kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
08-12-2018, 12:09 PM,
#11
RE: kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
अब स्कूटी सीखने के वक्त हम दोनों को बहुत चिपकना पड़ता था, जब वो मुझे सामने बिठा कर स्कूटी का हैण्डल पकड़ाता और खुद पीछे से झुककर हैण्डल पकड़ता और मुझे गाईड करता था, उस वक्त उसकी सांसें मेरे गालों पर महसूस होती थी, कभी वह मेरी कमर को थाम लेता तो कभी मेरे कंधों पर हाथ रख देता था, मैं रोमांचित हो उठती थी, मुझे अपने पिछवाड़े में कुछ चुभन सी भी होती थी।
अब मैं इस उम्र में तो पहुंच ही चुकी थी कि वह चुभन किस चीज की है जान सकूँ, अब तो बस मैं उस चुभन से लिंग के आकार का अनुमान लगाने की कोशिश करती थी और अंदर ही अंदर शरमा भी जाती थी, कभी कभी योनि भी खुशी में आंसू बहा देती थी।
लेकिन हम दोनों में से कोई भी आगे नहीं बढ़ रहा था।
छुट्टियों के दिन कब बीते, पता ही नहीं चला और अब हम फिर स्कूल जाने लगे।
छुट्टियों के दिन कब बीते पता ही नहीं चला। फिर स्कूल शुरू हो गये, मैं रेशमा और सैम पहले की ही तरह साथ स्कूल जाते थे, सैम स्कूटी चलाता था और कभी रेशमा बीच में बैठ जाती थी तो कभी मैं बीच में बैठ जाती थी।
एक दिन रास्ते के गड्ढे में गाड़ी उछली, उस दिन बीच में मैं बैठी थी गाड़ी के उछलते ही मैंने सैम को कस के पकड़ना चाहा और अपनी बाहें उसके कमर पे लपेट ली, तभी मेरे हाथों को कुछ उभार का अहसास हुआ मैंने जिज्ञासा वश उसे छुआ और दबा दिया।
उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाय राम… यह क्या कर दिया मैंने.. यह तो सैम का लिंग था!
हालांकि ये सब सिर्फ कुछ क्षणों में हुआ था लेकिन सैम मेरी इस हरकत से हड़बड़ा गया और गाड़ी अनियंत्रित हो गई, हम गिरे तो नहीं क्योंकि सैम ने गाड़ी संभाल ली पर गाड़ी रास्ते से उतर कर झुक गई और हमें उतरना पड़ा।
मैंने कान पकड़ कर सॉरी कहा, सैम ने मुस्कुरा कर कहा- कोई बात नहीं!
पर अभी रेशमा को माजरा समझ नहीं आया था तो उसने कहा- भाई तुझे गाड़ी चलानी नहीं आती क्या? आज तो मार ही डाला था तूने हम दोनों को! और तू रे स्वाति… भाई की गलती पे तू क्यों सॉरी बोल रही है?
तो मैं मुस्कुरा दी और सैम ने कहा- तू चुप कर चल, बैठ गाड़ी पे, स्कूल के लिए देर हो रही है।
हम स्कूल पहुंच गये, वहां मौका मिलते ही रेशमा ने मुझे अकेले में फिर पूछा कि उस समय तू क्यों सॉरी बोल रही थी, तो मैंने उसे सारी बात बता दी। अब रेशमा मुझे छेड़ने लगी ‘आय हाय… तू तो बड़ी लक्की है रे, तुझे तो बैठे बिठाये लिंग मिल गया।’
मैंने भी आंखें तरेर के जवाब दिया कि मैं नहीं पकड़ने गयी थी तेरे भाई का बंबू, वो तो सिर्फ एक एक्सीडेंट था, और मुझे क्या मालूम था कि तेरा भाई अपना लिंग खड़ा करके गाड़ी चलाता है।
तो रेशमा ने फिर कहा ‘चल एक्सीडेंट ही सही, बता तो सही कि कितना बड़ा था कैसा लगा?’
मैं मुस्कुरा उठी, मेरी योनि भी चिपचिपा गई और उससे पीछा छुड़ा के जाते जाते मैंने कहा- कल तू बीच में बैठ जाना और पकड़ के देख लेना अपने भाई का लिंग!
वापसी में मैंने बीच में बैठने में झिझक दिखाई तो रेशमा मेरी उलझन समझ कर बीच में बैठ गई, वो लोग मुझे घर पर उतार के चले गये और मैं कपड़े भी बदल नहीं पाई थी कि सैम मुझे गाड़ी सिखाने आ गया।
मैंने मम्मी से कहा- मैं आकर नाश्ता करूँगी।
और सैम के साथ निकल गई, इस साल हम लोगों ने शुरुआत से ट्यूशन नहीं किया था, फिर भी पिछले कुछ दिनों से गाड़ी सीखने का काम बंद था पर आज सैम क्यों आया है और इतना उतावला क्यों है मैं समझ सकती थी।
सैम ने एक गार्डन में ले जाकर गाड़ी रोकी, हम कोई सूनी जगह के बजाय पब्लिक के बीच में नीचे घास पर अगल-बगल बैठे, दोनों कुछ देर खामोश रहे फिर मैंने कहा- आज यहां कैसे लाये हो सैम, कोई खास बात है क्या?
उसने कहा- खास तो कुछ नहीं, बस यह बताओ कि तुमने कभी लिंग देखा पकड़ा नहीं है क्या?
मैं उसके अचानक इस सवाल से हड़बड़ा सी गई पर अब सैम से नजदीकी बढ़ गई थी इसलिए जल्दी ही संभल कर बोली- मैं कहां और किसका देखूँगी, और ऐसे भी कौन होगा जो लिंग खड़ा करके गाड़ी चलाता होगा।
तो उसने मेरे उरोजों की ओर इशारा करके कहा- जब किसी की पीठ में तुम्हारे बोबे रगड़े गये ना, तो बुढ्ढों के भी लिंग खड़े हो जाएँ! हाय राम… सैम सच कह रहा था… मेरे मम्मे रोज उसके पीठ पे रगड़ते थे पर मैंने कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया था।
मैं शरमा गई और मुस्कुरा कर मस्ती में कहा- तब तो फिर तुम्हारी बहन रेशमा के मम्मे रगड़ने से भी तुम्हारा लिंग ऐसे ही फुंफकारता होगा, वैसे भी उसके मम्में मेरे से काफी बड़े भी तो हैं।
इतना सुन कर सैम ने अजीब सा मुंह बनाया और कहा- चलो घर चलते हैं।
मुझे लगा कि मैंने कुछ गलत कह दिया और सैम नाराज हो गया, मैं उसे मनाने की कोशिश करने लगी पर वो नहीं माना हम गाड़ी पर बैठ गये।
यहां पर आप लोगों को रेशमा के बारे में बता दूं, रेशमा बहुत गोरी.. 5’3″ की हाईट, बड़े भरे हुए मम्में, पिछाड़ी निकली हुई भरी हुई शरीर की, आंखों में काजल लगने पर मृगनैनी, होंठों पर लिपिस्टिक लग जाये तो गुलाब की पंखुड़ी, गाल भरे हुए, थोड़ी चंचल और हमेशा खुद को ढक कर रखने वाली लड़की थी।
मैं हमेशा चाहती थी कि उसके जैसे ही उभार मेरे सीने पर भी हों, इसीलिए मैंने सैम से रेशमा के मम्मों का जिक्र कर दिया, पर शायद सैम सच में नाराज था इसीलिए उसने आधे रास्ते तक कोई बात ही नहीं की।
तब मैं उसे मनाने के लिए व्याकुल हो उठी और मैंने थोड़े से सूने रास्ते में सैम के गाल पर किस कर दिया और उसके कान में मासूमियत से सॉरी कहा।
सैम ने मुस्कुरा के ‘इटस ओके’ कहा।
और बस जल्दी ही हम घर पहुंच गये।
उस पूरी रात मैंने सैम के सपने देख कर गुजारे, मेरी योनि ने रस भी बहाया और पता नहीं कब मेरे हाथ मेरी योनि की ओर बढ़ गए और मैं योनि को सहलाने लगी, मैंने लोवर उतारी नहीं बल्कि उसके अंदर हाथ डाल कर योनि को रस छोड़ने तक सहलाया और थक कर सो गई।
अगले दिन जब स्कूल जाने के लिये वे दोनों भाई बहन मेरे घर के पास आये, तब मैं ही बीच में बैठना चाहती थी पर रेशमा ने जगह नहीं दी।
ऐसा ही दो दिन लगातार हुआ और दूसरे दिन सैम ने मुझे कहा कि तुम बीच में क्यों नहीं बैठती हो, तुम उस दिन से नाराज हो क्या? मैंने कहा- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, रेशमा ही बैठने नहीं देती।
तो सैम ने सिर्फ ‘झूठ…’ कहा और चला गया।
अगले दिन स्कूल जाने के लिए वो लेट आये, पूछने पर बताया कि अब्बू को आफिस के काम से आठ-दस दिनों के लिए बाहर जाना था तो अम्मी भी घूमने के लिए साथ चली गई है, अब हम दोनों ही घर पर हैं तो लेट हो गए।
मैंने मुस्कुरा कर ‘कोई बात नहीं’ कहा और सब कुछ सामान्य सा रहा।
वे लोग अगले दो दिन और लेट आये, चौथा दिन रविवार था, मैंने घर के कामों में दिन बिताया।
अगले दिन सोमवार को जब वो स्कूल जाने के लिए मेरे घर पहुंचे तो रेशमा गाड़ी से उतर कर मेरे घर में घुसी और मम्मी से कह दिया कि आज हम लोग स्कूल से सीधे हमारे घर जायेंगे, और स्वाति रात का खाना हमारे घर से खाकर आयेगी।
मैं कुछ समझ नहीं पाई पर कुछ नहीं कहा, क्योंकि मुझे लगा कि रेशमा की कोई प्लानिंग होगी।
और वैसा ही हुआ सैम ने स्कूल का रास्ता छोड़ कर दूसरा रास्ता पकड़ा, अपने घर की ओर गाड़ी घुमाई। मैंने तुरंत टोका- ये हम कहां जा रहे हैं?
तो रेशमा ने कहा- आज स्कूल की छुट्टी और घर पर मौज!
मुझे यह बात अच्छी नहीं लगी और सच कहूँ तो अचानक प्लानिंग की वजह से हड़बड़ा रही थी, ऐसे ही ना नुकुर में हम एक दूसरे रास्ते से उनके घर पहुंच गये।
घर का दरवाजा रेशमा ने खोला और अंदर किचन में चली गई, इतने में सैम ने मेरे सामने आकर अपने दोनों कानों को हाथों में पकड़ कर सॉरी कहा, मैं मुस्कुरा उठी, मेरा गुस्सा नखरा सब काफूर हो गया और ‘कोई बात नहीं’ कहते हुए मैं घर के अंदर आकर सोफे पर बैठ गई।
सैम ने दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में चला गया, रेशमा पानी लेकर आई, हमने पानी पिया और रेशमा के कमरे में आ गये।
अब मैंने धीरे से रेशमा को कहा- यार बात क्या है? मुझे लग रहा है कि तुम लोग मुझ से कुछ छुपा रहे हो?
तो रेशमा ने कहा- मैं तुम्हें यहां कुछ बताने के लिए लाई हूँ, यार भाई का लिंग सच में बहुत बड़ा है..!
मैंने आश्चर्य से रेशमा को देखा और कहा- तुमने कब देख लिया? और भाई के बारे में ऐसी बात करते शर्म नहीं आती।
तो रेशमा ने बड़ी बेशर्मी से कहा- अब शर्म वर्म गई भाड़ में… बस मन हुआ तो छू लिया, देख लिया, चूस लिया, और अंदर भी डलवा लिया।
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08-12-2018, 12:09 PM,
#12
RE: kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
इतना सुन कर मेरा चेहरा तो गुस्से से तमतमा गया क्योंकि अब सैम को मैं चाहने लगी थी, और योनि में झुरझुरी सी महसूस हुई, मैंने तुरंत सवालों के कई गोले दागे- कब, कहां, कैसे? तुम्हें डर नहीं लगा, कहां से सीख गई, कोई जान लेगा तो?
