्पीड धीरे होने लगी मैं किसी सोच में किसी गहरी सोच में डूबने लगा, दीदी ने मुड़कर मुझे देखा मेरे चेहरे की चिंता उनसे छुपी नहीं थी वह जानती थी कि मैं क्या सोच रहा हू उन्होंने मुड़कर मुझे पकड़ लिया, मेरी आंखों में देखा मेरी आंखों में कुछ पानी आ चुका था ,मेरा जेहन दर्द से भर रहा था दीदी ने मुझे अपने हाथों से सहलाया ,

" भाई तु जो सोच रहा है वह तो सही है, लेकिन यह हमारा प्यार है, इसमें कोई सीमा नहीं है, नहीं हो सकती है, अगर तू दुखी है ,अगर तू दुखी है तो मत कर लेकिन याद रख तेरी दीदी को भी इसमें वही मजा मिलता है जो तुझे मिलता है, भाई मेरे प्यारे भाई आकाश प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़ दर्द में मत रहना, जो भी बात है खुलकर कर तेरी दीदी अब तेरी है पगले, तू नहीं जानता तूने मुझे कितना सुख दिया है, मैं तेरी हूं मैं अपने भाई की हु,और मुझे तेरा होने से कोई नहीं रोक सकता तू भी नहीं, अब से हमारे बीच यह आंसू नहीं आएंगे"
उन्होंने हाथ बढ़ाकर मेरे आंसू पोछें उनकी बातों से मेरा दिल हल्का हो गया था लेकिन लिंग में तनाव अभी भी था, मैंने फिर धीरे-धीरे धक्के देना शुरू किया दीदी की एक ही खिलाती हंसी सुनाई थी और दीदी फिर से अपना सर दर्पण के सामने कर दी दीदी के चेहरे का भाव बदल रहा था और मेरी स्पीड भी बढ़ रही थी, अब मेरे मन में कोई ग्लानि नहीं थी मैंने फिर से उनके बालों को पकड़कर अपनी तरफ खींचा दीदी हल्के से दर्द में चिल्लाई
" भाई आह आह आह आह" थप थप थप थप की आवाज से पूरा कमरा गूंज गया हमारी सांसे फिर से तेज होने लगी मैं आईने से दीदी का चेहरा देख रहा था उनके चेहरे पर आई खुशी महसूस कर रहा था जो बढ़ा रही थी,जो मेरा जोश बढ़ा रही थी, मैंने उनकी कमर को अपने हाथों से जोर से पकड़ा और पूरी ताकत से धक्के देने लगा धक्का देने लगा दीदी का कामरस मेरे लिंग को भीगा चुका था, और बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था दीदी के चेहरे पर असीम आनंद के भाव थे, और मेरा चेहरा लाल हुआ जा रहा था पता नहीं क्यों छूटने का मन ही नहीं कर रहा था, ना ही मेरा ना ही मेरे लिंग का.. हम दोनों ही इस लम्हें को और ज्यादा और ज्यादा देर तक रखना चाहते थे, लेकिन कब तक जब तक सांसे बंद हो जाए, मैंने अपनी पूरी ताकत अपने कमरे में लगा दी मेरा लिंग पूरी जड़ तक दीदी के अंदर जा रहा था, दीदी खुशी से आनंद से चमक रही थी उनके मुंह से सिसकारियां छूट जा रही थी उन्होंने अपने होंठों को अपने दांतों में दबा रखा था उनकी आंखे बंद थी उनका नंगा जिस्म पूरी तरह से चमक रहा था, मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी आखिरकार दीदी ने एक फुहार छोड़ी और वह निढल होकर जमीन में गिर गई... मैंने किसी तरह उन्हें अपने हाथों से संभाले रखा दी जैसे बेहोश हो गई थी, मैंने उन्हें उठाकर वैसे ही अपनी गोदी में उठाया और बिस्तर पर औंधे मुंह लिटा दिया, मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उसी स्पीड से फिर से अपनी कमर हिलाने लगा दीदी के नितंबों में पढ़ने वाली चोट की आवाज इतनी मादक थी एकलव्य लयबद्ध तरीके से आवाज में आ रही थी, दीदी मानो बेहोश थी और मैं उनकी कमर पर अपनी कमर को तेजी से खिलाया जा रहा था, मेरे धक्के अब बहुत तेज और बहुत ताकत से लगाया जा रहे थे, दीदी बस आह आह कर रही थी वह भी बहुत धीरे आवाज म दीदी ने फिर एक बार फुहार छोड़ी और फिर थककर चूर हो गई, लेकिन मैं, जैसे मेरे अंदर कोई जानवर आ गया हो मैं रुकने का नाम नहीं ले रहा था, मैंने दीदी के कमर को अपने हाथों से उठाया और पूरी ताकत से अपने धक्के बढ़ा दिया, मैंने दीदी के ऊपर लेट गया और उनके चेहरे को अपनी ओर खींचा उनकी आंखे बंद थी मैंने उनके होठों को अपने होठों में दबा लिया और उन्हें चूसने लगा, थोड़ी देर में दीदी ने जब आंख खुली तो मुझे अपनी नशीली आंखों से देखने लगी, मैं अभी उनके होंठों को चूस रहा था मेरे कमर और धीरे धीरे चल रहे थे दीदी की आंख खुलते ही मैंने कमर की स्पीड बढ़ा दी दीदी के चेहरे पर फिर एक स्माइल आ गई, उन्होंने मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ा और अपनी तरफ खींचा मेरे होठों को चूसने लगी जब हमारे होंठ एक दूसरे से अलग हुए पर दीदी ने हल्के से कहा 
