MmsBee कोई तो रोक लो
Yesterday, 03:06 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
152

एक तो मुझे खाना खाने के बाद, चाय ना मिलने से, मेरा सर भारी हो रहा था. उस पर निक्की लोगों की इस बात ने मुझे और भी ज़्यादा उलझा कर रख दिया था. मैं समझ नही पा रहा था कि, आख़िर उन तीनो के बीच क्या खिचड़ी पक रही है.

मैं अभी इन्ही बातों से परेशान था कि, तभी शिखा ने आवाज़ देकर बरखा को बुलाया और उस से मेरे लिए चाय बनाने को बोलने लगी. चाय की तलब तो मुझे बहुत ज़्यादा लगी थी. लेकिन इतने सारे मेहमआनो के बीच मे मेरे लिए चाय बनवाना मुझे अच्छा नही लग रहा था. मैने शिखा को ऐसा करने से रोकते हुए कहा.

मैं बोला “दीदी, आप बेकार मे परेशान मत होइए. मुझे कोई चाय वाय नही पीना.”

लेकिन शिखा ने फ़ौरन ही मेरी इस बात को काटते हुए कहा.

शिखा बोली “भैया, इसमे परेशान होने वाली कोई बात नही है. मुझे निक्की ने पहले ही बता दिया था कि, आपको खाने के बाद चाय पीने की आदत है. वरना आपका सर भारी हो जाता है. इसलिए आप चुप कर के बैठिए, बरखा अभी चाय लेकर आती है.”

शिखा की इस बात को सुनकर, मैं चुप रहने के सिवा कुछ ना कर सका. बरखा चाय बनाने चली गयी. उसके बाद मेरी शिखा और सीरू से यहाँ वहाँ की बातें होती रही. थोड़ी देर बाद बरखा चाय लेकर आ गयी. उसने हम लोगों को चाय दी और फिर शिखा से कहा.

बरखा बोली “दीदी, वो नेहा मुझे बुला रही है. उसे बाजार से कुछ खरीदी करना है. मैं उसके साथ जा रही हूँ.”

इतना बोल कर बरखा चली गयी और हम लोग चाय पीने लगे. चाय पीना हो जाने के बाद सीरू ने भी शिखा से कहा.

सीरत बोली “भाभी, अब हम भी चलते है. घर मे भी बहुत काम है. आपको यदि कोई काम हो तो, हम मे से किसी को भी कॉल कर देना.”

इतना बोल सीरू और सेलू उठ कर खड़ी हो गयी. शिखा ने भी उसको जाने से नही रोका और वो भी उनके साथ उठ कर खड़ी हो गयी. वो लोग बाहर जाने लगी तो, मैं भी उठ कर उनके साथ बाहर आ गया.

बाहर आकर सीरू ने निक्की और आरू को आवाज़ लगाई. कुछ ही देर मे निक्की और आरू नीचे आ गयी. नीचे आकर दोनो शिखा से मिली और थोड़ी बहुत मुझसे बात करने के बाद, वो चारो घर चली गयी.

उनके जाने के बाद, हम अंदर जाने को हुए, तभी मेरा मोबाइल बजने लगा. मैने मोबाइल निकाल कर देखा तो, मौसी का कॉल आ रहा था. इसलिए मैं अंदर जाते जाते रुक गया और वही आँगन मे रखी चेयर पर बैठ गया. शिखा भी ना जाने क्या सोच कर आँगन मे ही बैठ गयी.

मैने शिखा को अपने पास बैठते देखा तो, उसे बताया कि, मेरी मौसी का कॉल आ रहा है. इसके बाद मैने कॉल उठाते हुए मौसी से कहा.

मैं बोला “जी मौसी, आज इतने दिन बाद मेरी याद कैसे आ गयी.”

मौसी बोली “बड़ा आया मौसी वाला, तुझे वहाँ का एक काम करने को दिया था. मेरे उस काम का क्या हुआ. कहीं तू मेरा काम करना भूल तो नही गया.”

मौसी की ये बात सुनते ही, मुझे उन का बताया काम याद आ गया. मैं सच मे ही उनका बताया काम करना भूल गया था. मैने इस बात के लिए उनसे माफी माँगते हुए कहा.

मैं बोला “सॉरी मौसी, मैं सच मे ही हॉस्पिटल के चक्कर मे, आपका काम करना भूल गया था. लेकिन अब मैं बाकी बचे 2-3 दिन मे आपका काम करने की पूरी कोसिस करूगा.”

मौसी बोली “ठीक है, जब तुझे समय मिले, तब तू इस काम को कर लेना. लेकिन भूलना मत ये बहुत ज़रूरी काम है.”

मैं बोला “आप फिकर मत कीजिए मौसी. मैं जल्दी ही आपका काम करके आपको कॉल करता हूँ.”

मेरी इतनी बात सुनने के बाद मौसी ने कॉल रख दिया. मगर उनके इस कॉल ने मुझे गहरी सोच मे डाल दिया था. मुझे इस तरह सोच मे पड़ा देख कर, शिखा से नही रहा गया और उसने मुझे टोकते हुए कहा.

शिखा बोली “क्या हुआ भैया. किस बात को लेकर इतना सोच मे पड़ गये.”

मैं बोला “कुछ नही दीदी. वो मेरी मौसी ने मुझे एक काम करने का बोला था. लेकिन मेरे दिमाग़ से ही वो काम निकल गया था. अभी उन ने मुझे वो ही काम याद दिलाने के लिए कॉल किया था.”

शिखा बोली “तो इसमे परेशान होने की क्या बात है. अभी तो आपको 3-4 दिन यहाँ रहना ही है. इस समय मे आप अपना काम कर सकते हो.”

मैं बोला “ये ही तो परेशानी वाली बात है दीदी. इतने दिन अज्जि जब पूरी तरह से खाली था. तब मुझे काम याद नही था और अब जब मुझे काम याद आया तो अज्जि के पास ज़रा भी समय नही है. मुझे समझ मे नही आ रहा कि, अपने इस काम के लिए, अब किसको पकडू.”

शिखा बोली “क्या मैं जान सकती हूँ कि, आपको क्या काम है.”

मैं बोला “मौसी ने एक आदमी का पता दिया है और उसके बारे मे मालूम करने को कहा है. लेकिन ये भी कहा है कि, इस बारे मे किसी को कुछ मालूम नही पड़ना चाहिए.”

मेरी बात ये बात सुनकर, शिखा चौके बिना ना रह सकी. उसने बड़ी बेचेनी के साथ मुझसे कहा.

शिखा बोली “मौसी ने मुंबई मे कहाँ का पता दिया है.”

शिखा की इस बात के जबाब मे मैने अपना मोबाइल निकाला और उसमे मेसेज मे सेव किया हुआ, उस आदमी का नाम और पता निकाल कर, मोबाइल शिखा के हाथ मे थमा दिया. मोबाइल मे नाम और पता देखते ही, शिखा ने मुझे हैरानी से देखते हुए कहा.

शिखा बोली “भैया, क्या आप जानते हो ये मुंबई के किस इलाक़े का पता है.”