ये वो… ये वो… मैं बहुत कुछ लगातार बोलती रही, उसने मेरे मुंह पे हाथ रखा और कहा- बस मेरी अम्मा, बस कर, तुझे आज सब कुछ बताने सिखाने के लिए ही तो यहां लाई हूँ।
सिखाने शब्द को सुन कर मैं फिर चौंकी- सिखाने से तुम्हारा क्या मतलब है मैं ये सब नहीं करने वाली हूँ।
तो रेशमा ने कहा- वाह री शरीफजादी…! ये सब तेरी ही लगाई आग तो है।
अब मैं परेशान सी होकर सोचने लगी कि मैंने क्या किया।
तब रेशमा ने कहा- तू चिंता मत कर, मेरी बात सुन, तुझे सब समझ आ जायेगा।
तब मेरी जान में जान आई।
और फिर रेशमा अपनी सैक्स स्टोरी सुनाने लगी। 
पिछले कुछ दिनों से मैं मोबाइल में अश्लील मूवी देख रही थी, जिसके कारण मैं हमेशा उत्तेजित और व्याकुल रहने लगी थी और जब उस दिन जब तूने मुझे कहा कि तेरे भाई का लिंग कितना बड़ा है तू खुद ही पकड़ के देख लेना, तब मैंने सोचा कि यह तो सही बात है अगर मेरा काम घर में ही हो जाये तो क्या बुरा है। और मैं बहाने से भाई के लिंग को छूने टटोलने लगी। और तुमने भाई को भी तो कह दिया था कि ‘तुम्हारी बहन की चुची पीठ में रगड़ती हैं तब तुम्हारा लिंग खड़ा नहीं होता क्या’ करके, तो अब तुम्हारे कहने के बाद से भाई ने भी समय देख कर मेरे मम्मों और पिछवाड़े में हाथ मारना शुरू कर दिया, और इसी बीच अम्मी अब्बू का बाहर जाना हो गया मानो कि खुदा ने हर मुराद पूरी कर दी हो।
जिस दिन अम्मी अब्बू गये, उसी रात को मैं कमरे में अपने मोबाइल पर अश्लील मूवी देखते हुए लेटी थी, मेरा एक हाथ टीशर्ट के ऊपर से ही मम्मों को सहला रहा था।
तभी भाई कमरे में आया, मैंने हड़बड़ा कर मोबाइल बंद किया और बिस्तर पर बैठ गई।
भाई सामने आकर बैठ गया और कहा- रेशमा, मैं एक बात कहूँ… तुम्हें मेरी मदद करनी होनी.. मैं स्वाति को चाहता हूँ और मैं यह भी जानता हूँ कि तुम मेरे साथ जो हरकतें कर रही हो, वो अनजाने में नहीं हो रही हैं। अगर तुम किसी को पसंद करती हो तो बता दो, मैं तुम्हें उससे मिलवा दूँगा पर बदले में तुम मुझे स्वाति से मिलवा दो। मैं चाहूँ तो मैं खुद ही स्वाति से ये बातें कह सकता हूँ पर मैं स्वाति को खोने से डर रहा हूँ, कहीं वह किसी बात को बुरा ना मान जाये। बोलो मेरी मदद करोगी ना?
अब मैंने सोचा की यही मौका है कि मैं भी अपनी बात कह दूँ- देख भाई, मैं किसी को नहीं चाहती और अगर किसी से मेरा संबंध हो भी जाए तो हमारे घर की बदनामी है, अगर तुम चाहो तो तुम मेरा एक काम कर सकते हो, तुम मुझे वो खुशी दे दो जिसकी मुझे तलब है और मैं तुम्हें वो खुशी दिला सकती हूँ जिसकी तुम्हें तलब है।
सैम ने आश्चर्य, खुशी, गुस्से, कौतूहल के मिले जुले स्वर में कहा- यह तुम क्या कह रही हो, तुम्हें पता है?
तो मैंने कहा- हाँ भाई, बहुत अच्छे से पता है, अगर हम समाज की नजरों में अच्छा बना रहना चाहते हैं और तन मन को भी शांत रखना चाहते हैं तो यही तरीका सबसे उपयुक्त है।
और सैम के कुछ कहने से पहले ही मैंने अपना टीशर्ट उतार दिया, सफेद ब्रा में कसे हुए मेरे उरोज आजाद होने को व्याकुल नजर आ रहे थे, कमरे में पर्याप्त रोशनी थी, बिस्तर पर गुलाबी रंग की चादर बिछी हुई थी, भाई की नजरों में असमंजस और वासना एक साथ नजर आने लगी थी।
मैंने थोड़ा आगे बढ़ कर भाई के गले में बाहों का हार डाला और भाई को अपने बगल में लुढ़का लिया।
भाई लेटा हुआ अभी भी कुछ सोच रहा था, पर मैंने उसके शर्ट के बटन खोल दिये, उसके सीने पर एक चुम्बन अंकित कर दिया और भाई से कहा- भाई, तुम नहीं चाहते तो जा सकते हो क्योंकि अब मैं इससे ज्यादा बेशर्म नहीं हो सकती।
तो भाई ने कहा- नहीं, रेशमा ऐसी बात नहीं है, बस पांच मिनट का समय दे, मैं बाथरूम से आता हूँ।
उसके इतना कहते ही मैं खुशी से उछल पड़ी और भाई बाथरूम चला गया।
इस बीच मैंने अपनी लोवर उतार दी और अम्मी की हाट गाऊन पहन कर भाई का इंतजार करने लगी।
भाई जब आया तो मुझे देखता ही रह गया।
मैंने बिस्तर से उतर के भाई को गले लगाकर उसका स्वागत किया और कान में कहा- भाई तुम नर हो और मैं मादा, हम सृष्टि के नियम के विपरीत कुछ भी नहीं कर रहे हैं।
और भाई की भुजाओं की पकड़ मेरे शरीर में बढ़ती चली गई। भाई मुझसे लंबा था 5.8 इंच की हाईट, चौड़ा सीना ज्यादा गोरा नहीं था पर कसरती शरीर था, अभी पूरा जवान नहीं हुआ था इसलिए शरीर पर बाल नहीं थे, सर पे लंबे बाल थे, चेहरा लंबा था और हमेशा क्लीन शेव रहता था।
उसके लिंग को आज तक मैंने खुली आँखों से आजाद नहीं देखा था पर ऊपर से उसका नाप लगभग सात इंच का होगा, ऐसा मेरा अनुमान था, भाई ने मेरा चेहरा अपने हाथों में थामा और कहा- रेशमा, तुम बहुत अच्छी हो, मैं भी इंसान हूँ, मेरी भी हसरतें हैं पर मैंने स्वाति के कहने से पहले तुम्हें इस नजर से कभी नहीं देखा था, पर अब तुम मुझे बहुत खूबसूरत और कामना की देवी नजर आ रही हो, अब मैं इन आँखों और काम सागर में तब तक डूबा रहना चाहता हूँ जब तक दिल के सारे अरमान पूरे ना हो जायें।
मैंने भाई को जकड़ लिया और कहा- हाँ भाई, मैं भी यही चाहती हूँ!
भाई ने मेरे माथे को चूमा, फिर गालों को और फिर कब मेरे नाजुक होंठों से अपने होंठ सटा दिये, पता ही नहीं चला।
मेरे 32 साईज की चुची कठोर होकर 34 की हो गई थी जो भाई के सीने में दबी हुई थी, भाई का हाथ मेरी पीठ कमर और कूल्हों को सहलाने लगा, मेरे हाथ भाई की पीठ पर चल रहे थे, अम्मी का गाऊन साटन का था इसलिए भाई को गाऊन के ऊपर से भी बहुत आनन्द आ रहा था।
मेरी मदहोशी तब टूटी जब भाई ने मेरा गाऊन उतारना चाहा। हालांकि मैंने भी भाई का सहयोग किया पर पहली बार अपने भाई के सामने बिना कपड़ों के दिखने से मैं शर्म से दोहरी हो गई और मैंने भाई के सीने में अपना मुँह छुपा लिया।
मुझे नीचे कुछ चुभन सी हुई, मुझे समझते देर ना लगी कि मुझे नंगी देख कर भाई का लिंग लोवर को फाड़ने आतुर हो गया है, भाई ने मुझे खुद से चिपकाये रखा और मेरे कानों में मेरी तारीफ शुरू कर दी- रेशमा तुम तो जवान हो गई हो, तुम्हारे सीने के उभार तो किसी भी मर्द को आहे भरने पर मजबूर कर देंगे और अभी अनछुये हैं तो ऊपर की ओर उठे हुए हैं। रेशमा तुम जानती हो हम लड़कों को इस तरह की शेप वाले मम्मे बहुत पसंद हैं। हाँ तुम्हारा पेट थोड़ा और अंदर होना था पर तुम्हारी मखमली त्वचा और नितम्ब और मांसल जांघों को देख कर तुम परिपूर्ण कामुक स्त्री सा अहसास देती हो। रेशमा अब चलो ना अपनी चूत के भी दर्शन करा दो…
मैं तो अपनी तारीफें सुन कर सातवें आसमान में उड़ रही थी, फिर भी मैंने भाई के मुंह में उंगली रखकर चुप कराते हुए कहा- चुप… कोई ऐसे शब्दों का प्रयोग करता है क्या?
भाई ने कहा- कौन क्या कहता है, मुझे नहीं पता पर मैं तो चूत और लंड या लौड़ा ही जानता हूँ।
मैंने फिर मुंह में उंगली रख कर शरमा कर कहा- नहीं ना भाई, लिंग या योनि कहो ना..!
भाई ने हम्म कहा और मेरी उंगली जो उसके मुंह पर रखी थी उसको मुंह के अंदर लेकर चूसने लगे।
मैं पागल सी होने लगी।
फिर भाई ने मुंह से उंगली निकाली और मुझे उठा कर बैड में लेटा दिया। मैंने आँखें बंद कर ली पर मुझे लगा कि भाई अपनी पैंट निकाल रहा है। और फिर भाई ने मेरी नाभि में किस किया, मैंने आँखें खोली तो भाई अब बनियान और चड्डी में था।
भाई ने मेरी पीठ की ओर हाथ डाला मैंने थोड़ा उठकर उसका साथ दिया और भाई ने दूसरे ही पल मेरे उरोजों को आजाद कर दिया।
मैंने चादर को कस के पकड़ लिया और मुंह एक ओर कर लिया, आँखें अपने आप बंद हो गई और होठों में शर्म भरी लज्जत मुस्कान और कामना की तरंगें तैरने लगी, मैं इंतजार कर रही थी कि कब भाई मेरे उरोजों को गूंथे, दबाये, चूमे सहलाये।
यहाँ पर आप लोगों को बता दूं कि लड़की मम्मों के आजाद होने के बाद उसको सहलाने दबाने का इंतजार करती है, पर उसे तड़पाने का मजा ही अलग होता है। यहाँ भी वही हुआ, सैम ने उरोजों को टच ही नहीं किया और नीचे सरक कर जांघों को चूम लिया, पेट पर हाथ फिराये और पेंटी की इलास्टिक पर उंगली फंसा कर नीचे खींचने लगे।
मैंने अपने हाथों से चेहरे को ढक लिया और कूल्हों को उठा कर भाई की मदद की।
ऐसे तो मैं हर महीने जंगल साफ करती हूँ पर अभी साफ किये दस दिन हो गये थे तो काले भूरे रोयें के साथ मेरी इज्जत से नकाब उतरने लगा, भाई ने ओहह आहहह की आवाज के साथ मेरे संपूर्ण योनि प्रदेश को एक ही साथ हाथों में दबोच लिया।
मैं थोड़े दर्द और मजे के साथ सिहर उठी। मेरा एक हाथ भाई के बालों पर चला गया और दूसरा हाथ अपने उरोजों को मसलने लगा।
तभी भाई ने मेरी योनि में एक चुम्बन अंकित किया, मुझे लगा कि योनि में जीभ फिराने का भी आनन्द मिल ही जायेगा पर भाई ने कुछ नहीं किया।
मैं झल्ला उठी- भाई तुम ना तो मेरे मम्में दबाते हो ना योनि चाटते हो, तुम्हें सेक्स करना नहीं आता क्या?
तो भाई ने जवाब दिया- मैंने थोड़ा बहुत नेट में देखा है, ज्यादा नहीं जानता। अगर तुम्हें आता है तो तुम सिखाओ ना?
मैंने कहा- हाँ नेट देख कर ही तो मैं भी सीखी हूँ पर शायद तुमसे ज्यादा जानती हूँ।
भाई ने कहा- वाह रे मेरी लाडो रानी, चुदाई में तू कबसे हुई सयानी?
मैं मुस्कुरा दी और भाई को घुटनों में करके उसकी बनियान निकाल दी, और उसे अपने बगल में लेटा लिया, फिर ताबड़तोड़ चुम्बनों की बौछार दोनों तरफ से होने लगी।
मेरी योनि गीली हो चुकी थी और उत्तेजना में फूल कर बड़ी भी हो गई थी।
अब भाई बिना कहे ही मेरे मम्मों से खेलने लगा, काटने, चूसने, चाटने लगा।
भाई ने कहा- मैंने आज तक जितनी भी सैक्स मूवी देखी हैं, उनमें तुम्हारे मम्मों जितनी खूबसूरत कभी नहीं देखी। ये भूरे मिडियम निप्पल तुम्हारे सुडौल गठीले दूधिया उरोजों को और भी निखार रहे हैं।
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08-12-2018, 12:09 PM,
#13
RE: kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
मैं उसकी बातें सुनकर और उत्तेजित होने लगी और अपना निप्पल उसके मुंह में दे दिया। वो भी मजे से मेरा निप्पल चूसने लगा और तभी पता नहीं कैसे मेरा हाथ उसके चड्डी के भीतर घुस गया और मैंने उसका फ़ुंफकारता लिंग हाथों में थाम लिया।
भाई का लिंग अपनी अनदेखी में आँसू बहा चुका था।
मैंने उसके चिपचिपेपन का फायदा उठाया और आगे पीछे करने लगी..
