Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
04-07-2019, 12:19 PM,
#11
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
रचना बाथरूम में चली गई।
30 मिनट बाद दोनों तैयार होकर कार में घर की तरफ़ चल पड़े।
घर पहुँच कर रचना ने अमर को आवाज़ लगाई, वो जल्दी से नीचे आया और दोनों को देख कर खुश हो गया।
अमर- वेलकम शरद.. अब बताओ कैसा रहा आज का दिन और मेरी प्यारी बहन हो गई क्या सेलेक्ट.. डायरेक्टर साहब ने क्या कहा?
शरद- अरे यार… इतने सवाल एक साथ पूछ लिए। ये सब तुमको रचना बता देगी। मुझे बहुत जरूरी काम है, अभी जाना होगा तुम आओ मेरे साथ !
अमर ने रचना को बोला- बैठो, मैं शरद को बाहर तक छोड़ कर आता हूँ।
बाहर जाकर अमर बहुत उत्तेजित था कि क्या हुआ।
शरद- देख यार, रचना बहुत चालाक और समझदार है, इसे झूठ बोलकर फंसाना आसान नहीं है, इसलिए मैंने रियल में डायरेक्टर से मिलवा दिया है। कल इसका स्क्रीन टेस्ट होगा। आज तो बस नॉर्मली बात हुई है, अब मेरा प्लान सुन.. तू अभी कुछ मत कर, कल टेस्ट हो जाने दे.. इसको सेलेक्ट करवा कर बाद में ऐसी तरकीब बताऊँगा कि यह खुद नंगी होकर तेरे पास आएगी।
अमर- ओह वाउ… यार टेन्शन मत लो, मैं कोई जल्दबाज़ी नहीं करूँगा और सच में अगर उसको हीरोइन बना सको तो, बना दो यार बहुत क्रेजी है वो हीरोइन बनने के लिए।
शरद- ओके यार.. मैंने कब मना किया ! उसको मिलवाया भी असली आदमी से है। अब तुम कहते हो तो बनवा दूँगा। अब मैं जाता हूँ… ओके रात को कॉल करके बताता हूँ कि कल कब जाना है।
अमर- अच्छा यार तू जा..!
शरद- यार आज ये नहीं जाती, तो कुछ बात बन जाती, पर पता नहीं किससे मिलने की जल्दी थी इसको.. यार हो ना हो… इसका कोई बॉय-फ्रेंड तो है.. तू पता कर, पर ऐसे कि उसको शक न हो.. समझ गया न..!
अमर- यार लगता तो नहीं, पर तुम कहते हो तो ट्राई करता हूँ पता करने की.. ओके अब तुम जाओ बाय..!
शरद वहाँ से सीधा धरम अन्ना के पास गया।
धरम अन्ना- अरे तुम क्यों आना जी.. क्या बात है हम को फ़ोन करना था जी..!
शरद- धरम अन्ना, आज तो मैंने जैसे कहा तुमने किया, पर कल क्या करना है मैं बताता हूँ। उसको शक मत होने देना कि तुम कौन हो और मेरे कहने पर ये सब कर रहे हो।
धरम अन्ना- तुम टेन्शन मत लो जी, धरम अन्ना जुबान का पक्का जी.. मुंडी कटवा लेगा.. पर ज़बान नहीं जाने देगा। एक बात मेरे को बोलना जी..!
शरद- हाँ कहो, क्या है..!
धरम अन्ना- लड़की बहुत सेक्सी होना, उसको देखकर धरम अन्ना को कुछ-कुछ होना जी.. हमको भी थोड़ा टेस्ट करना जी… प्लीज़..!
शरद- अरे धरम अन्ना… मिलेगी, लेकिन सब्र करो पहले जो काम करना है, वो करो नहीं तो सारा खेल बिगड़ जाएगा..!
धरम अन्ना- ओके जी.. तुम बोलो कल क्या करना जी..!
शरद उसको समझा देता है कि कल क्या करना है और वहाँ से चला जाता है।
घर आकर शरद अपने रूम में जाता है और अलमारी से एक फोटो निकालता है और उसे देख कर उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं.. वो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगता है।
शरद- सिमी आई लव यू.. देख तेरा शरद क्या से क्या हो गया है। आज मैंने पहला कदम बढ़ा दिया है। अब तू देख मैं कैसे एक-एक करके सबको सबक़ सिखाता हूँ। उस साली रचना का तो वो हाल करूँगा कि उसकी रूह कांप जाएगी और बाकी की दोनों को भी मैं जल्दी ढूंढ लूँगा और उन कुत्तों को तो ऐसी मौत दूँगा कि मौत भी डर जाएगी। बस मुझे पता लग जाए उनके बारे में.. सिमी आ जाओ प्लीज़ मैं अधूरा हूँ.. तुम्हारे बिना.. आ जाओ ..!
शरद काफ़ी देर तक वहीं बैठा रहा और रोता रहा।
उधर अमर वापस अन्दर गया तो रचना सोफे पर लेटी हुई थी।
अमर- हाय स्वीट सिस.. अब बताओ क्या-क्या हुआ आज?
रचना ने उसे वो सब बताया जो शरद ने समझाया था.. एकदम नॉर्मल सी बातें..
अमर- तुम कौन सी फ्रेंड से मिलने गई थी, जो फ़ोन भी ऑफ कर रखा था?
रचना- भाई है एक मेरा न्यू-फ्रेंड… आप नहीं जानते..!
अमर- ओह.. कोई लड़का है… मैं समझा लड़की होगी।
रचना- लड़का है तो कोई प्राब्लम है क्या भाई?
अमर- नहीं नहीं.. ऐसी कोई बात नहीं है.. लेकिन फ़ोन तो ऑन रखना था न..! शरद जी परेशान हो रहे थे।
रचना- भाई मैं बहुत थक गई हूँ… थोड़ा रेस्ट कर लूँ.. रात को डिनर पर मिलते हैं और ललिता कहाँ है?
अमर- अरे मैं बताना ही भूल गया, वो अपनी सहेली के यहाँ है, कल पिकनिक का प्रोग्राम है, तो उनको सुबह जल्दी जाना है, इसलिए आज वहीं रुक गई है, आ जाएगी कल शाम तक… तुम आराम करो.. मैं भी थोड़ा बाहर हो आता हूँ !
अमर बाहर आकर शरद को फ़ोन करता है और उसको बताता है कि उसका शक सही था, वो किसी लड़के से मिलने गई थी, पर मैंने ज़्यादा पूछा नहीं, वो अभी रेस्ट कर रही है उस डायरेक्टर से बात हुई क्या… कल कब आना है.?
शरद- मैं कल ही समझ गया था, अभी कुछ मत कहो, कल सुबह मैं आ रहा हूँ 8 बजे क्योंकि कल वो शूटिंग में बिज़ी रहेगा, तो जल्दी बुलाया है। वैसे मैं उसको कॉल कर लूँगा, पर तुम भी बता देना।
अमर- ओके ओके.. भाई, टेन्शन मत लो, कल तो मैं उसके साथ आ सकता हूँ न..!
शरद- नहीं यार सारा खेल बिगड़ जाएगा, मैं वादा करता हूँ बहुत जल्द वो तुम्हारी बाँहों में होगी।
अमर ख़ुशी से झूम उठा और फ़ोन बंद करके अपने दोस्तों के पास चला गया।
रचना चुदाई से थक गई थी, अपने कमरे में जाकर सो गई।
अमर करीब रात को 9 बजे घर आया, तब भी रचना सो रही थी।
अमर- रचना… उठो बहना, टाइम देखो कितना हो गया है, खाना नहीं खाना क्या..!
रचना- उऊः क्या है भाई.. कितना अच्छा सपना आ रहा था.. आपने जगा दिया।
अमर- अच्छा क्या था बताओ तो.. अब उठो कुछ खा लो… शरद का फ़ोन आया था..कल 8 बजे जाना है। उसने तुमको भी किया क्या..!
रचना- पता नहीं मैं तो सो रही थी, फ़ोन साइलेंट था आ उउउ..!
रचना अपना मोबाईल चैक करती है।
रचना- ओ माई गॉड… 5 मिस कॉल हो गए… शरद जी कहीं नाराज़ ना हो जाएं.. अभी कॉल करती हूँ।
अमर- पहले फ्रेश हो जाओ.. बाद में कर लेना।
रचना- नहीं भाई अभी कर लेती हूँ… पता नहीं वो क्या सोच रहे होंगे..!
रचना ने फ़ोन लगाया, शरद ने साधारण बात की और सुबह के लिए उसको तैयार रहने को बोला।
रचना ख़ुशी-ख़ुशी बाथरूम में फ्रेश होने चली गई, 20 मिनट बाद दोनों भाई-बहन खाना खाने लगे।
अमर- रचना, अब तो तुम खुश हो ना?
रचना- हाँ भाई.. मैं बहुत खुश हूँ।
अमर- तो अपने भाई को भी खुश कर दो.. मेरा मतलब है जल्दी से हीरोइन बन जाओ, मुझे तब ख़ुशी होगी..!
रचना- भाई बस कल की बात है, अगर कल सब ठीक रहा न.. तो मैं आपको वो दूँगी कि आप सोच भी नहीं सकते..!
अमर- ओह वाउ.. मुझे कल का इंतजार रहेगा, माई स्वीट सिस.. अब मेरा तो हो गया.. मैं तो टीवी देखूँगा.. तुम भी आ जाओ न..!
रचना- नहीं भाई.. आप देखो… मुझे कल के लिए थोड़ी तैयार हो जाने दो.. ओके..!
अमर उसको ‘बाय’ बोलकर चला गया और रचना अपने कमरे में जाकर पूरी नंगी हो गई और वो क्रीम चूत पर लगा कर सो गई।
वो बस आने वाले कल के बारे में सोच रही थी और पता नहीं कब उसको नींद ने अपने आगोश में ले लिया।
अमर- ओह रचना, तुम्हारे मम्मे क्या मस्त हैं… आ मज़ा आ रहा है आ..हह..आ अफ…. रचना आहह एयेए मेरा लंड चूसो.. उफ आ मज़ा आ गया आ..हह.. चूसो अपने भाई का लौड़ा आ..हह.. ज़ोर से आ अएयेए मेरा पानी निकलने वाला है आ आ..हह…!
अमर के लंड से पिचकारी निकलने लगती है और उसकी आँख खुल गई।
अमर को जब यह अहसास हुआ कि ये सपना था, तो वो मुस्कुराने लगा और अपने आप से ही बोलने लगा- सुबह का सपना है, जरूर सच होगा और रचना तुमको ऐसे ही मेरा लौड़ा चूसना होगा, लेकिन पानी तो मैं तेरी चूत में ही निकालूँगा..!
अमर ने घड़ी की तरफ देखा, सुबह 7 बज रहे थे, वो जल्दी से बाथरूम गया और शॉवर ऑन करके खड़ा हो गया।
15 मिनट में फ्रेश होकर, वो तौलिया बाँध कर रचना के कमरे के पास आया, वो बन्द था, तो अमर ने रचना को आवाज़ लगाई, तब उसकी आँख खुली।
अमर- रचना, जल्दी उठो 7.30 बज गए हैं शरद ने कहा था, ठीक 8 बजे आएगा… लेट मत करो।
रचना हड़बड़ा कर उठी।
रचना- ओह माई गॉड.. उठ गई भाई.. बस अभी आई रेडी होकर, आज तो लेट हो गई बाबा..!
अमर अपने कमरे में तैयार होने गया और रचना भी जल्दी से बाथरूम में घुस गई।
ठीक 8 बजे शरद ने हॉर्न मारा तो अमर बाहर आया।
अमर- हाय ब्रो… गुड मॉर्निंग कैसे हो?
शरद- मैं तो अच्छा हूँ.. रचना कहाँ है, उसको जल्दी बुलाओ यार, लेट हो जाएँगे..!
अमर- कूल.. यार आ जाएगी और सुनाओ आज का क्या प्रोग्राम है.. मैं अकेला बोर हो जाऊँगा यार.. साथ ले चल न.. मैं दूर रहूँगा..!
शरद- यार आज की बात है.. अब इतना तो सब्र कर ले न..!
वो दोनों बातों में मस्त हो गए, 8.20 पर रचना भागती हुई बाहर आई।
उसने पीला टॉप और गुलाबी स्कर्ट पहनी थी, वो काफ़ी सेक्सी लग रही थी।
रचना- हाय शरद जी.. सॉरी मैं लेट हो गई।
शरद- अब ये सब गाड़ी में बोल देना… पहले ही लेट हो गए हैं हम.. ओके..!
अमर- बाय.. मैं फ़ोन करता हूँ तुमको..!
“प्लीज़ तुम मत करना वहाँ.. क्या पता हम बिज़ी हों और बीच में तुम्हारा फ़ोन आ जाए..!”
अमर- ओके बाबा नहीं करूँगा.. अब जाओ भी तुम लोग और लेट हो जाओगे..!
शरद ने गाड़ी स्टार्ट की, रचना भी बैठ गई और दोनों वहाँ से निकल गए।
शरद- जान… मैंने कहा था 8 बजे रेडी रहना, फिर भी देर कर दी..!
रचना- सॉरी शरद जी.. कल तो जोश-जोश में आपसे 3 बार प्यार कर लिया और रात को पूरा बदन अकड़ रहा था, थकान की वजह से ऐसी नींद आई कि सुबह आँख ही नहीं खुली, अमर ने आवाज़ दी तब जाकर उठी..!
शरद- अच्छा 3 बार प्यार किया… हाँ ऐसा कहो 3 बार चुदाई की हा हा हा हा हा..!
रचना- आप भी ना बड़े बेशर्म हो..!
शरद- वो तो मैं हूँ.. आज तो स्कर्ट पहन कर आई हो जाँघें भी चमक रही हैं.. क्या बात है जान.. क्या इरादा है तुम्हारा..!
रचना- इसी लिए तो लेट हो गई मैं हाथ पाँव और सब जगह के बाल साफ किए हैं मैंने.. हीरोइन भी ऐसे ही रहती हैं न… एकदम चिकनी..!
शरद- जान कल तो मैंने चूत को देखा है, वो तो चिकनी ही थी आज दोबारा क्यों..!
रचना- ओह वो तो थी.. पर पैरों पर लगाई तो सोचा उस पर भी लगा लूँ.. दोबारा चमका लूँ बस और कुछ नहीं..!
शरद- वाउ… आज तो धरम अन्ना गया काम से.. तुम तो पूरी तैयारी के साथ आई हो.. आज क्या धरम अन्ना के सामने नंगी होने का इरादा है?
रचना- प्लीज़ शरद जी.. मैं वैसे ही परेशान हूँ.. आप भी.. कुछ भी बोल रहे हो.. मैंने ये सब आपके लिए किया है !
शरद- ओके जान सॉरी.. अब मजाक नहीं करूँगा, पर वहाँ जरा ख्याल करना.. आज धरम अन्ना से पक्का हाँ करवानी है.. ओके..!
रचना- आप बस मेरे साथ रहना, कोई गलती हो तो इशारा कर देना बस..!
वो दोनों बातें करते रहे और गाड़ी सड़क पर दौड़ती रही। करीब 9 बजे वो एक फार्म हाउस पर पहुँचे, जहाँ किसी फिल्म की शूटिंग चल रही थी।
वहाँ नामचीन स्तर तो कोई नहीं था, पर जूनियर आर्टिस्ट थे, धरम अन्ना डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठा था, कोई रोमाँटिक सीन चल रहा था। एक लड़की और लड़का भीगे हुए एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
धरम अन्ना की नज़र शरद पर गई और वो उनको देखते ही गुस्से में बोलता है- कट कट कट… अईयो… ये क्या तमाशा लगा के रखा जी.. एक डायलोग भी ठीक से नहीं बोल सकते हो और ऐसा दूर-दूर से क्या बोलती तुम.. रोमान्टिक सीन जी.. थोड़ा चिपको.. बाद में बोलो..!