मैं बोला “नही, मैं तो यहाँ कही घुमा ही नही हूँ. मैं तो बस प्रिया के घर, हॉस्पिटल, अज्जि के बंगले और आपके घर के सिवा कही गया भी नही हूँ.”

शिखा बोली “फिर भी आपको ये पता मिल गया है.”

शिखा की इस बात से अब मेरी भी हैरानी का कोई ठिकाना नही था. शिखा ने मुझे हैरान होते देखा तो, मेरी हैरानी को दूर करते हुए कहा.

शिखा बोली “भैया, अभी आप इसी इलाक़े मे हो जहाँ का पता आप ढूँढ रहे हो.”

शिखा की इस बात से मेरी हैरानी और भी ज़्यादा बढ़ गयी. क्योकि मेरे पास जो पता लिखा था वो कुछ और था. जबकि शिखा का घर जिस इलाक़े मे था, उस इलाक़े का नाम कुछ और ही था. इसलिए मैने शिखा से कहा.

मैं बोला “लेकिन दीदी, इस जगह का नाम तो आआआ.. है. जबकि मेरे पास जो पता है. उसमे तो ब्ब्ब्बबब.. नाम लिखा है. मेरी समझ मे नही आ रहा कि, आप कहना क्या चाहती हो.”

शिखा बोली “भैया, जैसे पहले मुंबई का नाम बॉम्बे था. बस उसी तरह पहले इस इलाक़े को उसी नाम से जाना जाता था, जो आपके पास लिखा है. लेकिन 10 साल पहले इस इलाक़े का नया नाम रख दिया गया था. अब नाम बदल जाने से जगह तो नही बदल जाएगी ना.”

शिखा की बात सुनकर, मैने खुश होते हुए कहा.

मैं बोला “दीदी, यदि ये इसी इलाक़े का पता है तो, फिर आप इस आदमी को भी जानती ही होगी.”

शिखा बोली “नही, इस मैं इस नाम के किसी आदमी को नही जानती. मैने अपनी सारी जिंदगी यही पर गुज़ारी है. यहाँ इस नाम का कोई भी आदमी नही रहता. मुझे लगता है कि, आपकी मौसी को किसी ने ग़लत पता दे दिया है.”

शिखा की बात सुनकर, मैने राहत की साँस लेते हुए उस से कहा.

मैं बोला “थॅंक्स दीदी. आपने मेरी बहुत बड़ी परेशानी हाल कर दी. वरना मैं बेकार मे ही इस पते को लेकर यहाँ वहाँ भटकता रहता.”

शिखा बोली “लेकिन आपका काम तो हुआ नही.”

शिखा की इस बात के जबाब मे मैने मुस्कुराते हुए कहा.

मैं बोला “नही दीदी, मेरा काम तो हो गया. मौसी ने मुझे जो मालूम करने को कहा था. वो तो मैने मालूम कर लिया है. अब यदि वो आदमी यहाँ रहता ही नही है तो, इसमे हम भला क्या कर सकते है. मैं अभी मौसी को कॉल करके ये बात बता देता हूँ.”

ये कह कर, मैने शिखा से मोबाइल लिया और जैसे ही मौसी को कॉल लगाने लगा तो, शिखा ने मुझे रोकते हुए कहा.

शिखा बोली “एक मिनट भैया, यहाँ बहुत शोर-गुल हो रहा है. हम उपर चल कर मौसी से बात करते है. हो सकता है कि, उन्हे भी ये बात समझाना पड़ जाए.”

मुझे भी शिखा की ये बात सही लगी और फिर मैं शिखा के साथ उपर छत पर आ गया. हम उपर पहुचे तो, प्रिया बाहर छत पर ही, एक चेयर पर बैठी अख़बार पढ़ रही थी. उसने हमे उपर आते देखा तो, अख़बार एक किनारे रख दिया और मुस्कुराने लगी.

हम लोग भी उसे देख कर मुस्कुरा दिए और उसके पास खाली पड़ी चेयर पर जाकर बैठ गये. शिखा ने प्रिया को इस तरह वहाँ अकेले बैठे देखा तो, उस से कहा.

शिखा बोली “निक्की लोग तो कब की जा चुकी है. फिर तुम यहाँ अकेली क्यो बैठी हो.”

प्रिया बोली “दीदी, मैं भी नीचे ही आ रही थी. लेकिन तभी मेरी एक सहेली का कॉल आ गया और मैं उस से बात करने लगी. मगर बात करते करते उसने कहा कि, वो अभी थोड़ी देर से कॉल करती है. इसलिए मैं यही बैठ कर, उसके दोबारा कॉल आने का इंतजार करने लगी.”

प्रिया के कॉल वाली बात सुनते ही, शिखा को भी अपने उपर आने की वजह याद आ गयी. उसने फ़ौरन मुझे मौसी को कॉल लगाने को कहा और शिखा का इशारा मिलते ही मैने मौसी को कॉल लगा कर सारी बात बता दी. लेकिन इतनी जल्दी अपना काम हो जाने की बात मौसी के गले से नही उतार रही थी.

मैने मौसी के इस शंका का समाधान करने के लिए, उन को शिखा से बात करने को कह कर, मोबाइल शिखा को थमा दिया. जिसके बाद शिखा मौसी से बात करने लगी. शिखा मौसी से बात करते करते, हमारे पास से उठ कर, छत की दूसरी तरफ चली गयी. जिस वजह से मुझे उसकी बातें सुनाई देना बंद हो गया.

थोड़ी देर तक मौसी से बात करने के बाद, शिखा ने मेरे पास आकर वापस मोबाइल मुझे दे दिया. मैने मौसी से एक दो बातें की और उसके बाद उन्हो ने कॉल रख दिया. मेरी और मौसी की बात हो जाने के बाद, शिखा ने मुझसे कहा.

शिखा बोली “मैने मौसी को सब कुछ समझा दिया है और अब उनको भी इस बात का यकीन हो गया है.”

शिखा की बात सुनकर, मैने मुस्कुराते हुए कहा.

मैं बोला “अब उनको यकीन हो या ना हो, ये उनकी परेशानी है. मैने तो अपना काम पूरा करके, अपना पिछा इस काम से छुड़ा लिया है.”

मेरी बात सुनकर शिखा भी हँसने लगी. फिर ना जाने क्या सोचकर, शिखा ने मुझसे सवाल करते हुए कहा.

शिखा बोली “भैया, क्या आपके घर से शादी मे कोई नही आएगा.”

मैं बोला “दीदी, मैने आज सुबह ही, प्रिया के सामने अपनी मम्मी से बात की थी. उनसे मैने यहाँ आने के बारे मे पुछा था. लेकिन उनका कहना था कि, अभी मेहुल की मम्मी हमारे घर मे है. जिस वजह से वो चाहते हुए भी इस शादी मे शामिल नही हो पाएगी.”

मेरी इस बात की हामी प्रिया ने भी भर दी. लेकिन शिखा ने इस सवाल के बदलने मे, मुझसे दूसरा सवाल करते हुए कहा.

शिखा बोली “आंटी जी नही आ सकती तो क्या हुआ. अंकल जी तो आ ही सकते है. आप उनको ही बुला लीजिए.”

