Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
07-20-2019, 09:29 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी

विमल के साथ जिंदगी तो उसने गुजारनी है ...तो क्या उसे खुद नही विमल से बात करनी चाहिए ...उसके अतीत के बारे में उससे सुनना चाहिए और अपने अतीत को खुद उसके सामने रखना चाहिए ....ताकि आगे आनेवाली जिंदगी में अतीत की कभी परछाई भी ना पड़े ....और दोनो में एक विश्वास का बंधन हो...जो कि हर दंपति की जिंदगी में होना चाहिए...क्यूंकी विश्वास ही आधार होता है एक खुश हाल जिंदगी का...नही तो जिंदगी बिखर के रह जाती है...

अपने मन में वो विमल से सवाल करने लगी ....बोलो ना विमल ..क्या तुम्हारे दिल में मेरे लिए वही तड़प बाकी रहेगी जिसे ले कर तुम कवि के पास गये थे मेरा हाथ माँगने...या फिर तुम मुझ से नफ़रत करोगे ..क्यूंकी मेरी जिंदगी में पहला जो लड़का आया था जिसने मुझे अच्छी तरहा दो साल तक भोगा था...वो कोई और नही मेरा बड़ा भाई था....बताओ ना विमल क्या तुम इस कड़वे सच को बर्दाश्त कर लोगे.....

विमल क्या तुम ये सुन पाओगे ..कि मैं सुनील से प्यार करती हूँ और शायद करती रहूंगी आखरी साँस तक.......पर उसके दिल में मेरे लिए सिर्फ़ एक बहन का प्यार है ...क्या ये सच मैं तुम्हें बता पाउन्गि...क्या मुझे ये सच तुम्हें बताना चाहिए .........

जब लड़की शादी के बंधन की तरफ अपने कदम बढ़ा देती है......तो हर पल उसके दिमाग़ में एक जंग छिड़ी रहती है....कुछ यही हाल रूबी का था.....

काबी उसके दिमाग़ में कोई ख़याल आता तो कभी कोई......

इस बात को अच्छी तरहा जानते हुए कि विजय और सुनील उसका कभी कोई बुरा नही होने देंगे ....वो अपनी अंदर चलती इस जंग को रोक नही पा रही थी........

रूबी ने पलट के देखा मिनी दूसरी तरफ मुँह कर के सो रही थी......दिल-ओ-दिमाग़ में चलती हुई जंग...रूबी की आँखों से नींद उड़ा चुकी थी......

वो धीरे से बिस्तर से उठी......अपने लिए एक कॉफी बनाई और धीरे धीरे सीप लेते हुए खिड़की पे आ कर खड़ी हो गयी......और दूर तक फैले समुद्र को देखने लगी....

कितना शांत था समुद्र आज .......और कभी कभी जब इसमें तूफान आता है तो ना जाने कितनी ज़िंदगियों को अपनी लपेट में लेके लेता है.......

ये समुद्र एक आईना ही तो होता है ...जो इंसान की जिंदगी का रूप दिखता है.....कभी वो कितनी शांत और सकुन से भरी होती है तो कभी ऐसे ऐसे जलजले आते हैं जो साथ जुड़ी कितनी ही ज़िंदगियों को तबाह कर देते हैं......

एक एक पल अपनी जिंदगी का रूबी की आँखों के सामने आने लगा ......पहले प्यार किया तो धोखा मिला...फिर प्यार किया तो नाकामयाब रहा.......और अब शादी...क्या वो विमल को वही प्यार दे पाएगी......जिस प्यार पे उसने सुनील का हक़ बना रखा है.......

सुनील.....देखो जा रही हूँ तुम्हारी जिंदगी से दूर....अब कभी तुम्हें मैं........(आँसू टपक पड़े रूबी की आँखों से) काश कि तुम मेरे प्यार को समझ पाते .....कोशिश करूँगी ....तुम्हारी चाहत को दिल के किसी कोने में दफ़न कर दूं....कोशिश करूँगी ..एक नयी जिंदगी विमल के साथ जीने की....पर ये आस हमेशा जिंदा रहेगी...कि वो वक़्त भी कभी आए...जब तुम्हें अहसास हो मेरे प्यार की गहराई का....

रुला के गया सपना मेरा
रुला के गया सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा
रुला के गया सपना मेरा

वही हैं गमे दिल, वही हैं चंदा तारे
वही हम बेसहारे
वही हैं ग़मे दिल, वही हैं चंदा तारे
वही हम बेसहारे
आधी रत वही हैं, और हर बात वही हैं
फिर भी ना आया लुटेरा

रुला के गया सपना मेरा
बैठी हूँ कब हो सवेरा
रुला के गया सपना मेरा

कैसी यह जिंदगी, के सांसो से हम उबे
के दिल डूबा, हम डूबे
कैसी यह जिंदगी, के सांसो से हम उबे
के दिल डूबा, हम डूबे
एक दुखिया बेचारी, इस जीवन से हारी
उस पर यह गम का अंधेरा

रुला के गया सपना मेरा
बैठी हू कब हो सवेरा
रुला के गया सपना मेरा.

कभी कभी सपने ऐसे होते हैं जो बस रुलाते ही रहते हैं....ऐसे ही सपनो की दुनिया में रूबी जी रही थी....और उन सपनो को अपने दिल की किसी पिटारी में बंद रखने का प्रयास कर रही थी.

रात धीरे धीरे सरक रही थी .....और सरक रहे थे उसके अरमान .....फिसल के एक कोने में दुबक रहे थे.......वो अपने आप को तयार कर रही थी ....आख़िर सुनील उससे ये सवाल ज़रूर पूछेगा...कि उसने ये फ़ैसला कैसे लिया...क्यूँ लिया....
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07-20-2019, 09:30 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
उसने कभी ख्वाब में भी नही सोचा था कि जिंदगी को एक मक़सद मिल जाएगा....
.जब सुनील को छोड़ के आई थी तो बहुत ही निराश और टूटी हुई थी ...
अब तक जिंदगी में जितने आदमियों से पाला पड़ा था वो जिस्म के भूखे थे एक सुनील ही उसे ऐसा मिला जिसने उसकी तरफ देखा तक नही....

यही वो वजह थी ..कि सुनील उसकी रग रग में बस गया था....उसकी ही नही उसकी बेटी की रग रग में भी ...
क्या ऐसा कभी होता है..के मा और बेटी एक ही इंसान को अपने दिल में बसा लें ....और वो इंसान उनकी तरफ देखे तक ना.....

जिंदगी का ये पहलू सवी की समझ से परे था ...क्यूंकी ये सब उसे एक अजूबा लगता था....मर्द तो औरत की चूत की तरफ भागता है ...यही उसने जाना और समझा था ...लेकिन सुनील ने उसकी सभी धारणाओं को फैल कर दिया था.....क्या सही मर्द ऐसा ही होता है.....अगर हां...तो उसके नसीब में ऐसा मर्द क्यूँ नही आया ....ये सोच सोच कर उसे सुमन से जलन होती थी....क्या नही मिला सुमन को.....पहले सागर और अब सुनील.....मैने ऐसे क्या पाप किए ...जो एक ही माँ की कोख से जनम लेने पर भी मेरी जिंदगी में काँटे और उसकी जिंदगी में फूल ही फूल.......

अपनी जिंदगी के पुराने पन्ने पलटते हुए वो उन दिनो में पहुँच गयी ....जब वो बॅंगलुर में रहते थे........कॉलेज के दिनो में उसे एक लड़के से प्यार हो गया था.....लेकिन उस लड़के के साथ कुछ ऐसा हुआ ....कि वो एक दिन उसे आ कर बोला ....कि मुझे भूल जाओ ......मेरी जिंदगी अब काँटों का गुलदस्ता बन चुकी है...और मैं कभी नही चाहूँगा कि तुम्हें उन कांटो की हल्की सी भी चुबन महसूस हो......इतना कह वो चला गया.....

दूर इतना दूर की पता ही ना चला वो कहाँ गया.....अपने इस प्यार को हमेशा सूमी से छुपा के ही रखा था.....
उसके बाद जिंदगी में कभी कोई पसंद ही नही आया ....और एक दिन ...समर से उसकी शादी हो गयी........और

यहीं से हुई शुरुआत उसके पतन की ....कहते हैं कि जिंदगी में इंसान चाहे अनचाहे जो पाप करता है ....उसकी सज़ा इसी जनम में मिल जाती है.......और यही तो हो रहा था उसके साथ ....जब पाप किए तो उनके फल तो भुगतने ही पड़ेंगे ....
वो फल कब किस रूप में भुगतने पड़े ...ये कोई नही जानता...क्यूंकी सब कुछ वक़्त के गर्भ में छुपा रहता है......
.जो धीरे धीरे अपनी चल चलता रहता है और इंसान को पता भी नही चलता ....कि वो वक़्त आ गया...
जब उसे अपने किए गये पापों का फल भोगना पड़ेगा.....

ये पाप ही तो था कि समर की बातों में आ कर ऐसा जाल बुना कि सुमन को स्वापिंग के लिए मजबूर होना पड़ा .....ये पाप ही तो था ...कि सुमन को ये बोला कि दूसरा बेटा मरा हुआ पैदा हुआ ताकि समर उसे अपनी बहन की झोली में डाल सके....
.एक दूध पीते बच्चे को उसकी असली माँ से जुदा करना ....संसार का सबसे बड़ा पाप होता है .....
और समर के साथ मिल ये पाप भी तो किया था......

एक ठंडी साँस भर वो सोचने लगी...इन्ही पापों की तो अब सज़ा मिल रही है......
.कहाँ सुमन के पास सब कुछ ...एक जान छिड़कनेवाला नया पति ....सुनील...
कहाँ मैं...नितांत अकेली...जिंदगी की लड़ाई अकेले लड़ते हुए ....

ये पाप ही तो थे जिनकी वजह से सुनील ने ठुकरा दिया .....वरना क्या वो अपना नही सकता था......बिल्कुल अपना सकता था...पर नही....उसके संस्कार...उसकी मर्यादा ....

कहते हैं कि पापों की सज़ा तो मिलती ही है पर प्रायश्चित करने का भी मौका मिलता है......
समझदार उस मोके को पहचान लेता है ...और जाहिल उस मोके को गवाँ देता है.....

सवी को भी वो मौका नज़र आने लगा.......लेकिन साथ साथ बहुत सी कठिनाइयाँ भी नज़र आने लगी .......
अगर वो इस मोके को दबोच लेती है ...तो दिल बहुत हल्का हो जाएगा.....मगर जो तुफ्फान कुछ लोगो की ज़िंदगियों में आएगा ....
वो .वो.....उनका क्या ...कैसे झेलेंगे वो इस तुफ्फान को.....

आज सवी को ये फ़ैसला लेना था ........ये रात बहुत भारी गुजरनेवाली थी सवी पर ........ये फ़ैसला लेना कोई आसान काम नही था........