लड़की- सॉरी सर मैं फिर से करती हूँ.. वो मुझे सबके सामने थोड़ी शर्म आ रही है..!
धरम अन्ना- तुम ऐसा शर्म करेगा तो बन गई फिल्म.. मेरा कितना खर्चा हो गया अईयो.. कौन लाया जी ऐसा लड़की को.. मेरा पूरा भेजा घूम गया ‘पैक-अप’ जी आज शूटिंग नहीं होगा जाओ सबके सब..!
शरद और रचना धरम अन्ना के पास जाकर ‘हैलो’ बोले।
धरम अन्ना- तुम दोनों अन्दर बैठो जी.. मैं आता थोड़ी देर में..!
दोनों अन्दर चले गए, धरम अन्ना अभी भी गुस्सा कर रहा था।
रचना- बाप रे शरद जी.. धरम अन्ना सर तो बहुत गुस्सा हैं आज.. पता नहीं मेरा क्या होगा..!
शरद- हाँ जान.. वो उस लड़की से खफा हैं, अब तुम ध्यान रखना.. कोई ऐसी बात मत बोल देना कि बना बनाया काम बिगड़ जाए।
रचना कुछ बोलती इसके पहले ही धरम अन्ना अन्दर आया, उसको देख कर दोनों खड़े हो गए।
धरम अन्ना- तुम बैठो जी, और सुनाओ क्या लोगे ठंडा या गर्म..!
शरद- नहीं नहीं.. कुछ नहीं आप कुछ ठंडा लो आपको गुस्सा आ रहा है न.. तो दिमाग़ ठंडा हो जाएगा..!
धरम अन्ना- नहीं रे.. हम को गुस्सा क्यों धरम अन्ना.. मालूम वो छोकरी को हम चाँस दिया, नया फिल्म का हीरोइन बनाया लेकिन उसको कुछ नहीं जी.. हम 2 दिन से परेशान.. ये फिल्म बहुत बड़ी हिट होने वाली जी.. ऐसा स्टोरी बहुत कम मिलना जी..लेकिन उसको कुछ समझ नहीं आना जी..!
शरद- ओह तो उसको प्राब्लम क्या है..!
धरम अन्ना- कुछ नहीं जी.. एक्टिंग तो ठीक करती पर थोड़ा सेक्सी पोज़ देने के टाइम नाटक करती कि हमको शर्म आती.. आज हम गुस्सा हो गया.. उसको निकाल दिया जी फिल्म से.. अब कोई नया छोकरी लेगा, जो सब अच्छे से कर सके..जी..!
शरद- धरम अन्ना बुरा ना मानो तो रचना को ले लो ये फिल्म में।
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04-07-2019, 12:19 PM,
#12
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
यह सुनकर रचना का चेहरा ख़ुशी से चमक उठा।
धरम अन्ना- ना…रे अभी इसको हम ठीक से देखा नहीं.. टेस्ट लिया नहीं.. हम सीधा इसको हीरोइन कैसे बनाना जी..!
शरद- तो आज ले लो टेस्ट.. देख लो एक्टिंग !
धरम अन्ना- तुम्हारा बात बराबर जी.. लेकिन कोई दूसरी फिल्म में इसको चान्स दूँगा जी.. ये फिल्म बहुत हार्ड जी… इससे नहीं होगा जी..!
शरद कुछ बोलता उससे पहले रचना बोल पड़ी- सर प्लीज़.. मैं कर लूँगी.. आप एक मौका तो दो प्लीज़.. मुझे आज़मा कर तो देखो.. आपको निराश नहीं करूँगी..!
धरम अन्ना- बेबी… तुम अच्छा लड़की होना और ये फिल्म थोड़ा सेक्सी होना.. मर्डर देखा और राज़-3.. बस उन दोनों से एडवान्स मूवी जी.. तो इसमें बहुत सीन खुला-खुला होना जी.. तुमको मुश्किल होगा जी..!
रचना- हाँ… मैंने दोनों मूवी देखी हैं, मैं सब करने को तैयार हूँ.. आप एक मौका तो दो प्लीज़..!
धरम अन्ना- ओह बेबी… तुम्हारा बात धरम अन्ना को अच्छा लगा.. आज तुम्हारा टेस्ट लेगा.. अगर धरम अन्ना खुश हो गया तो ये फिल्म तुमको देगा जी…!
रचना- ओह धरम अन्ना जी थैंक्स थैंक्स.. बताइए क्या करना है मुझे?
धरम अन्ना- देखो बेबी, अभी बाहर तुमने देखा न.. वो लड़की को शर्म आता इसलिए मैं गुस्सा किया, तुम कोई सेक्सी अदा के साथ डांस करो.. हम देखेगा..!
रचना खड़ी हो गई और धरम अन्ना ने मोबाइल में गाना लगा दिया। रचना मटक-मटक कर नाचने लगी।
उसकी हिलती गाण्ड देख कर धरम अन्ना अपने लौड़े पर हाथ ले गया। करीब 5 मिनट के बाद धरम अन्ना ने ताली बजाई और खड़ा होकर रचना के पास आ गया।
धरम अन्ना- वेरी गुड डांस जी… हमको अच्छा लगा.. अब जरा एक्टिंग भी दिखाओ..!
रचना- ओके सर क्या करूँ.. आप बताओ कोई सीन..!
धरम अन्ना- हम दूसरा कोई सीन नहीं करेगा, इसी फिल्म का एक सीन है वो ही करो, अगर पास हो गई तो समझो तुम्हारी किस्मत चमक गई। अब सुनो हीरो बेड पर सोया है.. गहरी नींद में और तुमको सेक्स का मन होना जी.. अब उसके पास जाकर बेड पर सोना जी और थोड़ा रोमान्स करना जी ..हम देखना चाहता कि तुम कैसे करती… ओके..!
रचना- ओके सर.. वहाँ कौन सोएगा..!
धरम अन्ना- अभी इधर दो आदमी.. शरद और मैं, अब तुम बताना जी किसके साथ सीन करना चाहती..!
शरद जानता था कि वो उसका नाम लेगी और उसके साथ आराम से कर भी लेगी तो उसने रचना को धरम अन्ना की तरफ इशारा कर दिया।
रचना- सर आप वहाँ होंगे तो अच्छे से देख लेंगे.. मैं सही कर रही हूँ या नहीं..!
धरम अन्ना- अच्छा है जी.. आइडिया बहुत अच्छा है.. ओके हम ये बेड पर सोता… तुम आना जी और शरद तुम भी रूम में होना जी.. ओके अब आओ..!
धरम अन्ना रूम में जाकर बेड पर सीधा लेट गया और रचना उसके पास लेट गई और उसके बालों को सहलाने लगी।
रचना- जान उठो न.. सोने के लिए सारी उमर पड़ी है.. ये मौसम देखो कितना प्यारा है.. आज तो प्यार करने का दिन है, तुम सो रहे हो..!
रचना धीरे-धीरे अपनी उंगली धरम अन्ना के चेहरे पर घुमाने लगती है और फिर गले से होती हुई उसके पेट पर ले आती है।
दो मिनट तक रचना ऐसे ही करती रहती है, कभी बाल तो कभी होंठ पर ऊँगली चलाती है।
धरम अन्ना का लौड़ा पैन्ट में तन गया, वो उठा और कुर्सी पर गया।
रचना- क्या हुआ सर.. मैंने ठीक से नहीं किया क्या..!
धरम अन्ना- बेबी इतना टाइम तुमने उंगली बाल और चेहरे पर घुमाया। मैंने तुमको बोला कि तुमको सेक्स की भूख होना.. बॉय-फ्रेंड के पास जाकर उसको रेडी करना जी। अब ऐसे करोगी तो कैसे चलेगा जी..!
रचना- स..सॉरी सर.. आप मुझे समझ दीजिए मैं वैसे ही करूँगी..!
धरम अन्ना- देखो बेबी, इस फिल्म में तुमको आना मतलब शर्म को दूर रखना होगा जी.. अब तुम लेटो.. मैं आता और देखना मैं कैसे करता तुम डायलोग बोला अच्छा था, पर इस सीन में ज़ुबान नहीं हाथ का इस्तेमाल करो.. अब मैं आता ओके..!
रचना वहाँ सीधी लेट जाती है और धरम अन्ना उसके पास जाकर उसके होंठों पर हल्की सी किस कर देता है फिर उसके पास लेट कर उसकी मम्मे सहलाने लगता है।
एक हाथ उसकी जाँघों पर रख देता है और उनको मसलने लगता है, रचना की सिसकारियाँ निकलने लगती हैं। धरम अन्ना धीरे-धीरे उसकी चूत को रगड़ने लगता है।
रचना- आ सीसी उफ.. जान क्या कर रहे हो आ.हह.. उफ..!
शरद धरम अन्ना को इशारा कर देता है तो धरम अन्ना उठ जाता है।
धरम अन्ना- गुड जी.. ऐसा करना था वैसे अच्छी एक्टिंग की तुमने.. अब कुछ सवाल पूछूँगा जी.. उसका जवाब दो ओके..!
रचना- ओके…!
धरम अन्ना- मैं तुमको ये फिल्म में लेगा तो किसी को प्राब्लम नहीं होगा ना..!
रचना- नहीं सर, किसी को नहीं होगी..!
धरम अन्ना- बेबी, ये थोड़ा हॉट मूवी होना.. इसलिए पूछा कुछ सीन तुमको बिकनी के देना होगा जी और एक सीन में तुम नहाना जी और कोई तुमको मरने की कोशिश करना.. उस टाइम तुम पूरा नंगी होना.. पर कैमरा में बस तुम्हारे पैर और कंधा आएगा.. समझ गई न..!
रचना- ओह थैंक्यू सर.. मैं सब समझ गई आप जैसा कहोगे मैं करूँगी और मैंने हॉरर में देखा है..!
धरम अन्ना- बोलना और करना दो अलग बात जी।
शरद- धरम अन्ना ये वैसी लड़की नहीं है, जो बोला वो ही करेगी चाहो तो आजमा लो..।
रचना- हाँ सर क्यों नहीं..!
धरम अन्ना- अच्छा तो सारे कपड़े निकालो जी.. यहाँ बिकनी में आ जाओ..!
रचना बिना कुछ बोले कपड़े निकालने लगी और दो मिनट में लाल ब्रा और पैन्टी में धरम अन्ना के सामने आकर खड़ी हो गई।
धरम अन्ना का लौड़ा तो बगावत पर आ गया था, पर शरद ने उसको मना किया था, तो वो चुप था पर बर्दाश्त की भी एक हद होती है।
धरम अन्ना- गुड तुम बहुत सेक्सी हो.. ये फिल्म तो सुपर हिट जाएगी.. एक मिनट रूको.. मैं आता शरद तुम बाहर आओ जी।
दोनों कमरे के बाहर आ गए।
शरद- क्या हुआ..!
धरम अन्ना- हमको कंट्रोल नहीं होना जी.. क्या मम्मे हैं.. ये छोकरी हम को अभी नीचे करना जी प्लीज़..!
शरद- धरम अन्ना पागल मत बनो.. कॉंट्रेक्ट पेपर साइन करवाओ.. ये सब बाद में होता रहेगा।
धरम अन्ना- वो तुम मुझ पर छोड़ दो, मेरा यकीन करो मैं सब संभाल लूँगा।
शरद- ओके पर जल्दी अगर कोई भी गड़बड़ हुई न.. तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा..!
धरम अन्ना- पक्का जी… मैं अभी वो पेपर लाता.. तुम अन्दर जाओ जी..!
शरद अन्दर जाता है, तो रचना उससे लिपट जाती है।
शरद- जान वो कॉंट्रेक्ट पेपर लेने गया है, मान गया तुमको.. तुम धरम अन्ना के सामने नंगी हो गई, हाँ उसको दीवाना बना दिया तुमने तो..!
रचना- स्वीट-हार्ट उसकी नज़र मैंने पहचान ली है, अब देखो कैसे पेपर साइन होते है अभी..!
धरम अन्ना अन्दर आया और पेपर रख कर बोला- ये पेपर साइन होने के बाद तुम इस फिल्म का हीरोइन होना जी.. हम चाहे तो तुमको निकाल सकता, पर तुम अपनी मर्ज़ी से जाएगा तो पूरा खर्चा तुमको देना होगा..!
रचना- ओके मैं रेडी हूँ..!
रचना ने जल्दबाज़ी में पेपर ठीक से पढ़ा भी नहीं और साइन कर दिए।
धरम अन्ना और शरद ताली बजा कर उसको बधाई दी।
धरम अन्ना- शरद तुम थोड़ा बाहर जाना जी.. हमको बेबी से बात करना जी।
शरद रचना को ‘थंब’ दिखा कर ऑल दि बेस्ट बोल देता है और बाहर चला जाता है।
धरम अन्ना- बेबी, शरद बोला तो हम तुमको चाँस देना जी.. अब तो तुम साइन भी कर दिया। हमको क्या फायदा जी.. तुम बात को समझती ना..!
रचना- सर आप कहो मैं आपके लिए क्या कर सकती हूँ..!
धरम अन्ना पास आकर रचना के पीछे खड़ा हो जाता है और अपना लौड़ा उसकी गाण्ड पर सटा कर उसकी गर्दन पर होंठ रख देता है।
धरम अन्ना- अब बेबी हम क्या बोलेगा जी तुम समझती ना हमको क्या होना जी..!
रचना समझ गई कि धरम अन्ना क्या चाहता है पर वो इसके लिए रेडी नहीं थी और उसको मना भी नहीं कर सकती थी, वो बड़ी दुविधा में आ गई कि क्या करे अब..!
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04-07-2019, 12:19 PM,
#13
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
रचना थोड़ी देर चुप ही पर उसके बाद-
रचना- सर मैं समझती हूँ, पर एक बार फिल्म शुरू हो जाती तो अच्छा लगता। मैं कहाँ जाने वाली हूँ। आप जब चाहो मैं तैयार हूँ, पर प्लीज़ आज नहीं…!
धरम अन्ना ने उसके मम्मों पर हाथ रख दिया और धीरे-धीरे दबाने लगा।
धरम अन्ना- मैं जानता जी.. तुमको थोड़ा डर होना.. कोई बात नहीं हम इन्तजार करेगा जी.. लेकिन अभी थोड़ा सा प्यार करना चाहता जी.. बस ऐसे ही कल शूटिंग चालू कर देगा जी।
रचना- ठीक है.. लेकिन जल्दी हाँ.. कल कहाँ शूटिंग होगी और कितने बजे…!
धरम अन्ना मम्मों को दबाता जा रहा था और लौड़ा रगड़ता जा रहा था।
धरम अन्ना- बेबी, कल इसी टाइम आ जाना जी.. बाकी डिटेल मैं शरद को दे दूँगा अब पाँच मिनट बेड पर आओ ना जी..!
रचना जानती थी कि अब ज़्यादा मना करना ठीक नहीं होगा, तो वो बेड पे लेट गई, धरम अन्ना खुश होकर उसके पास लेट गया,उसको चूमने लगा और उसके मम्मों को दबाने लगा.
धरम अन्ना- उहह बेबी.. तुम बहुत सेक्सी होना.. ये ‘अनार’ का रस पिलाओ ना.. आज़ाद करो ना इनको…!
रचना- आ उफ़फ्फ़ ससस्स.. अब आप ही आ उफ्फ कर लो सर जी..!
धरम अन्ना ने रचना की ब्रा ऊपर कर दी और रचना के मम्मे आज़ाद हो गए, धरम अन्ना कुत्ते की तरह उन पर टूट पड़ा और रचना के निप्पल चूसने लगा।
शरद ने दरवाजे को धीरे से खोल कर देखा तो धरम अन्ना ‘लगा’ हुआ था। तब शरद ने दरवाजे को बन्द करके खटखटाया तो धरम अन्ना का मूड खराब हो गया और वो उठ कर रचना को 2 मिनट रुकने का बोल कर चला गया।
धरम अन्ना- क्या हुआ जी.. वो मान गई है ना.. अब तुमको क्या प्राब्लम होना जी..!