शिखा के मूह से अपने बाप का नाम सुनकर, एक पल के लिए मेरा चेहरा कठोर हो गया और मेरा मन अपने बाप को गाली देने का करने लगा. लेकिन मैने अपने आप पर काबू करते हुए कहा.

मैं बोला “दीदी, अभी वो 2 दिन पहले यही पर थे. उनकी अचानक तबीयत खराब हो गयी और उनको वापस जाना पड़ा. अभी भी उनकी तबीयत सफ़र करने लायक नही है. ऐसे मे उनका भी यहाँ आ पाना नही हो सकता है. लेकिन आप फिकर मत कीजिए. मैं आपसे वादा करता हूँ कि, शादी के बाद, मैं मोम को आपसे मिलाने ज़रूर लेकर आउगा.”

मेरी बात सुनने के बाद, शिखा ने मुझसे इस बारे मे, आगे कुछ नही कहा और हम लोगों से एक दो बातें करके नीचे चली गयी. लेकिन उसका उतरा हुआ चेहरा इस बात की गवाही दे रहा था कि, वो मेरी इस बात से खुश नही थी.

प्रिया को भी ये बात समझ मे आ चुकी थी और वो ये अच्छी तरह से जानती थी कि, मैने पापा की तबीयत खराब होने वाली बात शिखा से झूठ कही है. इसलिए शिखा के जाते ही उसने मुझे टोकते हुए कहा.

प्रिया बोली “तुम्हारे इस झूठ ने, दीदी का दिल दुखा दिया. तुम्हे एक बार कोसिस करके तो देखना था. हो सकता था कि, अंकल शादी मे आने के लिए तैयार हो जाते.”

प्रिया की बात सुनकर मेरा मूड फिर खराब हो गया और मैं भावनाओ मे बह कर, वो सब कह गया. जिसकी प्रिया कल्पना भी नही कर सकती थी. प्रिया की इस बात के जबाब मे मैने, उस पर भड़कते हुए कहा.

मैं बोला “हां तुम बिल्कुल ठीक कहती हो. यदि मैं चाहता तो, मेरा कमीना बाप ज़रूर इस शादी मे आ सकता था. लेकिन मैं उस कमिने का गंदा साया, अपनी इस मासूम और भोली भली बहन पर, किसी भी कीमत पर, नही पड़ने देना चाहता. क्योकि मैं सिर्फ़ ज़ुबान से ही नही, दिल से भी शिखा को अपनी बहन मानता हूँ.”

मैं इस समय सच मे ही बहुत गुस्से मे था और मेरा मन मेरे बाप को गालियाँ देने का कर रहा था. यदि इस समय मेरे सामने प्रिया की जगह कीर्ति होती तो, शायद अब तक मैं अपने बाप को गाली दे भी चुका होता.

लेकिन प्रिया के होने की वजह से, मैं कुछ हद तक अपने गुस्से को दबा कर रह गया था. प्रिया मेरे इस गुस्से की वजह को पूरी नही तो, कुछ हद ज़रूर समझ चुकी थी. इसलिए उसने मेरा ध्यान इस बात पर से हटाने के लिए मुझसे कहा.

प्रिया बोली “अरे इस खुशी के मौके पर बेकार मे अपना मूड खराब मत करो. ये देखो आज के अख़बार मे तुम्हारे लिए कितनी प्यारी चीज़ छपी है.”

ये कह कर प्रिया मुस्कुराते हुए, मुझे एक शायरी पढ़ कर सुनाने लगी.

प्रिया की शायरी
“आज मौसम मे अजीब सी बात है.
बेकाबू से मेरे ख़यालात है.
दिल चाहता है तुमको चुरा लूँ तुमसे,
पर मम्मी कहती है कि चोरी करना पाप है.”

लेकिन प्रिया की ये शायरी सुनकर भी मेरा मूड सही नही हुआ था. उसने अभी भी मेरा मूड उखड़ा हुआ देखा तो, फिर से एक शायरी पढ़ने लगी.

प्रिया की शायरी
“उमर क्या कहूँ काफ़ी नादान है मेरी.
हंस के मिलना पहचान है मेरी.
आपका दिल ज़ख़्मो से भरा हो तो मुझे याद कीजिए,
दिलो को रिपेयर करने की दुकान है मेरी.”

प्रिया की ये शायरी सुनकर, मैं प्रिया की तरफ देखने पर मजबूर हो गया. इस शायरी को सुनकर, मुझे ऐसा लगा. जैसे प्रिया ये खुद से ही बोली जा रही हो. अपने इस शक़ को दूर करने के लिए मैने प्रिया के हाथ से अख़बार छीन लिया और उसमे प्रिया की कही शायरी देखने लगा.

मेरा सोचना सही ही निकला. प्रिया अपने मन से ही शायरी बोल कर, मुझे सुनाए जा रही थी. प्रिया की सुनाई दोनो शायरी अख़बार मे नही थी. ये देख कर मैने प्रिया से कहा.

मैं बोला “ये क्या है. इसमे तो तुम्हारी सुनाई एक भी शायरी नही है.”

मेरी बात सुनकर, प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा.

प्रिया बोली “उसमे तुम्हे सुनने लायक कोई शायरी थी ही नही. इसलिए अपने मन से ही सुना दी.”

प्रिया की बात सुनकर, मैने एक बार फिर अख़बार पर नज़र डाली. मुझे उसमे तृप्ति की एक रचना दिखाई दे गयी. उसको देख कर मैने प्रिया से कहा.

मैं बोला “लेकिन इसमे तो एक अच्छी रचना छपि है.”

मेरी बात सुनकर, प्रिया ने मुझसे अख़बार ले लिया और देखने लगी कि, मैं किस रचना की बात कर रहा हूँ. उसे देखने के बाद, प्रिया ने मुझसे कहा.

प्रिया बोली “ये तो किसी खाड़ुस शायरा की खाड़ुस सी रचना है.”

मैं बोला “मगर मुझे इसका लिखा हुआ पसंद आता है.”

मेरी बात सुनकर, प्रिया ने हैरानी से मुझे देखते हुए कहा.

प्रिया बोली “क्या तुम तृप्ति की रचना पड़ते हो.”

मैं बोला “नही, लेकिन मैने मंडे को यहीं पर तृप्ति की एक रचना प्रतीक्षा पड़ी थी. मुझे वो बहुत पसंद आई थी. इसलिए मुझे इसका नाम याद हो गया. सच मे दिल को छुने वाली रचना लिखती है.”

मेरी इस बात को सुनकर, प्रिया ने मुस्कुराते हुए अख़बार को देखा और मुझसे कहा.

प्रिया बोली “ओके, मैं इसकी ये रचना सुनाती हूँ. देखती हूँ इसकी इस रचना मे तुमको क्या समझ मे आता है. रचना का नाम है, अजनबी से नफ़रत.”