अमर सो चुका था ...पर सवी की आँखों से नींद दूर थी......बिस्तर से उठ वो खिड़की पास आ खड़ी हो गयी और आसमान पे छाए चाँद को देखने लगी .....होंठों पे आपने आप लफ्ज़ आने लगे .....कितनी कोशिश करी कि सुनील को भूल जाए....पर ये हो ना सका.....आज भी सुनील उसकी नस नस में समाया हुआ था.....

यह रात खुशनसीब है, जो अपने चाँद को
कलेजे से लगाए सो रही है
यहाँ तो गम की सेज पर, हमारी आरज़ू
अकेली मुँह छुपाए रो रही है
यह रात खुशनसीब है, जो अपने चाँद को
कलेजे से लगाए सो रही है

साथी मैने पाके तुझे खोया, कैसा है यह अपना नसीब, ओह
तुझसे बिछड़ गयी मैं तो, यादें तेरी हैं मेरे करीब, ओह
तू मेरी वाफाओं में, तू मेरी सदाओं में
तू मेरी दुआओं में
यह रात खुशनसीब है, जो अपने चाँद को
कलेजे से लगाए सो रही है

कट ती नहीं हैं मेरी रातें, कट ते नहीं हैं मेरे दिन, ओह
मेरे सारे सपने अधूरे, ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन, ओह
ख्वाबों में, निगाहों में, प्यार की पनाहों में
आ छुपा ले बाहों में
यह रात खुशनसीब है, जो अपने चाँद को
कलेजे से लगाए सो रही है
यहाँ तो गम की सेज पर, हमारी आरज़ू
अकेली मुँह छुपाए रो रही है

चाँद को देखते हुए जिंदगी से गिला करते हुए ...ये रात भी गुजर गयी.
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जहाँ एक तरफ वो बहुत खुश थी कि रूबी की जिंदगी को एक माइना मिल जाएगा.....वहीं अपने बारे में सोच वो उदासी के बादलों में खो जाती थी....
यकीन ही नही होता था...के उसकी जिंदगी में ऐसे भी दौर आएँगे ...जब वो नितांत अकेली पड़ जाएगी.......
अपने साथ लेटी रूबी को देख ...
मिनी ने आज काफ़ी दिनो के बाद खुद के बारे में सोचना शुरू कर दिया......
जिंदगी के वो सुहाने पल एक एक कर उसकी नज़रों के सामने गुजरने लगे ...माँ बाप की लाडली ...
पूरे गाँव में सबसे ज़्यादा पड़ी लिखी ....
क्यूंकी उसकी माँ चाहती थी कि वो पढ़े लिखे अपने पैरों पे खड़ी होये.....

फार्मेसी का कोर्स करने उसे मुंबई के एक कॉलेज में डाल दिया गया ..
जिसके बिल्कुल साथ ही मेडिकल कॉलेज भी था.....
वहीं तो आया था वो लड़का ...जिसके माँ बाप यूके में थे और वो कॉलेज के एक्सचेंज प्रोग्राम
में कुछ महीनो के लिए मुंबई आया था इस कॉलेज में .......आज भी वो शाम मिनी नही भूल पाती थी..जब उसकी पहली मुलाकात हुई थी सुनेल से......

कितनी हँसीन बन गयी थी वो शाम जब वो अपनी सहेलियों के साथ पास ही के एक फेमस चाइनीस रेस्टोरेंट में गयी थी .
......अभी उनको बैठे हुए कुछ ही पल गुज़रे थे कि 4 लड़के खिलखिलाते हुए उसी रेस्टोरेंट में घुसे और बिल्कुल उनके सामने वाली टेबल पे बैठ गये.........
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07-20-2019, 09:30 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
यही वो पल था जब मिनी और सुनेल की नज़र आपर में टकराई थी ...
और नज़रों ने नज़रों को रोक लिया था........दोनो बस एक दूसरे को ही देखे जा रहे थे और भूल गये कि वो अपने दोस्तों के साथ आए हुए हैं......

सुनेल ने कभी सोचा नही था कि कभी उसके साथ ऐसा भी होगा ....लंडन के महॉल में पला बढ़ा वो असल में एक कॅसनोवा था...जिसपे लड़कियाँ जान छिड़कती थी ....
सबसे बड़ी खूबी उसमें ये थी ..कि वो अपनी पढ़ाई पे भी पूरा ध्याब देता था ....और लड़कियों को तो वो कपड़ों की तरहा बदलता था फिर भी लड़कियाँ उसपे मरती जाती थी ........

यहाँ इंडिया आ कर वो लव अट फर्स्ट साइट का शिकार हो जाएगा ....ये बात कोई सपने में भी नही सोच सकता था....मिनी पे जैसे ही उसकी नज़र पड़ी ...उसकी नज़रें वहीं रुक गयी ...हुस्न की बेमिसाल जीती जागती परी उसकी आँखों के सामने थी...जिसके वो सपने लिया करता था पर उसे कभी मिली नही थी....अपने सपनो को यूँ अचानक अपने सामने देख कर वो खो गया था.......उसके साथ के लड़कों ने जब उसकी नज़र का पीछा किया तो सब समझ गये कि हिन्दुस्तान आ कर
रोमीयो अब मजनू बन गया है और सबके चेहरों पे मुस्कान आ गयी और नज़रों ही नज़रों से आपस में बातें करने लगे......

कुछ ऐसा ही हाल मिनी की सहेलियों का भी हुआ ....मिनी को उन्हों ने कभी किसी लड़के से बात करते नही देखा था...लेकिन उसकी नज़र एक लड़के पे टिकी देख वो भी मुस्कुरा उठी ...हर लड़की की जिंदगी में ये दिन कभी ना कभी आ ही जाता है...जब ना चाहते हुए भी दिल किसी और का हो जाता है.....कोई ऐसा नज़रों के सामने आ जाता है..जिसे दिल अपना बनाने के लिए तड़प उठता है......मिनी सुनेल की नज़रों की ताब को झेल ना सकी और शरमा के नज़रें झुका ली.......

उसकी एक सहेली ने उसे छेड़ना शुरू कर दिया 'लैला -ओ-लैला लैला...कैसी तू लैला ...हर कोई चाहे तुझ से मिलना अकेला'

ये सुन मिनी होश में आई और बुरी तरहा झेन्प्ते हुए अपनी सहेली को गुस्से से देखने लगी...

दूसरी सहेली...कोई बात नही ..होता है ...होता है....

मिनी...चुप करो दोनो .....जल्दी सूप ख़तम करो और चलो यहाँ से....

वहाँ दूसरी टेबल पे सुनेल के दोस्त भी पीछे ना रहे....

दोस्त 1 ......मारा गया बेचारा कॅसनोवा इंडिया आ कर

दोस्त 2....यार रोमीयो को मजनू बनते आज पहली बार देखा

सुनेल ....तुम लोग साले खच्छर हो खच्छर .....जब हुस्न की देवी रंभा और मेनका को भी मात कर दे ....तो नज़रें क्या..दिल भी खो जाता है...

जब मिनी और उसकी सहेलियाँ रेस्टोरेंट से निकल अपने कॉलेज की तरफ जाती हैं तो सुनेल भी बाहर निकल ये देखने लगता है कि ये जा कहाँ रही हैं और जब वो उन्हें साथ वाले फार्मेसी कॉलेज में घुसता हुआ देखता है तो चेहरे पे मुस्कान आ जाती है...यानी फिर मोके मिलेंगे इस रूपसी से मिलने के....

सुनेल ने रोज उस चाइनीस रेस्टोरेंट में आना शुरू कर दिया कि शायद मिनी की झलक उसे मिल जाए ...शाम को घंटों वहाँ बैठा रहता ....और अंत में उदास हो कर चला जाता.......उसके अपने कॉलेज में साथ पढ़ती बहुत सी लड़कियाँ उसके आगे पीछे दौड़ती ...लेकिन ये कॅसनोवा बदल गया था ......मिनी की वो नज़रें उसे हर पल घायल करती रहती थी...

एक हफ्ते बाद उसकी किस्मत खुली जब मिनी फिर अपनी सहेलियों के साथ आई ....वो बस मिनी को देखता रहा....ये बात मिनी ने भी नोट कर ली...उस दिन कुछ खांस नही हुआ...ना ही सुनेल ने कोई ऐसी हरकत करी .....जो ये बताती कि वो मिनी के पीछे पागल हुआ जा रहा है....

एक हफ़्ता और गुजर गया .....इस बार भी मिनी उसी दिन यानी सनडे को ही आई ....जब वो जाने लगी तो सुनेल से रहा ना गया और उठ के उसके पास चला गया ...

सुनेल......सुनिए ....आप यहीं पढ़ती हैं क्या?

मिनी ....ने उसे देखा .....थोडा गुस्से में ...आप से मतलब?

सुनेल.....जिंदगी में पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि मुझे किसी से दोस्ती करनी है..और वो आप हैं...क्या इस नाचीज़ की दोस्ती कबूल फरमाएँगी...

मिनी ...मैं अंजान लोगो से बात नही करती ...मेरा रास्ता छोड़िए...

सुनेल....अंजान कहाँ रहे अब..मेरा नाम सुनेल है और यूके से यहाँ आया हूँ....यही साथ वाले कॉलेज में एमबीबीएस कर रहा हूँ...आप शायद फार्मेसी का कोर्स कर रही हैं...

मिनी...तो आप मेरा पीछा करते हैं...

सुनेल.....ये तो इल्ज़ाम है ...कभी आपने देखा मुझे पीछा करते हुए...हां रोज यहाँ आपका इंतेज़ार ज़रूर करता हूँ.....

मिनी......रास्ता छोड़िए...

सुनेल......रास्ते से हटते हुए...मैं कल शाम आपका इंतेज़ार करूँगा यहीं.....(और मिनी को देखे बिना वहाँ से चला गया)

मिनी और उसकी सहेलियाँ उसे जाता हुआ देखती रही...

सहेली 1 ...मिनी ये तो तेरा पक्का आशिक़ बन गया

सहेली 2 ...आशिक़ से भी बड़ा ...ये तो पूरा मजनू बन गया

मिनी ...चुप करो तुम दोनो...चलो यहाँ से

सहेली 1...क्या करेगी कल आएगी क्या उस से मिलने

मिनी ...ना बाबा ना ....ये सब मुझ से नही होता

सहेली 2...अरे एक बार मिल तो ले ...कोई कहीं अकेले तो बुला नही रहा ...यहाँ रेस्टोरेंट में और भी लोग तो होंगे ...मिलने में क्या जाता है

सहेली 1 ...हाई काश ये मुझे बुलाता ..मैं तो फट चली आती ..क्या पर्सनॅलिटी है उसकी.....हीरोस को भी मात देता है

मिनी ...उफ़फ्फ़ तुम लोग भी अब चलो नही तो मैं जा रही हूँ....(सब चली जाती हैं)

रात को बिस्तर पे लेटे एक तरफ सुनेल सोच रहा था कि वो आएगी या नही वहीं दूसरी तरफ मिनी सोच रही थी ...जाउ या नही......ये रात दोनो की आँखों ही आँखों में कट गयी...
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07-20-2019, 09:30 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी

अगला दिन गुजरा शाम हो गयी ...मिनी के कदम रेस्टोरेंट की तरफ उठते फिर रुक जाते ....नही गयी वो ...और सुनेल उसका इंतेज़ार करता रहा...देखा जाए तो सुनेल को मिनी की ये बात अच्छी भी लगी कि वो नही आई...