शरद- धरम अन्ना अभी नहीं, तुम कल कर लेना अभी मेरे प्लान का दूसरा भाग शुरू करना है। तुम बात को समझो यार उसकी चूत को मत छेड़ो..!
धरम अन्ना- ओके जी मैं समझता.. लेकिन मेरा पप्पू परेशान होना जी.. बस पाँच मिनट और दो उसके हाथ से पानी निकालने दो न जी…!
शरद- ओके तुम यहीं रूको.. मैं अन्दर जाकर आता हूँ ओके…!
धरम अन्ना- ओके जी.. जल्दी आना…!
शरद को देख कर रचना बैठ गई।
रचना- ओह गॉड.. अच्छा हुआ आप आ गए.. वो धरम अन्ना तो मेरी हालत खराब करने वाला था। अब क्या करूँ.. समझ नहीं आ रहा…!
शरद- तुमने सही किया उसको मना नहीं किया पर मैं उसको ज़्यादा कुछ नहीं करने दूँगा। तुम एक काम करो, उसका पानी निकाल दो.. ठंडा हो जाएगा तो हम यहाँ से निकल जाएंगे।
रचना- हाँ, यह ठीक रहेगा..!
“ओके मैं जल्दी ही उसको भेजता हूँ ..!”
शरद ने बाहर जाकर धरम अन्ना को समझा कर अन्दर भेज दिया।
धरम अन्ना- बेबी तुम्हारा शरद को जल्दी होना जी अब मेरा पप्पू को जल्दी प्यार करना जी..!
धरम अन्ना अपनी पैन्ट खोल कर अपना 8″ का काला लौड़ा रचना के सामने कर देता है। उसे देख कर एक बार तो रचना को घिन आती है, पर वो मजबूरी में उसको हाथ से पकड़ लेती है।
रचना- वाउ सर.. आपका तो बहुत बड़ा है और काला ऐसा जैसे कोई साँप हो…!
धरम अन्ना- आ..हह बेबी तुम्हारा हाथ कितना सॉफ्ट जी उफ्फ मज़ा आ गया मेरे नाग के लिए कल अपना बिल खोलना जी.. हम इसको डालेगा अभी जल्दी इसका जहर निकाल दो आहह..!
रचना उसको आगे-पीछे करने लगी, पर वो जानती थी, ऐसे कुछ नहीं होगा तो उसने आँख बन्द करके लौड़ा मुँह में डाल लिया और उसको चूसने लगी।
धरम अन्ना तो स्वर्ग की सैर पर चला गया था। रचना ने होंठ टाइट करके धरम अन्ना को इशारा किया कि अब वो आगे-पीछे करे।
धरम अन्ना- आ मज़ा आ रहा है बेबी उफ्फ.. तुम अच्छा चूसती जी.. आ….हह..!
दस मिनट तक रचना लौड़े को चूसती रही और आख़िर धरम अन्ना ने उसके मुँह में ही पानी छोड़ दिया।
आखिरी पलों में धरम अन्ना ने रचना का सर पकड़ कर लौड़ा पूरा मुँह में फँसा दिया, जिससे पूरा पानी उसको पीना पड़ा।
धरम अन्ना पूरा शान्त हो गया, तब ही उसने लौड़ा बाहर निकाला।
धरम अन्ना- आ…हह.. मज़ा आ गया बेबी..! अब तुम जल्दी रेडी हो जाओ वरना शरद गुस्सा होना जी ओके मैं जाता बाहर…!
धरम अन्ना के जाने के बाद रचना जल्दी से बाथरूम की तरफ भागी, उसको उल्टी जैसा लगा। धरम अन्ना के काले लौड़े से उसको घिन आ रही थी।
पाँच मिनट बाद वो बाहर आई और कपड़े पहन कर रूम से बाहर आ गई।
शरद- अब चलें..!
धरम अन्ना- ओके जी.. अब आप जाओ कल शूटिंग चालू होना जी.. 9 बजे यहाँ आ जाना…!
वो दोनों वहाँ से निकल गए।
रचना- थैंक्स शरद जी आपने बचा लिया.. वो काला सांड तो मेरी जान ले लेता आज…!
शरद- जान मैंने कहा था न.. कि मेरे होते कुछ नहीं होगा तुमको..!
रचना- थैंक्स शरद लव यू सो मच…!
शरद- जान.. तुमसे एक जरूरी बात करनी थी।
रचना- हाँ.. कहो क्या है…!
शरद- जब अमर को पता चलेगा कि तुम ऐसी फिल्म कर रही हो तो वो मेरे बारे में क्या सोचेगा…!
रचना- अरे नहीं शरद जी.. वो कुछ नहीं कहेगा बल्कि वो सिर्फ़ नाम का मेरा भाई है.. मैं सब समझती हूँ कि वो मेरे जिस्म का दीवाना हो गया है..! शायद आपको यह पता नहीं होगा…!
शरद ज़ोर से हँसता है और रचना को सब बात बता देता है कि अमर ने ही उसको कहा था तुमको हेरोइन बनाने के लिए, ताकि वो तुमको चोद सके..!
रचना- ओ माई गॉड… मैं जानती थी कि कोई तो बात है.. भाई ने मुझे चोदने के लिए आपसे भी कह दिया कि चूत का स्वाद चख लेना.. कितना कमीना होगा न वो…!
शरद- जान इसीलिए मैंने तुमको उसे बताने से मना किया था। अब सुनो.. उसे कभी मत कहना कि तुम सब जान गई हो और मैंने तुम्हारी सील तोड़ी है। अब तुम वो करो जो मैं कहता हूँ उसका मन भी हल्का हो जाएगा और वो कुछ बोलने के काबिल भी नहीं रहेगा।
रचना- वैसे एक बात कहूँ.. मेरा भी मन भाई से चुदने का है बहुत स्मार्ट लगते हैं वो…!
शरद- वाह.. आग दोनों तरफ बराबर लगी है.. अब तुम गौर से सुनो, जो मैं कहता हूँ आज वही सब करना ओके…!
रचना- ओके बॉस…!
शरद पंद्रह मिनट तक रचना को समझाता रहा कि क्या करना है उसको और रचना बड़े गौर से सब सुन रही थी।
रचना- वाउ.. शरद जी यू आर टू गुड.. अब मज़ा आएगा खेल का…!
इसी तरह बात करते हुए वो दोनों घर पहुँच गए…
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04-07-2019, 12:19 PM,
#14
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
गाड़ी रुकी, अमर उनको देख कर खुश हो गया।
अमर- वाउ व्हाट ए सरप्राईज.. इतनी जल्दी वापस आ गए तुम लोग.. क्या हुआ…!
रचना भाग कर अमर से चिपक जाती है।
रचना- भाई मैं आज बहुत खुश हूँ.. मैंने फिल्म साइन कर ली… कल से शूटिंग शुरू होगी।
अमर- ओह वाउ रियली.. आज तो पार्टी बनती है।
शरद- हाँ यार ये तो है.. अभी तो मैं जाता हूँ पर रात को पार्टी यहीं करेंगे.. मैं 8 बजे तक आ जाऊँगा।
अमर- ओके ब्रो… चलो मैं बाहर तक तुम्हारे साथ चलता हूँ।
रचना- भाई इनको छोड़ कर मेरे रूम में आ जाना।
अमर और शरद बाहर आ गए।
अमर- वाउ यार.. कमाल कर दिया तुमने.. सीधे फिल्म साइन करवा दी.. कौन सी फिल्म है..!
शरद- अरे यार इन सब बातों को गोली मारो.. जाओ वो तुम्हें बुला कर गई है.. मज़ा करो, पर उससे कोई सवाल मत करना। मैंने उसका माइंड ऐसे बना दिया है कि अब वो खुलकर तुम्हारे साथ मस्ती करेगी, पर तुम उसको अहसास मत होने देना कि तुम्हें पता है और रात को हम दोनों मिलकर उसको चोदेंगे… वादा याद है ना…!
अमर- हाँ यार मुझे याद है.. बस अभी मैं उसकी चूत का मुहूरत कर दूँ, फिर रात को दोबारा मज़ा लेंगे…!
शरद वहाँ से चला गया।
अमर सीधा रचना के रूम में गया, तब रचना बेड पर लेटी थी और एक चादर अपने ऊपर डाल रखी थी।
अमर- क्या हुआ बहना.. ऐसे क्यों सोई हो..! क्या हुआ? तबियत तो ठीक है ना?
रचना- भाई मैंने कहा था न.. कि फिल्म साइन होने पर आपको वो ख़ुशी दूँगी कि आप सोच भी नहीं सकते…!
अमर- हाँ बहना.. क्या है बताओ न…!
रचना- इस चादर को खींचो पता चल जाएगा…!
अमर चादर पकड़ कर खींच देता है। रचना को देख कर उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। क्योंकि रचना एकदम नंगी सीधी लेटी हुई थी।
रचना- भाई इसी रूप में आप मुझे देखना चाहते थे ना..! लो आ जाओ अब मैं आपकी हूँ.. जो करना है कर लो…!
अमर जल्दी से बेड की तरफ बढ़ता है।
रचना- रूको भाई ऐसे नहीं तुम भी अपने कपड़े निकाल कर आओ, तब प्यार का मज़ा आएगा।
अमर तो पता नहीं कौन सी दुनिया में खो गया था, उसके मुँह से आवाज़ ही नहीं निकल रही थी। वो भी जल्दी से नंगा हो गया, उसका लौड़ा तना हुआ था, जो करीब 6″ का होगा और ज़्यादा मोटा भी नहीं था।
रचना- ओह.. वाउ.. भाई आपका तो बहुत बड़ा है…!
अमर बेड पर चढ़ गया और रचना के मम्मों को दबाने लगा।
अमर- बहना डरो मत बड़ा है, तो क्या हुआ.. मैं आराम से डालूँगा पर पहले मुझे प्यार तो करने दो…!
रचना- आ जाओ भाई आज मैं बहुत खुश हूँ जल्दी से आ जाओ…!
अमर ने रचना के होंठों पर अपने होंठ रख दिये और उसके मम्मों को दबाने लगा।
दस मिनट तक दोनों एक-दूसरे को चुम्बन करते रहे।
अमर कभी गर्दन को चूमता तो कभी निप्पलों को चूसता ! दोनों एकदम गर्म हो गए थे।
रचना- आ..हह.. सी.. उफ्फ भाई.. अब आप लौड़ा दो न.. मेरे मुँह में.. आ..हह.. आप मेरी चूत चाटो न उफ्फ सी.. बहुत खुजली हो रही है आ उफ़फ्फ़…!
अमर ने 69 का पोज़ बनाया और अपना मुँह चूत पर टिका दिया। रचना ने जल्दी से लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
पाँच मिनट भी नहीं हुए थे कि अमर ने अपना कंट्रोल खो दिया।
अमर- आ..हह.. उफ्फ रचना आ..ह.. ऐसे मत चूसो आ..हह.. मेरा पानी आ..हह.. उफ्फ निकल जाएगा आ..हह.. उफ़फ्फ़..!
अमर के लंड से पिचकारी निकलने लगी और रचना उसे पी गई।
अमर पानी निकालने के बाद बेहाल सा होकर साइड में लेट गया।
रचना- आ..हह.. भाई आपका पानी कितना टेस्टी था उफ्फ मेरी चूत चाटो न.. आ..हह…. आप तो ठंडे हो कर अलग लेट गए.. आह.. आओ ना भाई…!
अमर- बहना तेरे मुँह में बहुत गर्मी है.. मेरा लौड़ा हार गया तुमसे.. अब तुम थोड़ा रूको.. मैं इसे कड़क करके ही तुम्हारी चूत की खुजली मिटाऊँगा।
रचना सेक्स की आग में जलती रही, पर अमर का लौड़ा कड़क नहीं हो रहा था।
रचना की बर्दाश्त के बाहर हो गया तो उसने फिर से लौड़ा मुँह में ले लिया और उसको चूसने लगी दो मिनट में उसको फिर से कड़क कर दिया।
रचना- आ आ..हह.. आ जाओ भाई.. अब डाल दो मेरी चूत बहुत प्यासी है मिटा दो.. मेरी चूत की प्यास आ..हह.. आ उफ़फ्फ़…!
अमर ने रचना की टाँगों के बीच आकर अपना लौड़ा चूत पर टिकाया और एक धक्का मारा, आधा लंड चूत में चला गया।
रचना- आ..हह.. आह उफ्फ ज़ोर से करो न भाई.. आ पूरा डाल दो आ आ…हह..!
अमर ने एक और धक्का मारा तो पूरा लौड़ा जड़ तक चूत में समा गया।
रचना- आ..हह.. उफ्फ ओह स्पीड से करो ना आ..हह.. आह आह…!
अमर का यह पहला सेक्स था अनुभव ना के बराबर.. वो स्पीड से धक्के मारने लगा।
रचना- आ आ..हह.. फक मी ब्रो.. आ..हह.. फास्ट और फास्ट फक योर लिटिल सिस आ..हह…. उफ़फ्फ़ फक हार्ड आ..हह…..!
अमर धकाधक झटके मारने लगा और रचना की फूटी किस्मत कि पाँच मिनट में ही अमर के लौड़े ने पानी छोड़ दिया।
रचना की चूत को गीला कर दिया पर उसकी प्यास ना मिटा सका।
अमर ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और लंबी-लंबी साँसें लेने लगा।
रचना- आ..हह.. सी.. भाई उफ्फ आप ऐसे मुझे बीच में नहीं छोड़ आ..हह…. उफ्फ सकते.. प्लीज़ कम आ..हह…..!
रचना अमर को मारने लगी और उसके मुँह पर बैठ गई।
रचना- आ..हह.. चाटो प्लीज़ आ..हह….उफ्फ…!
अमर चूत को चाटने लगा।
रचना- आ..हह.. उफ़फ्फ़ जल्दी आ..हह….!
अमर ने रचना को पकड़ कर नीचे लिटा लिया और अपनी उंगली उसकी चूत में डाल कर हिलाने लगा।
रचना- आ आ..हह.. उफ्फ अब ठीक है आ..हह.. ज़ोर से भाई आ…!
पाँच मिनट की कड़ी मेहनत के बाद अमर कामयाब हो गया, रचना की चूत ने पानी छोड़ दिया था।
रचना- आ आह उफ़फ्फ़ मैं गई.. आ आ..हह.. उहह उहह…!
पानी निकल जाने के बाद रचना भी शान्त पड़ गई।
अमर- रचना सॉरी.. मैं जल्दी झड़ गया लेकिन तुम में तो बहुत पावर है और तुम्हें दर्द भी नहीं हुआ ऐसा क्यों…!


रचना सुकून से पड़ी हुई थी और लंबी साँसें ले रही थी।
अमर- रचना, सॉरी… मैं जल्दी झड़ गया लेकिन तुममें तो बहुत पावर है और तुम्हें दर्द भी नहीं हुआ ऐसा क्यों…!
रचना- भाई मैं जानती थी कि आपका पहली बार है और आपसे सील नहीं टूटेगी इसलिए आपको ज़्यादा मेहनत ना करनी पड़े इसलिए मैंने पहले ही चुदाई करवा ली है।

!
अमर- व्हाट !!??!! किसके साथ की है?
रचना- मेरे न्यू फ्रेण्ड के साथ कल की थी। अब ज़्यादा सवाल मत करना, टाइम आने पर सब बता दूँगी ओके…!
अमर- ओके.. नहीं पूछूँगा पर एक बात कहनी थी.. रात को पार्टी है और शरद भी आ रहा है उसने तुम्हारे लिए इतना किया है.. क्या तुम उसके साथ भी चुदाई कर लोगी?
रचना- भाई आप पागल हो क्या.. मैं हर किसी के साथ कर लूँ.. क्या समझा है आपने मुझे…!
अमर- रचना प्लीज़ बात को समझो.. बेचारा कितनी मेहनत कर रहा है…!