रचना का शीर्षक बता कर प्रिया ने तृप्ति की इस रचना को पढ़ना सुरू कर दिया.
“अजनबी से नफ़रत”

“वो बँधे है किसी और की, चाहतो की जंजीर मे,
फिर भी उन्हे चाहने की, चाहत सी क्यों होती है.
दिल को समझाया बहुत कि, हैं वो मेरे नही किसी और के.
फिर भी उनको देखते ही, दिल मे धक धक सी क्यों होती है.
पता है वो आए है, पर किसी और के बुलाने पे.
फिर भी उनके आने से, कहीं कोई दस्तक सी क्यों होती है,
नज़रें मिली थी मेरी उनसे, ऐसे ही अंजाने मे.
फिर भी उनकी नज़रों की ही, इनायत सी क्यों होती है,
कि नही मैने कभी, वक़्त की बर्बादी फ़िजूल मे.
फिर भी उनकी बातो को सुनने की, फ़ुर्सत सी क्यों होती है.
हक़ नही है मुझे कि, मैं डूब जाऊ उनकी यादों मे.
फिर भी उनको चूमने की, सरारत सी क्यों होती है.
होंगे ना वो मेरे कभी, अगर मर भी जाउ उनके इंतजार मे.
फिर भी उनकी बाहों मे आने की, हसरत सी क्यों होती है.
नही जानती वो चाहते है किसे, इतना दिल ओ जान से.
फिर भी उस “अजनबी से नफ़रत” सी क्यों होती है.”

प्रिया मुझे तृप्ति की ये रचना सुना रही थी और मैं इसमे खो सा गया था. शेर-शायरी या किसी कविता को समझ पाना मेरे लिए हमेशा से ही एक मुश्किल काम था. लेकिन ना जाने तृप्ति की रचना मे ऐसी क्या बात थी कि, मैं उसकी रचना को सिर्फ़ समझ ही नही गया था, बल्कि उसमे छुपे दर्द और बेबसी को भी महसूस कर पा रहा था.

जबकि प्रिया इस रचना को पढ़ने के बाद, मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. उसकी इस मुस्कान से समझ मे आ रहा था कि, उसे इस रचना मे कुछ भी महसूस नही हुआ है. इस बात को सोच कर मैने उस से कहा.

मैं बोला “क्या हुआ. क्या तुम्हे तृप्ति की ये रचना ज़रा भी समझ मे नही आई, जो तुम इस तरह मुस्कुरा रही हो.”

मेरी इस बात को सुनकर, प्रिया ने मुस्कुरा कर, शायरी मे जबाब देते हुए कहा.

प्रिया बोली
“मैं बेटी नही, ग़ालिब या फ़राज़ की.
जो बात समझ सकूँ, ग़ज़ल मे राज़ की.”

प्रिया की ये शायरी सुनकर, मैं अपनी हँसी ना रोक सका. लेकिन मैं उस से इसके बदले मे कुछ बोल पाता, उसके पहले ही उसका मोबाइल बजने लगा और प्रिया कॉल उठा कर बात करने लगी.

शायद उसकी सहेली, उसे कहीं आने के लिए बोल रही थी. लेकिन प्रिया उसे मना कर रही थी. प्रिया शायद मेरी वजह से अपनी सहेली के पास जाना नही चाहती थी. मगर बाद मे प्रिया ने उस से कह दिया कि, वो आने की कोसिस करती है. इसके बाद प्रिया ने कॉल रख दिया और मेरी तरफ देखते हुए कहा.

प्रिया बोली “क्या तुम मेरे साथ, मेरी सहेली से मिलने चलोगे.”

मैं बोला “हां, क्यो नही. चलो कहाँ चलना है.”

मेरी बात सुनकर, प्रिया को शायद अब भी इस बात का यकीन नही आ पा रहा था कि, मैं बिना कुछ जाने, बिना कुछ पुछे, इतनी आसानी से, उसके साथ जाने को तैयार हो गया हूँ. इसलिए उसने फिर से मुझसे कहा.

प्रिया बोली “क्या तुम सच मे मेरे साथ चलने को तैयार हो.”

मैं बोला “हां, मैं सच मे तुम्हारे साथ चल रहा हूँ और यदि तुम मुझे अपनी सहेली से, अपना बॉय फ्रेंड बनाकर, मिलाना चाहती हो तो, मुझे इस मे भी कोई परेशानी नही है.”

मेरी बात सुनते ही प्रिया का चेहरा खुशी से खिल उठा. वो फ़ौरन उठ कर चलने के लिए तैयार हो गयी. मैं भी उठ कर खड़ा हो गया. मैने उस से कहा कि मैं शिखा से बता देता हूँ कि, हम थोड़ी देर मे घूम कर आते है.

इतनी बात कर के हम नीचे आ गये. नीचे आकर मैने शिखा को बताया और फिर मैं अपनी कार मे प्रिया के साथ उसकी सहेली से मिलने निकल गया. कुछ ही देर मे हम प्रिया के बताए पार्क मे पहुच गये.

गाड़ी से उतरते ही प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ लिया और फिर हम ऐसे ही पार्क के अंदर आ गये. हम अंदर आ कर, हम अपने आस पास देखते हुए आगे बढ़ने लगे. प्रिया अपनी सहेली को चारो तरफ देख रही थी.

मैं प्रिया की सहेली को नही जानता था. इसलिए मैं वहाँ पर आए प्रेमी युगल को देख कर, वहाँ के रंगीन नज़ारो का मज़ा लेने लगा. अचानक ही मेरी नज़र वहाँ एक किनारे पेड़ के पास खड़े एक जोड़े पर जाकर ठहर गयी.

लड़की मुझे कुछ जानी पहचानी सी लगी तो, मैं उसे गौर से देखने लगा. मगर लड़की का चेहरा मेरी तरफ नही था. इसलिए मैं उसका चेहरा देखने के लिए, प्रिया से अपना हाथ छुड़ाया और उस लड़की की तरफ बढ़ गया.

मैं जैसे ही उस लड़की के पास पहुचा, प्रिया भी मेरे पीछे पीछे वहाँ आ गयी थी. अभी प्रिया मुझसे कुछ पुछ पाती कि, मुझे लगा कि, वो लड़की कोई और नही बल्कि बरखा है.

ये बात समझ मे आते ही, मैने बिना कुछ सोचे समझे उस लड़की के कंधे पर हाथ रख दिया. वो लड़की सच मे ही बरखा थी और अचानक मुझे अपने सामने देख कर, कुछ घबरा सी गयी थी.

वही उस लड़के ने जब मुझे बरखा के कंधे पर हाथ रखता देखा तो, उसने आगे बढ़ कर, मेरा कॉलर पकड़ लिया. उस लड़के की इस हरकत से मेरा ध्यान मेरी कॉलर की तरफ चला गया और तभी चटाक़…चटाक़…की गूँज से, मैं बुरी तरह से हड़बड़ा गया.
Reply

Yesterday, 03:06 PM,
RE: MmsBee कोई तो रोक लो
153
लेकिन मुझसे भी ज़्यादा इस गूँज से वो लड़का हड़बड़ा गया था. इस गूँज के साथ ही, उसके हाथ मेरी कॉलर से हट कर, अपने गालों पर चले गये. वो हैरानी से कभी बरखा तो, कभी प्रिया की तरफ देखने लगा.