लेकिन उसे ये भी यकीन था कि एक दिन वो ज़रूर आएगी...अगले दिन भी वो इंतेज़ार करता रहा पर मिनी नही आई ...ये सिलसिला यूँ ही एक हफ्ते तक चला और वो दिन आ गया जब हर हफ्ते की तरहा मिनी अपनी सहेलियों के साथ आती थी .......सही टाइम पे मिनी आई ...पर इस बार सुनेल जो अपने दोस्तों के साथ था उसने मिनी की तरफ देखा ही नही ...जल्दी अपना स्नॅक ख़तम कर दोस्तों को वहीं छोड़ वो मिनी से पहले चला गया......

यहाँ एक बात देखने वाली थी ...कि जो लड़का उस से मिलने के लिए घंटों इंतेज़ार करता था आज वो उसकी उपेक्षा कर चला गया और एक नज़र भी उसकी तरफ देखा नही.....

अब ये सुनेल ने क्यूँ किया ...ये तो वही जानता था..पर इसका असर मिनी पे पड़ा .....

एक हुक सी उठी मिनी के दिल में...पहले वो सुनेल को कोई दिल फेंक आशिक़ समझ रही थी...पर आज उसका रवईया देख मिनी के दिल ने उसे कबूल कर लिया था....आज उसने वो किया जो कोई लड़की कभी नही करती शायद....वो उठ के सुनेल के दोस्तों के पास गयी........

मिनी...क्या आप में कोई मुझे सुनेल जी का नंबर देगा....

टेनो दोस्त हैरानी से उसे देखने लगे .......फिर एक ने नंबर दे ही दिया.........

बड़ी हिम्मत करते हुए ....रात को मिनी ने एक मेसेज भेज ही दिया...मैं आपका इंतेजर करूँगी कल ..वहीं उसी रेस्टोरेंट में....

सुनेल को जब मेसेज मिला तो दस बार उसने वो मेसेज देखा ....उसकी हैरानी की कोई इंतिहा नही थी .....उसका नंबर पता करना और फिर मेसेज भी भेजने मिलने के लिए .....काफ़ी हिम्मतवाली लड़की थी...दिल तो पहले ही हार चुका था ...पर ये नही चाहता था कि वो उसे एक दिलफेंक आशिक समझे ....उसने मेसेज इग्नोर कर दिया........ना मेसेज का जवाब दिया और ना ही अगले दिन मिलने गया...

अगले दिन मिनी निराश भी हुई और खुश भी हुई........


इसके बाद मिनी ने कोई मेसेज नही भेजा और ना ही दुबारा कभी उस रेस्टोरेंट में गयी ...उसकी सहेलिया आती पर वो साथ नही होती .....

एक जंग सी शायद छिड़ गयी थी दोनो के बीच ...कॉन टूटेगा पहले

सुनेल वो था जिसके आगे पीछे लड़कियाँ घूमती हैं...लेकिन एक लड़की की उपेक्षा ने उसे अंदर से हिला दिया था...उसकी सोच जो लड़कियों के बारे में थी वो बदल रही थी...उसके दिल में जो चुबन उस वक़्त हुई थी जब मिनी से नज़रें चार हुई थी ...उसमें सबसे बड़ी भूमिका आकर्षण की थी ...जो इस उम्र में हर लड़के/लड़की को हो जाता है...पर उसने कभी ख्वाब में भी नही सोचा था कि कोई लड़की कभी उसकी भी उपेक्षा कर देगी....जहाँ एक तरफ इस बात से उसकी ईगो को चोट पहुँची थी...वहीं उसका दिल उसे कुछ और कह रहा था...उसे उस रास्ते पे चलने को मजबूर कर रहा था ..जो उसके लिए बिल्कुल अंजान था..जिसके बारे में वो कुछ नही जानता था...वो रास्ता था प्यार का.....हां उसे मिनी से सच में प्यार हो गया था...लेकिन एक डर भी उसके अंदर जाग गया था...कल जब मिनी को उसके इतिहास के बारे में पता चलेगा...वो उसे छोड़ देगी...तब...तब जो दर्द होगा वो सहा नही जाएगा...इसीलिए अच्छा है..अभी से दूरी बना के रख ली जाए...इन्ही बातों को सोचते हुए वोही मिनी को अवाय्ड करने लगा....

वहीं दूसरी और मिनी ..जिसे सुनेल की नज़रों की आदत पड़ गयी थी ...उसे इस तरहा सुनेल द्वारा उपेक्षित किया जाना अखर सा गया था...एक खूबसूरत लड़की के अहम को भी बहुत जल्द चोट पहुँचती है....ऐसा ही कुछ मिनी के साथ भी हो रहा था...लेकिन उसका दिल..उसका दिल दिमाग़ के सारे रास्ते बंद करता जा रहा था....वो अपनी हर धड़कन में सुनेल का नाम लिखता जा रहा था ......और दिल की ये हरकत मिनी की तड़प को बढ़ा रही थी...

जब दो अंजान लोग..लव अट फर्स्ट साइट का शिकार होते हैं..तो शायद ऐसा ही कुछ होता है दोनो के साथ......दिल से एक दूसरे के करीब आना चाहते हैं..एक दूसरे को समझना चाहते हैं...पर करकतें बिल्कुल उल्टी करते हैं..जैसे दूसरे कि कोई परवाह ही नही उन्हें.....कोई फरक ही नही पड़ता उन्हें कि उनकी किस हरकत का दूसरे पे क्या असर हो रहा है....

दिमाग़ अपने रास्ते पे चलना चाहता है और दिल ...वो तो माशा-अल्लाह अपनी दुनिया के फ़ैसले खुद लेता है और दिमाग़ को कहता है ..चुप कर ..ये तेरे बस की बात नही..ये दिल का मामला है

पहले मिनी ने सुनेल के निवेदन को ठुकराया था ...अब सुनेल उसे ठुकरा रहा था.........लड़ दोनो ही अपने आप से रहे थे.........इसी लड़ाई में 15 दिन और निकल गये.....

और एक तूफ़ानी शाम जब बहुत तेज बारिश हो रही थी......सुनेल बारिश शुरू होने से कुछ देर पहले ही रेस्टोरेंट पहुँचा था...अकेले और खिड़की के पास बैठ ...बाहर देखते हुए ...कॉफी पी रहा था...जाने कितने ही कप कॉफी के पी गया था...जब बारिश बहुत तेज हुई..हवा में ठंडक बढ़ गयी....तब कॉफी का मज़ा भी दुगना हो गया था.....

तभी इस तुफ्फानी बारिश में भीगति हुई मिनी रेस्टोरेंट में घुसी और एक कोने में खड़ी हो थर थर कांप रही थी ठंड की वजह से .....वैसे तो ठंड नही थी पर तेज चलती हवा और भीगा बदन..ठंड का ही अहसास करवाता है......

सुनेल ने उसकी हालत देखी ....उसे आसपास कुछ और नज़र नही आया तो टेबल पे जो सफेद कॉटन का कवर बिछा हुआ था...वही उठा के मिनी के पास गया और उसे उस क्लॉत से लपेट दिया ताकि कुछ तो पानी ये क्लॉत सोख ले........रेस्टोरेंट में बस इक्का दुक्का लोग ही थे जो बारिश की वजह से फस गये थे.....

सुनेल....बाथरूम जा कर अपने कपड़े निचोड़ ली जिए...वरना बीमार पड़ जाएँगी.....इतना कह उसने रेस्टोरेंट की रिसेप्षन से दो ताजे टेबल कवर माँगे और मिनी को दे दिए...जो चुप चाप अपनी पलकें झुकाए ....बाथरूम में घुस गयी.....


मिनी जब बाहर निकली तो उसे उन दोनो टेबल क्लॉत से अपने जिस्म को अच्छी तरहा ढका हुआ था और एक टेबल की कुर्सी पे अपने कपड़े डाल दिए सूखने के लिए ...अपनी सलवार और कुर्ता........ब्रा और पैंटी तो उतार सकती ही नही थी....
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07-20-2019, 09:30 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सुनेल ने जब उसे देखा तो देखता रहा...रेस्टोरेंट का सारा स्टाफ मिनी को ललचाई नज़रों से घूर रहा था.....बारिश का ये हाल था कि दो घंटे और तो नही रुकने वाली थी....मिनी के दोनो कंधे नंगे थे ....सुनेल से ये बर्दाश्त नही हुआ कि कोई उसे भूखी नज़रों से देखे...उसने अपनी शर्ट उतार के मिनी को दी...पहन लो और खुद को ढक लो......

मिनी का तो वैसे भी चुभती नज़रों से बुरा हाल हो रहा था...नज़रों से ही सुनेल को धन्यवाद दे उसने शर्ट पहन ली ....शर्ट सुनेल के जिस्म की गर्मी से काफ़ी गरम थी और पहन कर मिनी को राहत भी मिली ....सकुचाते हुए वो सुनेल की टेबल पे उसके सामने बैठ गयी....

सुनेल ने पहले ही कड़क गरमा गरम कॉफी मंगवाली थी......एक कप मिनी को ऑफर कर खुद एक कप पीने लग गया....

आवाज़ें जो चारों तरफ थी वो तेज बारिश के गिरने की और पीछे खड़े रेस्टोरेंट के स्टाफ की फुसफुसाहट की ......

मिनी कॉफी के हल्के हल्के सीप ले कर खुद को तरोताजा महसूस करने लगी थी...एक दो बार कनखियों से उसने सुनेल को देखा ...जो बाहर खिड़की से टपकती हुई बारिश को देख रहा था.....कुछ पल जब उसने मिनी को तब देखा था जब वो भीगी हुई रेस्टोरेंट में घुसी थी और तब देखा जब वो बाथरूम से बाहर निकली थी...इसके बाद उसने अपनी नज़रें मिनी से फेर ली थी...

खिड़की से बाहर देखते हुए ही वो बोला ...'क्या ज़रूरत थी ...इतनी बारिश में भीगते हुए यहाँ आने की.....खैर तुम जानो तुम्हारी जिंदगी...'

मिनी की आँखों से आँसू टपक पड़े ....

'एक तो इतनी बारिश में रिस्क लिया ...कि मिल सकूँ..उपर से इतनी कड़वी बातें....खैर कोई बात नही .....जब तुम्हें मेरी कोई परवाह नही तो मैं ही क्यूँ करूँ.....' अपने आँसू पोछे ..मिनी ने सुनेल की शर्ट उतार वहीं टेबल पे रख दी...और भागती हुई अपने गीले कपड़े उठा बाथरूम में घुस्स गयी ..फटाफट अपने गीले कपड़े पहने ....टेबल पे पड़ा अपना पर्स उठाया और रेस्टोरेंट से बाहर ....क्यूंकी कॉलेज का हॉस्टिल कदमो के फ़ासले पे ही था...वो भागती हुई चली गयी.......और अपने कमरे में पहुँच ज़ोर ज़ोर से रोने लगी.....