तभी भाई ने कहा- मेरा लिंग चूसो ना?
हालांकि मैं जानती थी कि लिंग चूसना और योनि चाटना कामुक सेक्स का हिस्सा है फिर भी मैंने एक बार मना किया तो भाई ने गिड़गिड़ाते हुए कहा- तुम चूसोगी तो मैं भी चाटूंगा..
अब मेरे भी मन में लड्डू फूटा और मैंने भाई के ऊपर ही 69 की पोजिशन ले ली..
मैंने चड्डी निकालने की कोशिश की और भाई ने मदद करके चड्डी निकाल दी। अब पहली बार भाई का लिंग मेरी आँखों के सामने था हाय.. हाय! कितना प्यारा सा लिंग बिल्कुल सीधा तना हुआ सात इंच के लगभग ढाई इंच की मोटाई रही होगी.. और खतने की वजह से सुपारा अलग दिख रहा था, हल्का गुलाबी चमकदार सुपारा!
सच कहूँ तो अब भाई मना भी करे तब भी मैं उसे चूसे बिना नहीं रह सकती थी, मैंने लिंग के जड़ को हाथ से पकड़ा और लिंग के छेद में जहाँ से वीर्य की कुछ बूँदें चमक रही थी, में जीभ फिराई..
भाई के मुंह से आह निकली और उसने भी अपनी जीभ मेरी योनि के ऊपरी दाने पर फ़िरा दी, हम दोनों में अप्रायोजित प्रतियोगिता सी होने लगी, भाई मेरी योनि को ऐसे चाट रहा था जैसे दूध पीने के बाद पतीले की रबड़ी चाटनी हो, और मैं लिंग को ऐसे चूस रही थी जैसे मुनगे के अंदर का रस चूस के बाहर निकालना हो…
उसका लिंग मेरे मुंह में आधा ही जा रहा था पर मैं बडे इत्मिनान से चूस रही थी।
हालांकि मैंने सुना था कि पहली बार चूसने में टेस्ट अच्छा नहीं लगता पर मुझे तो पहली बार में भी अच्छा लग रहा था, वास्तव में अच्छा या बुरा उस समय की हमारी उत्तेजना पर निर्भर करता है।
खैर अब हम दोनों ही व्याकुल हो गये थे और भाई ने मुझे रोक कर उठाया और लेटा कर मेरे दोनों पांव फैला लिया और कहने लगा- रेशमा, अब तुम्हारी इन चिपकी हुई गुलाब की पंखुड़ियों को अलग करने का वक्त आ गया है, थोड़ी तकलीफ होगी पर बर्दाश्त कर लेना.. ऐसे भी तुम्हारी फूली हुई मखमली योनि खुद ही मेरे लिंग राज के इंतजार में आंसू बहा रही है..
पर मैंने कहा- भाई, मैंने सुना है बहुत दर्द होता है, प्लीज आप क्रीम या तेल लगा लो ना..
भाई ने कहा- हम्म ये ठीक रहेगा!
और पास ही रखी बोरोप्लस की ट्यूब से क्रीम निकाल कर अपने लिंग में लगाई फिर अपनी उंगली में क्रीम लगा कर मेरी योनि के छेद में चारों तरफ लगाने लगे।
मैं और भी व्याकुल होने लगी, मेरी योनि ने और रस बहाये।
फिर भाई ने ऊंगली से क्रीम योनि के अंदर तक पहुंचाना शुरू किया, मेरा कामरस और क्रीम मिलकर मेरे योनि प्रदेश को बहुत हीफिसलन भरा बना चुके थे, और मेरी बेचैनी चरम पर और आकांक्षायें सातवें आसमान पर थी..
मैंने कहा- भाई… भाई… भाई… अब क्यों तड़पा रहे हो?
भाई ने कुछ नहीं कहा, बस अपना लिंग मेरी योनि के ऊपर टिका के रगड़ना शुरु कर दिया।
मैं और व्याकुल हो उठी- भाई… भाई अब डाल दो ना…
भाई ने इस बार मुस्कुरा कर कहा- मेरी छोटी सी बहना के अंदर इतनी आग है, ये तो मैं सोच भी नहीं सकता था।
मैंने तुरंत कहा- ये कुछ सोचने का समय नहीं है भाई, चोदने का समय है, तुमसे नहीं होता तो किसी और को बुलाऊँ क्या?
इतने में भाई ने कहा- मैं यही तो चाहता था कि मेरी बहना खुल कर चुदे क्योंकि सेक्स का आनन्द ही आता है खुल कर करने में! मुझे भी थोड़ी बहुत जानकारी है.. अब देख तेरा भाई कैसे चुदाई करता है!
और यह कहते हुए उसने दो इंच लिंग योनि में उतार दिया, मैंने पहले ही बिस्तर को पकड़ लिया था और दांतों को भींच लिया था। इसके अलावा क्रीम की वजह से भी दर्द कम हुआ, फिर भी चीख निकलते निकलते बची… और भाई भी इतने में रुक गया और आगे पीछे करने लगा।
जब मैं सामान्य नजर आई तो भाई ने एक और झटका दिया और इस बार लगभग पांच इंच लिंग घुस गया।
मैं तिलमिला उठी पर भाई ने मुझे संभाला और उसकी समझदारी की वजह से मैं संभल गई।
मेरी योनि से खून की धार बह निकली पर मैंने खुद को संयत कर लिया। कुछ देर ऐसे ही करने के बाद भाई ने आखरी दांव खेला और लिंग पूरा जड़ में बिठा दिया और मेरे ऊपर पसर कर मुझसे लिपट कर ऐसे ही रुक गया।
मुझे लगा कि मेरी जान निकल गई लेकिन मुझे जिंदा होने का अहसास तब हुआ जब भाई ने मेरे गालों पर चपत लगाई।
भाई कुछ देर ऐसे ही धीरे-धीरे करते रहे… अब मैं खुद भी पूर्ण सहवास के लिए तैयार थी और लिंग ने भी अपने लिए पर्याप्त जगह बना ली थी।
फिर हमारी गाड़ी ने स्पीड पकड़ी और कमरा कामुक स्वरों से गूंज उठा- आहहह… उउहहहह और और… हाँ ऐसे ही… हाँ..हाँ… और करो… बहुत मजा आ रहा है… ओहह जान ओहह जान बहुत खूब.. आई लव यू जान… इन शब्दों के साथ घमासान चुदाई चलती रही और अंत में भाई ने मेरे अंदर ही लावा छोड़ दिया!
मैं भी इस बीच झड़ चुकी थी।
चरम पर पहुंच कर हम आँखें बंद करके निढाल पड़े रहे। मुझे लगा कि हमारा ये खेल लगभग दो-तीन घंटे चला होगा पर घड़ी पर नजर गई तो आधा घंटा ही हुआ था।
वास्तविकता तो यह है कि इस आधे घण्टे में हमने अपनी पूरी जिंदगी जी ली थी।
सच में प्रथम सहवास कोई कभी नहीं भूल सकता।
रेशमा- सच यार स्वाति, प्रथम सहवास कोई कभी नहीं भूल सकता!
रेशमा की कहानी सुन कर मेरी पेंटी गीली हो चुकी थी और मेरा एक हाथ मेरे सख्त हो चुके स्तन को दबाने में लगा था।
तभी रेशमा ने अपना हाथ मेरे स्तन को मसल रहे हाथ के ऊपर रखा और दबाते हुए कहा- स्वाति, जब तन की आग लगती है ना तो कुछ नहीं सूझता!
मैं (स्वाति) कुछ ना कह सकी और रेशमा थोड़ा और खिसक कर मेरे पास आई और मेरे गालों को चूमते हुए बोली- सच रे स्वाति, भाई का लिंग बहुत मजेदार है तू भी एक बार अंदर ले ही ले!
मैं जैसे चौंक पड़ी- नन…ना… नहीं.. मैं ये सब नहीं कर सकती…
तभी सैम आ गया, पता नहीं वो हमें कबसे देख रहा था.. मैं थोड़ी सी सकपका सी गई।
सैम ने मुझे कंधे से पकड़ कर खड़ी किया और मेरी आँखों में देखते हुए रेशमा से कहा- नहीं रेशमा, स्वाति को किसी चीज के लिए मत कहो, मैं इसे प्यार करता हूँ, इसके शरीर को पाना मेरी चाहत नहीं..
फिर मुझसे कहा- स्वाति तुम मेरे लिए क्या हो, यह मेरे लिए लफ्ज़ों में ब्यां कर पाना मुश्किल है, तुम मुझ पर यकीन करो या ना करो यह तुम्हारी मर्जी… तुम बेझिझक यहाँ से जा सकती हो। 
मैं बुत बनी कुछ देर यूं ही खड़ी रही, आँखों से अश्रू धार बह निकली और अनायास ही मैं सैम से लिपट गई, उसके सीने पर मुँह छिपा लिया। ऐसा करने से मेरा सर उसके गले तक आ रहा था.. क्योंकि आज भले ही मेरी ऊंचाई 5.5 है पर उस समय रेशमा के बराबर ही 5.3 की थी, मेरा रंग रेशमा जितना गोरा नहीं था, क्योंकि मैं दूधिया गोरी थी और रेशमा सफेद गोरी.. 
मैं थोड़ी पतली दुबली थी, कूल्हे ज्यादा नहीं निकले थे पर सीने के उभार स्पष्ट कठोर कसे हुए नुकीले और उभरे हुए थे, 30-32 के बीच के रहे होंगे क्योंकि 32 नं. की ब्रेजियर मुझे थोड़ी ढीली होती थी और 30 नं. की थोड़ी कसी.. और मेरी उम्र इतनी भी नहीं थी कि मैं ब्रा की ए बी सी डी साईजों के बारे में जान सकूं!
गर्दन सुराही दार ऊँची उठी हुई, पेट अंदर चिपका हुआ… आँखों में कटार सा पैनापन, गाल गुलाबी और माथे पर पसीना आ जाये तो देखने वाले के लिंग से रस टपक पड़ता था, मतलब मैं बिना मेकअप ही ज्यादा अच्छी लगती थी।
तब मैं लिपस्टिक कभी नहीं लगाती थी, अब तो कभी कभी लगा भी लेती हूँ,, लेकिन बिना लिपस्टिक के ही होंठों का रस हर वक्त टपकता नजर आता था, दाग धब्बे का तो शरीर में कहीं निशान ही नहीं है.. त्वचा कांच या संगमरमर सी बिल्कुल नहीं थी.. बल्कि कोमल जैसे पपीते को काटने से लगता है.. अगर आँख बंद करके कोई छुये तो उसे मेरी त्वचा से साल भर की गुड़िया का अहसास होगा…
कुल मिलाकर मैं फूलों सी नाजुक.. घास सी लोचदार.. चंद्र आभा लिये हुए कमसिन कली अभी सैम के सीने से लिपटी हुई थी।
सैम का हाथ मेरे पीठ को सहलाता हुआ सीधे आकर मेरी कमर पर रुक गया…
मैंने रोते हुए कहा- सैम तुम सच बोलो या झूठ, यह तो तुम्हारा खुदा जानेगा..पर हाँ मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, मैंने तुम्हें अपनी रुह में हक देने का फैसला कर लिया है।
सैम ने मेरा चेहरा अपनी हथेलियों में थामते हुए कहा- स्वाति आई लव यू!