"भाई भाई सुनना जल्दी करना कॉलेज भी तो जाना है"
मैंने उठ कर फिर से उनके कमर को अपने हाथों में पकड़ा और तेजी से धक्के लगाने लगा दी दी दी दी थोड़ी देर ही मेरा साथ दे पाई और फिर झाड़कर चूर हो गई लेकिन इस बार दीदी ने मुझे रोका और पास से ही एक कपड़ा लेकर अपनी योनि को साफ किया और हंसकर मुझे कहा अब डाल... अब दीदी की योनि थोड़ी सुखी थी जिससे मेरे लिंग को अच्छी रगड़ मिल रही थी, जिससे मेरा मजा और बढ़ गया था मैंने तेजी दिखलाई और फिर से पूरी ताकत जुटा कर अंदर बाहर करने लगा, आखिरकार दीदी का गीलापन गीलापन फिर से बढ़ने लगा और मेरा लिंग फिर से दीदी की गहराइयां नापने लगा, थोड़ी देर के मेहनत के बाद ही मैंने अपना संपूर्ण गाढ़ा वीर्य दीदी के अंदर छोड़ने को तैयार हो गया, मैंने फिर से पूरी ताकत से धक्के लगाए और अपना पूरा वीर्य दीदी के अंदर धकेलता गया..
अब मैं बिल्कुल बेजान सा दीदी के ऊपर गिर पड़ा दीदी ने मुझे संभालते हुए अपने ऊपर लिया और मेरे लिंग को जो कि थोड़ा बेजान हो रहा था अपनी योनि में डाल लिया ताकि थोड़ा भी वीर्य बाहर ना जाने पाय, दीदी के ऐसा करने से मेरे लिंग में थोड़ी अकड़न फिर बढ़ गई और मैं दीदी की योनि में समाया हुआ उन्हें पकड़कर सोने लगा....
लगभग आधे घंटे हम दोनों ऐसे ही सोये रहे, हम एक दूसरे को किस करते, कभी मैं हल्के हल्के कमर चलाता, दीदी मुझे जकड़ लेती मेरे होठों को अपने होठों में भर लेती ,हम आधे घंटे तक ऐसे ही लेटे रहे... दीदी आखिरकार मन मारकर उठी और नहाने चले गई साथ मैं भी चल दिया, हम दोनों साथ नहाए और तैयार होकर बाहर निकल गया.....

मैं और दीदी डॉक्टर के क्लीनिक में बैठे हुए थे दोनों आज बहुत खुश लग रहे थे डॉक्टर हमारे सामने अपनी मेज पर कुछ कर रहे थे, 
“क्या बात है आज से तुम दोनों के चेहरे बहुत ही चमक रहे हैं,” हम दोनों के चेहरे में एक शर्म का भाव आ गया,
“कुछ नहीं डॉक्टर हम तो बस आपको धन्यवाद देने आए थे”
“धन्यवाद धन्यवाद किस लिए”
“आपने यह जो सब किया हमारे लिए उसके लिए आपका धन्यवाद”
“अरे तुम दोनों तो मेरे बच्चे हो मैं तुम्हारे लिए नहीं करुंगा तो किसके लिए करुंगा, लेकिन एक बात कहूं आज सच में तुम दोनों बहुत प्यारे लग रहे हो लगता है कोई खास बात है”
मैं आश्चर्य से डॉक्टर को देख रहा था लेकिन दीदी के चेहरे में एक शर्म का भाव दिखाई पड़ रहा था दीदी का चेहरा लाल हो चुका था मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था, लेकिन दीदी सब समझ रही थी कि डॉक्टर क्या कहना चाहते हैं
हम लोग डॉक्टर से यही बात करते रहें थोड़ी देर बाद डॉक्टर से विदा लेकर हम दोनों जाने लगे डॉक्टर ने दीदी को रोक लिया और मुझे बाहर बैठने कहा, मुझे तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन डॉक्टर की बात कैसे डाल सकता था मैं बाहर चला गया…
“तो लगता है तुम दोनों के बीच कुछ हो गया”
“क्या डॉक्टर आप भी” दीदी ने शरमाते हुए कहा
“ हां कुछ तो हो गया तुम्हारे चेहरे की चमक बता रही है कि कुछ तो हो गया तो बताओ आकाश कैसा है, जैसे मैंने बताया था वैसे ही है ना बिलकुल जानवर सा” डॉक्टर के चेहरे में एक इस्माइल आ गई जबकि दीदी पूरी तरह से शर्मा चुकी थी
“ हां डॉक्टर आप सही कह रहे हैं मुझे कभी-कभी आकाश की चिंता होती है, मैं तो देख कर दंग रह गई कितनी ताकत वह कैसे संभाल पाते हैं” डॉक्टर का चेहरा थोड़ा गंभीर हो गया
“ वह सब तो ठीक है लेकिन आकाश के अंदर कोई ग्लानि का भाव तो नहीं है,”
“ हां थोड़ा तो है लेकिन अब वह इसमें मजे लेने लगा है,” दीदी अभी डॉक्टर से नजर नहीं मिला पा रही थी..