तभी कही से नेहा वहाँ भागती हुई आ गयी. वो शायद दूर से ये सब नज़ारा देख चुकी थी. इसलिए उसने आते ही, उस लड़के के कंधे पर हाथ रख कर, बरखा और प्रिया पर भड़कते हुए कहा.

नेहा बोली “ये क्या बदतमीज़ी है. तुम लोगों ने हीतू को किस बात के लिए मारा है”

नेहा की इस बात के जबाब मे, बरखा ने उसके गुस्से की परवाह किए बिना, उल्टे उसको ही चेतावनी देते हुए कहा.

बरखा बोली “बदतमीज़ी तो तेरे इस हीतू ने की है. जिसने बिना कुछ सोचे समझे मेरे भाई के गिरेबान पर हाथ डाल दिया. समझा इसको कि पुनीत मेरा भाई है और मैं इसके साथ, किसी की कोई बदतमीज़ी सहन नही करूगी. फिर चाहे वो बदतमीज़ी करने वाला तेरा हीतू ही क्यो ना हो.”

बरखा के इस तमाचे और इस बात ने मेरे दिल पर बहुत गहरा असर किया था. मैं अभी तक बरखा को शिखा के रिश्ते से दीदी कहता था. मगर मुझे ये कभी महसूस नही हुआ था कि, वो भी शिखा की तरह मुझे अपना भाई मानती है.

लेकिन आज उसके इस गुस्से ने मुझे, उसके लिए मेरी अहमियत और उसके प्यार का अहसास करा दिया. मैं बड़े गौर से बरखा के इस रूप को देख रहा था. वही वो नेहा और हीतू को मेरे गिरेबान पर हाथ डालने के लिए फटकारते जा रही थी.

बरखा के साथ नेहा को देख कर, अब तक मेरी समझ मे सारा मामला आ चुका था. क्योकि प्रिया मुझे नेहा और उसके बाय्फ्रेंड से मिलने की बात पहले भी एक बार बता चुकी थी. बस मैं ये नही जानता था कि, प्रिया अभी मुझे नेहा से ही मिलाने ले जा रही है और शायद बरखा भी इस बात से अंजान थी कि, वहाँ प्रिया आने वाली है.वरना उसने पहले ही नेहा को बता दिया होता कि, प्रिया उसके घर मे है.

ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था. मैने घर मे बरखा की ये बात तो सुनी थी कि, वो नेहा के साथ बाजार जा रही है. मगर यहाँ अचानक से बरखा को किसी लड़के के साथ देख कर, मैं खुद को रोक ना सका और उसके पास चला गया. जिसका ख़ामियाजा मुझे तो नही, मगर उस बेचारे हीतू को अपने गाल पर तमाचा खा कर भुगतना पड़ गया था.

नेहा मुझे बरखा के घर मे देख चुकी थी और वो ये भी जानती थी कि, शिखा मुझे अपना भाई मानती है. इसलिए बरखा की बात के बाद उसने बरखा से तो कुछ नही कहा. लेकिन अपना सारा गुस्सा प्रिया पर उतारते हुए कहा.

नेहा बोली “बरखा का हीतू पर हाथ उठाना तो मैं समझ सकती हूँ और मैं इसे ग़लत भी नही मानती. लेकिन तूने क्यो हीतू पर हाथ उठाया. क्या पुनीत तुम्हारा भी भाई लगता है.”

नेहा की इस बात को सुनकर, प्रिया ने मुस्कुरा कर, उसकी तरफ देखा और फिर मेरा हाथ पकड़ कर, नेहा की बात का जबाब देते हुए कहा.

प्रिया बोली “भाई ये तेरा लगता होगा. मेरी तो ये जान है. आज मैं इसे ही तुझसे मिलाने लाई थी.”

प्रिया की बात सुनकर, नेहा ने एक बार मेरी तरफ देखा. फिर ठहाके मारकर हँसने लगी और प्रिया का मज़ाक उड़ाते हुए कहा.

नेहा बोली “हाहहाहा, पुनीत को तो मैं अच्छे से जानती हूँ. इसके बारे मे शिखा दीदी मुझे, परसो ही बता चुकी थी. ये अज्जि भैया का दोस्त है और यहाँ अपने अंकल का इलाज करवाने आया है. तुझे अपना झूठा बाय्फ्रेंड बनाने के लिए क्या कोई और लड़का नही मिला था. जो मुझे जलाने के लिए इस अपना झूठा बाय्फ्रेंड बनाकर यहाँ ले आई.”

नेहा के मूह से, मेरे बारे मे इतनी सब बातें सुनकर, प्रिया के चेहरे की हँसी गायब हो गयी और वो हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी. शायद वो मुझसे ये जानना चाहती थी कि, नेहा ये सब क्या बोल रही है.

मगर मुझे तो खुद ही नही पता था कि, शिखा और नेहा के बीच मुझे लेकर क्या बातें हुई है. इसलिए मुझसे प्रिया से कुछ भी कहते नही बन रहा था. उधर नेहा ने फिर से प्रिया का मज़ाक उड़ाते हुए कहा.

नेहा बोली “वैसे तेरी पसंद की दाद देना पड़ेगी. तूने मुझे नीचा दिखाने के लिए अछा लड़का चुना था. मगर अफ़सोस की तेरा ये झुत पकड़ा गया.”

नेहा की बाते सुनकर, प्रिया शर्मिंदा होने के सिवा कुछ ना कर सकी. उसका झूठ पकड़ा गया था. जिस वजह से उसका चेहरा शरम से झुक गया था. मैं चाह कर भी प्रिया के लिए कुछ नही कर पा रहा था. ऐसे मे बरखा ने इन सब का ध्यान अपनी तरफ खिचते हुए कहा.

बरखा बोली “प्रिया ये सब क्या है. क्या नेहा सच कह रही है. क्या तुमने अभी जो कुछ भी कहा, वो झूठ है.”

बरखा के इस सवाल को सुनकर, प्रिया और भी ज़्यादा परेशान हो गयी. वो सर झुकाए रखने के सिवा कुछ नही कर पा रही थी. मुझे प्रिया की इस हालत पर तरस आ रहा था. इसलिए मैने बरखा को चुप करने के लिए उसकी तरफ देखा. मगर बरखा ने अपने सवाल का रुख़ प्रिया की तरफ से मोड़ कर, मेरी तरफ करते हुए कहा.

बरखा बोली “पुनीत तुम ही कुछ बोलो. क्या प्रिया ने अभी जो कुछ कहा है, वो सब झूठ है.”

बरखा के बार बार एक ही सवाल करने से अब मुझे उस पर गुस्सा आ रहा था. मैं अभी इसी गुस्से मे बरखा को कुछ बोलने ही जा रहा था कि, तभी बरखा ने फिर से मुझसे सवाल करते हुए कहा.

बरखा बोली “देखो पुनीत, यदि प्रिया तुम्हारी गर्लफ्रेंड है तो, तुमको उसकी तरफ़दारी लेना चाहिए. तुम यदि सच मे उसके बाय्फ्रेंड हो तो, फिर कुछ बोलते क्यो नही. आख़िर ये उसकी इज़्ज़त का सवाल है.”