और उसकी आँखें डबडबा सी गई.. लगा कि सागर छलक जायेगा।
पर मैंने कांपते हुए उसके लबों पर अपने सिसकते हुए होंठ रख दिये.. पहले हमने एक दूसरे के होठों को चूमा, चूसा, फिर पता नहीं कब जीभ को एक दूसरे के मुंह में घुसाने लगे।
इतने में जब पीछे से रेशमा मुझ से सट गई और अपने दोनों हाथों से मेरे उरोजों को दबाने लगी तब हमारी लय टूटी और मैंने मुस्कुरा कर रेशमा के गाल को किस किया और थैंक्स कहते हुए अपनी हथेलियों में अपना चेहरा छुपा लिया।
पर मैं आज तक नहीं समझ सकी कि मैंने रेशमा को क्यों थैंक्स कहा।
मैं कुछ देर यूं ही चेहरा ढके खड़ी रही… तभी मेरी सलवार का नाड़ा खिसकने सा एहसास हुआ.. हम स्कूल के लिए निकले थे और बंक मार के सीधे श्वेता के घर पे थे इसलिए इस समय हम लोग ड्रेस में यानि सलवार सूट में थे।
मेरी सलवार के नाड़े को सैम ने मेरे सामने घुटनों के बल बैठ कर खोला था.. मैंने सलवार पकड़ लिया.. और मना करने लगी.. पर सैम ने गिड़गिड़ाते हुए प्लीज कहा।
और मैंने अपनी पकड़ ढीली कर दी क्योंकि इस समय तक मैं खुद ही सभी चीजों के लिए तैयार थी.. बस यह है कि नखरा करना भी सेक्स की एक रस्म सी होती है.. और मैं उस रस्म को ही निभा रही थी।
सैम ने सलवार नीचे गिरते ही मेरी जांघों में अपनी बाहें लपेट ली और सहलाने चूमने लगा।
मैं इस हमले को अभी समझ भी नहीं पाई थी कि रेशमा ने मेरी कुरती के नीचे भाग को पकड़ लिया और ऊपर उठाने लगी।
मैंने शरमा कर हाथ ऊपर किये ताकि कुरती बाहर निकालते बने।
अब मैंने तेजी से जानना चाहा कि ये दोनों बहन भाई किस हालत में है.. तो मैंने पाया कि रेशमा ने अपने बड़े मम्मों को संभालने के लिए गुलाबी ब्रा पहन रखी है.. हालांकि बड़े मम्मों का मतलब 38/40 का होता है पर हम जिस उम्र में थे हमारे लिए 32/34 के मम्मे भी बड़े ही थे…
पता नहीं उसने कुरती कब उतारी, मैंने ध्यान नहीं दिया था पर अभी उसकी सलवार उतरनी बाकी थी और सैम बनियान और जांघिये में था… शरीर में कसावट थी.. पर बारहवीं का लड़का बारहवीं जैसा ही तो रहेगा… सैम मेरी जांघों को छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था।
जब मैंने उसकी ओर दुबारा देखा तो मैं शर्म के मारे पानी पानी हो गई.. क्योंकि सैम मेरी योनि के सामने अपना मुंह रखकर अपना चेहरा थोड़ा सा ऊपर की ओर रखकर आँखें बंद करके मुंह थोड़ा सा खुला रखकर कुछ सूंघने की मुद्रा में था, जैसा हम लजीज भोजन या फूल या परफ्यूम को सूंघते हैं।
अब तक मेरी योनि ने रस बहा दिया था और मेरी पेंटी गीली हो चुकी थी। मैंने जाकी की नार्मल कट सफेद पेंटी पहन रखी थी.. जरूर ही पेंटी के ऊपर से ही दाग साफ नजर आया होगा।
मैंने सैम को उठने के लिए कहा तो उसने हड़बड़ा कर, जैसे वो नींद से जागा हो ह… ह… हाँ स्वाति कहा।
मैंने फिर कहा- सैम प्लीज वहाँ से उठो, मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
सैम खामोश रहा और मेरी योनि को पेंटी के ऊपर से काटते हुए मेरी पेंटी को थोड़ा खींचा जैसे हम किसी के कालर के भीतर झांकते हैं या किसी बर्तन को झांकते हैं.. लेकिन इस दौरान उसकी भुजाओं की पकड़ से मैं आजाद थी तो मैंने स्वयं ही पीछे सरक कर सैम को खुद से अलग किया।
अब तक रेशमा ने अपने पूरे कपड़े उतार दिये थे.. रेशमा को भी इस हालत में मैंने पहली बार देखा था। रेशमा ने आज की तैयारी में अपनी योनि चिकनी कर ली थी और उसके उरोजों के चारों ओर का भूरे रंग का घेरा तो कयामत ही लग रहा था।
मैंने रेशमा से कहा- बड़ी बेशर्म है री तू! खुद ही पूरे कपड़े निकाल कर ऐसे ही घूम रही है?
तो उसने कहा- तू भी आठ दस बार लंड का स्वाद चख ले, फिर देखना खुद ही चूत फैलाये लंड खोजेगी..
मैं तो शर्म और गुस्से से लाल हो गई- ये कैसी भाषा बोलने लगी है.. तो उसने कहा- मैं भी ऐसी भाषा नहीं बोलती हूँ.. पर सुना है कि इससे सेक्स का मजा बढ़ जाता है इसलिए अब बोलने लगी हूँ।
पर मैंने साफ मना कर दिया, मैंने कहा- तुम दोनो सेक्स करोगे और वो भी बिना किसी उटपटांग हरकत के! फिर अगर मुझे अच्छा लगा तो मैं साथ आ जाऊंगी और अच्छा नहीं लगा तो फिर कोई मुझे जिद नहीं करेगा।
दोनों भाई बहन ने मुझे एक साथ ओके कहा।
सैम ने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और बेड पर ले गया, पीछे पीछे रेशमा आई मेरा हाथ पकड़ के हटाते हुए बोली- चल हट, कोई अपनी इतनी प्यारी चीज परोस के दे रहा है और ये भाव खा रही है..
वो ये बातें मुझे जलाने चिढ़ाने के लिए बोल रही थी।
पर असलियत वो नहीं जानती थी कि दरअसल मैं खुद ही अब सेक्स के लिए तैयार थी पर उससे होने वाले दर्द का अंदाजा लगाने के लिए मैंने ऐसी शर्त रखी थी.. और मैं माहौल में ढलकर अपनी झिझक भी मिटाना चाहती थी.. साथ ही लाईव सैक्स सीन का मजा भी लेना चाहती थी।
तभी सैम ने कहा- यार स्वाति, कम से कम कपड़े तो पूरे निकाल दो..
मैं मुस्कुरा दी।
सैम ने अपनी बनियान एक झटके में निकाल फेंकी.. और मेरी सफेद ब्रा के हुक खोलने लगा। सैम मेरे सामने खड़ा था, उसकी नजर नीची और मेरी नजर ऊपर यानि हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे.. मन की उत्सुकता और भाव आँखों से बयान हो रहे थे.. उसे हम लोगों से कुछ पल ज्यादा लगे हुक खोलने में… पर हुक खुल ही गया।
मैंने अपनी बाहों को मोड़ कर ब्रा को अलग करने में उसकी मदद की.. आज मैंने तीस नं. ब्रा पहनी थी और मैंने तो आप लोगों को बताया ही है कि तीस नं. मुझे कसा होता है.. तो ब्रा की पट्टी और ब्रा का निशान मेरे कोमल शरीर पर पड़ गया था.. हालांकि ब्रा खुलने से मुझे भी थोड़ी राहत महसूस हुई क्योंकि यौन उत्तेजना के कारण मेरे मम्मों का आकार और बढ़ रहा था।
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08-12-2018, 12:10 PM,
#14
RE: kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
मेरी सांसें तेजी से चलने लगी थी.. ऐसे में सैम ने मेरे शरीर में ब्रा से बने निशान पर उंगली चलाई.. वो कंधे से शुरू करके मेरे उरोजों के ऊपर आकर रुका फिर उरोजों के चारो ओर उंगली घुमाई.. मेरे दोनों हाथ उसके कंधे पर थे और चेहरे को मैंने शरमा कर एक ओर कर लिया था.. मैं अपने होंठ खुद काटने लगी.. शायद ये अति उत्तेजना के पल थे।
रेशमा बाथरूम चली गई थी।
फिर सैम ने चारों ओर उंगली घुमाने के बाद पूरे मम्मे को एक साथ हाथों में भरकर दबाया और मैं ‘आहह…’ की आवाज के कसमसा के रह गई.. मेरा हाथ उसके बालों में चला गया, मैं बाल खींचते हुए उसे अपनी ओर खींचने लगी और उसने यंत्रवत मेरे निप्पल पर अपना मुंह टिका दिया।
मेरी सिसकारियाँ निकल गई.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऐसा उसने तब तक किया जब तक रेशमा नहीं आ गई.. मुझे अचानक से लगा कि ये अभी क्यों आ गई.. आप सेक्स के चरमोत्कर्ष से पहले किसी तरह का व्यवधान शायद ही कभी पसंद करें.. मुझे भी अच्छा नहीं लगा!
पर सैम ने मेरे कान में यह कह कर खुशी दी कि तुम्हारे मम्में और निप्पल रेशमा से कहीं ज्यादा अच्छे हैं.. हाँ उसने बिल्कुल सही कहा था क्योंकि मेरे निप्पल मुलायम थे और सर्कल थोड़ा काला सा था मगर छोटा था।
खैर रेशमा ने कहा- भाई अभी तक आप अंडरवियर में हो? इतना कैसे बर्दाश्त कर लिया?
तब सैम ने मुस्कुरा के कहा- खुद ही देख लो..
रेशमा ने ‘हाँ क्यों नहीं…’ कहते हुए मेरा हाथ पकड़ के सैम के सामने बिठाया और खुद भी बैठ गई।
मेरी धड़कनें तेजी से चलने लगी.. जांघिये के ऊपर से उभार नजर आ रहा था पर ज्यादा बड़ा उभार नहीं था.. रेशमा तो अब बेशर्म हो ही चुकी थी, उसने एक झटके में सैम का अंडरवियर खींच दिया।
मैं और रेशमा एक साथ हंस पड़ी!
यह क्या आधा खड़ा आधा सोया लिंग सफेद द्रव से पूरा सना हुआ.. सैम ने अपना बाल खुजाते हुए कहा- यार, मैं अभी जवानी की दहलीज पर कदम रख रहा हूँ और दो-दो नंगी लड़कियों के साथ रहकर खुद को कब तक संभाल पाता इसलिए चड्डी पे ही माल निकल गया..
अब तक मैं बड़ी घृणा से मुंह बना रही थी पर रेशमा ने सैम पर प्यार जताते हुए मुंह को चू चू चू करके बजाया और कहा- मेरा भाई इतना तड़प रहा है..
और यह कहते हुए उसने चड्डी को पैर से अलग किया और लिंग को हाथ में पकड़ कर आस-पास फैले सफेद द्रव्य को चड्डी से साफ करने लगी।
मैं कौतूहल भरी नजरों से ये सब देख रही थी, रेशमा ने कहा- हाँ हाँ देख ले, पहली बार देख रही है ना! मेरे साथ भी यही हुआ था.. अभी देखना जब ये पूरा खड़ा होगा और तेरी योनि में घुसेगा और ये जो माल यहाँ गिरा है ना इसे वीर्य कहते हैं, इसका स्वाद भी बहुत अच्छा होता है.. बोल चखेगी?
मैंने ओअअअ कहते हुए मुंह बनाया और पीछे हट गई.. लिंग में तनाव आना शुरू हो चुका था। तभी रेशमा ने ‘जा मर कुतिया, तू ही बाद में पछतायेगी!’ कहते हुए.. लिंग मुंह में ले लिया और बड़े मजे से चूसने लगी।
लिंग में बहुत तेजी से तनाव आया.. और वह देखते ही देखते आठ इंच का दिखने लगा.. मैंने तुरंत कहा- तूने तो सात इंच बताया था, ये लिंग तो आठ इंच का दिखता है?
रेशमा ने लिंग मुंह से निकाला और कहा- अब आठ हो या सात… मुझे नहीं पता, मैंने कोई टेप ले कर नहीं नापा था, हाँ लेकिन इतना जरूर है कि ये तगड़ा और सुंदर लिंग जब तेरे अंदर घुसेगा ना तो हजार गुना ज्यादा मजा आयेगा!
उसकी इस बात से मैं शरमा गई और मेरा ध्यान लिंग पर केन्द्रित हो गया.. सच में मैं भी नहीं बता सकती कि लिंग कितना बड़ा था, पर वह गोरा था, उसकी नसें भी स्पष्ट दिखने लगी थी, सुपारा बड़ा सा था नीचे की ओर गहराई तक उसकी हद थी, रंग गुलाबी लाल था मगर रेशमा के चूसने से सफेदी आने लगी थी, मानो रेशमा ने उसकी लालिमा चुस ली हो..
मैं अनायास ही आगे की ओर सरकी और रेशमा के उरोजों को दबा दिया… रेशमा ने आऊच कहा और मुस्कुराते हुए ही लिंग मेरी ओर कर दिया।
शायद उसने आँखों से कहा- ले अब तू भी लिंग चूस ले, ये मौका बार-बार नहीं मिलने वाला,!
या ऐसा भी हो सकता है कि मैंने ही ऐसा सोच लिया हो और मैंने लिंग मुंह में लिया और मेरी आँखें बंद हो गई.. स्वाद का कुछ पता नहीं.. अब मैं क्या कर रही हूँ या ये क्या हो रहा है मुझे कुछ पता नहीं चल रहा था।
मुझे अपने मम्मों में किसी हाथ का अहसास हुआ, मैं जानती थी कि रेशमा मेरे उरोजों से खेल रही है तो मैंने अपना ध्यान लिंग पर केन्द्रित रखा.. मेरा दांया हाथ लिंग को जड़ से संभाले हुए था और बायें हाथ को मैंने अपने मम्मों पर रेशमा के हाथ के ऊपर रख दिया..