सुनेल जिसने अपना ध्यान खिड़की से बाहर ही रखा हुआ था...जब उसे बाहर मिनी बारिश में भागती हुई नज़र आई तब जा कर उसकी तंद्रा टूटी और उसे याद आया कि उसने क्या बोल दिया था....

ग्लानि महसूस करने लगा कि उसने मिनी का दिल दुखा दिया था....जब बारिश रुकी तो बोझिल कदमो से अपने हॉस्टिल की तरफ चला गया....

इस हादसे के बाद ना सुनेल उस रेस्टोरेंट में गया और ना ही मिनी......दोनो बस अपनी पढ़ाई में लगे रहे ....और उदासी ने उनको घेर लिया...दोनो जैसे हँसना भूल ही गये थे....वक़्त अपनी रफ़्तार से चलता रहा और एक महीना गुजर गया.....मिनी की सहेलियों ने कितना ज़ोर डाला पर नही ...उसने उनकी बात कभी नही मानी उस रेस्टोरेंट में जाने की ना ही कभी सुनेल ने अपने दोस्तो की...कहीं और चले जाते थे बस उस रेस्टोरेंट पे नही जाते थे..........सुनेल के दोस्त भी उसकी तड़प को महसूस करने लगे थे और मिनी की सहेलियाँ भी .......

एक महीना इसी तरहा गुजर गया...जब एक दिन सुनेल के दोस्तों ने मिनी की सहेलियों से बात करी और दोनो को मिलने का प्लान बनाया....जगह चुनी गयी जुहू बीच ....

मिनी की सहेलियाँ उसे ले कर वहाँ पहुँची और सुनेल के दोस्त उसे ले कर......

अब हाल यूँ हुआ कि एक तरफ से सुनेल और उसके दोस्त मटर गश्ती करते हुए आ रहे थे और एक तरफ से मिनी और उसकी सहेलियाँ...जैसा सबने सोचा था...हो गया आमना सामना....सुनेल के कदम वहीं रुक गये और मिनी के भी वहीं....नज़रें नज़रों से मिली और नज़रों से ही गीले शिकवे होने लगे.......

दोनो के दोस्त वहाँ से फुट लिए और छोड़ दिया दोनो को अकेला....

नज़रों का खिचाव आपस में बढ़ा और कदम एक दूसरे की तरफ बढ़ने लगे ....और इतने करीब आ गये ...कि साँसे एक दूसरे में घुलने लगी .....मिनी ने अपना सर सुनेल की छाती से टिका दिया और सुनेल की बाहों ने उसे समेट लिया.........दोनो शायद एक दूसरे के दिल की हालत बखूबी जानते थे इसीलिए तो किसी ने कोई गिला शिकवा नही किया........लव अट फर्स्ट साइट अपनी पहली मंज़िल पे पहुँच गया.....

और फिर शुरू हुआ मुलाक़ातों का सिलसिला ...एक दूसरे को पहचानने का सिलसिला.....सुनेल ने अपना इतिहास भी नही छुपाया और लंडन का जो महॉल था उसे अच्छी तरहा समझा उसका उसपे क्या असर पड़ा सब मिनी को बता दिया.....

जब ये सच मिनी के सामने आया तो कुछ दिन तो उसने सुनेल से बात भी ना करी......पर सुनेल के बार बार इसरार करने पे कि उसकी जिंदगी में अब मिनी के अलावा कोई और नही आएगा...मिनी ने उसपे यकीन कर लिया....

वक़्त इतनी तेज़ी से बीता कि दोनो को पता ही ना चला........और सुनेल के जाने का वक़्त आ गया ......लेकिन उसकी जिंदगी में जो तुफ्फान आनेवाला था...उससे वो अंजान था.....उसके बिखरने के दिन नज़दीक आ गये थे...एक सैलाब उसकी जिंदगी में आने वाला था ...जो उसके वजूद को ख़तम कर डालेगा.......

मिनी को जल्दी वापस आने का कह और रोज फोन पे बात करने का वादा दे कर ....सुनेल वापस लंडन चला गया...दिल में हज़ारों अरमान और हज़ारों उमंगे लिए हुए...उस वक़्त के इंतेज़ार में कि वो इंडिया वापस जाएगा और मिनी से शादी कर ले गा.

लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था........


अचानक घर वापस पहुँच वो अपने मोम डॅड को सर्प्राइज़ देना चाहता था...इसीलिए उसने अपनी फ्लाइट वगेरह और आने की दिन के बारे में कुछ नही बताया था....

एरपोर्ट से जब बाहर निकला तो लंडन की फ़िज़ाओं में भी उसे मिनी की महक महसूस हुई ....होती भी क्यूँ ना ...वो तो उसकी सांसो में बस चुकी थी ...दिल की हर धड़कन के साथ उसे अपने पास होने का अहसास दिलाती थी .....

उसने एक ओपन टॅक्सी ली और गुनगुनाते हुए अपने घर की तरफ निकल पड़ा....

शादी के लिए रज़ामंद कर ली,
रज़ामंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
शादी के लिए रज़ामंद कर ली,
रज़ामंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
हो उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
शादी के लिए रज़ामंद कर ली,
रज़ामंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली

बन के भँवरा अब बाग मे,
बन के भँवरा अब बाग मे
कलियो के पिछे नही भगुगा मैं
शाम सवेरे बस आज से,
गलियो मे अब नही झकुँगा मैं
नैनो की खिड़की, नैनो की खिड़की
मैने बाद कर ली, हा मैने बाद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
हो उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली

मेरी नज़रों ने हुश्न की,
मेरी नज़रों ने हुश्न की,
नाज़ुक बहारो को छु लिया
नाज़ है मुझको तक़दीर पर,
मैने सितारो को छु लिया
मैने तो क़िस्मत, मैने तो क़िस्मत
बुलंद कर ली, बुलंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
हो उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
आहा, शादी के लिए रज़ामंद कर ली,
रज़ामंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली.

अपने ख़यालों में गुनगुनाते हुए सुनेल जब घर पहुँचा तो सारा सर्प्राइज़ धरा रह गया...घर में कोई नही था........उसने घड़ी में वक़्त देखा ....अभी इंडिया में शाम थी...मिनी को फोन कर अपने ठीक तक पहुँचने की खबर दी और इंतेज़ार करने लगा ....

फिर सोचा कि घर के बाहर कितनी देर खड़ा रहेगा...तो अपने दोस्त के घर चला गया.........बहुत वक़्त बाद दोनो मिले थे तो मस्टिगिरी चालू हो गयी और दोनो वहीं एक बार में चले गये....

सुकेश ....यार तुझे रीना बहुत मिस कर रही थी...रोज ही पूछती थी तेरे बारे में

सुनेल... वो...अवेलबल फॉर ऑल टाइप्स ...लेट हर गो टू हेल

सुकेश...कुछ बदल के आया है तू इंडिया से ...लगता है वहाँ भी पटा ली...

सुनेल...पटाइ नही यार पट गया...फ्लॅट हो गया..तबाह हो गया..जिंदगी का मतलब ही बदल गया

सुकेश सीटी बजाने लगा .......यानी हमारा कॅसनोवा हुस्न का गुलाम हो गया

सुनेल..अब जब तू अपनी भाभी से मिलेगा तब समझेगा ..कॉन सी कयामत मुझ पे गिरी...सच में बहुत ही अच्छी है...बिल्कुल वैसी जैसी मैं ढूंढता रहता था.

सुकेश.....भाभी!!!!! शादी कर के आया है कययय्याआआ

सुनेल...नही यार ...इस बार मोम डॅड को लेकर जाउन्गा ...बस कोर्स पूरा हो जाए अब दिन ही कितने बचे हैं....

सुकेश.....ओह हो तो बात यहाँ तक पहुँच चुकी है...अपना कॅसनोवा वाकई में गया काम से...क्या होगा लंडन की फुलझड़ियों का....कितनो के दिल तबाह हो जाएँगे

सुनेल...कम ऑन यू नो इट वाज़ नो स्ट्रिंग्स अटॅच्ड वित एनी वन...

यूँ ही बातें करते बियर पीते 4-5 घंटे कैसे निकले पता ही ना चला और फिर सुनेल ने घर का रुख़ किया....

सुनेल जब घर पहुँचा तो उसकी माँ ने लपक के उसे गले लगा लिया और गिला किया के बताया क्यूँ नही वो लेने आती एरपोर्ट पे...पर सुनेल को घर जी हवा में कुछ बदला सा लग रहा था...ये बदलाव क्या था ये वो पहचान नही पा रहा था....सुनेल अपने डॅड से मिल अपने रूम में चला गया...पर कुछ ऐसा था जो उसे जाना पहचाना नही लग रहा था..क्या था वो...ऐसा क्या है जो मैं पहचान नही पा रहा हूँ..ये घर मुझे वो घर क्यूँ नही लग रहा जहाँ मैने अपना सारा जीवन जिया है.....फिर अपनी ही सोच पे हंस पड़ा ....उफ्फ मिनी ..ये क्या कर डाला तुमने ...अपना घर भी अब अपना नही लग रहा तुम्हारे बिना...

अपना समान रख वो फ्रेश होने चला गया...बाथरूम में शवर के नीचे जब खड़ा हुआ तो एक एक पल जबसे वो आया उसकी नज़रों के सामने घूमने लगा.....वो बात जो उसे खल रही थी...वो समझ में आ गयी थी....वो था एक तनाव ...एक तनाव जो उसने अपने मोम डॅड के बीच महसूस किया था....आज तक कभी ऐसा नही हुआ था कि उसने अपने मोम डॅड के बीच कोई तनाव देखा हो...पर आज वाकई में एक तनाव था दोनो के बीच....और इसका कारण क्या हो सकता था...ये सोच में पड़ गया वो....वो सबसे ज़्यादा अपनी मोम से प्यार करता था और कभी उसे किसी तनाव में नही देख सकता था....

नहाने के बाद वो कपड़े बदल अपने बिस्तर पे बैठ गया ...और वजह सोचने लगा...क्या हुआ हो सकता है दोनो के बीच...उसे कुछ समझ नही आ रहा था.....

सुनेल की मोम और उसके डॅड के बीच पीछे काफ़ी दिनो से एक झगड़ा चल रहा था ....वो था ये कि सुनेल की माँ जो कि समर की बहन थी ...सुनेल को उसकी जिंदगी का सच बताना चाहती थी...पर उसके डॅड बिल्कुल भी नही मान रहे थे...असल में सारी जिंदगी जब से समर की बहन ने सुमन के जुड़वा बेटे को चोरी से लिया था..उसके दिल पे एक बोझ था..एक माँ से झूठ बोल उसके बच्चे को उससे जुदा करने का...हर पल वो खुद से लड़ती थी..अब उसकी नज़र में सुनेल बड़ा हो चुका था और सब समझ सकता था..भावुकता में आ कर इंसान से ग़लती हो जाती है..पर ये तो पाप था....वो चाहती थी कि सुनेल को उसके सच का पता चल जाए और वो अपनी असली माँ सुमन से मिल सके.....