बरखा की ये बात सुनकर, मेरे दिमाग़ मे एक बिजली सी चमक गयी. मुझे अब समझ मे आ गया कि, बरखा एक ही बात पर बार बार ज़ोर क्यों दे रही है. असल मे वो चाहती थी कि, मैं प्रिया की तरफ़दारी करूँ और नेहा को ग़लत साबित कर दूं.

ये बात मेरी समझ मे आते ही, मेरा दिमाग़ तेज़ी से चलने लगा और एक पल मे ही मेरे दिमाग़ ने नेहा की हर बात का जबाब भी ढूँढ लिया. मैने बरखा की बात का जबाब देते हुए उस से कहा.

मैं बोला “दीदी, जब मुझे और प्रिया को कुछ पता हो, तभी तो हम नेहा की इस बात का कोई जबाब दें ना. हमे तो पता ही नही है कि, शिखा दीदी से नेहा की क्या बात हुई है. अब यदि शिखा दीदी ने नेहा से यदि ये कहा कि, मैं अज्जि का दोस्त हूँ तो, इसमे ये बात कहाँ से आ गयी कि, मैं प्रिया का बाय्फ्रेंड नही हूँ. बस इसी बात को सोच कर हम दोनो चुप है.”

“क्योकि शिखा दीदी और अज्जि दोनो ही, प्रिया के बार मे सब कुछ जानते है. तभी तो शिखा दीदी ने अंकल के पास से अपनी ड्यूटी प्रिया के पास करवाई थी. मैं शिखा दीदी का भाई हूँ, इसी वजह से तो, प्रिया अपनी सहेली निक्की के भाई की शादी को छोड़ कर, आपके घर मे है.”

“इस सब के बाद भी यदि नेहा को लगता है कि, मैं प्रिया का झूठा बाय्फ्रेंड हूँ तो, अब नेहा ही प्रिया के हाथ को देख कर बताए कि, प्रिया के हाथ मे इस “पी” के लिखे होने का मतलब वो क्या निकालेगी.”

ये कहते हुए, मैने प्रिया का वो हाथ पकड़ कर नेहा के सामने कर दिया, जिसमे उसने हथेली पर ब्लेड से बड़ा सा “पी” बनाया हुआ था. वो “पी” देख कर तो नेहा के साथ साथ बरखा और हीतू की आँखे फटी की फटी रह गयी.

वहीं प्रिया भी हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी. क्योकि अभी तक उसको भी पता नही था कि, मुझे उसकी हथेली पर लिखे इस “पी” के बारे मे पता है. मैं गौर से सबका चेहरा देख रहा था और अब मुझे लगने लगा था कि, नेहा को भी इस बात पर यकीन आने लगा है. इसलिए मैने अपनी बात को आगे चालू रखते हुए कहा.

मैं बोला “यदि अब भी नेहा को इस बात पर शक़ है कि, मैं प्रिया का बाय्फ्रेंड नही हूँ तो, मैं इन नेहा का ध्यान इस बात की तरफ दिलाना चाहता हूँ कि, बरखा दीदी ने तो, हीतू को इसलिए तमाचा मारा था, क्योकि उसने उनके भाई का गिरेबान पकड़ा था. लेकिन मैं यदि प्रिया का झूठा बाय्फ्रेंड था तो, फिर प्रिया को हीतू को तमाचा मारने की क्या ज़रूरत थी.”

मेरी इन बातों से जहा प्रिया के चेहरे की चमक वापस लौट आई थी. वही इस बात ने नेहा को भी सोचने पर मजबूर कर दिया था. प्रिया के चेहरे की चमक को देख कर, बरखा ने अब नेहा को लताड़ते हुए कहा.

बरखा बोली “अब तेरा मूह क्यो बंद है. तेरा शक दूर हुआ या तुझे अब भी इन दोनो से कुछ पुच्छना है. अरे अपना पहाड़ जैसा मूह खोलने के पहले, एक बार मुझसे तो पुच्छ लेती कि, प्रिया पुनीत की गर्लफ्रेंड है या नही. वो मेरा भाई है, क्या मुझे उसके बारे मे इतना भी पता नही होगा.”

बरखा की ये बात सुनकर, नेहा की बोलती ही बंद हो गयी थी और अब प्रिया की जगह, उसका सर शरम से झुक गया था. वही हीतू ने मुस्कुरा कर, अपने गाल को सहलाते हुए बरखा से कहा.

हीतू बोला “नेहा को यकीन हो या ना हो. मुझे तो प्रिया की इस हरकत से पूरा यकीन हो गया है कि, पुनीत ही प्रिया का बाय्फ्रेंड है. मैं अपनी ग़लती के लिए तुम सब से माफी माँगता हूँ. अच्छा हुआ कि, पुनीत की दो ही चाहने वाली यहाँ थी. यदि एक दो और होती तो पता नही आज मेरा क्या हाल होता.”

हीतू की ये बात सुनकर, हम सबको हँसी आ गयी. इसके बाद हीतू ने मुझे अपना परिचय दिया. हीतू उसके प्यार का नाम था. उसका असली नाम हितेश था. उसके साथ थोड़ी देर की बात चीत से ही समझ मे आ गया था कि, वो बहुत मिलन-सार, हस्मुख और दिल का साफ लड़का है.

उसने किसी भी बात को अपने दिल से नही लगाया था और मेरे साथ भी बड़े प्यार से बात कर रहा था. आपस मे परिचय होने के बाद, हम सब वही एक कॉफी हाउस मे कॉफी पीने चले गये.

कॉफी पीने के बाद, मैने बरखा को बताया कि, हम प्रिया के घर जा रहे है. मैं प्रिया के घर से शाम को शिखा दीदी के पास आउगा. इसके बाद मैं प्रिया के साथ उसके घर वापस आ गया.

घर आकर प्रिया सीधे पद्मिमनी आंटी से जाकर लिपट गयी. पद्मि नी आंटी प्रिया को इतना खुश देख कर हैरान रह गयी. लेकिन मैं प्रिया की इस खुशी को समझ सकता था. प्रिया को खुश देख कर मुझे भी बहुत सुकून मिल रहा था.

थोड़ी देर आंटी से बात करने के बाद मैं अपने कमरे मे आ गया. क्योकि अब दोपहर के 2 बज चुके थे और अब किसी भी समय कीर्ति का कॉल आ सकता था. मुझे अपने कमरे मे आए अभी थोड़ी ही देर हुई थी कि, कीर्ति का कॉल आने लगा.

कीर्ति का कॉल देखते ही मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी. मैने खुशी खुशी उसका कॉल उठाते हुए कहा.

मैं बोला “तो मेडम को मुझसे बात करने का समय मिल ही गया.”

मेरी बात सुनकर, कीर्ति खिलखिलाने लगी. वो समझ गयी थी कि, मैं सुबह मुझसे बात ना करने की वजह से ऐसा बोल रहा हूँ. इसलिए उसने अपनी सफाई देते हुए कहा.

कीर्ति बोली “सॉरी जान, तुम कल बहुत थक गये थे और हम रात को देर तक बात भी करते रहे थे. इसलिए मैने सोचा कि आज तुमको आराम कर लेने दिया जाए. क्योकि आज तुमको हॉस्पिटल भी नही जाना था.”