सब कुछ यंत्रवत हो रहा था..
तभी मेरी बेहोशी टूटी जब सैम ने अपना पूरा लिंग मेरे मुंह में डालने की चेष्टा की, उसने मेरे बालों को कस के पकड़ लिया और लिंग जड़ तक पेलने की कोशिश करने लगा.. मैं छटपटाने लगी मेरे लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा था, जहाँ आधे लिंग के लिए जगह नहीं थी वहाँ पूरा लिंग कैसे घुसता..
मैंने खुद को छुड़ाया और उसे मुक्के से मारने लगी, मैं रोने लगी, उसे जानवर वहशी कहने लगी।
उसने मेरे हाथों को पकड़ा और सीने से लगा लिया, फिर कानों में धीरे सॉरी कहा.. मैं रो रही थी पर उसके खड़े लिंग ने मेरी पनियाई योनि पर पेंटी के ऊपर से दस्तक देनी शुरू कर दी.. तो मेरा भी रोना बंद हो गया और सैम मुझे लगातार सॉरी बोल रहा था.. मैंने उसे चुप कराने के लिए उसके मुंह में जीभ डाल दी और हमारी लंबी किसिंग चालू हो गई।
इसी बीच उसका हाथ मेरी पेंटी में फंसकर नीचे की ओर सरकने लगा.. मैंने जैसे मौन स्वीकृति दे दी हो और पेंटी को नीचे उतर जाने दिया।
पेंटी के उतरते ही रेशमा ने कहा- वाह क्या बात है, रोने का इनाम कड़कते लिंग से..
और मैं शरमा गई, मैंने सैम के सीने में सर छुपाने की कोशिश की मगर सैम ने जानबूझकर मेरी ठोड़ी पकड़ के मुझसे नजरें मिलाई और हम दोनों मुस्कुरा उठे।
फिर सैम ने मुझे उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया और खुद नीचे की ओर सरक गया। मेरी योनि का दोनों भाई बहन मुयाना करने लगे, ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझ पर कोई परीक्षण करने वाले हों।
मैं अब कुछ भी नहीं कर सकती थी, मैं तो अब एक खिलौने की भांति उनके इशारों पर नाच रही थी.. मेरे कानों पर एक मादक आवाज आई- हाय अल्लाह इतनी प्यारी योनि.. छोटे-छोटे रेशमी बाल, हल्की सी दरार और उस पर कामरस की ऐसी चिपचिपाहट जैसे दो तख्त के बीच फेवीकोल डाला गया हो!
फिर किसी ने योनि पर हाथ फेरा, मैं सहम गई और हाथ फेरते ही कहा- इतनी नाजुक मुलायम मखमली योनि यार… क्या योनि ऐसी भी होती है…
ये सब सैम और रेशमा आपस में बातें कर रहे थे।
तभी रेशमा की तेज आवाज आई- भाई देख, क्या रहे हो रस बिस्तर पे टपक रहा है, इसे ऐसे ही बरबाद होने दोगे क्या?
उन शब्दों के साथ ही मैंने जीभ अपनी योनि की दरारों में महसूस किया.. एक पल को आँखें खोलकर देखी तो सैम ने मेरी योनि पर अपना मुंह टिका दिया था। मैंने फिर मजे और शर्म भरी लज्जत से आँखें बंद कर ली, मेरा शरीर किसी गर्म लोहे की तरह तपने लगा, और एक गर्म सलाख की मांग करने लगा।
रेशमा थोड़ी ऊपर आकर मेरे मम्मों को सहलाने लगी और मेरे होंठो को चूमते हुए कहा- सच यार स्वाति, तू इतनी हसीन है, मैंने आज देखा!
मैंने प्यार और शरारत भरे स्वर में कहा- पहले देख लेती या जान लेती तो क्या करती?
उसने मेरी आँखों में आँखें डाली और कहा- बताऊं.. बताऊ.. बताऊं मैं क्या करती..
कहते हुए नीचे मेरी योनि की ओर अपना हाथ बढ़ाया और अपनी दो ऊंगलियाँ मेरी योनि में डाल दी..
मैं अक्षत यौवना थी इसलिए उसकी दो उंगलियों का आधा घुसना भी बर्दाश्त नहीं कर पाई… और ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाय राम मर गई…’ कहते हुए चीख पड़ी।
सैम ने कहा- रेशमा इसके साथ बेरहमी मत करो.. मैंने तुम्हारे साथ ऐसा कुछ किया था क्या?
रेशमा ने कहा- चल अब इसकी साईड मत ले भाई, इसको हटा यहाँ से, इसने ही तो कहा था ना कि पहले रेशमा चुदेगी फिर मैं..
सैम को जैसे सांप सूंघ गया हो.. वो तो अब योनि फाड़ने की तैयारी कर चुका था और मैं भी अब तक इतनी गर्म हो चुकी थी कि अब एक पल और बर्दाश्त नहीं कर सकती थी।
तब सैम ने कहा- छोड़ ना यार रेशमा, तू भी अच्छा इसकी बातों को मानने लगी.. अब ये है लाईन में है तो पहले इसे ही कर लेने दे ना!
रेशमा ने कहा- नहीं भाई.. ये अपने मुंह से खुद कहे कि पहले मुझे करवाने दो, तभी मैं इसे करवाने दूँगी..
मैंने तपाक से कह दिया- हाँ मैं बोल रही हूँ ना पहले मुझे करवाने दो.. मेरी योनि अब तुम्हारे भाई के लिंग के लिए तड़प रही है.. अब और नहीं सहा जाता…
रेशमा ने ‘आय हाय… मेरी सहेली ऐसे मचल रही है जैसे बिन पानी मछली..’ कहते हुए बोरोप्लस की पास रखी ट्यूब उठाई और हाथों में क्रीम लेकर मेरी योनि में लगा दी और एक उंगली जहाँ तक जा सकती थी अंदर भी लगा दी।
ऐसा करते हुए उसने ट्यूब सैम को दे दी और उसने भी अपने लिंग पर क्रीम की अच्छी मात्रा में लगा ली।
अब रेशमा मेरे मम्मों और शरीर के अंगों को मादक तरीके से सहलाने लगी, मैं भी उसके मम्मों से खेलने लगी.. और सैम अपने अकड़ रहे लिंग को मेरी योनि की दरार पर रगड़ने लगा।
मैंने सैम को देखा और कहा- अब देर किस बात की?
तो सैम मुस्कुराया और एक हल्का धक्का लगाया, इसी के साथ ही उसका सुपारा मेरी योनि में फंस गया… मैं दर्द के मारे हड़बड़ाने लगी रेशमा ने मुझे जकड़ लिया.. और रेशमा के कुछ देर पहले ही मेरी योनि में उंगली डालने से जगह बन गई थी इसलिए मैं सह गई।
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08-12-2018, 12:10 PM,
#15
RE: kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद दूसरा धक्का लगा.. तब ऐसा लगा जैसे किसी ने तलवार से मेरे जिस्म को काट दिया हो… मैं बेसुध सी होने लगी… मैं बस यही सोच रही थी कि अगर क्रीम ना लगी होती तो मेरा क्या होता और मैं यह सोच ही रही थी कि तभी तीसरा धक्का लगा और मैं सच में बेहोश हो गई।
जब रेशमा ने मेरे मुंह में पानी डाला तब होश आया..
दर्द और जलन योनि में किस कदर हो रहा था.. बता पाना मुश्किल है.. उस पल को सोचकर समझ आता है कि सच में रेप करने से लड़कियाँ मर क्यों जाती है.. क्योंकि बहुत लोग सोचते हैं कि चुदने के लिए बनी योनि में लिंग घुसने से कोई कैसे मर सकता है.. लेकिन वो यह नहीं जानते कि जबरदस्ती करने और बेरहमी दिखाने से अक्षत यौवनाओं की जान भी जा सकती है.. जैसा कि उस दिन मेरे साथ हो सकता था।
खैर मैं ऐसे ही कुछ देर पड़ी रही, फिर स्थिति सामान्य होने लगी, मैं फिर से उनके कामुक कारनामों का जवाब देने लगी।
तब सैम ने लिंग को आगे पीछे करना शुरु किया, मैं मजे, दर्द उत्साह उत्तेजना के मिले जुले भंवर में फंसती चली गई… और कुछ उलझन में उलझना दिल को सुकून देता है.. मैं इसी सुकून से आनन्द लेते हुए ‘और तेज करो…’ कब कहने लगी पता ही नहीं चला!
सैम किसी तेज घोड़े की तरह हाँफता हुआ बहुत तेज गति से मेरी योनि की प्यास बुझा रहा था, अब प्यास बुझा रहा था या बढ़ा रहा था यह कह पाना भी मेरे लिए मुश्किल है.. क्योंकि हर धक्के के साथ मुझे ऐसा लग रहा था कि इस समय का एक एक पल सदियों लम्बा हो जाये.. यह काम क्रीड़ा कभी खत्म ही ना हो..
पर मेरे चाहने से क्या होता है.. मैं अकड़ने लगी, सैम समझ गया कि मेरा होने वाला है उसने गति और बढ़ा दी.. और मैं झड़ गई।
सैम अभी नहीं झड़ा था लेकिन उसका इंतजार एक और योनि कर रही थी..
रेशमा की आवाज आई- चल भाई, अब जल्दी से इस योनि की प्यास भी बुझा दे!
वो पहले से घोड़ी बन कर लिंग का इंतजार कर रही थी, सैम का लिंग एक झटके में उसकी योनि की गहराइयों में उतर गया और दोनों मजे लेकर कामक्रीड़ा करने लगे।
जल्द ही दोनों एक साथ चरम पर पहुंच गये.. और सब ऐसे ही पड़े रहे।
कुछ देर बाद उठे तो पता चला कि सबकी नींद लग गई थी और शाम हो चुकी थी।
हमने झटपट अपने टिफिन का खाना खा लिया जो हमने सुबह स्कूल के लिए रखा था।
उसके बाद एक राऊंड और चला, दूसरे राऊंड में मैंने खुलकर मजा किया। फिर उन्होंने मुझे घर छोड़ दिया।
मैंने मम्मी से सर दुखने का बहाना किया और अपने कमरे में जाकर सो गई।
स्वाति मुझे अपनी आप बीती सुना रही है, स्वाति पढ़ रही थी जब उसने अपना कौमार्य लुटाया था। सैम रेशमा और स्वाति इन तीन नामों के बीच ही अभी तक स्वाति की कहानी घूम रही थी, पहले सैम और रेशमा में सैक्स सम्बन्ध बने, फिर स्वाति ने खुद को सैम के हवाले किया, और जब भी मौका मिलता था सैक्स मिलन होता रहा।
लेकिन सैम इस बार बारहवीं की परीक्षा देते ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पुणे चला गया, मैंने अपने आप को बहुत अकेला महसूस किया और फिर तन को जो आदत लग चुकी थी सो अलग… अभी मैं रेशमा के साथ ही रहती थी इसलिए कुछ तकलीफ कम हो जाती थी.. सैम के जाने के बाद मैंने किसी की ओर आँख उठा के नहीं देखा।
लेकिन परीक्षा हुये, सैम को गये एक महीना भी नहीं हुआ था कि रेशमा ने हमारे ही क्लास के एक लड़के को बायफ्रेंड बना लिया.. अब वह ज्यादातर वक्त उसी के साथ गुजारने लगी और मैं खुद को बहुत ज्यादा तन्हा महसूस करने लगी।
खैर मैंने पेटिंग सीखने और घरेलू कामों में अपना मन लगाया, रेशमा और उसका बायफ्रेंड सुधीर क्या करते थे, कहाँ जाते थे, मैं सब जानती थी। वो लोग कभी कभी मुझे भी साथ घुमाने ले जाते थे।
ऐसे ही स्कूल खुलने के दिन आ गये, मैं अपनी स्कूटी से स्कूल जाने लगी, स्कूल के पंद्रह दिन ही हुए थे कि रेशमा के पापा का ट्रांसफर हो गया और रेशमा को दूसरे शहर जाना पड़ा, अब मैं बिल्कुल अकेली हो गई.. और अब सुधीर भी अकेला हो गया।
वैसे सुधीर अच्छा लड़का था, रेशमा से पहले और किसी लड़की का नाम मैंने उसकी जिन्दगी में नहीं सुना था।
एक दिन मैं गार्डन के पास एक बेंच पर अकेले उदास बैठी थी.. मेरी नजरें एक टक जमीन को ही देख रही थी.. पता नहीं मैं वहाँ कितनी देर से बैठी थी, शायद घंटा भर तो हो ही गया रहा होगा, और यह बात मुझे तब पता चली जब सुधीर ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा- स्वाति, अब शाम हो गई है, तुम्हें घर जाना चाहिए..