रचना- ओके.. इस बारे में अभी कोई बात नहीं करो… रात को देखते है क्या होता है। अब आप जाओ मुझे थोड़ा सोने दो। सुबह जल्दी उठी थी न…!
अमर- ओके बहना, सो जाओ मैं जाता हूँ…!
अमर अपने कपड़े पहन कर वहाँ से अपने कमरे में आकर सोचने लगा कि ऐसा कैसे हो गया, वो फेल कैसे हो गया.. यह बात शरद को बताऊँ या ना बताऊँ.. बस इसी सोच में उसकी आँख लग गई और वो भी सो गया।
दोपहर दो बजे नौकरानी ने अमर को जगाया कि लंच तैयार है, आप कर लेना।
दोस्तो, मैंने आपको बताया था न.. कि यहाँ एक नौकरानी है.. वो बस खाना बनाने और साफ-सफ़ाई करने अन्दर आती है। उसको सख्त हिदायत है जितनी जल्दी हो अपना काम निपटा कर बाहर अपने रूम में चली जाए इसलिए वो ज़्यादा बात भी नहीं करती।
अमर उठकर रचना के रूम में गया, वो पहले ही उठ गई थी।
अमर- रचना, बड़े जोरों की भूख लगी है, जल्दी आओ खाना तैयार है।
दोनों ने लंच किया, तभी शरद वहाँ आ गया।
अमर- ओह वाउ.. आओ-आओ यार कैसे आना हुआ.. बस अभी लंच किया है, तुम भी आ जाओ।
शरद- नहीं यार मैं करके आया हूँ.. अभी एक बात करनी थी तुमसे…!
रचना- आइए ना शरद जी, क्या बात है..!
शरद- तुमको बाद में बताऊँगा.. पहले अमर से अकेले में दो मिनट बात कर लूँ ओके…!
रचना- ओके जैसी आपकी मर्ज़ी.. मैं अपने रूम में जाती हूँ.. आप अमर के रूम जाकर आराम से बात कर लो, लेकिन जाना मत.. मुझे आपसे काम है.. ओके…!
शरद- ओके मैं तुम्हारे रूम में आता हूँ.. तुम जाओ…!
दोनों अमर के रूम में आकर बेड पर बैठ गए।
अमर- कहो यार, क्या बात है?
शरद- यार… मैं सोच-सोच कर परेशान हो रहा था कि ..क्या हुआ आज तुमने तो फ़ोन नहीं किया तो मैंने सोचा मैं खुद जा आता हूँ।
अमर- ओह.. तो ये बात है.. चूत का चस्का लेने आए हो। पर यार.. मान गया तुमको.. ऐसा क्या कह दिया रचना को कि वो सच में नंगी मेरे सामने आ गई…!
शरद- अब तुमको आम खाने हैं या पेड़ गिनने हैं…!
अमर- मुझे तो आम ही खाने हैं पर मेरा नसीब खराब है वो भी नहीं खा पाया मैं तो…!
शरद- क्यों क्या हुआ..! मैंने तो सोचा कि अब तक खूब मज़ा ले लिया होगा तुमने…!
अमर ने उसे पूरी बात बताई कि कैसे वो फेल हो गया आज…!
शरद- ओह शिट यार.. इतने कमजोर कैसे पड़ गए तुम.. और मैंने कहा था ना रचना का कोई बॉय-फ्रेंड है.. देखो चुदवा लिया न उससे.. और यह बात भी झूठ है कि कल ही चुदवाया है, वो बहुत टाइम से चुदवा रही है.. तभी उसका स्टेमिना मजबूत है और तुम्हारा पहली बार था तो ऐसा हो गया.. पर डरो मत, मेरे पास इसका भी इलाज है, ऐसा आइडिया दूँगा कि रचना थक जाएगी, पर तुम्हारा पानी नहीं निकलेगा…!
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04-07-2019, 12:19 PM,
#15
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
अमर- वाउ यार.. प्लीज़ बताओ न.. मेरा बहुत मन है कि ऐसा हो प्लीज़ प्लीज़…
शरद- ओके दे दूँगा.. पर मेरी एक शर्त है वो माननी होगी तुमको…!
अमर- जो कहोगे मान लूँगा.. पर प्लीज़ बताओ न…
शरद- तुम तो फेल हो गए हो, अब मुझे मौका दो मैं उसकी ठुकाई करता हूँ…!
अमर- तो कर लो ना यार.. किसने रोका है…!
शरद- ऐसे नहीं, मैं रचना को अपने साथ ले जाना चाहता हूँ दो दिन उसको मेरे पास रहना होगा। मैं आराम से करना चाहता हूँ !
अमर- क्या.. लेकिन यार मेरा क्या होगा और वो मानेगी क्या.. इस बात के लिए?
शरद- उसको मैं मना लूँगा.. बस तुम ‘हाँ’ कहो !
अमर- ओके, पर मेरा क्या होगा यार?
शरद- तुम डरते क्यों हो.. जब मैं फ़ोन करूँ मेरे घर आ जाना दोनों साथ मिलकर मज़ा लेंगे उसका…
अमर- ओह वाउ.. यह अच्छा है, पर मैं ललिता को क्या कहूँगा?
शरद- यार कल से सुन रहा हूँ यह ललिता आख़िर है क्या बला.. कहाँ है वो?
अमर- शाम को खुद देख लेना.. मेरी छोटी बहन है, वो भी क़यामत लगती है यार !
शरद- अच्छा ऐसी बात है.. तो आज देख लेते हैं.. वैसे बुरा मत मानना यार तू है बड़ा हरामी.. अपनी सग़ी बहनों पर नज़र रखता है…!
अमर- हा हा हा.. अच्छा ये ही सही.. पर तू बता जिसकी ऐसी सेक्सी बहनें होगीं, वो हरामी नहीं तो क्या बनेगा और मेरे नज़र रखने से क्या होता है मज़े तो किसी और ने ले लिए…!
शरद- यार कहीं ललिता भी तो किसी के चक्कर में नहीं है न.. कल से घर से गायब है।
अमर- नहीं नहीं.. वो ऐसा नहीं कर सकती, अभी छोटी है वो…!
शरद- यार तू किस जमाने की बात कर रहा है आजकल किस-किस उम्र की चुद जाती हैं…कुछ मालूम भी है..!
अमर- ओके.. पर ललिता पर मुझे यकीन है.. उसने अभी तक ऐसा नहीं किया होगा।
शरद- यकीन तो रचना पर भी था.. वो तो चुदी-चुदाई निकली.. अब ललिता का पता नहीं।
अमर- यार बात तो तेरी सही है… आजकल किसी का कोई भरोसा नहीं फिर ललिता है भी सेक्सी.. रचना से छोटी है, पर फिगर उससे ज़्यादा मस्त है।
शरद- यार तेरी बहनें इतनी हॉट हैं और दूसरे उनके मज़े ले रहे हैं.. ऐसा कर आज शाम की पार्टी के बाद ललिता को चैक करते हैं कि उसने चुदाई की या नहीं…
अमर- ओके ओके.. पर कैसे…
शरद- वो सब मुझ पर छोड़ दे..


अमर बड़ी बेचैनी से बोला- ओके ओके.. पर कैसे?
शरद- वो सब तू मुझ पर छोड़ दे…
अमर- ओके.. अगर वो कुँवारी हुई तो मैं उसकी सील तोड़ूँगा…
शरद- यार बुरा मत मानना.. नई गाड़ी को पुराना ड्राइवर चलाए तो अच्छा होता है, अगर नया ड्राइवर चलाता है, तो गाड़ी को खतरा होता है तुझे अनुभव नहीं है.. मेरी बात मान मैं तुझे नुस्ख़ा दे दूँगा.. तू आराम से रचना को चोदना और मैं ललिता को चोद लूँगा। उसके बाद तू ललिता के पास आ जाना.. मैं रचना के पास चला जाऊँगा.. ठीक है ना…!
अमर- लेकिन यार, मुझे सील पैक चूत का मज़ा लेना था…!
शरद- अरे यार, एक बार में थोड़े ही चूत ढीली हो जाएगी.. वो तो वैसी की वैसी टाइट रहेगी। अगर ललिता कुँवारी है तो, अब बता हाँ या ना?
अमर- ओके हाँ.. पर तुम ऐसा क्या जादू करोगे कि मैं आराम से रचना को चोद लूँगा और पानी भी नहीं निकलेगा और ललिता कैसे मानेगी?
शरद- वो सब तू मुझ पर छोड़ दे… अब मेरा कमाल देख बस… मैं रचना के कमरे में जाता हूँ कैसे दो मिनट में उसको नंगा करता हूँ.. तू छुप कर देखना ओके.. मुझे बता कि कहाँ से देख सकता है..!
अमर- की-होल से देख लूँगा यार…!
शरद- ओके.. पर कोई आवाज़ मत करना.. वरना काम बिगड़ जाएगा। बाद में तो हम दोनों मिलकर चोदेंगे न…!
शरद वहाँ से रचना के कमरे में चला गया और अन्दर जाते ही ऊँगली से उसे इशारा किया कि चुप रहे, अमर बाहर है।
दरवाजे लॉक करके उसके पास जाकर बैठ गया।
शरद बहुत धीरे से बोला- जो भी बोलो धीरे बोलना अमर बाहर की-होल से देख रहा है उसको बिल्कुल शक मत होने देना कि हमने पहले चुदाई की हुई है।
रचना- ओके.. पर मेरी चूत में आग लग रही है.. अमर में बिल्कुल भी दम नहीं है.. प्लीज़ कुछ करो ना…!
दोनों काफ़ी देर तक नाटक करते रहे और फिर शरद ने रचना को चुम्बन किया। यह देख कर अमर हैरान रह गया कि आख़िर शरद ने क्या कहा होगा रचना को, वो इतनी जल्दी कैसे मान गई…!
अब शरद ने रचना को बेड पर लिटा दिया था और उसके मम्मों को मसल रहा था, चुम्बन कर रहा था। पाँच मिनट के अन्दर दोनों चुम्बन करते-करते एक-दूसरे के कपड़े निकालने लगे।
रचना- आ..हह.. शरद अपना लौड़ा निकालो ना उफ्फ मेरे मुँह में दो.. मुझे उसका रस अच्छा लगता है…!

!
दोनों नंगे होकर 69 के पोज़ में आ गए थे अब शरद का मुँह दरवाजे की तरफ था। रचना को उसने अपने ऊपर लेटा रखा था। अमर को रचना की चूत साफ दिख रही थी। उसका लौड़ा भी कड़क हो गया था। शरद अपनी जीभ से रचना को चोदने लगा और रचना भी कहाँ कम थी, लौड़े को जड़ तक गले में उतार कर चूस रही थी।
अमर बुदबुदाया- ओह शरद, तुम तो जादूगर हो, कितनी जल्दी मेरी बहन को मना लिया और कैसे उसको मज़ा दे रहे हो…!
दस मिनट तक दोनों का चूसने का प्रोग्राम चलता रहा, अब रचना तेज़ आवाज़ से बोलने लगी थी।
रचना- आह उफ़फ्फ़ सीई ..शरद जी आ..हह.. आपने तो मज़ा दे दिया आ..हह.. अब डाल दो लौड़ा.. मेरी चूत आ..हह.. बहुत प्यासी है ये आह…!
शरद नीचे लेट गया और रचना को लौड़े पर बैठा कर पूरा लौड़ा चूत में ठेल दिया और रचना को अपने सीने से चिपका लिया।
अब शरद नीचे से झटके मार रहा था। बाहर अमर ने अपना लौड़ा निकाल कर उसको मुठ्ठी मारना शुरू कर दिया था।
शरद शातिर था, उसने ऐसे पोज़ बनाया कि अमर को बाहर से लंड और चूत साफ दिखे। अब शरद शुरू हो गया था धक्के पे धक्का लगा रहा था।
रचना- आआ आआ आह उफ़फ्फ़ चोदो आ..हह.. उ मज़ा आ रहा है अई उफ्फ एक आप हो जो आ..हह.. कितना मज़ा दे रहे हो आ..हह…. एक वो था आह ‘लूज़र’ आहह…!
अमर को साफ सुनाई दे रहा था, पर वो तो मूठ मारने में बिज़ी था…!
अमर- आहह… आह… उहह… उहह साली… मुझे लूज़र बोलती है तुझे तो इतना चोदूँगा कि मुझसे रहम की भीख मांगेगी। शरद के पास सब का ईलाज है आ आ…!
पाँच मिनट तक शरद रचना की चूत का भुर्ता बनाता रहा और आख़िर उसके लौड़े ने चूत में पानी छोड़ दिया।
इस दौरान रचना दो बार झड़ गई और अमर ने भी दो बार मुठ्ठ मार कर पानी निकाल दिया।
शरद अलग होकर पसर गया और धीरे-धीरे रचना को कुछ कहने लगा।
अमर अब थक चुका था, तो वहाँ से सीधा अपने कमरे में आ गया और बेड पर बदहवास सा लेट गया।
शरद- जान सच्ची तुम बहुत हॉट हो, अच्छा अब तो बता दो वो लड़की कौन है जिसके साथ लैस्बो करती हो, मुझे ऐसा क्यों लग रहा है वो ललिता ही है !
रचना- आप बहुत तेज़ हो.. समझ गए हाँ बाबा.. वो ललिता ही है.. मैंने ही उसके मम्मों को दबा कर बड़े कर दिए हैं।
शरद- अच्छा जान, अब तो रात को और मज़ा आएगा। अब मैं जाता हूँ एक बहुत जरूरी काम है, रात को आता हूँ पार्टी के लिए…!
रचना- ऐसी क्या खास पार्टी होगी.. किसी को बताया तो है नहीं.. बस हम घर के लोग ही होंगे.. तो क्या मज़ा आएगा…!
शरद- जान, मैंने अभी तो तुमको बताया ना रात को अमर को खुश कर देना और तुम्हारी बहन को भी शामिल कर लेंगे तो सब मिलकर मज़ा करेंगे…!
रचना- लेकिन शरद आपने बताया भाई ललिता को भी चोदना चाहते है पर वो तो अभी कमसिन है, कही कुछ हो ना जाए उसको…!
शरद- मैं हूँ न.. डरो मत जैसे प्यार से तुम्हारी सील तोड़ी थी, वैसे ही उसकी भी तोड़ूँगा और फिल्म में भी रोल दिलवा दूँगा… खुश?
रचना- वाउ मज़ा आएगा.. ललिता को भी बहुत अच्छा लगेगा सुनकर कि वो भी मेरी फिल्म में काम करेगी…!
शरद- बस ललिता आ जाए, मैंने जो कहा वो काम भूलना नहीं ओके…!
रचना- ओके बाबा.. कर लूँगी, अब आप जाओ, मैं चूत को आराम दे देती हूँ.. आज तो रात को इसका बैंड बजने वाला है..!
शरद- हा हा हा हा.. ओके जान लव यू..!
शरद कपड़े पहन कर अमर के पास गया।
शरद- अरे तुझे क्या हो गया.. ऐसे क्यों पड़ा है…!
अमर- अरे यार मान गया तुमको… क्या पावर है.. इतनी लंबी चुदाई की उफ्फ मेरा तो देख कर हाल खराब हो गया.. दो बार मूठ मारी मैंने…!
शरद- ओह गुड.. अब देखो मैंने रचना को मना लिया है तुम बस रात को पार्टी के लिए बाहर ले आना… आज तेरी दोनों बहनें चुदेंगी और तू भी उनको चोदना.. ओके अब मैं जाता हूँ बहनचोद…!
अमर- हा हा हा.. यार तू भी ना गाली भी निकाल रहा है और मुझे बुरा भी नहीं लग रहा.. जा दोस्त.. आज रात को बस मेरा काम कर देना मैं रचना को दिखा दूँगा कि मैं क्या हूँ… प्लीज़ यार कोई खास नुस्ख़ा लाना, जो मुझे तुमसे भी अधिक पावरफुल बना दे…!