“ ठीक है ठीक है कोई बात नहीं ऐसा तो होगा मुझे पहले ही लगा था वह तुमसे बहुत प्यार करते हैं और तुम भी उससे बहुत प्यार करती हो जब दोनों एक दूसरे से इतना प्यार करते हो तो फिर डर किस बात का तो फिर किस बात का दुख है किस बात की ग्लानि, तुम दोनों इस चीज को इंजॉय करो यह तुम दोनों के लिए अच्छा है कोई भी चीज अच्छी या बुरी नहीं होती उसे अच्छा या बुरा बनाया जाता है जब दिल में प्यार है तो हर चीज अच्छी है और जब दिल में प्यार नहीं होता तो हर चीज बेकार है, तुम दोनों तो बने ही एक दूसरे के लिए हो तुम्हारा प्यार ही तुम्हारी पहचान है, बस आकाश को बहुत प्यार देना वह तुम्हारे बिना नहीं रह पाएगा उसे दूर मत होना उसे डूब जाने देना जितना वह डूबना चाहे…” दीदी डॉक्टर की बात बहुत ध्यान से सुन रही थी,
“ डॉक्टर आपसे एक बात कहनी है”
“हां कहो”
“ डॉक्टर आकाश, आयशा को बहुत प्यार करता है, मुझे कभी कभी डर लगता है कि मेरे कारण आयशा और आकाश के रिश्ते में कोई दरार ना आए, क्या काश उसे भी इतना प्यार कर पायेगा जितना वह मुझे करता है,” डॉक्टर बस मुस्कुरा दिये
“ नहीं कभी नहीं आकाश उसे उतना प्यार कभी नहीं कर पाएगा लेकिन हां तुम्हारा और आकाश का प्यार कुछ अलग है और आकाश और आयशा.का प्यार कुछ अलग है, आकाश भले हि तुम्हारे साथ सेक्स करता है लेकिन फिर भी वह तुझे अपनी बहन मानता है, वह तुझे दिल से चाहता है लेकिन तू उसकी बहन है दीदी है यह चीज मत भूलना,” डॉक्टर की बात से दीदी के चेहरे में एक चमक आ गई
“ मैं भी अपने भाई को बहुत प्यार करती हूं डॉक्टर और उसे हमेशा खुश देखना चाहती हूं भले इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े मैं हर चीज़ करने को तैयार लेकिन डॉक्टर एक बात आपसे कहना है,( इसके बाद दीदी और डॉक्टर के बीच हुई बात गुप्त रहेगी जिसे मैं बाद में खोलूंगा )”
“ हां यह तो ठीक है लेकिन देबू को कैसे मनाओगे..” डॉक्टर ने अपनी चिंता जाहिर की
“ वह बहुत अच्छा लड़का है और मुझसे बहुत प्यार करते हैं मुझे लगता है वह मान जाएगा,”
“हूमममममम ओके देखते हैं लेकिन अगर नहीं माना तो” डॉक्टर फिर चिंता से दीदी को देखते हैं
“ नहीं माना तो आप तो है ना आप किस दिन काम आओगे” दीदी के चेहरे में एक मुस्कान थी वही मुस्कान डॉक्टर के चेहरे में भी थी….