पर शायद ये उसके नसीब में ना था कि वो खुद अपने और अपने भाई के कुकर्म अपने मुँह से सुनेल के सामने कबूल करे....होनी ने कुछ और ही सोच रखा था....
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07-20-2019, 09:31 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
अगले दिन जब सुनेल उठा तो घर में उसने तेज तेज आवाज़ें सुनी ...कुछ ऐसा ही उसे पता चला कि किसी को कुछ बताना है......रोज उसकी मोम उसे उठाने आती थी जब वो घर होता था.....अगले दिन ही उसे हॉस्टिल जाना था...पर आज ऐसा नही हुआ था...जब तक वो अपने कमरे से बाहर निकला उसने सिर्फ़ इतना सुना कि वो घर से जा रही है शाम को आएगी तब तक उसके डॅड को अपना माइंड मेक अप करना था.....

सुनेल नीचे उतरा ...मोम जा चुकी थी.......डॅड हॉल में बैठे गुस्से में उफ्फन रहे थे.......

सुनेल....डॅड मोम सुबह कहाँ चली गयी ...आज तो मॉर्निंग टी भी नही दी....

डॅड...पागल हो गयी है वो....दिमाग़ ठिकाने आएगा तो आजाएगी वापस शाम तक

सुनेल....ऐसा लगा जैसे किसीने दिल में छुर्रि घोंप दी हो.........डॅड!!!!!

डॅड....सॉरी बेटा वो बस तेरी मोम का दिमाग़ आज कल हिल गया है...तू बैठ मैं तेरा ब्रेकफास्ट........अभी बात पूरी भी नही हुई थी कि डॅड का मोबाइल बजने लगा

सुनेल की मोम का फेटल आक्सिडेंट हो गया था............

दोनो बाप बेटे बताए गये हॉस्पिटल भागे पर देर हो चुकी थी......शी वाज़ डिक्लेर्ड डेड....

अपनी बीवी को खोने के बाद...अब कोई इच्छा बाकी नही रह गयी थी सुनेल के डॅड के मन में....और अंतिम संस्कार होने के बाद........सुनेल के डॅड ने एक डाइयरी थमा थी जो सुनेल की माँ लिखा करती थी......उसमें एक फोटो थी ....जो सुनील-सुमन--समर की थी......


जैसे जैसे सुनेल ने वो डाइयरी पड़ी.......वैसे वैसे उसका खून खोलता गया........मेरी माँ कोई और है......मेरे बाप ने मेरी माँ को धोखा दिया - वो स्वपिंग की योजना.......काश इस वक़्त समर मेरे सामने हो और मैं उसकी गर्दन दबा दूं........माँ......कोई बेटा.....चाहे वो पास हो या दूर.....अपनी असल माँ की इज़्ज़त ...से बहुत प्यार करता है...........वो फोटो.......जिसमे समर सुमन और छोटा सुनील थे ...एक वही पहचान मिली थी सुनेल को अपनी माँ को पहचानने के लिए....

माँ...माँ....माँ ...दिल चीत्कार कर रहा था...अपनी माँ को बुला रहा था...उस से मिलने को तड़प रहा था......माँ ....मैं आ रहा हूँ......आ रहा हूँ माँ

और सुनेल भूल गया...उसका कोर्स..उसका सब कुछ..उसका करियर..बस उसे अपनी माँ से मिलना था....उसे अपने उस बाप से बदला लेना था...जिसने उसे उसकी माँ से जुदा किया था....नफ़रत हो गयी थी उसे अपने अब के बाप से...जिसने उसे पाला था...इसे पालना नही कहते..इसे अपनी भूख मिटाना कहते हैं...वो भूख जो वो खुद बाप बन कर नही मिटा सकता था...तो किसी और के बच्चे को चुरा लिया...वो बाप कैसा था...जो अपने ही बच्चे को चुरा कर अपनी बहन को दे गया...और सालों साल उस बच्चे को उसकी माँ से दूर रखा....

सुनेल ने अपना समान पॅक किया...अपना बॅंक बॅलेन्स चेक किया...12000 पौंड थे उसमे जो उसने अपनी पॉकेट मनी और प्राइज़स मिला के बचा रखे थे .....चल पड़ा वो मुंबई..समर से मिलने...क्यूंकी समर ही रास्ता था..उसकी माँ तक उसे पहुँचाने का.....

और एक दिन वो समर के घर पहुँचा...ये वही दिन था...जब सुनील..रूबी को लेने आया था.....

जिस वक़्त सुनेल समर के घर पहुँचा...दरवाजा थोड़ा खुला था और अंदर उसने हूबहू अपने आप को देखा जो उसके उस तथाकथित बाप की ठुकाई कर रहा था....दिल तो किया कि अंदर घुस्से और अपने भाई के साथ मिल समर की वो हालत करे ...जो कभी किसी की ना हुई हो.......पर बड़ी मुश्किल से उसने खुद को रोका....और सुनता रहा ...किस तरहा उसका भाई दहाड़ रहा था.....समर को उसकी काली कर्तुते बता रहा था........

सागर ...जिसे सुनील अपना पिता बोल रहा था...वो अब इस दुनिया में नही रहा था...कैसा होगा वो...जिसके साए तले सुनील पनपा......भाई ...देख इसे किस्मत कहते हैं...हम दोनो में से मैं ही अभागा निकला जिसे पालने से उठा कही और दे दिया गया...कितनी अच्छी किस्मत है तेरी......और मैं शायद पिछले जनम में किए गुनाह की सज़ा भुगत रहा था......आँसू टपक रहे थे....सुनेल की आँखों से...रो रहा था दिल..तड़प रहा था..उसका वजूद...हिम्मत नही हो रही थी अंदर घुस अपने भाई के सीने से लगने की....

सुनील जब रूबी और सवी को ले बाहर निकला तो सुनेल छुप गया........और उसका पीछा करने लगा......आधे रास्ते पता नही उसे क्या सूझा ...वो वापस समर के घर की तरफ पलट पड़ा.......तभी रमण घर घुसा और समर का प्रकोप उसपे टूट पड़ा...

सुनेल समर का पीछा करते हुए बार मे पहुँचा.....

कुछ देर पीने के बाद समर पास बैठे किसी इंसान से बात करने लगा....और जो सुनेल ने सुना..उसके रोंगटे खड़े हो गये.....

समर ने सुनील को मारने की सुपारी दे डाली थी......सुनील की जान ख़तरे में थी......समर तो चला गया काफ़ी पीने के बाद...लेकिन सुनेल उस इंसान के पीछे लग गया जो शायद एरपोर्ट जा रहा था...उसके पास सुनील की फोटो थी.....

सुनेल ने उस आदमी का ध्यान अपने उपर लगा दिया...और वो आदमी ये समझा कि वो सुनील है और ...सुनेल के पीछे लग गया....

सुनेल सीधा रेलवे स्टेशन गया और एक ट्रेन में चढ़ गया....

इस तरहा सुनेल ने सुनील की मौत को अपने पीछे लगा लिया.....

एक लुक्का छुपि का खेल शुरू हो गया........सुनेल उस इंसान की नज़रों के सामने जाता और गायब हो जाता कुछ दिन एक शहर कुछ दिन दूसरे शहर ......यू7न भागते हुए वो उस आदमी को एक दिन कोचीन तक ले गया.....जहाँ वो और आगे ना भाग पाया और उस आदमी के ज़रिए एक जान लेवा आक्सिडेंट का शिकार हो गया....

वो आदमी ये समझा कि उसने सुनील को मार दिया और वहाँ से गायब हो गया...

सुनेल की आँख जब खुली तो वो हॉस्पिटल में था और सब भूल चुका था..उसकी याददाश्त जा चुकी थी.....

'म्म्म्म.मममाआआआआआआआआआआअ' अमर ज़ोर से नींद में चिल्लाता है और हांफता हुआ उठ जाता है....

उसकी चीख से सवी की नींद खुल जाती है.....

सवी भाग के अमर के पास आती है जो इस वक़्त बहुत डरा हुआ था...जैसे उसने कोई भयानक सपना देखा...पूरा जिस्म पसीने से तरबतर था......

'क्या हुआ बेटा...कोई सपना देखा क्या...कुछ याद आया क्या तुम्हें.....तुम्हारी माँ.....कहाँ है तुम्हारी माँ.......बोलो बेटा....'

'पता नही...कुछ पता नही....' और वो फुट फुट के रोने लगा....

सवी ने सोचा था कि अमर को एक नौकरानी की देख भाल में छोड़ जाएगी...पर उसकी आज की हालत देख...ये अब नामुमकिन था...वो अमर को अकेले नही छोड़ सकती थी...

24 घंटे हर पल एक तड़प रहती थी अमर के दिल में...वो कुछ याद करने की कोशिश करता था...पर उसे कुछ याद नही आता था...कभी कभी सपने में एक हँसीन लड़की उसे आवाज़ लगाती हुई दिखती थी...पर उसका चेहरा कभी उसे दिखाई नही देता था...कभी वो खुद को देखता था...पर पहचान नही पाता था.....

जिंदगी एक जंग बन के रह गयी थी...जो हर पल एक नया खेल खेल रही थी.....

*****

वहाँ मालदीव में सुनील/सुमन और सोनल....रूबी के पास पहुँच गये थे......

मिनी के सामने जब सुनील आया...तड़प के रह गयी वो......ये मुझे पहचान क्यूँ नही रहा...आख़िर क्या राज़ है इसके पीछे.......सुनील की बेरूख़ी उसे पल पल मारती रहती ...और वो एक आस में जी रही थी...आज नही कल वक़्त उस पर मेहरबान होगा ही...यही वजह थी कि रमण के मरने के बाद वो यहीं रुकी रही .......

मिनी की नज़रों में हमेशा एक सवाल होता था जब भी वो सुनील को देखती थी...पर सुनील उन नज़रों का कुछ और मतलब ही निकालता था और मिनी से दूरी बना के रखता था...

तीनो जब रूबी के कमरे में पहुँचे तो मिनी ने सब के लिए कॉफी मँगवाई...

कॉफी पीते पीते....

सुनील......रूबी ये ....

मिनी ...हां सुनील जो सुना ठीक सुना..मैने बहुत बार रूबी से उसके इस फ़ैसले के बारे में पूछा..उसका हमेशा एक ही जवाब रहा ..कि वो विमल से शादी करने को तयार है...

सुमन....रूबी तुम छोटी बच्ची तो हो नही ..पर फिर भी मैं जानना चाहती हूँ कि अचानक तुमने ये फ़ैसला कैसे ले लिया.....