शरद- साले मैं वगैर नुस्खे के ही ऐसा हूँ… अगर मैं नुस्ख़ा ले लूँ तो तेरी दोनों बहन थक जाएंगी, पर मैं नहीं थकूंगा, अब जितना कहा उतना करना ओके…!
अमर- ओके बाबा.. अब जाओ बाय…!
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04-07-2019, 12:19 PM,
#16
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
शरद वहाँ से सीधा धरम अन्ना के पास गया।
धरम अन्ना- आओ जी.. क्या खबर है, हमको बहुत मज़ा आना जी… उसको भी साथ लाना था जी.. क्या चूसती है वो…!
शरद- हाँ वो टाइम भी आएगा.. अभी बस सब काम मेरे मुताबिक हो रहा है धरम अन्ना। मुझे तो कोई मेहनत ही नहीं करनी पड़ रही। अमर इतना बड़ा चूतिया है साला.. अपनी बहनों को चोदने के चक्कर में इतना अँधा हो गया कि समझ भी नहीं पा रहा है कि उनका क्या हाल होने वाला है। साला पागल है..! उसकी बहन तो खुद इतनी बड़ी चुदक्कड़ है.. अगर वो जरा सी मेहनत करता तो मेरी उसको जरूरत ही नहीं होती।
धरम अन्ना- नहीं जी… गॉड तुमको हेल्प करना.. इसके वास्ते अमर को तुम्हारे पास भेजना जी.. हम एक बात पूछना शरद जी.. हम जानता कि अब उनका बहुत बुरा हाल होना जी लेकिन आप ऐसा क्यों करता जी.. ये हम को समझ नहीं आना जी?
शरद- धरम अन्ना सब बता दूँगा, वक्त आने दो। अब सुनो रात को क्या करना है…!
शरद बोलता गया और धरम अन्ना की आँखों में चमक आने लगी, दो मिनट तक शरद धरम अन्ना को समझाता रहा।
धरम अन्ना- गुड जी वेरी गुड.. धरम अन्ना तुमको सलाम देना जी.. क्या आइडिया होना जी मज़ा आ गया, अब तुम देखो धरम अन्ना क्या करता जी..!
शरद ‘ओके’ बोलकर वहाँ से चला आया और अपने घर आकर फिर से फोटो को देख कर रोने लगा- देखो सिमी.. अब बस ज़्यादा टाइम नहीं लगेगा, मैं रचना के साथ-साथ उसके भाई और बहन की ज़िंदगी भी बर्बाद कर दूँगा.. हाँ अब बस तुम देखती जाओ ‘आई मिस यू सिमी’ आ जाओ प्लीज़ आ जाओ उउउ उूउउ…!
काफ़ी देर शरद वहीं बैठा रोता रहा।
शाम को पाँच बजे ललिता घर आई, तब रचना गहरी नींद में थी।
ललिता धीरे से उसके पास लेट गई और उसके गले को दबा दिया और ‘हूओ’ की आवाज़ निकाली।
रचना की तो जान निकल गई और झटके से ललिता को पीछे धकेला।
रचना- पागल हो गई क्या मेरी तो जान निकल गई।
ललिता- हा… हा… हा… तुमको क्या लगा… हा हा हा कोई तुम्हें मारने आ गया हहा हा हा..!
रचना- रुक ललिता की बच्ची, अभी तुझे मज़ा चखाती हूँ।
वो उठकर उसके पीछे भागी।
ललिता कमरे में इधर-उधर भागने लगी और आख़िर रचना ने उसे पकड़ कर बेड पर गिरा दिया और उसके मम्मों को दबाने लगी।
ललिता- अई उफ़फ्फ़ दर्द होता है.. क्या कर रही हो छोड़ो ना प्लीज़ आ..हह.. सॉरी अब नहीं करूँगी कसम से आ..हह…..!
रचना उसको छोड़ कर अलग बैठ हुई- इतने से दर्द से घबरा गई, जब असली दर्द होगा तो क्या करोगी…!

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ललिता- यह नाटक नहीं था.. असली में दर्द हो रहा था…!
रचना- मेरी भोली बहना… तुम समझी नहीं… जब चूत में लौड़ा जाएगा तब होगा असली दर्द…!
ललिता- अच्छा तुमको कैसे पता.. तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे लौड़ा ले लिया हो…!
रचना- और नहीं तो क्या.. इन दो दिनों मैंने खूब चुदाई कराई है और एक बड़ा सरप्राईज भी है तेरे लिए…!
ललिता- मैं नहीं मानती.. आप झूठ बोल रही हो… प्रूफ दो तब मानूँ।
रचना ने अपना पायजामा उतार कर अपनी फ़टी हुई फ़ुद्दी उसके सामने कर दी, जिसे देख कर साफ पता चल रहा था कि यह चुद चुकी है और चुदाई के कारण सूजी हुई भी थी।
ललिता चूत को छूकर देखती है और अपनी ऊँगली उसमें घुसा देती है।
रचना- आ..हह…. अब इस ऊँगली से कुछ फ़र्क नहीं पड़ने वाला बहना… लौड़े ने खोल कर रख दिया है इसको…!
ललिता- ओ माई गॉड…कब हुआ ये सब और किसके साथ.. प्लीज़ बताओ न.. कैसा फील हुआ.. सब बताओ…!
रचना उसे सारी बात बता देती है कि कैसे उसने शरद के साथ चुदाई की और हेरोइन बन गई है। सब कुछ बता दिया। बस अमर के साथ जो किया वो नहीं बताया।
ललिता- ओह माय गॉड फिल्म साइन कर ली और मुझे पता भी नहीं चला दीदी प्लीज़ मुझे भी हिरोइन बनना है.. प्लीज़ कुछ करो आप शरद से बात करो प्लीज़ प्लीज़…!
रचना- अरे मेरी माँ… सुन तो पूरी बात.. आज रात को यहाँ छोटी सी पार्टी है बस हम दोनों और शरद होगा.. तुम किसी तरह शरद को खुश कर दो वो चाहेगा तो तुम भी स्टार बन जाओगी..!
ललिता- दीदी मैं तो तैयार हूँ हम लेस्बो के टाइम सोचते थे कि लंड से कितना मज़ा आता होगा, पर कभी मौका नहीं मिला। अब आज पक्का मज़ा आएगा… पर आपने कहा दर्द होगा तो प्लीज़ बताओ ना कितना होगा…!
रचना- मेरी जान बहुत होगा, पर बस एक बार… उसके बाद तो मज़े ही मज़े हैं और शरद से शुरुआत करोगी तो बड़े आराम से करेगा। अब कहो क्या बोलती हो…!
ललिता- ओ माई गॉड… मैं क्या बोलूँ रात तो कब होगी मेरी चूत तो अभी से गीली हो गई है यार…!
रचना- अब तू जल्दी से बाथरूम में घुस जा और अपने बदन को चिकना कर ले। एक भी बाल नहीं रहना चाहिए समझ गई ना.. आज रात को खूब मस्ती करेंगे…!
ललिता- पर दीदी एक बात समझ नहीं आ रही भाई के होते ये सब कैसे होगा…!
रचना- भाई का टेन्शन तू मत ले यार… तू जानती नहीं हमारा भाई एक नंबर का हरामी है…!
ललिता- वो कैसे…!
रचना ने उसको पूरी बात बतादी, चुदाई की भी…!
ललिता- ओह वाउ.. दीदी आपने तो इन दो दिन में इतना कुछ कर लिया मेरा तो दिमाग़ चकराने लगा है…!
रचना- अब ज़्यादा सोच मत… जा जल्दी कर तू रात को सब समझ जाएगी।
ललिता ख़ुशी-ख़ुशी बाथरूम में चली गई और रचना वहीं बैठी मोबाइल पर कोई नम्बर डायल करने लगी।
रचना- हैलो शरद जी, ललिता आ गई है और मान भी गई है.. पर एक बात दिमाग़ में नहीं आ रही कि आज रात हम देर तक मस्ती करेंगे तो कल शूटिंग का क्या होगा…!
शरद- मेरी रानी, उसकी फिकर तुम क्यों करती हो, मैं सब संभाल लूँगा, तुम बस देखती जाओ।
रचना- ओके शरद बाय लव यू…!
रचना फ़ोन रखने के बाद मोबाइल में गेम खेलने लगी।
शाम तक ऐसा कुछ खास नहीं हुआ जो मैं आपको बताऊँ तो आपको सीधे मेन पॉइंट पर ले जाती हूँ।
शाम को 8 बजे अमर बीयर पार्टी का सामान ले रहा था, तभी उसको शरद का फ़ोन आया और उसने बताया कि पार्टी तुम्हारे घर में नहीं बल्कि मेरे एक फार्म हाउस पर होगी, जहाँ कुछ सरप्राईज भी है, तो तुम सब रात 9 बजे रेडी रहना.. मैं रचना को भी अभी बता देता हूँ इतना कहकर उसने फ़ोन काट दिया।
रचना भी एकदम तैयार थी, तभी शरद ने उसको फ़ोन किया और अपने प्लान के बारे में बता दिया और उसने यह भी कहा कि गाड़ी मैं भेज रहा हूँ, तुम लोग उसी में आ जाना और कुछ ड्रेस भी ले आना।
इतनी बात के बाद फ़ोन कट गया।
अमर जल्दी से जरूरत का सामान लेकर घर आ गया।
रचना हॉल में बैठी थी, उसने बहुत सेक्सी एक ब्लैक पारदर्शी मैक्सी वाला ड्रेस पहना था।
उसको देखते ही.. अमर- वाउ.. यू लुकिंग हॉट.. मार डालेगी आज तो बहना…!
रचना- थैंक्स भाई.. शरद जी का फ़ोन आया था.. आपको भी किया होगा ना…!
अमर- हाँ यार आया था.. जल्दी करो और यह ललिता कहाँ रह गई अब तक नहीं आई तुमने उसको कॉल तो कर दिया था ना यार…!
रचना- वो कब की आ गई भाई.. वो अन्दर तैयार हो रही है।
अमर- उसको बता दिया ना पार्टी यहाँ नहीं है…!
रचना- हाँ बाबा.. सब बता दिया, अब आप भी तैयार हो जाओ जल्दी…!
अमर सारा सामान वहीं रख कर अपने कमरे में चला गया।
ललिता भी तैयार होकर आ गई, उसने छोटा सा गुलाबी स्कर्ट और उस पर काली जैकेट पहनी थी, दोस्तो, अब मैं आपको क्या बताऊँ.. उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी.. आधे से ज़्यादा मम्मे दिख रहे थे और स्कर्ट भी ऐसा कि जरा सा हवा का झोंका आए तो उसकी चूत भी दिख जाए।
रचना- वाउ.. ललिता क्या सेक्सी ड्रेस पहना है और ब्रा क्यों नहीं पहनी…!
ललिता- वो इस जैकेट का लुक ऐसे ही आता है.. मम्मे दिखेंगे तभी तो आपके शरद जी लट्टू होंगे न…!
रचना- वेरी स्मार्ट गर्ल.. पैन्टी तो पहनी है ना वर्ना बैठते टाइम चूत भी दिखाई देगी हा हा हा…!
ललिता- ये देखो, पहनी है.. आप भी न.. बस ही ही ही करती रहती हो…!
अमर- वाउ.. क्या बात है ललिता.. आज तो तुमने भी कमाल कर दिया है.. आज तो तुम रचना को भी मात दे रही हो…!
ललिता- भाई, प्लीज़ चुप रहो… मैं कभी भी दीदी से सुन्दर नहीं लग सकती ओके.. अब आप दीदी की तारीफ करो वरना मैं ये ड्रेस निकाल कर दूसरा पहन लूँगी…!
अमर- सॉरी रचना.. मैंने यूं ही बोल दिया.. इस दुनिया में तुमसे सुन्दर कोई नहीं है.. ओके…!
रचना- ठीक है.. ठीक है.. अब मस्का मत लगाओ…!
दोस्तो, मैं आपको बता दूँ.. रचना को बहुत गुस्सा आता है जब कोई उसके सामने किसी और की तारीफ करता है.. इसलिए सबको ये पता है कि रचना गुस्से में पागल हो जाती है और कुछ भी कर सकती है, तो सभी इस बात का ध्यान रखते हैं।
वो तीनों बात कर ही रहे थे कि एक आदमी जिसने ड्राइवर की ड्रेस पहनी थी, वो अन्दर आया।
ड्राइवर- सर… आपके लिए शरद सर ने कार भेजी है।
अमर- हाँ ओके… तुम ये सामान लेकर चलो… हम आते हैं…!
तीनों उसके पीछे-पीछे चल दिए। अमर आगे बैठ गया और दोनों पीछे।
आधा घंटा कार चलती रही और फिर एक सुनसान एरिया में बहुत ऊँचाई पर एक बड़ा सा फार्म हाउस आता है, वहाँ कार रुक गई। ड्राइवर ने नीचे उतर कर गेट खोला.. तीनों उतर गये।
बाहर एक 30 साल का ठीक-ठाक सा दिखने वाला आदमी खड़ा उनको वेलकम करता है और उनसे कहता है आप मेरे पीछे आइए शरद सर अन्दर आपका वेट कर रहे हैं।
वो जब अन्दर जाते है तो ज़बरदस्त लाइटिंग हो रही थी और स्वीमिंग पूल के पास हट (झोपड़ी) बनी हुई थी.. जो काफ़ी बड़ी थी और सजी हुई थी।
रचना- वाउ.. क्या मस्त डेकॉरेशन है मज़ा आ गया देख कर…!
शरद- वेल्कम ब्यूटीफुल गर्ल्स…!
रचना- ओह वाउ.. शरद जी आपने तो काफ़ी अच्छा इंतजाम किया है।
शरद- अब आप सब पहली बार मेरे फार्म पर आए हो तो कुछ स्पेशल तो बनता है ना…!
अमर- हाँ यार, ये तो सही बात है.. इससे मिलो मेरी छोटी बहन ललिता…!
शरद ‘हाय सेक्सी’ बोलकर ललिता का हाथ पकड़ कर चूम लेता है। ललिता भी एक सेक्सी सी स्माइल दे देती है।
शरद ताली बजाता है तो पाँच-छह आदमी आते हैं।
शरद- सब काम हो गया न.. अब तुम सब बाहर जाओ।
वो सब बाहर चले गये, ड्राइवर अमर का सामान अन्दर रख गया।
शरद- ओके.. अब पार्टी शुरू करते हैं.. आ जाओ सब यहाँ आराम से बैठ कर ड्रिंक करेंगे।
शरद ने अच्छे से टेबल लगाई थी, सब वहाँ बैठ गए, शैम्पेन खोली गई.. सबने रचना को ‘विश’ किया और पीने का दौर शुरू हो गया।
उसके बाद बीयर की बोतलें खोली गई।
ललिता- न बाबा मैं नहीं पीऊँगी.. अभी सर घूम रहा है…!
शरद- अरे यार पार्टी का मज़ा लो.. नहीं पिओगी तो मज़ा कैसे आएगा लो..मेरे हाथों से पीओ।
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04-07-2019, 12:19 PM,
#17
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
सब ड्रिंक करने लगे। पंद्रह मिनट में ही रचना और ललिता एकदम टल्ली हो गई।
तब शरद ने अमर को इशारा किया और एक तरफ ले गया।
अमर- यार मज़ा आ गया.. अब बस जल्दी से मेरी खुराक दे दो।
शरद ने अपनी जेब से दो गोली निकाल कर अमर को दी।
शरद- ये खा लो, जब मैं कहूँ तब रचना को रूम में ले जाना ओके…!
अमर ने ख़ुशी-ख़ुशी वो गोली खा ली।
शरद- हे डार्लिंग.. थोड़ा डांस हो जाए…!
अमर अपने साथ रचना को ले गया और शरद ललिता को।
ललिता नशे में थी, उसके पैर लड़खड़ा रहे थे। इस बात का फायदा उठा कर शरद उसके मम्मों और गाण्ड से खेल रहा था।
ललिता- उहह.. शरद.. रचना ने आपकी जितनी भी तारीफ की.. आप उससे ज़्यादा अच्छे हो.. आप मुझे भी हिरोइन बना दो ना…!