मैं बोला “बड़ी आई मुझे आराम करने देने वाली. तुझे पता भी है कि, तेरी नितिका को प्रिया की तबीयत के बारे मे बताने से यहाँ कितना बड़ा हंगामा मच गया था.”

मैं तो ये बात कीर्ति को बताना चाहता था. लेकिन उसे ये बात पहले से ही पता थी. इसलिए उसने इस बात के लिए भी मुझसे माफी माँगते हुए कहा.

कीर्ति बोली “जान इस बात के लिए भी सॉरी. मुझे अभी अभी नितिका से पता चला कि, वहाँ क्या कुछ हो गया. ये तो मैं भी नही जानती थी कि, आंटी वहाँ पहुच कर इतना बड़ा हंगामा खड़ा कर देगी. लेकिन तुमको इतना ज़्यादा गुस्सा नही दिखाना चाहिए था.”

मैं बोला “तू बिल्कुल सही बोल रही है. मैने सच मे बहुत बड़ी ग़लती कर दी. मेरी जगह यदि तू होती और आंटी ने मुझे ये सब बोला होता तो, तू बड़े प्यार से सब सुन लेती.”

मेरी इस बात का मतलब समझ मे आते ही कीर्ति खिलखिला कर हँसने लगी और जल्दी से इस बात को बदलते हुए कहा.

कीर्ति बोली “जान ये सब बातें छोड़ो और ये बताओ, मौसी से शादी के बारे मे क्या बात हुई.”

मैं बोला “छोटी माँ को मैने सब कुछ बता दिया है. अब वो शादी मे देने वाला गिफ्ट सोच कर मुझे बता देगी.”

कीर्ति बोली “जान, मैने गिफ्ट सोच लिया है और मौसी को बता भी दिया है. अब देखो मौसी वो गिफ्ट देने के लिए तैयार भी है या नही.”

मैं बोला “तूने क्या गिफ्ट सोचा है.”

कीर्ति बोली “मैं अभी नही बताओगी. पहले मौसी को गिफ्ट देने के लिए तैयार हो जाने दो. उसके बाद बताउन्गी.”

मैने कीर्ति से गिफ्ट का पुच्छने की बहुत कोसिस की, मगर वो छोटी माँ के तैयार होने के पहले कुछ भी बताने को तैयार नही थी. मैने भी इस बात पर ज़्यादा बहस करना ठीक नही समझा और उस से कहा.

मैं बोला “ठीक है, तुझे जब ये बात बताना हो, तू बता देना. मगर अभी इतना तो बता दे कि, तू इस शादी मे आना चाहती या नही. क्योकि हमारे यहाँ से किसी के शादी मे शामिल ना होने की बात, शिखा दीदी को अच्छी नही लग रही है.”

कीर्ति बोली “शिखा दीदी का ऐसा सोचना भी सही है. लेकिन मौसी का कहना भी ग़लत नही है. वो चाह कर भी इस शादी मे शामिल नही हो सकती. रही मेरे आने की बात तो, अभी मेरी तबीयत कुछ ठीक सी नही है. इसलिए मैं सफ़र नही कर सकती.”

कीर्ति की तबीयत सही ना होने की बात सुनकर, मैने चिंता जाहिर करते हुए कहा.

मैं बोला “तेरी तबीयत को क्या हुआ. तूने डॉक्टर को दिखाया या नही.”

मेरी बात सुनकर, कीर्ति ने हंसते हुए कहा.

कीर्ति बोली “अरे बुद्धू, मेरी तबीयत को कुछ नही हुआ. बस वो लड़कियों वाली परेशानी है. जो लड़कियों को हर महीने होती है.”

मैं कीर्ति की बात का मतलब समझ गया था कि, अभी उसके पीरियड्स चल रहे है. मुझे इस वजह से उसके आने मे कोई परेशानी नज़र नही आई. इसलिए मैने उस से, आने पर ज़ोर देते हुए कहा.

मैं बोला “तो इसमे कौन सी बड़ी बात हो गयी. क्या लड़कियाँ ऐसे मे कहीं आती जाती नही है. तुझे नही आना तो साफ मना कर दे. इसमे बहाने बनाने की ज़रूरत क्या है.”

कीर्ति बोली “तुमको तो हर बात खुल कर बताना पड़ती है. तुमको मालूम है कि, मेरे पेट मे पहले से ही परेशानी है और ऐसे समय मे मेरे पेट का दर्द कुछ ज़्यादा ही बढ़ जाता है. जिस वजह से मुझसे सही से चला भी नही जाता. अब यदि इसके बाद भी तुम चाहते हो कि, मैं वहाँ आ जाउ, तो चलो मैं वहाँ आ जाती हूँ. अब खुश ना.”

कीर्ति की इस बात ने मुझे सोच मे डाल दिया था. क्योकि उसका लिवर कमजोर था. ऐसे मे उसको सच मे इस समय परेशानी का सामना कर पड़ रहा होगा. बस यही बात सोचते हुए मैने उस से कहा.

मैं बोला “चल रहने दे. यदि तेरी तबीयत ठीक नही है तो, तुझे यहाँ आने की कोई ज़रूरत नही है. मैं तो सिर्फ़ इसलिए बोल रहा था, क्योकि इसी बहाने मैं तुझे देख भी लेता.”

मेरी बात सुनकर, कीर्ति ने मुस्कुरा कर मुझे समझाते हुए कहा.

कीर्ति बोली “अरे तो इसमे इतना दिल छोटा करने वाली क्या बात है. अब तुम्हारे वापस आने के बस 3 दिन ही तो बचे है और ये 3 दिन तो ऐसे ही चुटकी मे निकल जाएगे. उसके बाद तुम्हारा, जितना दिल करे, मुझे देखते रहना.”

कीर्ति की इस बात के बाद, मुझे उस से इस बारे मे कोई बहस करना सही नही लगा. क्योकि ये तो मैं भी जानता था कि, जितना मुस्किल मेरे लिए उसके बिना रह पाना हो रहा था. उतना ही मुस्किल उसके लिए भी मेरे बिना रह पाना हो रहा होगा.

लेकिन इस समय मुझे इन सब बातों से ज़्यादा, उसकी तबीयत की फिकर सताने लगी थी. ना जाने क्यो उसकी बात सुनकर, मेरा दिल घबरा सा रहा था. इसलिए मैने इस बात को यही ख़तम करते हुए उस से कहा.

मैं बोला “चल ठीक है, ये 3 दिन भी गुजर ही जाएगे. लेकिन तुझे ऐसे मे अभी स्कूल जाने की बिल्कुल ज़रूरत नही है. तू अभी घर पर रह कर ही आराम करना और अपनी तबीयत का पूरा ख़याल रखना. यदि कोई भी तकलीफ़ हो तो, फ़ौरन छोटी माँ को बताना और कुछ भी छुपाने की कोसिस मत करना. यदि तूने इसमे ज़रा सी भी लापरवाही की तो, मुझसे बुरा कोई नही होगा.”

कीर्ति बड़े गौर से मेरी ये सब बातें सुन रही थी. मैं जब अपनी बातें कह कर चुप हुआ तो, उसने मुझे छेड़ते हुए कहा.