रूबी...बड़ी भाभी जिंदगी के कुछ फ़ैसले लेने ही पड़ जाते हैं चाहे दिल उन्हें माने या ना माने.....

तीनो रूबी का चेहरा देखने लगे .....सुमन समझ गयी ...रूबी सबके सामने खुल के बात नही करेगी...

सुमन खड़ी हो गयी...रूबी चल मेरे साथ........और सुमन रूबी को एक रेस्टोरेंट में ले गयी और दोनो कोने की एक टेबल पे जा बैठी....

सुमन....अब बता सच बोलना ..झूठ नही.....

रूबी ....और क्या करती भाभी...सुनील से दूर जाने का यही रास्ता दिखा...वो मुझे कभी नही अपनाएगा और साथ रह कर मैं उसे कभी भूल नही पाउन्गि ....परसो रात ....मिनी ने मेरी वो इच्छाए जगा दी अंजाने में जिन्हें बड़ी मुश्किल से दबाया था...अब घर की इज़्ज़त और अपने जिस्म की प्यास को पूरा कर ने के लिए मुझे यही ठीक लगा.......फिर विजय अंकल में मुझे सागर पापा दिखते हैं...विमल राजेश जीजू का खांस दोस्त है.....कवि सारी जिंदगी मेरे पास होगी...और क्या चाहिए...रही प्यार की बात ..तो हर किसी के नसीब में उसका प्यार नही होता...फिर भी जीना तो पड़ता ही है...शायद वक़्त मुझे विमल से प्यार करना सिखा दे....

सुमन...मुँह खोले रूबी की बात सुनती रही....उसके दिल में आज भी सुनील बसा हुआ था.......और प्यार वो भावना होती है जिसे कोई कुचल नही सकता...कोई दबा नही सकता......एक माँ और एक प्रेमिका और एक बीवी होने के नाते वो रूबी का दर्द उसके प्यार को समझ तो सकती थी...पर उसे उसका प्यार नही दिला सकती थी ....शायद रूबी का ये फ़ैसला हालत को देखते हुए बिल्कुल ठीक था...

सुमन ने एक ठंडी सांस छोड़ी और हालत को मंजूर कर लिया....शायद रूबी के लिए यही सही था...विजय का हाथ उसके सर पे हमेशा रहेगा...वो रूबी की खुशियों का हमेशा ध्यान रखेगा....दिल के किसी कोने में उसे एक तसल्ली मिली कि एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी सुनील और उसके सर से उतर जाएगी.......

रूबी के माथे को चूम...बेटी अपना ध्यान रखना...हम हमेशा तुम्हारे साथ ही हैं और रहेंगे.....तुम्हारे सागर पापा का घर तुम्हारा मायका है और रहेगा...चलो अब चलते हैं......

सुमन ने रूबी को कमरे में छोड़ा और सुनील और सोनल को चलने का इशारा किया...सोनल रूबी से गले मिली उसे प्यार से चूमा और फिर मिलने का कह कर सभी चल पड़े ...अपने होटेल की तरफ.

सुनील को ये जान कर दुख होता और उसे तकलीफ़ होती के रूबी ने शादी का फ़ैसला उस से दूर जाने के लिए लिया था …क्यूंकी वो सुनील को अपने मन से नही निकल पा रही थी…इसीलिए सुमन ने ये बात छुपा ली और बाकी सब कुछ सुनील और सोनल को बता दिया…

सोनल…वाउ कितना अच्छा है ये हॉलिडे हमारा…इनके सर से एक और ज़िम्मेदारी का बोझ उतर गया….
सुमन…हां सच अब चैन से छुट्टियाँ बिताएँगे …जब तक रूबी की शादी होती है ..और मैं तो सोच रही हूँ..कुछ दिन और यहाँ बिता के जाएँगे…
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07-20-2019, 09:31 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सोनल अपने कपड़े उतारने लगी और सूमी को भी उतारने का इशारा किया …उसकी बात मानते हुए सूमी ने भी कपड़े उतार डाले और सुनील दोनो को देखते हुए सोफे पे बैठ गया और अपने लिए वाइन निकाल दो-तीन घूँट मार आरामसे सोफे पे अढ़लेटा हो गया…

सोनल…हम पूल पे जा रहे हैं ….आप भी आओ ना ….

इतना कह सोनल सूमी को लेकर पूल में घुस्स गयी …दोनो कुछ देर तो तैरती रही एक दूसरे पे पानी फेंकती रही …फिर सोनल ने सूमी को अपने बाँहों में जाकड़ लिया और अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए...

एक पल के लिए सोनल ने फिर होंठ हटाए और चिल्लाई...आओ ना अंदर क्या कर रहे हो....और फिर सूमी ने होंठ चूसने शुरू कर दिए.....सूमी भी उसका साथ देने लगी

दोनो एक दूसरे के होंठ चूस्ते हुए अपने निपल एक दूसरे से रगड़ने लगी और दोनो के निपल कड़े होने लगे...दोनो ने सख्ती से एक दूसरे को भींच लिया और पानी के अंदर दोनो के जिस्म टकराने लगे...दोनो अपनी चूत एक दूसरे से रगड़ती फिर अलग करती और फिर रगड़ती..........

दोनो के जिस्म में आग बढ़ती जा रही थी जिसे पूल का ठंडा पानी भुजा नही सकता था उल्टा ये पानी तो और भी आग को भड़का रहा था.....

सूमी ने सोनल के उरोज़ मसल्ने शुरू कर दिए और सोनल ने बदले में सूमी की ज़ुबान को ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया......

इतने में सुनील बाहर आ गया...उसने सिर्फ़ अंडरवेर पहना हुआ था....

सुनील भी पूल में उतर गया और दोनो के करीब जा उन्हें अपनी बाँहों में कस लिया......

सोनल ने सूमी के होंठ छोड़े ताकि सुनील उन्हें चूम सके....सुनील ने पहले सोनल को किस किया और फिर सूमी के होंठों को चबाने और चूसने लग गया...

सोनल...बीवियाँ यहाँ नगी हैं और मिया जी अपना लंड छुपा के आए हैं...
उसने झुक के सुनील का अंडरवेर पूल में ही उतार डाला जिसे सुनील ने अपने पैरों से अलग कर दिया.......

सोनल सुनील की पीठ से चिपक गयी और उसकी पीठ पे अपने उरोज़ रगड़ने लगी ...उसके निपल इतने कड़े हो चुके थे कि सुनील को पीठ में चुभ रहे थे...

सोनल ने अपना हाथ धीरे धीरे सुनील के जिस्म को सहलाते हुए उसके लंड तक ले गयी और उसे सहलाने लगी .......अपना दूसरा हाथ आगे ले जा कर वो सूमी के उरोज़ को मसल्ने लगी....

सुनील का लंड खड़ा होने लगा और सोनल उसे सूमी की चूत से रगड़ने लगी....

तीनो काफ़ी गरम हो चुके थे......सूमी ने पिल्स खानी बंद कर दी थी...ताकि वो जल्दी अब बच्चे की माँ बन सके.......और इस बच्चे की कामना तीनो ही कर रहे थे.......

पूल में काफ़ी देर एक दूसरे से खेलते हुए ये तीनो बाहर निकल आए और सुनील ने वहीं एक रेस्टिंग बेड पे सूमी को लिटाया और उसके उपर चढ़ गया........

खुले में तारों की छाँव के नीचे चुदाई का अपना ही मज़ा होता है और ये तीनो यही मज़ा चख रहे थे जो वापस देल्ही जा कर इन्हें नही मिलना था....

सुनील सुर सोनल दोनो ने सूमी के उरोज़ पे धावा बोल दिया और दोनो ही उसका एक एक निपल चूसने लगे....दोनो के चूसने की शिद्दत इतनी तेज थी कि जैसे आज ही सूमी का दूध निकाल के मानेंगे...

सूमी ने सुनील के लंड को अपनी चूत से सेट किया और और कमर उछाल अंदर लेने की कोशिश करने लगी...

सुनील ने सूमी की इच्छा पूरी करी और एक तेज शॉट में ही पूरा लंड उसकी गीली चूत में घुसा दिया.......

अहह मज़ा आ गया.....कम फक मी हार्ड....ज़ोर से चोदो मुझे ....सूमी लंड अंदर घुसते ही बड़बड़ाने और सिसकने लगी

तीनो ....एक दूसरे में समाने में लगे हुए थे ...और ये नही जानते थे कि कुछ ऐसा होनेवाला है ...जो इन्हें पहले तो एक झटका देगा...फिर कुछ बोझ सुनील के सर से उतर जाएगा....

हर हादसा पहले एक तुफ्फान ही लगता है...और ये तुफ्फान इनके बहुत करीब पहुँचने वाला था........

सुनील सटासट सूमी को चोदने में लगा रहा और कुछ देर में ही अपना वीर्य उसकी चूत में डाल उसके उपर गिर पड़ा और दोनो हान्फते रहे......

उसके बाद सोनल ने सुनील को अपने लिए तयार किया.......लेकिन जब सुनील झड़नेवाला था तो सोनल ने उसे सूमी की चूत में ही झड़ने को कहा...

रात भर तीनो ये खेल खेलते रहे...और हर बार सुनील ...सूमी की चूत में ही झाड़ता....

सुबह तक तीनो बुरी तरहा थक चुके थे ....और इनकी आँख लग गयी....तीनो बाहर पूल के पास ही सो गये थे....

सूरज ने जब अपनी किर्णो का ताप इन्पे छोड़ना शुरू किया...तब जाके इनकी आँख खुली और तीनो अंदर जा कर बिस्तर पे सो गये......

दो घंटे बाद इनकी नींद खुली...फिर तीनो एक साथ नहाए और फ्रेश होने के बाद अपने आज के प्रोग्राम की तयारि करने लगे......

आज के लिए सुनील ने एक बोट का इंतज़ाम कर रखा था जो इन्हें डोर किसी आइलॅंड पे ले जानेवाली थी.....जहाँ आबादी ना के बराबर थी और बीच खाली ही रहते थे......पानी वहाँ का बहुत सॉफ थे और समुद्र की सतह से ही नीचे रंगबिरंगे कॉरल दिखते थे...

नाश्ते करने के बाद तीनो उस आइलॅंड की तरफ निकल पड़े.......आज सूमी और सोनल बहुत खुश नज़र आ रही थी....बहुत दिनो बाद उन्हें सुनील के साथ खुल के मस्ती करने का वक़्त और मौका मिला था और ये दोनो मिलकर इस टूर को एक यादगार टूर बनाना चाहती थी ....और सुनील दोनो को खुश रखने मे कोई कमी नही छोड़ रहा था.....दोपहर तक ये तीनो उस आइलॅंड पे पहुँच गये......सुनील ने बोट के चालक को कुछ समान लेने भेज दिया ताकि उन्हें पूरी तन्हाई मिल सके ....और फिर सोनल और सुमन ने वहाँ एक चद्दर बिछा कर पिक्कनिक लंच का इंतेज़ाम किया जो ये लोग साथ लाए हुए थे....