शरद- बना दूँगा यार.. पहले तुम्हें उस काबिल तो बना दूँ.. आज रात तुम सब यहीं रहोगे न.. तो तुम मेरे साथ कमरे में सो जाना.. अच्छे से तुम्हें एक्टिंग सिखा दूँगा…!
ललिता- गुड.. मैं जानती हूँ तुम क्या करोगे.. हा हा हा… तुम मेरे साथ चुदाई करोगे.. मुझे सब पता है…!
शरद- तो क्या हुआ.. तुम भी तो यही चाहती हो न.. चलो अब हम चलते हैं.. मुझे भी तो अपनी जवानी का जलवा दिखाओ जान…!
ललिता- चलो.. लेकिन अमर भाई को क्या बोलोगे, अरे मैं तो भूल गई मेरा भाई तो खुद मुझे चोदेगा.. उसको क्या बोलना.. चलो चलो चलते हैं…!
शरद ललिता को अपनी बाँहों में भर कर जाने लगता है। अमर और रचना उनको देख कर मुस्कुराते हैं।
ललिता- बाय बाय.. मैं जा रही हूँ चुदने.. रचना तुम भी जाओ भाई के साथ ही..ही..ही.. लेकिन कोई फायदा नहीं भाई.. तो लूज़र है हा हा हा… मैं लूँगी मज़े और तुम ही ही ही… अगर मज़ा लेना हो तो आ जाना हमारे पास…!
शरद रचना और अमर को इशारा करके एक रूम में चला गया।
अमर- रचना, तुमने ललिता को क्या कहा, उसने मुझे लूज़र कहा..!
रचना- ओह सॉरी भाई.. मैंने मजाक में कहा था ! अब हम भी चलें, मेरा सर घूम रहा है…!
अमर- हाँ चलो बहना… अभी तो सर घूम रहा है, अब देखो मैं क्या-क्या घुमाता हूँ…!
शरद ने ललिता को रूम में ले जाकर बेड पर लिटा दिया।
ललिता- शरद तुम बहुत अच्छे हो.. आओ ना मेरे पास आ जाओ.. मुझे जी भर कर प्यार करो और प्लीज़ मुझे भी हिरोइन बनना है…!
शरद बुदबुदाता हुआ- हाँ जान आता हूँ… कैमरा तो चैक कर लूँ सालों ने बराबर लगाए हैं या नहीं.. आज तुम दोनों बहनों की शूटिंग का दिन है…!
ललिता- ओह वाउ.. आज शूटिंग होगी.. मेरा हीरो कहाँ है…!
शरद- मैं हूँ न.. रानी यह देखो… यह बटन दबाते ही इस घर के सारे कैमरे ऑन हो जाएँगे और सब कुछ रिकॉर्ड हो जाएगा…!
ललिता एकदम नशे में थी, उसको कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि शरद के इरादे क्या हैं।
ललिता- वाउ.. चालू करो न.. शरद.. नहीं आज से मैं तुमको शरद कहूँगी.. मेरे शरद आ जाओ ना… दबा दो बटन को…!
शरद- हाँ ये ठीक है तुम शरद ही कहना.. रूको मास्क तो लगा लूँ साली तेरी सील टूटने का वीडियो बना रहा हूँ, मेरी शक्ल थोड़े दिखानी है ग़लती हो गई, जो रचना के टाइम मास्क नहीं लगाया, लेकिन कोई बात नहीं, उसके तो अभी बहुत वीडियो बनेंगे ! और अब साथ में तेरे भी बन जाएँगे, और वो तुम्हारा हरामी भाई है ना उसको भी इस फिल्म में रोल दे दूँगा.. बरबाद कर दूँगा तुम सबको…!
शरद भी नशे में क्या से क्या बोल रहा था मगर ललिता कहाँ समझने वाली थी, वो तो खुद बदहवास हो रही थी।
ललिता- शरद आ जाओ ना यार…!
शरद ने मास्क लगा कर वीडियो ऑन किया और ललिता का जैकेट निकाल फ़ेंका।
उसके खड़े मम्मों देखकर उसका नशा दुगना हो गया और उन पर छोटे दो हल्के गुलाबी निप्पल गजब ढा रहे थे।
उसने जल्दी से ललिता की स्कर्ट और पैन्टी निकाल दी, उसकी चूत के होंठ पर तिल देखकर उसका लौड़ा फुंफकारने लगा।
एकदम कसी हुई करारी चूत थी, ललिता की चूत ऊपर से नोकदार किसी नाव की शेप में थी।
शरद- वाउ ललिता.. तुम तो गजब की आइटम हो… साली तेरा जिस्म देख कर ही मेरे लौड़े से बूँदें बाहर आने लगीं, आज तो तेरी चुदाई में मज़ा आ जाएगा…!

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ललिता पर नशा बहुत ज़्यादा हो गया था, वो बदहवास सी लेटी हुई थी।
शरद ने अपने कपड़े निकाल दिए, उसका लौड़ा लोहे की रॉड के जैसे गर्म हो रहा था।
उसने मास्क लगाया हुआ था, जैसे कोई रॉबरी करने वाले लगाते हैं। बस होंठ और आँख खुली हुई थीं।
शरद बेड पर ललिता के पास लेट गया और उसके नरम पंखुड़ी जैसे होंठों को चूसने लगा, अपने हाथ से उसके 34″ के मम्मों को मसलने लगा।
ललिता नशे में थी, पर इस अहसास को महसूस कर रही थी और अपने हाथ शरद की पीठ पर घुमाने लगी थी।
ऐसी जवानी पाकर शरद तो पागल हो गया था।
ललिता के होंठों का रस पीने के बाद अब वो निप्पल को चूसने लगा था, दूसरे निप्पल को चुटकी में लेकर दबा रहा था।
ललिता- आ आ..हह.. शरद.. उफ्फ मज़ा आ रहा है… तुम बहुत आ..हह…. अच्छा चूस रहे हो उफ्फ आ आ..हह…..!
शरद निप्पल चूसने में बिज़ी था तभी दरवाजे पर खटका हुआ, शरद ने जल्दी से उठ कर दरवाजा खोला, एक आदमी अन्दर आया।
ललिता तो नशे में थी, उसे कहाँ होश था कि कौन आया है।
शरद ने दरवाजे बन्द कर दिया और वो आदमी अन्दर आ कर खड़ा ललिता को देखने लगा।
दोस्तो, अब यह कौन आ गया बीच में मज़ा खराब कर दिया.. यह कौन है, मैं आपको बाद में बताऊँगी.. चलो तब तक हम अमर का हाल जान लेते हैं।
अमर- रचना, तुम इस ड्रेस में बहुत सेक्सी लग रही हो…!
रचना- अच्छा तो फिर जो करना है ऐसे ही करो नहीं निकालती में ड्रेस हा हा… हा हा हा…!
अमर- ओह मजाक मत करो यार… अब जल्दी से निकालो ना नहीं तो मैं फाड़ दूँगा…!
रचना- हे रूको.. कपड़े फाड़ दोगे तो मैं कल घर क्या नंगी जाऊँगी…!
अमर- तो निकालो जल्दी.. मेरा लौड़ा लोहे जैसा कड़क है ये देखो…!
अमर ने पैन्ट निकाल कर रचना को लौड़ा दिखाया, वो वाकयी में तना हुआ था।
रचना- वाउ भाई.. आज तो आपका लौड़ा बहुत अच्छा लग रहा है…!
रचना उसके पास आकर बैठ गई और लंड को चूसने लगी।
अमर- आ आ उफ्फ, कितने नरम होंठ हैं तेरे आ मज़ा आ गया उफ्फ…!
रचना मस्ती में लौड़े को चूस रही थी और अमर मज़ा ले रहा था।
पाँच मिनट के बाद अमर से सब्र नहीं हुआ और उसने रचना के बाल पकड़ कर उसको खड़ा कर लिया और उसके कपड़े निकालने लगा।
रचना- आऊच.. क्या करते हो भाई.. आराम से .. मैं निकालती हूँ ना…!
अमर- अब सब्र नहीं होता बहना.. मैं आज तेरी चूत का भुर्ता बना दूँगा…!
रचना के चेहरे पर हँसी आ गई, वो मन में सोचने लगी कि इस लौड़े से अमर क्या भुर्ता बनाएगा, शरद के बम्बू से सील तुड़वाई है अब तो वो ही अमर पर भारी पड़ेगी।
अमर ने रचना को नंगा कर के बेड पर लिटा दिया और खुद उसके मम्मों को चूसने लगा और लंड को चूत पर रगड़ने लगा।
रचना- आ आ..हह.. उफ्फ भाई तुम्हारा लौड़ा उफ्फ चुभ रहा है आ..हह.. धीरे दबाओ ना मम्मों को उफ्फ आ…!
अमर बड़ा बेसब्र हो रहा था। वो कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था इसलिए ज़्यादा वक्त बर्बाद ना करते हुए उसने लौड़ा चूत पर सैट किया और जोरदार धक्का मार दिया। पूरा लौड़ा चूत में समा गया।
रचना- आआआअ उफफफफ्फ़ धीरे से आह डालना था न… उफ्फ मेरी तो आह आ. जान निकाल दी..!
अमर- आ मज़ा आ गया.. तेरी यही चीख सुननी थी। तुझे अपने बॉय-फ्रेंड से चुदाई के वक्त दर्द नहीं हुआ क्या जो अब नाटक कर रही है.. आ..हह.. उहह ये ले उहह ये ले साली आह आ..हह…..!
रचना- आ आह आ..हह.. उ उई छोड़ो आ भाई आ..हह.. अब मज़ा आ रहा है उफ्फ फक मी ब्रो.. आ..हह.. गो डीप आ..हह.. या या या उफ़फ्फ़ टीज वन्स आ..हह.. अगेन.. फक डीप आ आ..हह.. उ…!
अमर को शरद ने पावर तब दी थी जिसके कारण वो अँधा-धुंध शॉट मार रहा था और रचना भी नशे में थी.. तो उसको भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था।
दोस्तो, मैं आपको बता दूँ कि रचना ने कम बीयर पी थी इसलिए वो होश में थी लेकिन ललिता को शरद ने एकदम टाइट कर दिया था, इसलिए वो एकदम मदहोश हो चुकी थी।
रचना- आ..हह.. फास्ट ब्रो आ..हह.. फक योर लिटल सिस आ आ..हह….!
अमर- ..उहह आ आ..हह.. ये ले उफ्फ आज मेरा अरमान पूरा हुआ.. आ..हह.. ले ले आ…!
पंद्रह मिनट तक अमर झटके मारता रहा।
रचना- आ आह या या ज़ोर से आ और ज़ोर से उ आह फक मी हार्ड आह बी वाइल्ड आ आ मैं जा रही हूँ आ..हह.. भाई प्लीज़ आह फास्ट उई फास्ट आह…और फास्ट आह उईईई आआआ आआ…!
रचना ने अमर के लौड़े को चूत में जकड़ लिया और झड़ने लगी। कभी उसकी चूत सिकुड़ती.. कभी खुलती.. अमर भी उसी स्पीड में लगा हुआ था।
अमर- आ उह उहह आ..हह.. क्यों रचना आ निकाल दिया ना आह उहह तेरा पानी आह.. मेरा अभी नहीं निकलेगा आह… आज तुझे थका दूँगा आ उहह ले उहह…!
रचना- ओके भाई आह.. करते रहो उफ्फ मैं जानती हूँ आह.. अई यह सब शरद का कमाल है आ वो जादूगर है कुछ भी अई आह आ कर सकता है आ आह.. आज तो ललिता का हाल बिगाड़ देगा वो.. आह.. काश मैं देख पाती आह आह…!
अमर- हाँ बहना आह.. मुझे भी देखना था आह.. हम जल्दी से खत्म करके उफ्फ उधर जाएँगे आह.. ललिता की चुदाई आ..आह देखेंगे आ…!
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04-07-2019, 12:20 PM,
#18
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
अमर लगातार झटके देकर थक गया था, तब उसने लौड़ा बाहर निकाल लिया और रचना को ऊपर ले लिया। अब रचना ऊपर से उछल-उछल कर चुद रही थी। उसकी चूत में फिर से खुजली हो गई थी। अब वो गाण्ड उछाल-उछाल कर लौड़े पर कूद रही थी।
अमर- आ आ..हह.. आ मज़ा आ गया.. कूदो बहना आ उफ्फ आ..!
रचना- अई अई इ इ उफ़फ्फ़ आ आ फक आ आ ई फक यू भाई आ ओह..!
इन दोनों को चुदाई करते हुए पूरे 40 मिनट हो गए थे, अब जाकर अमर के लौड़े में झनझनाहट हुई।
अमर- आ उफ्फ मेरा पानी निकलने वाला है आ आह…!
रचना- उफ्फ… आआ… आईईईई… आआ… मेरा भी अई आ आ उफ्फ आया आया अई…!
रचना ज़ोर-ज़ोर से उछलने लगी, नीचे से अमर झटके मारने लगा और एक साथ दोनों झड़ गए। रचना लंबी सांस लेती हुई अमर पर ढेर हो गई।
अमर भी हाँफ रहा था। उसने रचना को नीचे उतारा और लंबी सांस के साथ रिलेक्स हुआ।
दोनों एक-दूसरे के पास लेटे हुए मुस्कुरा रहे थे जैसे कोई किला फतह करके आए हों।


दोनों एक-दूसरे के पास लेटे हुए मुस्कुरा रहे थे जैसे कोई किला फतह करके आए हों।
रचना- क्या देख रहे हो भाई…!
अमर- तुम्हें देख रहा हूँ न… कल तक तो में खेल-खेल में तुम्हारे मम्मों को टच करता था। लौड़ा चूत पर रगड़ता था और आज देखो तुम मेरे सामने नंगी पड़ी हो, जब चाहूँ मम्मों को दबा दूँ.. चूत चाट लूँ.. चुदाई कर दूँ.. है ना…!
रचना- हाँ भाई सही कहा आपने.. आप जब खेल के समय ये सब करते थे न..तो चूत एकदम गीली हो जाती थी। आपको पता है मैं और ललिता सेक्सी वीडियो देखते थे और सोचते थे कि कब हमको भी लौड़ा मिलेगा। अब देखो दोनों बहनें एक साथ चुद रही हैं।
अमर- अरे ललिता से याद आया… चलो उसको देख कर आते हैं क्या हाल है उसके.. शरद में बहुत पावर है.. वो पक्का अभी तक चोद रहा होगा…!
दोनों जल्दी से खड़े हुए और बिना अंडरगारमेंट के कपड़े पहन कर शरद के रूम की तरफ गए।
अमर- अन्दर से तो कोई आवाज़ नहीं आ रही क्या बात है, ललिता की सिसकारियाँ तो सुनाई देनी चाहिए ना..!
रचना कुछ नहीं बोली और दरवाजा खटखटाया, अन्दर से शरद की आवाज़ आई- बस दो मिनट..!
रचना- ओके… पर जल्दी खोलो हमें ललिता को देखना है।
कुछ मिनट बाद दरवाजा खुलता है। शरद ने तौलिया बाँधा हुआ था और ललिता बेड पर पड़ी सिसक रही थी। उसकी आँखों में आँसू थे और बेड पर खून ही खून था।
यह नजारा देख कर अमर की तो सांस अटक गई। रचना भाग कर ललिता के पास गई और उसका सर अपनी गोद में रख लिया।
ललिता की आँखों से लगातार आँसू गिरना जारी थे, पर वो कुछ बोल नहीं रही थी।
अमर- ओ माई गॉड… यार ये क्या कर दिया तुमने इतना खून…!
शरद- टेंशन मत लो यार… मुबारक हो ललिता सील पैक थी.. किसी से चुदी हुई नहीं थी। इसका मुहूर्त मैंने ही किया है.. थैंक्स यार ऐसी कच्ची कली को तोड़ने का मौका देकर तूने मुझे अपना कायल बना लिया है।
अमर- यार इसे हुआ क्या है.. ये रो क्यों रही है और कुछ बोलती क्यों नहीं?