मैंने चौंक कर उसकी तरफ देखा और कहा- नहीं, मैं तो अभी आई हूँ!
तो सुधीर ने हंसते हुए कहा- करीब आधे घंटे से तो मैं खुद तुम्हारे पास वाली बेंच पर बैठा हूँ, मैं सोच रहा था कि तुम खुद मुझे देख लोगी, पर ऐसा नहीं हुआ तो मुझे तुम्हारे पास आना पड़ा।
और उसने गंभीरता से कहा- स्वाति तुम परेशान हो क्या?
मैंने ना में सर हिलाया।
पर सुधीर ने मेरा चेहरा पढ़ लिया- स्वाति, तुम जिस वजह से परेशान हो, मैं भी उसी वजह से परेशान रहता हूँ, पर जिन्दगी तो किसी के लिए किसी परेशानी की वजह से नहीं रुकती, बल्कि हमें उससे लड़ कर आगे निकलना पड़ता है… नहीं तो उसी में उलझ कर दम निकल जाता है..
मैंने उसकी गंभीर बातों का जवाब अपनी भर आई आँखों से दिया..
उसने फिर कहा- यह मैं नहीं कह सकता कि सैम ने तुम्हारे साथ और रेशमा ने मेरे साथ अच्छा किया या बुरा, लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि वक्त ने हमारे सामने ऐसे हालात पैदा करके हमें बड़ा जरूर बना दिया है।
मैं उसकी बातों में खोई हुई थी, तभी उसने कहा- चलो, मैं तुम्हें घर छोड़ दूँ!
तो मैंने अपनी स्कूटी दिखाते हुए कहा- मैं चली जाऊँगी!
और वहाँ से निकल कर मैं रास्ते भर और घर में भी यही सोचती रही कि सुधीर ने जो बातें कहीं, उनके मतलब क्या थे.. क्योंकि मैं छोटी थी इसलिए मतलब तो नहीं समझी पर सुधीर समझदार है, इतना तो मैं समझ गई।
अब आगे से मैं सुधीर के साथ भी वक्त गुजारने लगी.. हम रोज नहीं मिलते थे पर कभी-कभी हम आपस में सुख दुख बांट लिया करते थे।
ऐसे ही एक दिन पुरानी बातें करते करते मैं रो पड़ी और सुधीर के सीने में सर रख लिया.. शाम का वक्त था अंधेरे और उजाले के बीच का फर्क मिट गया था, लालिमा मद्धम रोशनी ऐसे लग रही थी मानो किसी ने रोमांस के लिए डेकोरेशन किया हो..
मैं सुधीर से लिपटी रही पर सुधीर ने मुझे टच तक नहीं किया..
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08-12-2018, 12:10 PM,
#16
RE: kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
मुझे रोते रोते अहसास हुआ कि मैं सुधीर के सीने से बहुत देर से चिपकी हुई हूँ.. तो मैं अपने आंसू पौंछते हुए सुधीर से अलग हुई.. और सॉरी कहकर घर आ गई।
सुधीर ने सॉरी का जवाब दिया या नहीं मुझे नहीं पता..
मैं तो अभी भी सैम की यादों में खोई हुई थी.. पर जब मैं अपने इस हाल से उबर गई तब मुझे अहसास हुआ कि सुधीर चाहता तो मुझे उस समय कहीं भी टच कर सकता था, सहला सकता था या और कुछ कर सकता था, पर उसने मुझे छुआ तक नहीं.. अब मैं उसकी इस शराफत की कायल होने लगी।
अगले दिन सुधीर मुझे स्कूल में नजर नहीं आया, मैंने इस बात को साधारण बात समझी.. लेकिन वह एक हफ्ते स्कूल नहीं आया.. तब मैंने उसके एक खास दोस्त को पेड़ के नीचे पार्किंग में देखा और उससे पूछा- सुधीर स्कूल क्यों नहीं आ रहा है?
तब उसने मुझे एक चिट्ठी थमा दी और कहा- सुधीर ने तुम्हें देने को कहा था।
मैंने कहा- तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं दे दी?
तो उसने कहा- सुधीर ने कहा था कि जब स्वाति खुद आकर मेरे बारे में पूछे तभी यह चिट्ठी उसे देना, और जब तक ना पूछे इसे अपने पास ही रखना..
वो चला गया और मैं वहीं खड़ी रही.. मेरी आँखों से आँसू की मोटी धार बह निकली, मैंने ऐसे ही रोते हुए उसकी चिट्ठी व्याकुलता के साथ खोली, मुझे अक्षर धुंधले नजर आ रहे थे क्योंकि आंसुओं की वजह से मुझे साफ नजर नहीं आ रहा था, फिर भी मैं पढ़ने की कोशिश करने लगी.. और चिट्ठी को सीने से लगाकर रोने लगी.. मुझे नहीं पता कि मैं क्यों रो रही थी.. मुझे किसी ने कुछ कहा भी नहीं था, ना ही सुधीर से कोई बात हुई थी।
मुझे आज समझ आता है वही सच्चा प्यार था.. जो बिना ‘आई लव यू’ कहे बिना इजहार के और बिना सेक्स के हो गया था।
मैं मन ही मन सुधीर को चाहने लगी थी.. पर सुधीर के मन में क्या है, यह मैं नहीं जानती थी।
अब मैंने अपना दुपट्टा उठाया आँसू पौंछे और चिट्ठी पढ़ने लगी.. चिट्ठी की पहली लाईन पढ़ कर ही मैं चौंक उठी.. डीयर स्वाति तुम रोना मत.. तुम बहुत भावुक हो इसलिए मुझे यह बात चिट्ठी के सहारे करनी पड़ रही है।
मैं यह सोच कर कि कोई मुझे इतने अच्छे से समझता है मैं और जोरों से रो पड़ी!
आगे लिखा था- तुम चिट्ठी पढ़ रही हो इसका मतलब तुमने मेरी तलाश की, मेरे लिए तुम्हारे दिल में इतनी ही जगह काफी है.. मैं तुम्हें बहुत प्यार करने लगा हूँ.. हाँ मैं रेशमा से भी बहुत प्यार करता था, पर वो छोड़ कर चली गई, उसके जाने के बाद मैं टूट सा गया था पर तुम्हारे साथ वक्त बिता कर मन को हल्का लगता था, पर मैं तुमसे निश्छल दोस्ती निभा रहा था, मेरा यकीन करो मैं खुद नहीं जानता कि मेरे मन में कब तुमसे प्रेम करने के विचार ने घर कर लिया.. मैं तुम्हारी सादगी, सौंदर्य और विचारों का पहले से कायल था पर तुम मेरी प्रियसी बनो, यह मैंने ख्वाबों में भी नहीं सोचा था, अब अगर मैं तुम्हारे सामने या पास रहा तो कभी भी तुमसे इजहार कर बैठूंगा और तुम मुझे मौके का फायदा उठाने वाला लड़का समझ बैठोगी, इसलिए मैं अपने मामा के यहाँ आ गया हूँ और मैं यहीं पढ़ाई करुंगा, अब मेरी जिन्दगी में कोई नहीं आयेगी.. तुमने मुझे अच्छा दोस्त समझा पर मेरे मन में तुम्हारे लिए पाप उमड़ा उसके लिए माफी चाहता हूँ। तुम अपनी जिंदगी में हमेशा खुश रहना, तुम्हारा सुधीर!
मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई.. क्या लड़के भी इतने ईमानदार हो सकते हैं.. क्या सैम भी मुझे इतना ही समझता रहा होगा.. क्या यह मुझसे सच में प्यार करता है, मैंने सच्चा प्यार खो दिया या पा लिया…
यही सब सोच-सोच कर मेरा बुरा हाल था..
मैं घर आई और बिना खाए पिये अपने रूम में चली गई और सुधीर को ‘अपने दिल की हालत कैसे बताऊँ’ यह सोचने लगी।
फिर मैंने सोचा कि छुट्टियों में तो सुधीर घर आयेगा ही… तब मैं उससे सारी बात कर लूँगी।
लेकिन कब आयेगा, क्या बात होगी… यह कुछ पता ना था, और सबसे बड़ी बात तो यह थी कि इतना लंबा इंतजार मैं कैसे कर पाऊँगी और कहीं सुधीर की जिन्दगी में कोई आ गई तो मेरा क्या होगा?
फिर मैंने अपने आपको समझाते हुए सच्चा प्यार पाने के लिए कठोर तप करने का निर्णय लिया और उसके खत का बिना जवाब दिये मैं स्वयं विरह अग्नि में जलने लगी, मैं चाहती तो उसका कान्टेक्ट नं. आसानी से पा सकती थी पर मैंने जान बूझ कर दूरी बनाये रखी। हालांकि मेरे तन की जरूरत ने कई बार मुझे कमजोर किया पर मैं उंगली केला गाजर या मोमबत्ती घुसा कर अपने आप को शांत कर लेती थी।
मेरी दो ही महीने की तपस्या ने रंग दिखाया और सुधीर से मुलाकात के ठीक 65वें दिन से चार दिनों की तीज पर्व की छुट्टी में घर आ रहा था।
मैंने उसके दोस्त को पहले ही कह रखा था कि उसके आने की खबर मुझे जरूर देना, उसने मुझे तीन दिन पहले ही सूचना दे दी..ये तीन दिन ‘मैं उससे कैसे मिलूँगी, क्या कहूँगी, कहाँ मिलूँगी’ सोचने में निकल गये।
मैं बहुत खुश थी, मैंने अपना ड्रेस कई बार बदला होगा, खाने पीने का ख्याल ही नहीं रहता था और मैं बार बार तैयार होती और आईने को देखती थी।
इस बार छुट्टियों में किमी दीदी और भैया नहीं आने वाले थे, तो मेरी हरकत पर गौर करने वाली मेरी मम्मी बची और वो भी तीज मनाने अपने मायके चली गई थी, उन्होंने मुझे भी चलने को कहा पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मुझे तो सुधीर से मिलना था।
आखिर मेरी जिन्दगी का सबसे हंसीन पल आने ही वाला है।
मैंने पापा को खाना खिला कर आफिस के लिए विदा किया और बहुत सोच कर काले रंग के शर्ट के साथ सफेद लैगिंग्स और सफेद दुपट्टा डाल लिया और अपना बैग और चाबी उठा कर मैं सुधीर के घर जाने के लिए घर में लॉक करने ही वाली थी कि मुझे अपने सामने सुधीर खड़ा दिखा।
मुझे लगा कि मैं स्वपन देख रही हूँ और मैं बुत बनी स्तब्ध खड़ी रही।
सुधीर पास आया, दरवाजा खोला और मेरा हाथ पकड़ कर घर के अंदर ले गया, मैं तो काठ की गुड़िया हो गई थी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था..
तभी सुधीर ने मुझे आवाज दी और कंधे से पकड़ कर हिलाया, मैं चौंकी और रो पड़ी और अचानक ही मैंने बहुत जोर का तमाचा सुधीर को मारा…
और मारती ही रही…
मैं (स्वाति) तैयार होकर सुधीर से मिलने जाने ही वाली थी कि सुधीर मेरे घर पर ही आ गया, मैं स्तब्ध रह गई, फ़िर मैंने सुधीर को मारना चालू कर दिया।
सुधीर ने मेरे हाथों को पकड़ लिया और खुद को मारते हुए कहने लगा- और मारो स्वाति, मैं इसी लायक हूँ!
तब मैं रुक गई और उसको सीने से लगा लिया, सच में ये सुकून आज से पहले कभी नहीं मिला था.. सुधीर ने भी मुझे बाहों में जकड़ लिया और ‘आई लव यू स्वाति… आई लव यू स्वाति…’ की रट लगा दी और मेरे मस्तक गालों और होंठों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।
हम दोनों बदहवास से थे.. दोनों ही रो रहे थे..
सिसकते हुए सुधीर ने कहा- स्वाति मैंने तुम्हें बहुत रुलाया है, मुझे और मारो..
मैंने कहा- हाँ सुधीर, रुलाया तो है पर तुम्हें मारुंगी तो चोट मुझे लगेगी.. इसलिए तुम्हारी सजा यह है कि अब तुम मुझे छोड़ कर कहीं मत जाना..
तो उसने हाँ कहते हुये मुझे और जोरो से जकड़ लिया।
ऐसे ही खड़े खड़े बहुत देर हो गई, तभी हवा चलने से दरवाजा तेजी से हिला और टकराया तब मुझे दरवाजा खुला होने का अहसास हुआ, और मैं उसे बंद कर आई, फिर सुधीर का हाथ पकड़ के अपने कमरे की ओर बढ़ी और कहा- आओ सुधीर अंदर बैठते हैं, अभी घर पर कोई नहीं है..
सुधीर ने कहा- मैं जानता हूँ!