कीर्ति बोली “हाए मैं मर जावा. तुम मेरा कितना ख़याल रखते हो. यदि ये बात मौसी सुनेगी कि, उनका लल्ला, उनसे ज़्यादा मेरा ख़याल रखता है तो, वो मुझसे जलने लगेगी.”

कीर्ति की इस बात पर मैने चिड-चिड़ाते हुए उसे गुस्से मे बकना सुरू कर दिया. मगर कीर्ति का मुझे परेशान करना नही रुका. वो बहुत देर तक मुझे इन सब बातों मे उलझाए रही. इसके बाद हम थोड़ी देर यहाँ वहाँ की बात करते रहे. फिर 3:30 बजे के बाद, उसने रात मे बात करने की बात कह कर कॉल रख दिया.

मैं कीर्ति की तबीयत के बारे मे छोटी माँ से बात करना चाहता था. लेकिन कीर्ति ने ये कह कर रोक दिया था कि, उसकी तबीयत की चिंता करने की ज़रूरत नही है और यदि मैने इस बारे मे छोटी माँ से बात की तो, वो हमारे बारे मे क्या सोचेगी.

कीर्ति की इस बात की वजह से, मैं छोटी माँ से, उसकी तबीयत की बात नही कर सकता था. लेकिन अब मुझे उसकी तबीयत की चिंता सता रही थी और मैं इसी सोच मे खोया हुआ था कि, तभी किसी ने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटा दिया.
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
  पारिवारिक चुदाई की कहानी 21 221,608 09-08-2020, 06:25 AM
Last Post:
Exclamation Vasna Story पापी परिवार की पापी वासना 198 92,414 09-07-2020, 08:12 PM
Last Post:
Lightbulb Antarvasnax Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा 190 43,523 09-05-2020, 02:13 PM
Last Post:
Thumbs Up Antarvasna कामूकता की इंतेहा 50 35,345 09-04-2020, 02:10 PM
Last Post:
Thumbs Up Sex kahani मासूमियत का अंत 13 21,008 09-04-2020, 01:45 PM
Last Post:
Star Antarvasna kahani नजर का खोट 121 546,184 08-26-2020, 04:55 PM
Last Post:
Star Antarvasna kahani अनौखा समागम अनोखा प्यार 103 407,116 08-25-2020, 07:50 AM
Last Post:
  Naukar Se Chudai नौकर से चुदाई 28 273,153 08-25-2020, 03:22 AM
Last Post:
Star Antervasna कविता भार्गव की अजीब दास्ताँ 18 17,622 08-21-2020, 02:18 PM
Last Post:
Star Bahan Sex Story प्यारी बहना की चुदास 26 31,864 08-21-2020, 01:37 PM
Last Post:



Users browsing this thread: 14 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.


Didi nai janbuja kai apni chuchi dikhayaiगरबती पेसाब करती और योनी में बचचा दिखे Xxxरजाई मे हाथ देकर चूत सहलाईRajsharmastories.com/heroine baneक्सनक्सक्स डिसालाल भाल वालि दादि नागडे सेकस पोन फोटोsexhdbfcomPuchi Lawada Ki Naga Photosxxxhindividiosasurnait me hone wali xxx photo katrinaचुतमेगाङ बताओwww.super hot sardarni in xvideos2 xxx.comहुमा कुरेशी के XXX दुधgokuldham randiyoki storiesSex ke time mera lund jaldi utejit ho jata hai aur sambhog ke time jaldi baith jata ilaj batayenprinka ke boob dabay akshay nexnxxtv randi apporvagilichut.ka.lahrate.lund.ka.khel.videox** nangi photo video Amisha Patel x** nangi photo video nangi photobeautiful wife chaudai rial marathimahima ke cudai ke pic sex baba comSexbabanet.badnamलडकि के पेट मे कॅमरा लगाया हुवा xxx vidioindhanhotsexywww sex baba.राज शर्मा चुदाई काहानी मा उ बेटा.comrssmasti balidanसेकसी विडीयेआईला पण तेच पाहिजे होते भाग ३सिरा माँ की khet xxxxxx bf केpad de fudi de swad ki gadi galiya di xxx sexy story hindi www.xxxsexpec.me phtoभोजपूरी मोनालिशा हाड सेँक्सी फोटोdesi bodyaboobsxnxx bhahi surgsratavneet kaur ko sabne choda sex story part 2.comwwx sex xxx hd ledis photoIndian koleg javarjasti sex videowww. khadhi chudahi xxx videoसहेली ने मेरी चुदाई karbai apne भाई से चुदाई karbai दूर deya चुदाई हिन्डे गंवार के लिएसुवागरात मे चूत चुदाई केसे होतिwww sexbaba net Thread antarvasna kahani E0 A4 85 E0 A4 A8 E0 A5 8C E0 A4 96 E0 A4 BE E0 A4 B8 E0 A4मेरी ओर मेरी बेटियाँ जोरदार चुदाईsex baba parineeti chopra nude photoगोऱ्या मांड्या सेक्स कथाsex x.com. page 66 sexbaba story.shemale ne choda madarchod kutiya bana ksavita bhabhi 115 episodexxx.shalem.javid.ke.chudae.ke.kahane.nokaar.maalken.ke.comTarakmehta ki madhvibhabhi xxxopen sex videoraveena tandon ki gand me gusayabollywood actress celina jaitleynude sex.bababollywood actress nude sex बाबा net site:internetmost.rubus ki bheed me maje ki kahaniya antrvasna.comwww sexbaba net Thread sapna choudhary nude xxx porn fakesचुतमे लंड दालने के फोटोdevoleena nangi photo ki sexy nangi video kapdon ki chaddi baniyanचोदते चोदते गंद से आगे निकल जाए ग्वीडोxxx sonaksi shn phntoankitha sexbaba hd photosलडकी की बुर मे लड क्यो घुसाया जाता है बताये फोटोइन्डियन भाइ कि बिबिको अकेलेमे चिदासाली नो मुजसे चुतमरवाई15साल कीxxxbfxxx mp4 video downloads MB 1.1ಯೋನಿ xossipmeri biwi our banarsi panwala sex storiesअगर पेक्टिकल फोर्म नही बरा तोBachhi ka sex jan bujh kar karati thi xxx vidiosex baba net honey rose xphotokartina langili sex photochachi choudi mere saamneकोन लङकि अबि नहि अपनी बुर नहि चोदयी हे उसकि फोटोM MADHIRU DIKSHIT ON SEX BABA.COXxx bed par sokar pichese hd काला टीका नाटक वाली शिमरन sexy xxx potoBabuji aur Bahu ka rape sex videoHindisexstory chuddkar maa beta n bahuजादुई फूल की हिंदी कहानी दिखाओ बाल सहित कहानी दिखाओAnita ke saath bus me ched chad अगर पेक्टिकल फोर्म नही बरा तोactress Mahi gill ki chut chudai ki kahani Hindi meAnita Hassanandani xxx photo Sax Baba netXnxx.tv kriti khabhana rachona banetje sex baba hd photoSaloon me jhante banwayixxxcon रणबीरmusmani ldki ka sil toda sex pron vidyo