शरद- अरे कुछ नहीं हुआ है यार.. थोड़ा दर्द है अभी ठीक हो जाएगी। तुम दोनों जाओ एंजाय करो यार…!
रचना- लेकिन शरद जी आप इसको बाथरूम तक तो लेकर जाओ पूरा खून ही खून हो गया है।
शरद- यार तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे मुझे कुछ पता नहीं है तुम जाओ मैं सब संभाल लूँगा…!
ललिता कुछ बोल तो नहीं पा रही थी, पर कोशिश करके वो बोली- द दीदी आप जाओ.. आ..हह.. शरद की बात मानो आ आ एंजाय करो आ मैं ठीक हूँ आह..!
अमर- लेकिन ललिता तुम्हें दर्द हो रहा होगा यार शरद तुम भी ना क्या हाल बना दिया इसका ऐसे कोई करता है क्या…!
शरद- अरे यार अब तुमको कैसे समझाऊँ पहली बार में ऐसा होता है। ये ठीक है कुछ नहीं हुआ इसको.. तुम लोग जाओ.. थोड़ी देर में यह बिल्कुल ठीक हो जाएगी। मैं खुद तुमको बुला लूँगा और हम चारों यहीं एक साथ चुदाई करेंगे.. अभी तुम जाओ…!
ललिता- आ हा भाई आ आप जाओ आ मैं ठीक हू आ.ह..!
ललिता के कहने पर वो दोनों वहाँ से चले गए। रचना तो जानती थी ये सब साधारण बात है। उसकी भी यही हालत हुई थी।
दोनों वापस अपने रूम में चले आए।
दोस्तो, आप सोच रहे होंगे इन पाँच मिनट में ऐसा क्या हुआ होगा, वो आदमी कौन था जो आया था, तो आप टेंशन ना लो, मैं बताती हूँ चलो वापस पीछे चलते हैं।
मैं पीछे की कुछ लाइन वापस लिख रही हूँ ताकि आपको अच्छे से समझ आ जाए कि क्या हुआ था ओके..!
शरद तो पागल हो गया था ऐसी जवानी पाकर ललिता के होंठों का रस पीने के बाद अब वो निप्पल को चूसने लगा था। दूसरे निप्पल को चुटकी में लेकर दबा रहा था।
ललिता- आ आ शरद उफ्फ मज़ा आ रहा है तुम बहुत आ अच्छा चूस रहे हो उफ्फ आ आ.
दोस्तों शरद निप्पल चूसने में बिज़ी था तभी दरवाजे पे नॉक होती है और शरद जल्दी से उठ कर दरवाजे खोल देता है। एक आदमी अन्दर आ जाता है ललिता तो नशे में थी। उसे कहाँ होश था कि कौन आया है। शरद ने दरवाजे बन्द कर दिया और वो आदमी अन्दर आ कर खड़ा ललिता को देखने लगता है।
शरद- यार सचिन क्या बात है, यहा क्यों आ गए…!
सचिन- अरे यार क्या बताऊँ मुझ से रहा नहीं गया.. क्या सेक्सी आइटम है यार..! इसकी चुदाई का तो वीडियो एकदम करीब से बनाऊँगा देख मैं कैमरा साथ लाया हूँ..!
शरद- अरे इतने कैमरे तो लगे हैं फिर ये क्यों…!
सचिन- हाँ पता है, पर इसकी चूत पर जो तिल है उसको ज़ूम करके लूँगा तो मज़ा नहीं आएगा इसलिए नज़दीक से लूँगा.. यार तू चालू रख अपना प्रोग्राम..!
ललिता- उहह शरद कहाँ चले गए आ आओ ना आ मेरे जिस्म में आग लग रही है आ जाओ ना..!
सचिन- जाओ यार, साली खुद बुला रही है कि आओ मुझे चोदो.. जाओ भाई.. देर क्यों करते हो.. आप कहो तो मैं चला जाऊँ क्या…!
शरद- हे अपनी हद में रहो.. वक़्त आने पर तुम भी मज़े ले लेना.. ओके अब कैमरा चालू करके उसके सेक्सी पोज़ ले लो.. डरो नहीं नशे में है। उसको कुछ पता नहीं चलेगा कि इस कमरे में मेरे अलावा भी कोई है। जाओ लेलो पोज़…!
सचिन करीब जाकर ललिता की वीडियो बनाने लगा, ज़्यादातर वो चूत का पोज़ ले रहा था और अपने हाथ से छू कर मज़ा भी ले रहा था।
ललिता- उई उफ्फ मत तड़पाओ आ जाओ ना शरद आ.हह..!
शरद बेड पर आ जाता है और सचिन को इशारा करके पीछे कर देता है।
ललिता- आ..हह.. शरद कहाँ हो मुझे नींद आ रही है। आ जाओ ना…!
शरद दोबारा ललिता के निप्पल को चूसने लगता है और अपना लौड़ा उसकी चूत पर रगड़ने लगता है।
ललिता- आ आ उफ्फ मज़ा आ रहा है.. तुम आ कितने अच्छे हो आ उई…!
पाँच मिनट तक शरद मम्मों के मज़े लेता रहा उसके बाद वो उल्टा होकर ललिता पर लेट गया और अपना लौड़ा उसके मुँह में डाल दिया। ललिता को यह अहसास हुआ तो आँखें बन्द किए हुए ही वो लौड़ा चूसने लगी और शरद उसकी चूत चाटने लगा।
काफ़ी देर तक शरद चूत चाटता रहा और अपनी ऊँगली से उसे खोलने की कोशिश करता रहा। जब शरद चूत में ऊँगली डालता तो ललिता दर्द के कारण “उउउउउउ” करती और सचिन पोज़ को नज़दीक से लेता।
अब शरद का लौड़ा जवाब दे रहा था। उसको चूत चाहिए थी इसलिए शरद उठा और ललिता के दोनों पैर मोड़ कर साइड में कर दिए उसकी कमर के नीचे तकिया लगाया, जिससे उसकी चूत ऊपर उठ गई।
ललिता- आ आ..हह.. शरद कितना मज़ा आ रहा था उफ्फ चाटो ना.. मेरी चूत को आ आ.हह..!
शरद ने पास में रखी तेल की शीशी ली और ललिता की चूत पर ढेर सारा तेल लगाया और अपनी ऊँगली से अन्दर करने लगा।
ललिता- आ उफ्फ शरद दुखता है.. आ उई आ आ…!
सचिन पास खड़ा चूत का पोज़ ले रहा था और अपने एक हाथ से ललिता के मम्मों को भी दबा रहा था। शरद अपनी ऊँगली से ललिता की चूत को चोदने लगा ताकि आयल अच्छे से चूत में समा जाए और लौड़ा फिसल कर अन्दर जाए उसको तकलीफ़ कम हो।
पाँच मिनट तक शरद ऊँगली से चूत को चोदता रहा ललिता की चूत पानी छोड़ रही थी जिससे वो एकदम गीली हो गई थी और तेल ने भी अपना काम कर दिया था।
शरद ने लौड़े पर भी अच्छे से आयल लगाया और चूत की फाँक खोल कर टोपी अन्दर फंसा दी।
ललिता- आआ उउइई शरद बहुत दर्द हो रहा है आ.हह..!
!
सचिन- भाई टोपी फँसाई तो इसका ये हाल है, अब तो भयंकर चीख निकलेगी इसकी…!
शरद- निकलने दो.. तभी तो लोगों को पता चलेगा कि ये कुँवारी कली है…अच्छे से रिकॉर्ड करना तुम…!
शरद ने लौड़े पर दबाव बनाया और एक इंच लौड़ा अन्दर घुसा दिया, चूत बहुत टाइट थी अगर तेल ना होता तो लौड़ा छिल जाता या चूत छिल जाती, चूत इतनी टाइट हो रही थी कि लौड़ा घुसते ही उसका दर्द के मारे ललिता का बदन अकड़ने लगा नशा उतरने लगा था।
ललिता- उई शरद उफ़फ्फ़ रूको अई बहुत दर्द हो रहा है, अई आह उ प्लीज़ रूको आ धीरे से आ आ.हह..!
शरद- मेरी जान अभी सील टूटी नहीं है अब दाँत भींच लो और देखो कैसे तुम्हें कली से फूल बनाता हूँ…!
इतना कहकर शरद ने कमर को पीछे किया और जोरदार धक्का मारा.. 4″ लौड़ा सील तोड़ता हुआ चूत में फँस गया।
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04-07-2019, 12:20 PM,
#19
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
शरद को बहुत ज़्यादा ताक़त लगानी पड़ी थी सील तोड़ने के लिए। कमसिन चूत में आख़िर इतना मोटा लौड़ा गया था, तो ज़ोर तो आना ही था ना…!
ललिता- आआआआ आआआआ मुम्मय्ययययई मार गई आआआआअ…!
दिल दहला देने वाली चीखें कमरे में गूंजने लगीं। सचिन से यह देखा नहीं गया तो उसने उसके होंठों पर हाथ रख दिए।
शरद- सचिन.. अब निकल लो बेटा.. इसका नशा उतर गया है जल्दी करो…!
सचिन चुपचाप दरवाजे खोल कर निकल गया दरअसल मैं आपको बता दूँ सचिन एक 25 साल का हैण्डसम लड़का है और यह कौन है शरद को कैसे जानता है ये सब वक्त आने पर आप जान जाओगे।
शरद ने ललिता के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूसने लगा।
दर्द के मारे ललिता का सारा नशा उतर गया था।
शरद उसी पोज़ में लेटा रहा, उसका लौड़ा चूत में फँसा हुआ था और उसे अहसास हो रहा था कि ललिता की चूत से खून रिसने लगा है।
वो बस ललिता के होंठों को चूसने में लगा हुआ था और ललिता रोए जा रही थी। उसका दम घुटने लगा था। तब उसने हाथ से शरद को हटाना चाहा, मगर शरद कहाँ हटने वाला था..!
थोड़ी देर बाद जब ललिता ढीली पड़ी तो शरद ने अपने होंठ हटाए।
ललिता- अया ह आह आ शरद प्लीज़ मेरी जान निकल जाएगी आह.. उठ जाओ न…आ आज के लिए बस इतना काफ़ी है आह.. प्लीज़ शरद आ मुझे बहुत दर्द हो रहा है आहह..!
शरद- सॉरी जान मैं जानता हूँ दर्द बहुत ज़्यादा है, पर पहली बार तो सब को सहना पड़ता है.. तुम बस आज बर्दाश्त कर लो फिर सब ठीक हो जाएगा। रचना को देखो दो ही दिन में उसकी चूत को ऐसा घिसा कि आज अमर से मज़े लेकर चुद रही है।
ललिता- आ मई आ ज ज्जानती हूँ एमेम मैं पर दर्द बहुत हो रहा है आ..हह…..!
शरद- कोई बात नहीं मैं हिलूँगा नहीं.. जब तक तुमको सुकून ना मिले अब कैसा लग रहा है.. दर्द कम हुआ या नहीं…!
ललिता- आ आ हा थोड़ा सा कम हुआ.. आ पर आ..हह….!
शरद- अब मैं धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करता हूँ ताकि जितना गया है उसको चूत में एडजस्ट कर दूँ.. बाद में तुमको मज़ा आएगा…!
ललिता आँखों से ‘हाँ’ का इशारा कर देती है।
अब शरद धीरे-धीरे लंड को हिलाने लगता है और ललिता की जान निकलने लगती है। उसकी चूत में बेन्तहा दर्द होने लगता है। वो रोती रहती है।
शरद- आ..हह.. सेक्सी क्या टाइट चूत है.. यार बहुत ताक़त लगानी पड़ रही है..उफ्फ अब तो पूरा लौड़ा जाएगा तभी कुछ मज़ा आएगा जान.. अब मुझ से बर्दाश्त नहीं हो रहा.. मैं डाल रहा हूँ तुम प्लीज़ एक बार बर्दाश्त कर लो बस…!
ललिता- अई आ इतना दर्द आ क्या कम है जो अब और सहूँ आ डाल दो शरद आ..हह.. आपकी ख़ुशी के लिए आ..हह.. सह लूँगी उफ्फ आ आ आ…!
शरद ललिता की गरदन पर चुम्बन करने लगा और उसके होंठों को चूसने लगा, अपने लौड़े को पीछे खींच कर एक तगड़ा धक्का मारा।
7″ लौड़ा चूत में घुस गया पर रुक गया जैसे आगे कोई दीवार आ गई हो..
शरद ने दोबारा लौड़ा बाह्र निकाल कर ज़ोर से झटका मारा तो फिर लौड़ा वहीं जाकर टकराया, पर उसको बर्दाश्त नहीं हुआ और वो बार-बार झटके मारने लगा।
पाँच बार के प्रयास के बाद आख़िर लौड़े ने अपनी जगह बना ही ली और पूरा का पूरा चूत में समा गया।
ललिता का मुँह बन्द था, वरना पूरा फार्म सर पर उठा लेती वो.. और दर्द की वजह से उसकी सांस हलक में अटक गई, उसे चक्कर आने लगे और वो अपनी बहन की तरह बेहोश तो नहीं हुई, पर कुछ बाकी भी ना रहा।
शरद जानता था जितना जल्दी शॉट मारेगा उतनी ही जल्दी ललिता की चूत का दर्द कम होगा।
ललिता की आँखों से आँसू और चूत से खून लगातार जारी था।
पंद्रह मिनट तक शरद ताबड़तोड़ लौड़ा पेलता रहा।
दोस्तो, सच कहूँ ललिता को दर्द इतना था कि उसको ओर्गज्म का अहसास ही नहीं हो रहा था, पर वो दो बार झड़ चुकी थी।
अब उसके शरीर में जान ना के बराबर थी।
शरद ने उसके मुँह को आज़ाद किया और लौड़े की धक्कमपेल को रोका।
ललिता- अहह र र शरद आ मु मु मुझे सांस आ लेने में आ..हह.. तकलीफ़ ह हो रही है अई बदन में बहुत दर्द ह हो रहा है…!
शरद- जान तुम बहुत पावरफुल गर्ल हो इतने दर्द के बाद भी होश में हो…रचना तो बेहोश हो गई थी आई प्राउड यू माई लिटल गर्ल.. अब सब ठीक है लौड़ा पूरा अन्दर जा चुका है… अब तुम मज़ा लेने के लिए तैयार हो जाओ… पर एक-दो बार और दर्द होगा.. फिर अपनी चूत में चाहे जितने लौड़े लेना हा हा हा हा..!
शरद को हँसता देख कर ललिता भी मुस्कुरा दी पर उसकी आँखों में अब भी आँसू जारी थे।
शरद- जान बस थोड़ी देर और सह लो आ..हह.. मेरा लौड़ा चूत में जकड़ा हुआ है उफ्फ…!
शरद फिर से शॉट लगाने लगा, ललिता जल बिन मछली की तरह तड़पती रही.. चीखती रही.. पर शरद अपने बम्बू को आगे-पीछे करता रहा।
ललिता- एयाया आआआ ह ओई मम्ममी आआ मारी आ..आ..हह.. प्लीज़ अई अई…!
शरद.- उहह उहह उहह बस आ..हह.. थोड़ी देर और आ आह उः उहह आआआ मेरा पानी अई आ रहा है लो रानी आ..हह…..!
शरद के लौड़े ने पानी की पिचकारी चूत में मारी जिसकी गर्माहट से ललिता का भी पानी निकल गया।
यह उसका तीसरी बार था, पर अबकी बार उसको चूत में गुदगुदी हुई और झड़ने का मज़ा आया।
ललिता- आ..हह.. आह उफ़फ्फ़ उईईईई आ..हह.. मेरा भी निकल आ..हह.. रहा है…!