दीदी देबू से मिलने के लिए राजी हो गई , मैं और राहुल उनके इस फैसले से बहुत खुश थे आखिरकार दीदी के जीवन में फिर से कोई प्यार आ रहा था, हम देबू को बचपन से जानते थे जानते तो हम मनीष को भी थे लेकिन देबू के आंखों में मैंने प्यार देखा था जो मनीष की आंखों में कभी नहीं देखा…
देबू इस बात से बहुत खुश था की दीदी उससे मिलने को राजी हो गई पहले कुछ दिन के मुलाकातों में ही दीदी और देबू बहुत करीब आ गए दीदी ने मुझे बताया कि कैसे आज हम ने किस किया और कैसे वो आगे बढ़े,... एक महीने तक यही सिलसिला चलता रहा और आखिरकार दोनों एक हो ही गया, मेरी उम्मीद की विपरीत दीदी ने इस बात का जश्न मनाया.. इन 1 महीनों में मैंने भी आयशा को प्रपोज किया और उसने भी इसे स्वीकार कर लिया, कुछ दिनों बाद कुछ अजीब सा हुआ दीदी देबू से शादी करने की जिद करने लगी, और घरवालों को मनाने की जिम्मेदारी मुझे और राहुल को दी गई, शादी का कारण था की दीदी प्रेग्नेंट थी, देवों के दीदी के सामने कुछ नहीं चल पा रही थी उसे डर था कि उसके घर वाले इस बात का विरोध करेंगे जो हुआ अभी लेकिन दीदी ने किसी की एक नहीं सुनी वह अपना बच्चा नहीं गिराना चाहती थी, मै और राहुल भी नहीं चाहते थे कि दीदी इतनी जल्दी बड़ी जिम्मेदारियों के बोझ तल दब कर रह जाए... लेकिन दीदी किसकी सुनती थी वह तो अपनी जिद पर अड़ी थी,
“ दीदी आप जानती हो यह फैसला आपकी जिंदगी बर्बाद कर सकता है” मैंने गुस्से में कहा
“ हां लेकिन मैं अपने प्यार की निशानी को अपने से अलग नहीं करूंगी, यह बात तुम समझ लो…” मेरी बात सुनकर दीदी का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था राहुल और देबू की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह दीदी का सामना करता या उसे कुछ समझाने की कोशिश करता…
“ दीदी आप बात को समझ नहीं रही हो”
“ भाई तू नहीं समझ रहा है बस और मुझे कुछ नहीं सुनना अगर तुम दोनों घरवालों से मेरी बात नहीं करोगे तो मैं घर छोड़कर जा रहे हूँ.. और हां देबू अगर तुम अपने घरवालों से मेरी बात नहीं कर सकते या मुझसे शादी नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं यह बच्चे इस दुनिया में आएगा तो आएगा, यह मेरे प्यार की निशानी है और मैं इसे किसी भी हालत में कुछ नहीं होने दूंगा चाहे इसके लिए मुझे अपने प्यार से लड़ना पड़े, घरवालों से लड़ना पड़े या भाई तुमसे लडना पड़े….” दीदी के चेहरे में एक दृढ़ता साफ दिखाई दे रही थी जिसे झुकाना किसी के बस में नहीं था उन्होंने अपना फैसला कर लिया था और अब वह किसी की नहीं सुनने वाली थी…
मजबूरन है हमें घरवालों से बात करनी पड़ी मेरे घर वाले तो मान गए लेकिन देबू के घर वाले इस बात का पूरा विरोध किया आखिरकार देबू को घर छोड़कर आना पड़ा एक मंदिर में एक सादे फंक्शन में शादी का कार्यक्रम हुआ… शादी के आठवें महीने बाद ही दीदी ने एक प्यारे से बच्चे को जन्म दिया…
दीदी उस दिन बिस्तर पर लेटी हुई थी और मै उनके पास बैठा हुआ था.. मैंने बच्चे को बड़े प्यार से देखा मेरा भांजा कितना प्यारा कितना सुंदर मैंने उसके छोटे छोटे हाथों को अपनी उंगलियों से सहलाया उसका वह लाल चेहरा दीदी और मेरे बीच की सभी गहराइयों को भर दिया… दीदी मुझे प्यार से देख रही थी और मैं उस बच्चे को देख रहा था, कमरे में बस हम दोनों ही दीदी मुझसे कहा देख भाई तेरा भांजा, मेरे चेहरे पर एक मुस्कुराहट खिल गई मैंने दीदी से प्यार से कहा नहीं दीदी मेरा बेटा…
दीदी ने थोड़े आश्चर्य से मुझे देखा और मैंने कहा
“ उस दिन मैंने डॉक्टर और आपकी सभी बातें सुनी थी”
दीदी थोड़ी देर आश्चर्य से मुझे देखती रही लेकिन फिर उनके चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ गई
“ तो तूने यह बताया क्यों नहीं”
“ आपने मुझे बताया था क्या, मैं उसे बहुत प्यार दूंगा दीदी अपनी जान से ज्यादा इसे प्यार करूंगा यह मेरे और आपके प्यार की निशानी है…” हम दोनों की आंखों में आंसू थे और हम दोनों इस बच्चे को देख रहे थे…..




( समाप्त)
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