इधर उधर की बातें करते हुए तीनो ने लंच किया और फिर पानी में घुस खेलने लगे.....

आइलॅंड पे मस्ती मारने के बाद तीनो वापस होटेल आ गये….सूमी और सोनल बहुत चहक रही थी बिल्कुल कॉलेज की लड़कियों की तरहा….और सुनील इन्हें खुश होता देख खुश हो रहा था……
दो दिन बस मस्ती और चुदाई में बीते और वो दिन आ गया…..जब शाम को मिनी की सगाई होनी थी….

इस बीच विजय और आरती मिनी और मिनी को ले शॉपिंग करते रहे …..करण अपनी फॅमिली के साथ पहुँच चुका था ….जिसमे करण उसकी वाइफ उसकी बेटी पलक और बेटा विमल थे…जहाँ एक तरफ विमल खुश था …वहीं पलक बहुत उदास थी…..उसकी नज़रें किसी को खोज रही थी…..पर अभी तक वो सामने नही आया था….आता भी कैसे वो…तो….

जिस दिन करण पहुँचा था….उस दिन शाम को…….विजय और बाकी सब करण की फॅमिली के साथ ही डिन्नर किए…डिन्नर के डॉरॅन विमल की नज़रें मिनी से हट ही नही रही थी……मिनी को यहाँ देख उसे कुछ कुछ आभास हो गया था…कि यूँ अचानक

विजय ने सबको मालदीव क्यू बुलाया…..उसे तो अभी ये भी पता नही था कि राजेश और कविता एक हो चुके हैं और इस वक़्त अपना हनिमून मना रहे हैं….
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07-20-2019, 09:31 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
डिन्नर ख़तम होने के बाद …..विजय और आरती ने करण आदि को ले थोड़ा बाहर जाने का प्रोग्राम बनाया कि उन्हें कुछ बात करनी है और विमल और मिनी को थोड़ी देर के लिए एकांत दे दिया….

जाने से पहले विजय मिनी के कान में बोल गया…कुछ बेवकूफी मत करना….मिनी बस विजय को देखती रही….

सबके जाने के बाद….

कुछ पल तो एक दम शांति ही रही की क्या बात करें और कॉन बात शुरू करे….मिनी बस सर झुकाए बैठी टेबल पे पड़े चम्मच को उंगलियों में घुमा रही थी …जो बता रहा था कि वो कितनी घबराई हुई है…उसने नही सोचा था कि विजय अचानक दोनो को यूँ अकेले छोड़ देगा….

विमल तो बस मिनी को निहारता जा रहा था……और खुद को खुशकिस्मत समझ रहा था कि मिनी जैसी लड़की उसकी जीवनसाथी बनेगी……


विमल…कहते हैं इंतेज़ार का फल हमेशा मीठा होता है

मिनी उसकी तरफ देखने लगी…उसकी आँखों में कुछ सवाल थे….

मिनी …पर अगर वो फल किसी ने पहले चख लिया हो तो….

विमल….जानती हो..अमरूद पे अगर तोता अपनी चोंच मार दे तो इस बात की गॅरेंटी हो जाती है कि वो मीठा ही निकलेगा

मिनी….शायद फल और इंसान में यही फरक होता है..फल को लोग मीठा समझने लगते हैं और इंसान..खास कर लड़की….उसे….

विमल उसे आगे नही बोलने देता और उसकी बात काट देता है…

विमल…..लड़की वो फूल होती है जो अपनी सुगंध से जीवन में महक डाल देती है…अब जो सुगंधित हो..उसपे भंवरे तो मंडराएँगे ही…..और मुझे नही पूछनी तुमसे बीती बातें….आज और इस पल से …..तुम्हारे जीवन को मधु से भरना मेरी ज़िम्मेदारी है…..अगर मुझे इस काबिल समझो तो…

मिनी….एक नयी शुरुआत का आधार विश्वास होता है…और विश्वास तभी जनम लेता है…जब अतीत की कड़वाहट से गुज़रता है…..आप जानते ही क्या हो मेरे बारे में….

विमल…..क्या फूल को पता होता है उसमे कितनी और कैसी सुगंध है …..नही..उसी तरहा एक लड़की को भी उसके खुद के बारे में नही पता होता….अगर कोई कहे वो खुद को अच्छी तरहा जानती है…तो ये महज एक घमंड होता है..जो जब टूटता है तो वो लड़की बिखर जाती है…..उसी तरह एक लड़का भी खुद को पहचान पाता…वो अपने आप को कुछ और समझता है…पर जिंदगी का तराजू उसे उसकी कोई और ही पहचान बताता है….तुम कविता भाभी की बहन हो ….सुनील जैसे भाई की बहन हो…और क्या गुण चाहिए …..

मिनी की आँखों से आँसू टपक पड़े…आप कुछ समझ ही नही रहे

विमल...मैं सब समझता हूँ...तुम यही कहना चाहती हो ना कि पहले तुम्हारी जिंदगी में कोई और था......फूल के साथ काँटे भी तो होते हैं.....तुम्हारी जिंदगी से उन कांटो को बाहर निकालना अब मेरा फ़र्ज़ है.....बस अब कभी ये मत सोचना कि क्या हुआ था...सिर्फ़ इतना सोचना ...जिंदगी बहुत रंगीन ...उसमे बहुत से रंग हैं...और हम दोनो को मिलकर उन रंगों को चुनना है.....अपने घर को उन रंगों से भरना है ...जो हमारे जीवन में कोई कमी ना छोड़ें......

विमल मिनी के हाथ थाम लेता है और अपनी हाथों से दबा उसे यकीन दिलाता है...कि वो उसे हमेशा खुश रखे गा.....

बस तभी बाकी लोग भी आ जाते हैं.......










एक नये ख्वाब को लिए रूबी मिनी के साथ अपने कमरे में चली गयी......

इधर रूबी अपने कमरे में जाती है उधर उसी वक़्त सवी...अमर के साथ उसी होटेल में चेक इन करती है....

सवी ने दो कमरे लिए ...एक कमरा बीच के पास अमर के लिए और एक उस से थोड़ा दूर अपने लिए...

अमर से उसने वादा लिया था कि वो कमरे से बाहर नही जाएगा तीन दिन.....सिवाए बीच पे जाने के वो भी तब जब बीच खाली हो....सवी उस से रोज मिलेगी ...

अमर हामी भर देता है और तीन दिन के लिए खुद को कमरे में क़ैद रखने को मान लेता है....वो कोई सवाल नही करता कि सवी ऐसा क्यूँ कर रही है ...लेकिन सवी उसे बता देती है...कि उसकी बेटी की शादी है और वो नही चाहती कि उसके साथ अमर को देख लोग दस सवाल करें......इतना कह वो अमर के रूम से निकल सीधा रूबी के कमरे की तरफ जाती है.....

रूबी जब दरवाजा खोलती है तो सामने उसकी माँ खड़ी थी ........वो रोती हुई सवी से लिपट जाती है...

कहते हैं कि जब दिल से प्यार किया गया हो...जब रूह ने रूह को कबूल कर लिया हो ....और बीच में लंबी जुदाई आ गयी हो......तो रूह तक रूह की खुश्बू उसके पास होने का अहसास हो ही जाता है....

ऐसा ही कुछ हुआ...पर एक जगह नही दो जगह....

सवी और अमर जब होटेल में घुसे थे ...तो कमरे में बैठे विजय को बेचैनी होने लगी थी और कुछ यही हाल मिनी का हुआ था .....रूबी तो सवी से लिपटी हुई थी लेकिन सवी के ज़रिए मिनी को सुनेल की खुश्बू आ रही थी...वो हैरानी से सवी को देख रही थी....

आरती से भी विजय की बेचैनी नही छुपी थी......

सवी के जाने के बाद अमर फ्रेश होने बाथरूम चला गया और उसने एक टी-शर्ट और बर्म्यूडा पहन लिया .....खाली कमरा उसे खाने को दौड़ रहा था...खिड़की जो पूरे दरवाजे जितनी बड़ी थी वहाँ से चमकता समुद्र उसे रेगिस्तान जैसे वीरानेपन की याद दिला रहा था...उसके कदम कमरे में बने बार काउंटर की तरफ बढ़ गये.....कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला था जिसपे उसका ध्यान नही गया था...वो अपने लिए ड्रिंक बना पीने लग गया और खिड़की खोल बाहर से आती ठंडी हवा को महसूस करते हुए समुद्र को देखने लगा..जैसे उस से कुछ सवाल कर रहा हो...

अपने आप उसके मुँह से कुछ निकला

ओह हो ओह हो ओह हो
आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे
दर्द में डूबे गीत देदे गम का सिसकता साज़ न दे
ओह हो ओह हो ओह हो

ये आवाज़ होटेल में गूँजती हुई मिनी के कानो तक पहुँच गयी ....

सवी इस आवाज़ को पहचान गयी थी ...पर उसने कोई रिक्षन नही दिखाया...लेकिन एक और शक्स इस आवाज़ को पहचान गया था...मिनी....

मिनी के मुँह से निकल पड़ा सुनेल ...जो एक बॉम्ब की तरह सवी के कानो में फटा

और मिनी के कदम उस आवाज़ की ओर खिचते चले गये.....एक ताक़त उसे खींच रही थी ...उसे बता रही थी...उसका सुनेल यहीं आस पास है.....वो उस आवाज़ का पीछा करते हुए अमर के कमरे तक जा पहुँची...
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07-20-2019, 09:31 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
अब रूबी को छोड़ सवी मिनी के पीछे नही जा सकती थी.......नही चाहती थी कि रूबी को अमर के अस्तित्व का पता चले.......किसी भी तरहा मिनी को वो चुप करा लेगी...

मिनी कमरे के अंदर चली गयी ......अमर खिड़की पे खड़े बाहर समुद्र को देखता हुआ पी रहा था अपने दर्द को ब्यान कर रहा था....

मिनी चलते हुए अमर के बिल्कुल पीछे पहुँच ....सुनेल

ये आवाज़ सुन अमर पलटा...सामने एक लड़की खड़ी थी....उसकी खाली नज़रें उस लड़की पे अटक गयी ....दिमाग़ में उस लड़की की फिगर घूमने लगी .......जिसका चेहरा वो नही देख पाता था...आज वो चेहरा उसके सामने था...पर फिर भी वो उसे पहचान नही पा रहा था......

मिनी....सुनेल..कहाँ चले गये थे तुम...लपक के वो अमर से लिपट गयी ....और फुट फुट के रोने लगी...

अमर जिसे कुछ याद नही था...वो एक तो मिनी को कुछ पहचाना सा जान रहा था...और उसके इस तरहा रोने और लिपटने से वो घबरा सा गया था....

मिनी एक दम उस से अलग हुई....एक ज़ोर का झटका लगा उसे ....सुनील/सुनेल...कहीं जुड़वा...ओह इसलिए वो...क्या सुमन को सुनेल के बारे में कुछ मालूम नही ...क्या सुनील भी नही जानता...ओह गॉड...ये ये....क्या खेल है....