ललिता की चूत पानी से भर गई थी।
शरद उसके ऊपर से उठा तो ‘पक्क’ की आवाज़ से लौड़ा बाहर आया और ललिता एक बार ज़ोर से चीखी और उसकी आँखों में दोबारा आँसू आ गए।
शरद खड़ा हुआ और बेड का हाल देखा खून से लाल था और उसका लौड़ा भी खून और वीर्य से लथपथ हो रहा था उसने चादर से अपना लौड़ा साफ किया और कैमरा के पास जाकर बेड को ज़ूम करके पोज़ लिया। उसने नकाब उतार कर रख दिया था।
ललिता- उफ्फ ओ माई गॉड आ..हह.. इतना दर्द आ..हह.. मैंने सहा कैसे उई मैं मरी क्यों नहीं.. शरद आ और ये नकाब क्यों लगाया था उफ्फ आ…!
शरद ने कैमरा पर कैप लगा दिया पर बन्द नहीं किया। तभी फ़ोन की घंटी बजी, शरद ने फ़ोन उठाया।
शरद- हैलो हाँ कहो.. क्या हुआ…!
सचिन- वो दोनों तुम्हारे रूम की ओर आ रहे हैं।
शरद- ओके बाय।
शरद ने पास पड़ा तौलिया लपेट लिया।
शरद- जान, अमर और रचना आ रहे है तेरा हाल-चाल पूछने उन्हें वापस भेज देना ओके.. आगे का प्रोग्राम मैं तुम्हें बाद में बताता हूँ ओके माई स्वीट जान…!
ललिता- आ..हह…. ओके अई दर्द से जान निकल रही है उफ्फ ये फ़ोन किसका था आ..हह.. आपको कैसे पता आ वो आ रहे है…!
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
शरद ने बेड के करीब आकर कहा- बस दो मिनट रूको, सब बाद में बताऊँगा.. पहले उनको वापस भेजो ओके…!
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04-07-2019, 12:20 PM,
#20
RE: Kamukta Story कामुक कलियों की प्यास
दोस्तो, आगे क्या हुआ वो तो आप जानते ही हो कि ललिता का हाल जानने ये रचना और अमर आए हैं तो चलो अब अमर और रचना के पास चलते हैं। वो वापस अपने रूम की ओर जा रहे हैं और रास्ते में उनकी बातचीत हो रही है।
अमर- रचना यार मुझे ललिता के लिए बहुत चिंता हो रही है कितना खून निकला उसका.. उफ्फ मेरी तो हालत खराब हो गई देख कर…!
रचना- अरे भाई ललिता को कुछ नहीं होगा.. आप रूम में चलो मैं सब समझाती हूँ आपको…!


अमर और रचना वापस अपने रूम की ओर जा रहे हैं और रास्ते में उनकी बातचीत हो रही है।
अमर- रचना यार मुझे ललिता के लिए बहुत चिंता हो रही है कितना खून निकला उसका उफ्फ मेरी तो हालत खराब हो गई देख कर।
रचना- अरे भाई कुछ नहीं होगा ललिता को.. आप रूम में चलो मैं सब समझाती हूँ आपको…!
रूम में जाकर अमर बेड पर लेट गया और रचना उसके पास बैठ कर उसके बालों को सहलाने लगी।
अमर- रचना अब बताओ क्या बताने वाली थी?
रचना- भाई यही कि जो खून देख कर आप घबरा रहे हो वो सील टूटने पर आता है, मुझे भी बहुत आया था, जब शरद ने मेरी सील तोड़ी थी।
अमर- क क क्या तुम्हारी सील शरद ने तोड़ी थी.. ओ माई गॉड..!
दोस्तो, लो खुल गई पोल शरद की.. अब देखो मज़ा…!
रचना सकपका जाती है कि उसने ये क्या बोल दिया.. वो बात को संभालती हुई।
रचना- ओह सॉरी ग़लती से बोल दिया शरद ने नहीं मेरे बॉय-फ्रेंड ने जब पहली बार चुदाई की थी उस टाइम बहुत दर्द हुआ था और खून भी आया था।
अमर- लेकिन अभी तुमने शरद क्यों कहा..! सच बताओ माजरा क्या है…!
रचना- ओह्ह कहा है तो हम कल से शरद शरद कर रहे हैं इसलिए गलती से उनका नाम ज़बान पर आ गया यार ! और शरद कैसे सील तोड़ेगा हा मेरे बॉय-फ्रेंड के बाद आपने मुझे चोदा और आपके कहने पर मैंने शरद के लिए ‘हाँ’ की उसका नम्बर तो बहुत बाद में आया था, लेकिन मज़ा बहुत दिया शरद ने, यह मैं जरूर बोलूँगी…!
अमर- हाँ ये तो है.. मैंने देखा था और दो बार मूठ भी मारी थी.. तुम्हारी चुदाई देख कर…!
रचना- क्या भाई, आप अपनी बहन की चुदाई देख रहे थे.. आपको शर्म नहीं आई क्या…!
अमर- अरे बहना शर्म कैसी.. जब मैं खुद तुम्हें शरद से चुदाई करने का बोल सकता हूँ, तुमको चोद सकता हूँ तो देखने में क्या हर्ज है.. अब देखो इन बातों से लौड़ा कैसे तन गया है…!
रचना- तो आ जाओ, अभी उसका तनाव कम कर देती हूँ…!
दोनों एक-दूसरे से लिपट गए और चुम्बन करने लगे। चुम्बन के दौरान वो दोनों एक-दूसरे के कपड़े निकालने लगे। पाँच मिनट के अन्दर दोनों नंगे बेड पर लिपटे हुए पड़े थे, जैसे कोई साँप चंदन के पेड़ से लिपटा हुआ हो।
दोनों के हाथ और होंठ बराबर चल रहे थे। कभी रचना गर्दन को चूमती, तो कभी होंठों को और शरद तो निप्पल का रस पीने में मस्त था, उसके हाथ चूत को सहला रहे थे। दोनों चुसाई में लगे हुए थे।
दोस्तो, एक बात बता दूँ इन दोनों ने बीयर कम पी थी इसलिए इन पर ज़्यादा नशा नहीं चढ़ा था। इनको चूमा-चाटी करने दो.. आओ ललिता का हाल देख आते हैं।
क्योंकि आप सब के जेहन में कई सवाल चल रहे हैं.. जिनका जवाब उसी कमरे में मिलेगा !
तो आइए वहाँ भी देख लेते हैं कि वहाँ क्या हो रहा है।
अमर और रचना के जाने के बाद शरद ने कमरा लॉक कर लिया।
शरद- ओह माय डार्लिंग यू आर सो स्वीट… अच्छा किया जो उनको जल्दी भगा दिया…!
ललिता- आ..हह.. अब मुझे उठाओ भी.. उफ्फ जान निकल रही है.. अई.. मैं हिल भी नहीं पा रही हूँ…!
शरद उसे गोद में उठा कर बाथरूम तक लेकर गया, बाथटब के पास बैठा कर गर्म पानी से उसकी चूत का खून साफ करने लगा।
ललिता- आआईइ ससस्स बहुत दु:खता है.. आ आराम से रब करो ना उफ्फ…!
शरद ने उसकी बातों की परवाह किए वगैर उसको अच्छे से साफ कर दिया और टब में गर्म पानी डालकर उसको अन्दर बैठा दिया।
शरद- जान, इस गर्म पानी में आराम से बैठो और हाथ से चूत को धीरे-धीरे सहलाती रहो सारा दर्द निकल जाएगा, मैं अभी आता हूँ।
!
शरद अपना लौड़ा धोकर बाहर निकला और चादर उतार कर कोने में डाली, नीचे प्लास्टिक शीट पर भी खून लगा था, उसको भी उतार कर कोने में डाल दिया, अलमारी से नई चादर बेड पर डाल कर उसने अपने कपड़े पहने और कैमरा चैक किया जिसके साइड में छोटी स्क्रीन थी.. उसे ऑन करके देखा- ..अमर और रचना लिपटे हुए चुम्मा-चाटी कर रहे थे।
वो मुस्कुराता हुआ स्क्रीन बन्द करके कमरे के बाहर चला गया।
शरद सीढ़ियों पर चढ़ कर ऊपर कोने के एक कमरे के पास गया और दरवाजा खटखटाया।
अन्दर से सचिन ने दरवाजा खोला और शरद अन्दर चला गया।
वहाँ सचिन के अलावा एक और आदमी था जो बैठा हुआ शराब पी रहा था।
शरद- अबे साले, कितनी पिएगा अब बस भी कर…
सचिन- यार यह अशोक ज़्यादा उतावला हो रहा है। तुम लोगों की लाइव चुदाई देख कर इसका दिमाग़ खराब हो गया है।
अशोक- अबे चुप साले.. मुझे रोक लिया नहीं तो आज मैं उन दोनों बहनों का गेम बजा देता… साली क्या गजब की आइटम गर्ल है वो.. अगर शरद तू मेरा दोस्त नहीं होता न.. तो मैं कब का जाकर उन दोनों को चोद देता.. प्लीज़ यार अब तो दिलवा दे ना मुझे उनकी चूत…!
शरद- यार सब्र करो दिलवा दूँगा.. बस आज की रात रुक जा.. कल रात को पक्का वो तेरी बाँहों में होगी.. अब तो दोनों को यहीं रखेंगे.. अब कहाँ जाएंगी साली…!
अशोक- हा हा हा साली दोनों बहनों को अपनी रखैल बना कर रखेंगे.. मगर उस बहनचोद का क्या करोगे यार?
शरद- कल सुबह मैं रचना के मुँह से उन दो हरामियों का नाम पूछूँगा और उसके बाद उन दोनों के साथ इस हरामी को भी खत्म कर दूँगा…
अशोक- शरद मैं मारूँगा उन कुत्तों को.. मेरी सिमी का बदला मैं लूँगा उनसे.. और रचना से जब मेरा मन भर जाएगा तो इसे इतनी भयंकर मौत दूँगा कि इसकी रूह भी कांप जाएगी…!
शरद- क्यों अशोक सिमी सिर्फ़ तुम्हारी थी मेरी कुछ नहीं थी क्या..? हम दोनों मिलकर उसका बदला लेंगे…!
सचिन- यार शरद, इस अशोक ने आधी-अधूरी बात बताई है.. आख़िर सिमी के साथ ऐसा क्या हुआ था और यह रचना तो सिमी की बेस्ट फ्रेण्ड थी ना फिर इसने ऐसा क्यों किया बताओ ना यार?
शरद- तुम सिमी को कब से जानते हो?
सचिन- यही कोई 8 महीने पहले जब वो इंडिया आई थी अशोक के साथ तब से जानता हूँ। अशोक को तो बहुत पहले से जानता हूँ पर सिमी को उस वक्त पहली बार देखा था। बहुत स्वीट-गर्ल थी वो, उसकी मौत का सुनकर मुझे बहुत दु:ख हुआ था, पर उस समय कारण पता नहीं था…!
शरद- रचना को कैसे जानते हो?
सचिन- सिमी ने ही बताया था इसके बारे में.. वो मुझे अपना भाई मानती थी और अक्सर रचना के बारे में बात करती थी। उसने कई बार मुझे और अशोक को उससे मिलाना चाहा, पर मौका ही नहीं मिला, उससे मिलने का.. उसकी मौत के बाद अशोक भी एकदम टूट गया था। जब तुम आए और तुमने कहा कि सिमी के साथ कुछ गलत हुआ तो तब हम दोनों का दिमाग़ घूम गया, पर यार अभी भी तुमने बताया नहीं कि तुमको पता कैसे चला और ऐसा क्या हुआ जो तुम ये सब कर रहे हो?
शरद- बता दूँगा.. कल सारी बात बता दूँगा अभी बस वीडियो बनाओ, मैं जाता हूँ ललिता कहीं बाहर ना आ जाए…!
अशोक- उसकी हिम्मत नहीं है यार.. तुमने साली का हाल बिगाड़ दिया है.. जाओ जाकर बाथरूम से उठाओ उसे.. यह देखो साली कैसे चूत को सेंक रही है…!
अशोक ने एलईडी को ऑन करके ललिता को लाइव देख कर बोला।
शरद- ओके… मैं जाता हूँ तुम ध्यान रखना कोई गड़बड़ ना होने पाए…!
इतना कहकर शरद बाहर निकल कर नीचे चला गया।
कमरे में आकर शरद बीयर की बोतल खोल कर पीने लगा।
शरद- जान क्या कर रही हो.. अब आ भी जाओ बाहर…!
ललिता- शरद अन्दर आकर ले जाओ.. मुझसे चला नहीं जाएगा…!
शरद ने अन्दर जाकर ललिता को टब से निकाला, तौलिये से अच्छे से सुखा कर अपनी गोद में लेकर बाहर ले आया।
बेड पर बैठा कर उसके पास बैठ कर बोला- लो जान थोड़ी बीयर पीलो.. दर्द कम हो जाएगा…!
ललिता- ना बाबा नहीं पीनी.. मेरा तो सर घूम जाता है…!
शरद- अरे जान पियो.. लो मेरे हाथों से पियो…
ललिता- अच्छा पीती हूँ, पहले आप ये बताओ आपने चुदाई के वक्त मास्क क्यों लगाया था और वो आदमी कौन था…!
शरद- अरे यार मैंने वीडियो बनाया है हमारी चुदाई का.. इसलिए स्टाइल के लिए मास्क लगाया और किस आदमी की बात कर रही हो तुम…!
ललिता- मैंने देखा था.. वो यहीं खड़ा था.. उसके पास कैमरा भी था…!
शरद- जान तुम नशे में थी, इसलिए तुमको वहम हो गया होगा.. यहाँ पर हमारे सिवा कोई नहीं था।
ललिता- अच्छा यह भी हो सकता है… शायद नशे की वजह से ऐसा लगा हो, मगर अभी फ़ोन किसका आया था और आपको कैसे पता चला कि वो आ रहे हैं…बताओ…!
शरद- जान तुम तो पुलिस की तरह छान-बीन कर रही हो.. लो बीयर पियो.. सब बताता हूँ…!
शरद सोच में पड़ गया कि उसने तो ललिता को नशे में समझ कर ये सब किया.. मगर इसको तो सब याद है, कहीं कोई पंगा ना हो जाए वो सोचने लगा कि इसको क्या जवाब दूँ।
ललिता- शरद बताओ ना.. कोई तो बात है जो आप मुझसे छुपा रहे हो…!
शरद बीयर की बोतल मुँह से लगा कर गट-गट पीने लगता है।
दोस्तो, शरद तो फँस गया कि अब क्या जवाब देगा यह !
चलो इसको बीयर पीने दो, उसके बाद शायद ये ललिता को सच बताए !
हम रचना के पास चलते हैं, उन दोनों की चूमा-चाटी बन्द हुई या नहीं अब तक…!
अमर बेड पर लेटा हुआ था और रचना उसके लंड को चूस रही थी।
अमर- आ आ..हह.. बहना उफ्फ मज़ा आ रहा है उफ्फ तुम बहुत अच्छा चूसती हो.. उफ्फ ऐसा ललिता को भी सिखा देना.. उसको भी लौड़ा चुसवाऊँगा.. पर अफ़सोस बस इस बात का रहेगा कि मेरी दो बहनें है और दोनों ही क़यामत ढाने वाली हैं, पर मैं किसी एक की भी सील ना तोड़ पाया। तुमने बॉय-फ्रेंड से तुड़वा ली और ललिता की शरद ने तोड़ दी.. काश मेरे नसीब में एक तो होती…!
रचना- ओह भाई.. आप इतने मायूस क्यों होते हो.. अगर आप चाहो तो एक नहीं दो सील आपको तोड़ने को मिल सकती हैं !
अमर- वाउ.. क्या बात करती हो.. दो सील.. मज़ा आ जाएगा बताओ न कहाँ.. और किसकी..!
रचना- बताती हूँ बाबा पर वादा करो हमेशा मेरा साथ देते रहोगे और मॉम-डैड को कभी इन बातों का पता नहीं चलना चाहिए…!
अमर- ओके बहना… वादा रहा। अब जल्दी बताओ ना यार प्लीज़…!
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