मुझे आश्चर्य हुआ कि मेरे घर के बारे में इसे कैसे पता.. मेरा मुंह आश्चर्य से खुला रहा।
तब उसने कहा- स्वाति, मैंने अपने दोस्तों से तुम्हारी खबर रखने को कहा था, जब मैं यहाँ आने वाला था, तब मैंने पहले ही सारी जानकारी ले ली थी, उन्हीं लोगों से मुझे यह भी पता चला था कि तुम भी मुझे चाहती हो, तब मुझे यहाँ से जाने का बहुत अफसोस हुआ पर मैं बार-बार स्कूल नहीं बदल सकता था, मुझे बाद में अहसास हुआ कि मैंने तुमसे दूर जाकर खुद को भी तकलीफ दी और तुम्हें भी। लेकिन तुमने मुझसे फोन पर बात क्यों नहीं की, तुम्हें तो मेरा नम्बर कहीं भी मिल जाता।
मैंने उसकी बात सुनकर कहा- नम्बर तो मिल जाता पर मैं चाहती थी कि हम दोनों दूर ही रहें ताकि वक्त के साथ एक दूसरे के प्रति प्यार की तड़प कम है या ज्यादा… यह जान सकें! सुधीर मैं तुमसे जीवन भर का साथ चाहती हूँ!
कहते हुए मैं फिर सुधीर से लिपट गई.. सुधीर ने अपने होंठों से ‘मैं भी…’ शब्द निकाले और मेरे वाटर कलर लिपस्टिक लगे गुलाबी होंठों से सटा दिया.. मैं भी उसका प्रतिउत्तर देने लगी।
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08-12-2018, 12:11 PM,
#17
RE: kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
माहौल कामुक होने लगा, उसकी छुअन से मुझे कंपकपी होने लगी.. इतने दिनों से प्यासे बदन की हवस जाग उठी, शरीर से पसीना बहने लगा.. मैंने दो पल उससे दूर होकर पंखा चालू किया, अपना दुपट्टा उतार कर कुर्सी पर रख दिया और बालों से पिन निकाल कर बाल को झटक कर बिखरा दिया।
शायद सुधीर बिना कहे ही इशारा समझ चुका था तभी तो उसने भी अपनी शर्ट निकाल कर बेड पर रख दिया, 5’5″ हाईट वाले सुधीर का चौड़ा सीना खूबसूरत चेहरा और आँखों में प्यार देख कर मेरी पेंटी गीली होने लगी, मैं अपने जगह पर ही नजरें झुकाए खड़ी रही।
सुधीर चलकर मेरे पास आया और मेरे कान में मुंह टिकाकर फ़ुसफ़ुसा कर बोला- चलो न, अब और नहीं सहा जाता.. देखो तो तुम्हारा गुलाम कैसे फड़फड़ा रहा है!
कहते हुए उसने अपने लिंग पर मेरा हाथ पकड़ कर रख दिया… मैंने लिंग को दबा दिया पर तुरंत छोड़ भी दिया और शरमा कर अपने हाथों से चेहरा ढक लिया।
फिर कुछ पल मुझे किसी के भी पास ना होने का अहसास हुआ.. तो मैंने आँखें खोली तो देखा की सुधीर अपनी पैंट निकाल रहा है और वह पैंट निकाल कर बिस्तर पर पीछे हाथ टिका कर बैठ गया।
ऐसे में उसका तना हुआ लिंग उसकी चड्डी के ऊपर से स्पष्ट नजर आ रहा था.. मेरा तो मन था कि पल में उसे अपनी योनि में घुसेड़ लूं, लेकिन सुधीर के साथ पहली बार था और मैं उसे चाहती भी थी इसलिए मैं शरमा गई।
तब सुधीर ने कहा- देखो जानेमन, हम जबरदस्ती तो करेंगे नहीं, अगर आप खुद कपड़े उतार के हमारे पास नहीं आई तो हम अपने हाथों से अपना लिंग हिलायेंगे और यहाँ से चुपचाप चले जायेंगे।
मैं कशमकश में थी.. मैंने कहा- देखो सुधीर, मैं एक लड़की हूँ यार… मैं खुद कैसे कपड़े उतार के पास आऊँ? तुम कुछ तो समझो लड़की हूँ तो शर्म तो आयेगी ही ना!
तो सुधीर ने कहा- तुम्हारा मतलब है कि लड़के बेशर्म होते हैं, या ये सब काम लड़कों का ही ठेका है, तुम सब लड़कियाँ ये सब काम लड़कों से जानबूझ कर करवाती हो ताकि बाद में कह सको कि लड़के ने तुम्हारे साथ जबरदस्ती की या मेरी मर्जी नहीं थी, तुमने ही जिद की, मैं ये सब बाद में नहीं सुनना चाहता इसलिए अपने कपड़े उतारो और मेरे पास आकर सैक्स में साथ दो।
बात तो उसकी सही भी थी, फिर मैं शर्माते हुए अपने कपड़े उतारने लगी, मैं उसकी ओर नहीं देखने का नौटंकी कर रही थी पर मैं छुपी नजरों से उसे देख रही थी..
वो अपना फनफनाता लिंग चड्डी की इलास्टिक के ऊपर से आधा बाहर निकाल के बैठा था और मेरे उतरते कपड़ों के साथ मेरी तारीफ करके मेरी वासना को परवान चढ़ा रहा था।
जैसे ही मैंने अपनी कुरती को नीचे से पकड़ के उठाया, उसने कहा- हाय… हाय हाय हाय… मर गया रे… इतनी चिकनी कमर.. पेट और नाभि… मैंने तो इतनी खूबसूरती की कल्पना भी नहीं की थी।
मैं मुस्कुरा रही थी पर मेरा चेहरा कुरती से ढका था इसलिए वो मुझे नहीं देख सकता था।
फिर जब कुरती मेरे स्तनों से पार हुई तो उसने कहा- क्या बात है स्वाति.. तुम तो सच में कमाल हो यार.. काली कुरती के अंदर पीले रंग की ब्रा व्हाट ए ग्रेट कांबीनेशन!
शायद उसने व्यंग्य कसा होगा! और कुरती के निकलते ही मेरे मम्मों में कम्पन हुई.. और मेरे मम्मों का बड़ा हिस्सा ब्रा के ऊपर से भी झांक रहा था।
इधर मैंने कुरती को खुद से अलग किया तब तक सुधीर मेरे सामने घुटनों पर आ गया था।
जी हाँ साहब, कोई कितना भी अकड़ू हो, चूत के सामने घुटने टेक ही देता है।
सुधीर भी अब दूर नहीं रह पाया और आकर सीधे मेरी नाभि को किस करने लगा, मेरी पतली गोरी चिकनी कमर को सहलाने लगा।
मेरे हाथ उसके बालों को सहलाने खींचने लगे… अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था.. तो मैंने अपनी लैंगिंग्स खुद उतारनी चाही, सुधीर ने उसे उतारने में मेरी मदद की और लैंगिंग्स आधी ही उतरी थी कि सुधीर पागल सा हो गया क्योंकि मैंने पेंटी भी पीले रंग की ही पहनी थी।
मैंने अपना जेब खर्च बचाकर दो हजार रूपये में दो सेट ऊंची वाली ब्रा पेंटी खरीदी थी ताकि मैं सुधीर को खुश कर सकूं.. और सच में मैं उन ब्रा पेंटी में गजब की निखर रही थी, मैं बिखरे बाल और पीली ब्रा पेंटी में अपसरा सी लगने लगी… मेरी चिकनी टांगों को सुधीर अपनी जीभ और गालों से सहला रहा था.. और एक बार उसने मेरी योनि को पेंटी के ऊपर से काटा।
मैं तड़प उठी… मैं पेंटी को उतार फेंकना चाहती थी पर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.. और पेंटी के गीले भाग को चूसने लगा.. फिर वह खड़ा हुआ और मेरे पीछे सट गया, उसका लिंग मुझे अपने चूतड़ों पर महसूस हो रहा था।
वह अपने दोनों हाथ सामने लाकर मेरे पेट को सहलाते हुए ऊपर की ओर ले गया और मेरे उरोजों पर ले जाकर रोक दिए.. और फिर मेरे कान में फ़ुसफ़ुसा कर कहा- मेनका, रंभा जैसी अप्सरायें भी तुम्हारे आगे कुछ नहीं है! स्वाति देखो ये तुम्हारे स्तन कितने सुडौल हैं, पेट कितना चिकना सपाट, कंधों का चिकनापन… आय हाय, तुम तो गजब की कामुक औरत हो चुकी हो!
ये सब उसने उत्तेजना में कह डाला., वास्तव में मैं इतनी भी सुंदर या कामुक नहीं हूँ कि अप्सराओं का मुकाबला करूँ, लेकिन इतना तो है कि उस वक्त वो मेरे लिए साक्षात कामदेव और मैं उसके लिए अप्सरा बन गई थी।
उसने मेरे ब्रा का हुक नहीं खोला… बल्कि कंधे की पट्टी को बाहों में सरका दिया जिससे मैं बंधी सी हो गई और वो मेरे कंधे, गले, गालों, लबों को चूमता चाटता रहा..
मैं व्याकुल थी कि कब वो मेरी पेंटी उतारे और मेरी योनि चाटे..
पर सुधीर ने अपने आप को कैसे रोके रखा यह तो वही जाने!
अचानक उसने मुझे बाहों में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया और खुद की चड्डी और बनियान उतारी, तब तक मैंने अपनी ब्रा पेंटी उतार दी थी.. अब वह मेरी योनि को सूंघने चाटने लगा.. इस बार वह बोल कुछ नहीं रहा था बस मेरी मखमली खेली खाई चूत का आनन्द ले रहा था।
वो मेरे और सैम के बारे में सब कुछ जानता था.. इसलिए मुझे किसी बात की चिंता नहीं थी।

मैंने उसके पैर को खींच कर उसे लिंग मुंह में देने का इशारा किया, उसने भी इशारा समझ कर मेरे मुंह में लिंग दे दिया.. मुझे लिंग चूसने की जल्दी थी इसलिए मैंने उसे बिना पौंछे ही मुंह में डाल लिया और लिंग मुंह में जाते ही मैंने वीर्य का स्वाद पहचान लिया। मतलब सुधीर ने भी उत्तेजना में वीर्य टपका दिया था।
अब सही में मेरी चुदाई का वक्त आया, मैं सांस रोके उसके हमले और लिंग के अहसास का इंतजार कर रही थी, पर सुधीर मेरे ऊपर झुक कर रुका रहा।
मैंने पूछा- क्या हुआ? अब डालो ना, अब और नहीं सहा जाता!
तो उसने कहा- मेरे से सही जगह नहीं जाता, तुम डालो..
मैंने कहा- तुमने तो रेशमा के साथ किया हुआ है, फिर भी कैसे नहीं आता?
तो उसने कहा- सैम ने रेशमा को सिखाया और रेशमा खुद मेरा लिंग पकड़ कर डालती थी इसलिए मैं नहीं सीख पाया..