पर ये मुझे पहचान क्यूँ नही रहा....

अमर...देखिए आप आप कॉन हैं...क्या आप मुझे जानती हैं.....?

मिनी...तुम तुम सुनेल हो ....हम मुंबई में मिले थे..एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे....फिर तुम यूके चले गये कुछ टाइम बाद अपने माँ बाप को साथ ला शादी की बात करने के लिए...लेकिन कुछ दिनो के अंदर ही तुम्हारे फोन आने बंद हो गये...मैं हर पल तुम्हारा इंतेज़ार करती रही...

अमर...सुनेल....कॉन सुनेल...मुझे कुछ भी याद नही ...ओह गॉड....(वो अपना सर पकड़ बैठ गया)

मिनी....तुम तुम सुनेल हो...याद है वो चाइनीस रेस्टोरेंट जहाँ हम पहली बार मिले थे....वो वो जुहू बीच पे हमारे दोस्त हमे ले गये थे....याद करो सुनेल...याद करो....

तभी ...पीछे से सवी की आवाज़ आई....बेटी ये सब भूल चुका है..आक्सिडेंट में इसकी याददाश्त चली गयी...पर तुम इसे कैसे जानती हो...तुम्हारी शादी तो रमण...

मिनी...रोती हुई सवी से लिपट गयी माँ ये सुनेल है...मेरा पहला और आखरी प्यार ....मैं तो सुनील को ही सुनेल समझ रही थी अब तक...

सवी...ओह! ये राज़ अभी राज़ ही रहने देना ..किसी को सुनेल के बारे में पता नही चलना चाहिए...जब तक रूबी की शादी नही हो जाती और इसकी यादाश्त वापस नही आ जाती...

मिनी...जो आप कहोगे वही करूँगी...पर मैं अब सुनेल को अकेले नही छोड़ूँगी.....मैं इनकी यादाश्त वापस ला के रहूंगी.....वापस ला के रहूंगी.....और मिनी फिर फुट फुट के रोने लगी...

सुनेल हैरान परेशान सा दोनो की बात सुन रहा था.

सवी......ठीक है तुम सुनेल के पास रहो...मैं रूबी के पास जा रही हूँ........

सुनेल के सर पे प्यार से हाथ फेर सवी कमरे से बाहर निकल गयी ....लेकिन उससे पहले एक साया वहाँ से भाग खड़ा हुआ...जिसके खुद के दिमाग़ में बॉम्ब फट रहे थे.........
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
'न्न्न्,, नाआआअहहिईीईईईईईईईईईईईई म्म्म्म़मीईईररर्र्ररराआआआ ब्ब्ब्बााआआक्कककचहााआ!!!!!!!!!!!'

सुमन नींद में चिल्लाई.............और घबरा के उठ गयी.......

सुनील और सोनल जो उसके अगल बगल सोए पड़े थे फटा फट उठे और देखा सुमन घबराई हुई पसीने से लथपथ है....

सुनील...अरे जान क्या हुआ...सपना देख रही थी क्या...कुछ नही होगा हमारे बच्चे को...आने तो दो उसे....

सुमन.....वो वो......तुम्हारा जुड़वा था....वो नही बचा था.......

आज सुनील और सोनल के सामने ये धमाका हो गया......आज तक उन्हें नही पता था...कि सुनील का जुड़वा भी था ...जिसे सुमन को यही बताया गया था....कि वो मरा हुआ पैदा हुआ है....

सुनील...क्या मतलब !!!! मेरा जुड़वा.....?????

सुमन...हां तुम दो जुड़वा थे...तुम्हारा भाई मरा हुआ पैदा हुआ था...मैं तो वक़्त के साथ उसे भूल गयी थी...आज ना जाने क्यूँ......

सुनेल के दिल की धड़कन की आवाज़ सुमन तक पहुँच ही गयी........आख़िर माँ जो थी वो....

सुनील...किसने कहा था तुमसे वो मरा हुआ पैदा हुआ ......क्या पापा ने.....

सुमन ने हैरानी से सुनील की तरफ देखा...ना नही समर ने.....

सुनील....अपने माथे पे हाथ मारता हुआ.......वो जिंदा है सूमी....वो जिंदा है....इसमे ज़रूर समर की कोई चाल है....मैं उसे ढूँढ के रहूँगा...मेरा वादा है तुमसे.....काश ये बात तुमने तब बताई होती जब समर जिंदा था......खैर कोई बात नही...मैं उसे ढूँढ के तुम्हारी झोली में डाल दूँगा......

सुमन...नही सुनील..मुझे पाने के लिए उसने जो भी किया ...पर वो इतना नही गिर सकता था ...खैर छोड़ो...पता नही क्यूँ आज ये बात मुँह पे आ गयी...

तभी सुनील को एक झटका लग ता है...उसके दिमाग़ में एक सवाल उठता है...कॉन हूँ मैं?

कहते हैं जो जुड़वा होते हैं उनमें एक मानसिक बंधन होता है....

क्यूंकी सुनेल बहुत दूर रहा ..ये बंधन कभी ज़ोर नही पकड़ पाया......आज वो बहुत करीब था..इसलिए उसकी मानसिक तरंगे सुनील तक पहुँच रही थी.....

सुनील....नही वो जिंदा है...मैं उसे महसूस कर पा रहा हूँ...वो परेशानी में है...वो सवाल कर रहा है...कॉन हूँ मैं? ज़रूर उसके साथ कुछ बुरा हुआ है.....वो कहीं आसपास है...तभी आज उसकी मानसिक तरंगे मुझ तक पहुँच रही हैं....ऐसा सिर्फ़ जुड़वा के साथ होता है......

सुमन...तुम ना...मैं ही बेवकूफ़ हूँ..पता नही क्यूँ ये सब बक दिया और तुम्हें बिना वजह परेशान कर डाला....चलो सो जाओ..कल रूबी की सगाई है....

लेकिन नींद गायब हो चुकी थी तीनो की आँखों से...

उधर जब सवी रूबी के कमरे में पहुँची तो रूबी गायब थी.......

रूबी को गायब पा सवी घबरा जाती है..कि कहीं रूबी उसके पीछे तो नही आई थी...

थोड़ी देर में रूबी आ जाती है और सीधा इंटरकम पे विजय को फोन करती है...

रूबी ...अंकल आप और आंटी अभी आ सकते हैं क्या...

विजय...बेटे इस वक़्त...

रूबी...मेरी मम्मी आई हुई हैं मैं चाहती हूँ आप आज ही इनसे मिल लो...

विजय कुछ पल सोचता है.....ओके मैं आ रहा हूँ...

रूबी ...मम्मी ये राजेश जीजू के पापा हैं...विमल इनके दोस्त का बेटा है....

सवी रूबी को ही देख रही थी ..जो इस वक़्त अपनी नज़रें चुरा रही थी..उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था...

सवी की अंजानी आशंका से कांप उठी थी...
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07-20-2019, 09:31 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
थोड़ी देर में विजय और आरती आते हैं...जैसे ही विजय और सवी का आमना सामना होता है..हवाएँ रुक जाती हैं..दोनो पत्थर बने एकदुसरे को देखते रहते हैं...आँखों पे विश्वास ही नही होता कि दोनो आज आमने सामने हैं...

रूबी आँखें फाडे दोनो को देखती है...

रूबी ..अंकल ये मेरी मम्मी हैं...

आं आं ...विजय जैसे होश में आता है....

आरती ...जो सवी को जानती थी......वो सवी के गले लगती है...भाभी ...सब मेरी वजह से....

सवी...भूल जाओ पुरानी बातों को...

विजय...कितने साल गुजर गये....अब समझा रूबी इतनी प्यारी क्यूँ है....

रूबी ...आप दोनो...

विजय....हां हम दोनो किसी जमाने में एक दूसरे से प्यार करते थे....लंबी कहानी है...फिर कभी...

रूबी ...अंकल मैं ये शादी नही कर पाउन्गि....

ककककक्क्क्ययययययययययाआआआआआ विजय/सवी/आरती तीनो ही चीख पड़े...

रूबी....अंकल मैं समझ सकती हूँ...आप पे क्या बीतेगी...लेकिन अगर मेरा पूरा सच जान लोगे ...तो यही कहोगे कि आप को कुएँ में गिरने से रोक लिया...आप बहुत अच्छे हो...आप में मुझे मेरे पापा नज़र आते हैं...उनको बेइज़्ज़त तो नही कर सकती ना...

विजय....बेटी सॉफ सॉफ बोलो ..ये पहेलियों का वक़्त नही...

रूबी...अंकल ...मैं ऐसी माँ की बेटी हूँ...जिसने मेरी सुमन माँ से उनके जुड़वा बेटे को छीन लिया...ऐसी माँ का खून ..जिस बेटी में होगा ...क्या कल वो भी ऐसी ही नही निकलेगी...

सवी पे पहाड़ टूट पड़ा...वो बिलख बिलख के रोने लगी.......मेरी कोई खता नही मैं मजबूर थी...

विजय और आरती के सर पे तो लगातार बॉम्ब फूटा...सुनील का जुड़वा...जिसे सुमन से छीनने का आरोप रूबी खुद अपनी माँ पे लगा रही है....सवी कह रही है...वो मजबूर थी...यानी सुनील का जुड़वा भाई है.......ओह गॉड क्या बीती होगी सुमन पे

विजय.....सविता ये ये मैं क्या सुन रहा हूँ......

सवी......आप तो चले गये ..इतना कह कर कि रास्ते बदल चुके हैं...उसके बाद क्या क्या हुआ आपको क्या मालूम...कैसे इंसान से मेरी शादी हुई ...और क्या क्या नही हुआ....समर......

विजय.......समर........ओह गॉड.....उसने तुम्हें भी नही छोड़ा....

अब रूबी और सवी चक्कर खा गये...

विजय...मुझे कुछ तो सुनील ने बताया है...पर लगता है मैं सब नही जानता...शुरू से बताओ......

फिर सवी ने अपनी आप बीती सुनाई और ये ख़तम होते होते रात बीत गयी....विजय और आरती दोनो की आँखों से आँसू बहते रहे....

सुबह होनेवाली थी......

विजय....अब सुनेल कहाँ है......

सवी...उसके लिए दूसरा कमरा बुक किया था...मिनी उसके साथ है....

विजय......सवी तुम मिनी और सुनेल को अभी आज ही मुंबई भेज दो मेरे फ्लॅट पे...ये चाबिया भी मिनी को दे दो...वहाँ नोकर अलग फ्लॅट में रहते हैं...मैं फोन कर दूँगा...मिनी से कहना वो सुनेल को हर उस जगह ले जाए ..जहाँ वो मिला करते थे....शायद ..सुनेल की यादश्त वापस आ जाए......और 3-4 दिन में हम वापस चले जाएँगे...मैं कोई कसर नही छोड़ूँगा...सुनेल का अच्छा इलाज़ करने में...
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