मैंने ओह गॉड कहा.. और उसका खड़ा तना सीधा लगभग सात इंच का लिंग पकड़ कर अपनी योनि द्वार पर रगड़ा, उसके गोरे लिंग का लाल मुंड मेरी योनि की दरार में फंसा हुआ था, मुंड काफी आकर्षक चिकना और बड़ा था, मेरी योनि उसके स्वागत के लिए पूरी तरह से तैयार थी।
तभी सुधीर ने जोर लगाना शुरू किया और एक ही झटके में लिंग जड़ तक पहुंचा दिया।
लिंग के घुसते ही मैं दर्द और मस्ती भरे मिले जुले स्वर में कराह उठी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ और हमारी घमासान चुदाई शुरु हो गई। सुधीर मेरे उरोजों को मसल रहा था.. मेरा हाथ सुधीर की पीठ पर, बालों पर लगातार चल रहा था। मैं इतने दिनों बाद अपनी योनि में लिंग लेकर अति प्रसन्न हो रही थी.. योनि की दिवारें लिंग के स्वागत में रस बहा रही थी।
सुधीर भी पागलों की भांति मेरे ऊपर टूट पड़ रहा था.. गति बहुत तेज और तेज.. और तेज होती गई और फिर जल्दी ही उंहह आंहहह आआहहह की आवाजों के साथ हम दोनों ही लगभग एक साथ चरम सुख को पा गये.. उसने लिंग बाहर निकाल कर मेरे पेट के ऊपर हाथों से दो चार झटके दिया और पेट पर ही अपना वीर्य गिराया और मेरे ऊपर ही लेट गया।
हम वीर्य से सने ऐसे ही पड़े रहे।
आधे घंटे बाद दूसरा राऊंड हुआ, फिर शाम को पापा के आने के पहले तीसरा राऊंड की चुदाई पूरी करके वह चल गया।
पापा के आने के पहले हमने उस दिन हमने चुदाई का तीसरा घमासान राऊंड पूरा किया, फिर सुधीर चला गया, हम मम्मी के मायके से लौटने तक रोज ये खेल खेला करते थे।
जब मम्मी आ गई तब मैंने (स्वाति) खुद सुधीर को मामा के घर वापस जाने को कहा क्योंकि उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, हम दोनों ने एक दूसरे से जीवन भर प्यार करने का वादा किया और बातें कम पढ़ाई ज्यादा का भी वादा लेते हुए आँखों में अश्रू धार लिये हुए विदा हो गये।
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08-12-2018, 12:11 PM,
#18
RE: kamukta औरत का सबसे मंहगा गहना
जब भी सुधीर छुट्टियों में घर आता, हम मौका देख कर चुदाई का खेल खेला करते थे.. कई बार तो हमें खुद को हस्तमैथुन के जरिये शांत करना पड़ता था।
ऐसे ही दिन बीते, हमारे पेपर अच्छे गये, हम अच्छे अंकों से पास हो गये.. मैंने और सुधीर ने एक ही कॉलेज में प्रवेश लिया और हम समय और जगह देख कर चुदाई कर लेते थे.. पर अति कभी नहीं की.. हम एक दूसरे को समझने लगे और पहले से ज्यादा चाहने लगे।
इस बीच हमारे घर में दीदी की शादी की बातें होने लगी थी, दीदी की शादी की चिंता में सभी परेशान भी थे.. फिर अचानक खबर आई की दीदी की शादी तय हो गई हम सभी बहुत खुश हो गये.. शादी भी बड़े धूमधाम से हुई… मैं शादी के रश्मों में दीदी के ससुराल नहीं गई थी.. इसलिए जब कुछ महीनों बाद मुझे छुट्टी मिली तब मैं दीदी के पास मिलने चली गई।
दीदी की ससुराल में मैंने जैसे ही कदम रखा, मेरे तो हाथ पांव फूल गये.. सबने हंसी खुशी मेरा स्वागत किया, पर स्वागत करने वालों में एक ऐसा शख्स भी था जिसे मैं बहुत अच्छे से जानती थी.. मैं सबको नजर अंदाज करते हुए दीदी (किमी) के पास गई और धीरे से इशारा करते हुए दीदी से उस आदमी के बारे में पूछा- ये तुम्हारा क्या लगता है?
किमी ने कहा- ये मेरे जेठ जी हैं।
यह सुन कर मैं तो सन्न रह गई.. पर दीदी को कुछ नहीं बताया.. और बताती भी क्या कि यही वह आटो चालक है जो मुझे छेड़ता था या जिसकी हम लोगों ने पिटाई और शिकायत की थी।
वो भी मुझे पहचान चुका था.. उसकी कमीनी हंसी साफ बता रही थी कि उसने यह शादी जानबूझ कर कराई है।
दीदी को सब बताऊँ या नहीं… इसी सोच में दूबे हुए एक दिन गुजर गया.. मैं अपना मन बहलाने अपने बायफ्रेंड से बात करने छत पर गई थी कि तभी मौका पाकर उसका जेठ वो आटो चालक मेरे सामने आकर बोला- देख स्वाति, अब तू मेरे जाल में फंस चुकी है.. यह शादी मैंने तुझसे ही बदला लेने के लिए अपने भाई से करवाई है, वो पहले से शादीशुदा है, पर तेरी दीदी नहीं जानती.. तू शांति से हमारी बात मान तो तेरी दीदी यहाँ खुशी खुशी रहेगी.. ऐसे भी तूने मेरी जिन्दगी खराब कर दी, तेरी शिकायत की वजह से मुझे गांव आकर खेती बाड़ी करनी पड़ रही है.. इस बार अगर तुमने कुछ किया तो मैं तुम्हें और तुम्हारे खानदान को बरबाद कर दूँगा..
मैं उसकी बातें सुनकर सहम गई.. मैं शांत रही और वो चला गया।
मैं बहुत घबराई सी और परेशान रहने लगी.. मेरे मन में अपराध भाव था कि मेरी वजह से मेरी दीदी की जिंदगी दांव पर लग गई है।
अगले दिन उसने फिर मौका देख कर मुझे कहा- आज रात तुम दरवाजा खुला रखना, हम आयेंगे..
मैं उसकी बातों का पूरा मतलब समझ रही थी.. मैंने हिम्मत दिखाने की कोशिश की, मैंने कहा- मैं तुम्हारी कोई भी बात नहीं मानूँगी, जाओ जो करना है कर लो.. और अगर ज्यादा तंग करोगे तो मैं घर में सभी को तुम्हारी हकीकत बता दूँगी..
वो हंसने लगा.. उसकी हंसी मुझे सुई की तरह चुभ रही थी.. उसने अपनी बीवी को आवाज दी, वो आ गई।
उसने कहा- इसे बताओगी? लो बताओ..
मैं समझ गई कि ये भी मिली हुई है।
दीदी अपने कमरे में सो रही थी, मैं डर रही थी कि वो मत उठे क्योंकि वो इन बातों को जानकर सह नहीं पाती!
उसने फिर कहा- सुधीर जरा आना तो..
मैं चौंक पड़ी- सुधीर यहाँ कैसे?
तभी वो कमीना जीजा आया, उसका भी नाम सुधीर था और मेरे प्यार का नाम भी सुधीर था.. मैं सोच रही थी कि एक ही नाम के दो लोगों के विचार इतने अलग कैसे हो सकते हैं.. वो भी उनसे मिला हुआ था, और वो सब हाथ में पेट्रोल और माचिस ले आये, और कहा- तुमने अगर हमारी बात नहीं मानी तो तुम्हारी दीदी जली हुई लाश की तुम खुद ही जिम्मेदार होगी।
अब मैं ठंडी पड़ गई.. मैंने गिड़गड़ाते हुए कहा- आप लोग जो कहोगे, मैं वो करूंगी बस मेरी दीदी को कुछ मत करो.. उसे ऐसे ही धोखे में खुश रहने दो।
वो रात को आने को बोल कर चले गये।
मैं अपने कमरे का दरवाजा खुला छोड़ कर जिल्लत सहने तैयार बैठी थी, मन में आया कि अपने सुधीर को ये सब बता दूँ, या पापा को ही बता दूं.. पर मैंने सोचा एक बार जो हिम्मत दिखाई थी उसका यह परिणाम आया है, अबकी बार और कुछ हो गया तो फिर कुछ नहीं बचेगा और मैंने सारी गलतियों का दोषी खुद को समझा और अपने साथ हो रहे इस व्यवहार को उसका प्रायश्चित!
मैं सलवार सूट पहने अपने बिस्तर में उन पिशाचों का इंतजार करने लगी। मैं रो रही थी, सुबक रही थी, सोच-सोच कर परेशान थी कि मैं यह क्या करने को राजी हुई हूँ।
तभी मन में बात आई कि जब मैं दो लोगों से चुद ही चुकी हूँ तो दो और लोगों से चुदने में क्या हर्ज है.. और मुझे यह भी लग रहा था की इस रात और मेरे इस समर्पण के बाद सब कुछ ठीक हो जायेगा।
तभी दरवाजा खुला और वो तीनों अंदर आये.. मैं सहमी सी थी उन्हें देख कर और जोरों से रो पड़ी.. तभी किमी की जेठानी मेरे पास आई और मुझे बिस्तर से उतार कर खड़ी करके बहुत जल्दी मेरी सलवार का नाड़ा खोला, सलवार नीचे गिरी ही थी कि किमी के जेठ ने मेरी पेंटी सरकाई और दो ऊंगली मेरी योनि में डाल दी और कहने लगा- इसी पर घमंड था ना.. तुझे.. आज बताता हूँ.. इसे कैसे फाड़ते हैं..
मैं तो डर ही गई.. मैं खुद को अपनी ही बाहों में समेटने की कोशिश करने लगी.. लेकिन मुझे मालूम था कि मैंने खुद यह अंजाम चुना है, मेरे साथ कोई जबरदस्ती नहीं हो रही है।
तभी जीजा ने मेरी ब्रा खींच दी.. अब मैं पूरी नंगी उनके सामने थी, उन्होंने मुझे पटक दिया और जीजा ने मेरी योनि में अपना लिंग डाल दिया ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ मैं तो बेजान सी थी, मानसिक तनाव के कारण बहुत दर्द भी हो रहा था पर चीख नहीं सकी क्योंकि मेरे मुंह में किमी के जेठ ने अपना लिंग घुसा दिया था।
उसकी जेठानी मेरे मम्मों को आटा गूंथने जैसे मसल रही थी।
अब मेरी योनि चुदाई का कुछ आनन्द उठाने लगी थी.. और मैंने उसके जेठ का लिंग अच्छे से चूसना शुरू किया ताकि सब कुछ जल्दी से निपट जाए। वह भी मेरे मुंह में ही झड़ गया और लिंग बाहर निकाल लिया।

लेकिन तभी किमी की जेठानी ने मेरे चूतड़ों के छेद में दो उंगलियाँ घुसा दी, मैं तड़प गई और जोर से चीख पड़ी।
उतने में ही किमी वहाँ आ गई.. उसके जेठ जेठानी दोनों छुप गये.. और किमी ने मुझे और जीजा को चुदाई करते देख लिया।
मैं एक पल को खुश भी थी कि किमी ने देख लिया तो अब मैं वहशीयत से बच जाऊँगी.. और किमी को सब बता दूँगी पर किमी ने इसका मौका नहीं दिया।
वहाँ से आकर मैंने सुधीर को सब बताया तो सुधीर ने मेरी स्थिति परिस्थिति को समझा और मेरी ओर से किमी को समझाने वाला था पर उससे पहले ही किमी ने आत्महत्या का प्रयास कर डाला।
जब किमी थोड़ी ठीक हालत में थी तब वो अपने पति के नाम से भी नफरत करने लगी थी.. और वही नाम तो मेरे बायफ्रेंड का भी है इसलिए मैंने सुधीर को दीदी से नहीं मिलवाया कि कहीं इससे मिलकर उसे अपने पति की याद ना आ जाये और सदमा ना पहुंचे।
किमी पूरी बात भी नहीं जानती और मुझे गलत समझती है, अब तुम ही बताओ संदीप मैं क्या करूँ?
मैंने गहरी सांस ली.. हालांकि मेरे लिंग ने इस कहानी में बिना छुये ही दो बार आँसू बहाये हैं, फिर भी अभी मुझे स्वाति और किमी के बीच दूरियाँ मिटाने के लिए कुछ करना था.. मैं यही सोचता रहा कि मैं क्या करूं..
तभी किमी आफिस से घर आ गई उसकी आहट पाते ही स्वाति संभल कर बैठ गई, हम ऐसे बातें करने लगे जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
किमी भी अपने कमरे में चली गई।
शाम की चाय हुई, रात का खाना हुआ और आज रात हम सब जल्दी सो गये।
पर आधी रात को किमी ने रोते हुए मुझे और स्वाति को उठाया और स्वाति के उठते ही उसे गले से लगा लिया और कहा- स्वाति, मुझे माफ कर दो, मैंने तुम्हें बहुत गलत समझा..
मैं हतप्रभ था कि यह किमी को क्या हो गया है?
स्वाति भी स्तब्ध थी..
तभी किमी ने कहा- जब मैं आफिस के लिए निकली, तब मुझे तुम दोनों पर शक हुआ इसीलिए मैं अपनी सहेली का कैम रिकार्डर मांग के लाई थी और अपने कमरे से हाल कवर हो, ऐसा फिट करके चले गई थी.. संदीप सॉरी तुम भी इमानदार हो, मैंने तुम पर भी शक किया.. क्योंकि मैं पहले भी इन चीजों से गुजर चुकी हूँ इसलिए मुझे ऐसा करना पड़ा। अब मैं रिकार्डिंग में सारी बातें देख चुकी हूँ, अब मेरे मन में कोई सवाल, कोई तर्क, कोई रंज नहीं है।
मैंने कोई बात नहीं कहते हुए बात को खत्म किया, अब सब कुछ खुद ही ठीक हो गया था, तो इससे अच्छा और क्या होता!
चूंकि किमी खुद भी बेहद खूबसूरत हो चुकी थी और मेरा दिल भी किमी के साथ लग चुका था इसलिए मैंने हमेशा इमानदारी बरती..
अब मैं और किमी स्वाति के घर में होते हुए भी एक रूम में सोते और सैक्स करते हैं, स्वाति भी अब कभी भी अपने बायफ्रेंड को बुला कर अपने रुम में चली जाती है।
किमी ने स्वाति और सुधीर की पढ़ाई के बाद शादी करवाने का वादा कर दिया है.. मुझे भी अच्छी लड़की देख कर शादी कर लेने को कहा है.. और खुद आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया है।
पर हमारे आज के सम्बन्धों के लिए किमी ने कहा है कि मैं जब तक चाहूँ ऐसा ही सम्बन्ध बनाये रख सकता हूँ, किमी मेरे लिए पूर्ण रुप से समर्पित है।
यह कहानी यहीं समाप्त होती है।

समाप्त
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